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Prashant Pratyush

किसी भी व्यक्ति का परिचय शब्दों में ढले, समय के साथ संघर्षों से तपे-तपाये विचार ही दे देते है, जो उसके लिखने से ही अभिव्यक्त हो जाते है। सम्मान से जियो और लोगों को सम्मान के साथ जीने दो, स्वतंत्रता, समानता और बधुत्व, मानवता का सबसे बड़ा और जहीन धर्म है, मुझे पूरी उम्मीद है कि मैं अपने वर्तमान और भविष्य में भी इन चंद उसूलों के जीवन जी सकूंगा और मानवता के इस धर्म से कभी मुंह नहीं मोड़ पाऊगा।

Voice of Prashant Pratyush

हर एक, सिखाए एक को – नारा दिया था कुलसुम सयानी ने प्रौढ़ शिक्षा को बढ़ावा देने के लिए!

क्या आप जानते हैं, हर एक, सिखाए एक को के नारे के साथ कुलसुम सयानी ने व्यस्क शिक्षा की नींव रखी जो बाद में प्रौढ़ शिक्षा के नाम से जाना गया।

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फिल्म घूमकेतु – एंटरटेनमेंट से चूक जाती है अनुराग कश्यप और नवाज़ुद्दीन सिद्दीकी की ये फिल्म

फिल्म घूमकेतु में महिला पात्रों को जिस तरह से दिखाया गया है कमोबेश हमारे आस-पास भी उसी परिवेश की महिलाएं देखने को मिलती हैं।

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तारीके शेरशाही अब किसी को क्यों याद नहीं …..

मात्र पांच साल के शासन में शेरशाह ने जो काम किए वह बताते है कि वह कितना महान शासक था। ये हिंदुस्तान का दुर्भाग्य है कि शेरशाह इतने कम समय तक ही शासन कर सका।

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राजा राममोहन राय ने सती प्रथा को दूर कर नव भारत की नींव रखी

राजा राममोहन राय की आज 248 वीं जयंती है, बीते हुए समय और आज के दौर में मेरे सामने ऐसा कोई शख्स नहीं जिसकी बौद्धिकता, मानवीयता और आकर्षण राममोहन राय जैसा हो।

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अनुष्का शर्मा की नई वेब सीरीज़ पाताल लोक सबको खूब पसंद आ रही है

अमेज़न प्राइम की वेब सीरीज पाताल लोक में किरदारों की कहानियों जुड़ने के साथ, फेक न्यूज़ कैसे समाज में काम करता है इसकी कहानी सामने आती है।

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दुर्गाबाई देशमुख ने अपने बाल-विवाह को मना करके नारी-अधिकारों के लिए काम किया

दुर्गाबाई देशमुख ने संविधान सभा में लगभग 750 संशोधन प्रस्ताव रखे और उनसे से महात्मा गाँधी से लेकर जवाहरलाल नेहरू और भीमराव आंबेडकर तक, सब प्रभावित थे। 

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सामाजिक मुद्दों के लिए अपना जीवन समर्पित करने वाली मृदुला साराभाई

मृदुला साराभाई महिलाओं के मौलिक अधिकार, गर्भपात, तलाक और अवैध संतान जैसे मुद्दों पर राज्य से महत्वपूर्ण सिफारिशें करती रहीं।

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नयी सीरीज़ ‘गर्लफ्रेंड चोर’ आपको अपने अतीत की प्यारी यादों में ले जायेगी

गर्लफ्रेंड चोर  की कहानी वैसी ही कहानी है जिसमें देखने वाला अपनी अतीत में खो जाता है और अपनी-अपनी कहानी का मूल्यांकन खुद करने लगते हैं।

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अम्मू स्वामीनाथन : संविधान सभा में महिला अधिकार को बुलंद करने वाली थीं

किसी स्कूल-कालेज में शिक्षित नहीं होने के बाद भी अम्मू स्वामीनाथन एक महिला नहीं, कई संभावनाओं की कहानी हैं, वह संभावना, जो तमाम महिलाओं में दबकर रह जाती है। 

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नेवर हैव आई एवर की इंडियन अमेरिकन लड़की की कहानी लोगों को ख़ूब पसंद आ रही है

नेवर हैव आई एवर  नए जमाने की पीढ़ी पर आधारित है, जो अकसर खुद को गंभीरता से लेने से बचते हैं लेकिन अपनी चिंताओं व भावनाओं को चुपचाप व्यक्त कर देते हैं।

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लारा दत्ता-रिंकू राजगुरु की सीरीज़ हंड्रेड में है कॉमेडी, एक्शन और एक जानदार एक्टिंग!

लारा दत्ता और रिंकू राजगुरु की वेब सीरीज़ हंड्रेड में कॉमेडी, इमोशनज़, एकदम खतरनाक एक्टिंग, बहुत अपीलिंग है और यह इस वेब सीरिज़ को खास बना देती है।

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जीवन और जीवाणु के जंग में कुदरत मुस्कुरा रही है…..

