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Prashant Pratyush

किसी भी व्यक्ति का परिचय शब्दों में ढले, समय के साथ संघर्षों से तपे-तपाये विचार ही दे देते है, जो उसके लिखने से ही अभिव्यक्त हो जाते है। सम्मान से जियो और लोगों को सम्मान के साथ जीने दो, स्वतंत्रता, समानता और बधुत्व, मानवता का सबसे बड़ा और जहीन धर्म है, मुझे पूरी उम्मीद है कि मैं अपने वर्तमान और भविष्य में भी इन चंद उसूलों के जीवन जी सकूंगा और मानवता के इस धर्म से कभी मुंह नहीं मोड़ पाऊगा।

Voice of Prashant Pratyush

हमारे समाज का आइना है विद्या बालन की फिल्म नटखट

फिल्म नटखट में सोनू की माँ अपने बेटे को इस सोच से बाहर निकालने का प्रयास करती है जो उसकी अपनी पीड़ा, दर्द, मनोदशा से भी जुड़ी हुई है।

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सरोगेसी की गुदगुदाती लेकिन गंभीर कहानी कहती है फिल्म मिमि

फिल्म मिमि के एक संवाद में कृति सेनन डाक्टर से कहती हैं, “पेट के बाहर किसी को मारना गलत है तो पेट के अंदर किसी को मारना कैसे सही है?”

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मल्लिका समग्र 19वीं सदी की लेखिका मल्लिका के होने का प्रमाण है 

मल्लिका समग्र इस बात की चर्चा ज़रूर करता है कि अगर भारतेंदु अपनी जीवनी पूरी कर पाते तो अवश्य मल्लिका के बारे में कोई जानकारी मिल जाती।

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ओलंपिक में हैं भारत की पहली महिला तलवारबाज़ भवानी देवी

भवानी देवी का संघर्ष अपने परिवार की आर्थिक चुनौतियों और तलवारबाज़ी प्रतियोगियों में मिली निराशाओं की आग में तपकर कुंदन बन रहा है।

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नारीवाद का सरोकार केवल महिलाओं से नहीं है – ‘नारीवादी निगाह से’, निवेदिता मेनन

निवेदिता मेनन की किताब 'नारीवादी निगाह से' का मूल बिंदू यह कहा जा सकता है कि मार्क्सवाद विचारधारा की तरह नारीवाद भी सार्वभौम नहीं है।

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जनसंख्या नीति का रास्ता जिस गर्भ से होकर जाता है उसकी राय क्या है?

जनसंख्या नीति के तमाम नीतिगत फैसले महिलाओं के गर्भ से होकर जाते हैं और उनको ही जनसंख्या नियंत्रण के फैसलों में शामिल नहीं किया जाता है।

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महिलाओं से जुड़े एक अहम मुद्दे की बात करती है फिल्म Sara’s

महिलाओं के शरीर पर उसकी पसंद को समझना जरूरी है खासकर जब मातृत्व की बात आती है तब, यही Sara's की कहानी का मुख्य थीम है।

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सिलबट्टा-क्रांति छेड़ने वालों की इस महिला को भी ज़रुरत है…

आप या तो हिंसा के समर्थक दिखेंगे या हिंसा के विरोध में। इसके लिए न किसी गांधीवादी दर्शन की जरूरत है न ही किसी मार्क्सवादी दर्शन की।

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5 नए आविष्कार जिन्होंने किया महिलाओं का जीवन थोड़ा आसान

आधुनिक मानवीय सभ्यता में कुछ नए आविष्कार हुए हैं, जिसकी वजह से महिलाओं की दशकों पुरानी समस्याओं का समाधान सरलतापूर्वक संभव हो सका है।

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डा. शर्वरी इनामदार की साड़ी पहनने वाली महिलाओं से एक गुज़ारिश

डा. शर्वरी इनामदार को देख कर लगता है कि आज महिलाओं को साड़ी के साथ अपनी सहजता का प्रमाण देना पड़ रहा है, पता नहीं क्यों?

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ओलम्पिक गोल्ड पर नज़र रखने वाली मुक्केबाज़ लवलीना बोरगोहेन कौन हैं?

आज देश को जरूरत है कि न केवल मुक्केबाज़ लवलीना बोरगोहेन को जाने, बल्कि उनकी मेहनत, उनके संघर्ष और उनकी लगन के बारे में भी जाने।

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बे-होश वैवाहिक रिश्ते की साइको थ्रिलर लगती है हसीन दिलरुबा…

“पागलपन की हद से ना गुजरे तो प्यार कैसा, होश में तो रिश्ते निभाए जाते हैं...” फिल्म हसीन दिलरुबा की कहानी इस संवाद के तरह ही उलझी हुई है।

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अपनी नज़र लक्ष्य पर साधे हुयी हैं तीरंदाज दीपिका कुमारी

दीपिका कुमारी कहती हैं, “समाज में कई जगहों पर पुरुष लेडीज फर्स्ट का जुमला उछाल देते हैं। महिलाएं भी बेहतर कर सकती हैं उनको पहले मौका तो दो।"

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दंगों की सियासत में महिलाओं के जीवन का सच है वेब सीरीज़ ग्रहण

वेब सीरीज़ ग्रहण का डायलॉग, "जो हुआ जिनके साथ हुआ और जिन्होंने किया, कोई दान, धन, धर्म, पश्चाताप उसकी माफी नहीं दे सकता...” रूह को छूता है।

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क्यों ज़रूरी है पीसनी सिलबट्टे की चटनी…

"औरतों ने किचेन के सुस्वाद भोजन के जायका बिगाड़ दिया है। अगर आप स्वस्थ्य रहने के इच्छुक हैं तो योगा या रस्सी कूदने की ज़रूरत नहीं है।"

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एक साथ कई सवालों का जवाब है शेरनी फ़िल्म की यह तस्वीर

स्त्री विमर्श में जिसको सिस्टरहुड, एक महिला का दूसरी महिला पर भरोसा, कहा जाता है, उसकी सहज अभिव्यक्ति है शेरनी फ़िल्म की यह तस्वीर।

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बदल रहा है अनमोल रिश्ता पापा से बिटिया का…

बदलाव की इन कहानियों से हर पिता कुछ सीख रहा है और सामाजिक संरचना के सामने दीवार बन रहा है,जो बेटियों को दहलीज के बाहर जाने नहीं देना चाहते।

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एडवेंचर, मनोरंजन और पर्यावरणीय पितृसत्ता पर बात करती है फ़िल्म शेरनी

शेरनी को पकड़ने के लिए जंगल में कैमरे लगाए जाते हैं, पहरेदारी बढ़ाई जाती है, यहां तक दफ्तर में यज्ञ-हवन भी कराया जाता है।

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संजय दत्त का ये पुराना वीडियो इन दिनों क्यों सुर्ख़ियों में है?

ट्वीटर पर