रात को आसमान में सितारे नज़र आ रहे हैं, दिन के समय हवा एकदम साफ हो गई है। जब कुदरत मुस्कुरा रही है तो इंसान घरों के खिड़कियों से बाहर देख पा रहा है।

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क्यों फोर मोर शॉट्स प्लीज़ – सीज़न 2 का फेमिनिज़्म मुझे निराश करता है…

अमेज़न प्राइम वीडियो के फोर मोर शॉट्स प्लीज़ के पहले सीज़न की शानदार सफलता के बाद, दूसरा सीज़न पहले सीज़न के तरह कमाल कर सकेगा इसमें मुझे संदेह है।

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नेटफ्लिक्स सीरीज़ ताज महल 1989 है पूरी ज़िंदगी की एक रूमानी फिलॉसफ़ी

ताजमहल 1989 को देखने के बाद कुछ तो है जो महसूस होता है, वह है प्रेम, मतलब किसी को याद करना और शायद इसलिए इस सीरीज़ का नाम ताज महल 1989  रखा गया है।

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एक थी बेगम : एक असफल बेगम की सफलता की कहानी है ये क्राइम सीरीज़

एक थी बेगम चौदह एपीसोड में जुर्म के दुनिया के बादशाहों के बीच में एक बेगम की कहानी है। जो एक-एक करके सारे बादशाहों को मात देती जाती है। 

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कैसे इन पीरियड्स ने मुझे, एक लड़के को, पितृसत्तात्मक बना दिया…

मेरे पास पीरियड्स से जुड़ा वो अनुभव है, जिसने पहली बार मुझे यह बताया कि मैं समाज के उस वर्ग का हिस्सा हूँ जिसे पुरुष वर्ग कहा जाता है और वह सब से बेहतर है।

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वेब सीरीज़ पंचायत क्या आपको भी दे रही है एक हल्का-फुल्का सा मीठा सुकून?

अमेज़न प्राइम पर रिलीज हुई वेब सीरीज़पंचायत हमारे देश के पंचायतों में महिला सरपंचों की पंचायतों की मौजूदा स्थितियों का शानदार मूल्य़ाकंन है।

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लॉकडाउन में अपने ही घर में चहल-कदम करती हमारी दुनिया

सोशल मीडिया पर लड़कियों को साड़ी चैलेंज मिल रहे हैं तो लड़कों को धोती चैलेंज। शायद ये सारी कोशिशें लॉकडाउन में स्वयं को और दूसरों को अवसाद से दूर रखने की हैं।

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नेटफ़्लिक्स फ़िल्म मस्का पारिवारिक परंपरा और महत्वकांक्षा की नर्म और मीठी कहानी है

नेटफ़्लिक्स पर आज रिलीज़ हुयी 'मस्का' लॉकडाउन के दौर परिवार के साथ देखने वाली कहानी है जिसमें अपनी परंपरा की तरफ नई पीढ़ी को संवेदनशील बनाने की कोशिश भी है।

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उमा नेहरू : भारतीय महिलाओं के अधिकारों की शुभ चिंतक

उमा नेहरू आज से 110 साल पहले महिला अधिकारों के लिए लिख रही थीं और आज़ादी के बाद एक सांसद के रूप में भी महिलाओं के अधिकारों के लिए आवाज़ बुलंद करती रहीं।

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यूट्यूब वीडियो ‘मेरा फर्ज़ है’ अपनी चुप्पी तोड़ने के साथ, नागरिकों को ज़िम्मेदार बनाता है

#MeraFarzHai वीडियो अच्छा कैंपेन है, पर वीडियो महिलाओं के खिलाफ हिंसा को केवल सार्वजनिक क्षेत्रों में ही देखा और उस पर अपनी खामोशी तोड़ने की बात की।

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मालती चौधरी : गांधी की तूफानी और टैगौर की मिनु

मालती चौधरी भारत की पहली महिला मार्क्सिस्ट लीडर्स में से एक थीं जिन्होंने राजनीति से अलग रहते सामाजिक एक्टिविस्ट के तरह काम करना तय किया।

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इम्तियाज़ अली की वेब सीरीज़ ‘शी’ है सीक्रेट मिशन कर लगी एक महिला कांस्टेबल की कहानी

शी के किरदार को लिखने के लिए बड़ी खोजबीन करके एक महिला कांस्टेबल की ज़िंदगी को देखा परखा और दर्शाया गया, जो खुद अपने आप से डरती है।

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पाकिस्तानी गीत दुआ-ए-रीम : एक करारा जवाब समाज की रूढ़िवादी सोच को

दुआ-ए-रीम में दो पीढ़ी की महिलाओं का अपने साथ होने वाली हिंसा पर चुप्पी और नई पीढ़ी की महिलाओं का हिंसा पर खुदमुख्तार तरीके से बोलना उभर कर सामने आता है।

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वेब सीरिज़ ‘सेक्स एजुकेशन’, मज़े-मज़े में करती है सेक्स पर बात

बेन टेलर के निर्देशन में बनी इस वेब सीरीज़ में, स्कूली बच्चों से लेकर अधेड़ उम्र के लोगों की सेक्स से जुड़ी समस्याएं को बेहतरीन ढंग से पेश किया गया है।

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जी हाँ! आप, मैं और ये समाज, हम सभी हैं ‘गिल्टी’

यौन शोषण की घटना को जब कोई सबके सामने लाता है, तो या तो सब एक चुप्पी साध लेते हैं या उस आवाज़ को चुप करने की तमाम साज़िशें होती हैं।

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अबके होली में मोहे रंग ऐसा पक्का दीजो कि छुटन न जाए…

होली मोहब्बत और अपनेपन के साथ ऐसे खेलें कि सारे बाहरी रंग छूट जाएं, लेकिन प्यार के पक्के रंग सामने वाला से न छूटें और न ही वह छुड़ाना चाहे।

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‘सिर्फ एक थप्पड़, पर नहीं मार सकता’ या ‘थप्पड़ से डर नहीं लगता है साहब, प्यार से लगता है’

थप्पड़ में है पुरुषवादी हिंसा के खिलाफ प्रतिरोध, जो अब तक हिंदी सिनेमा के इस रूमानी डायलाग में खो जाता था, “थप्पड़ से डर नहीं लगता है साहब, प्यार से लगता है।”

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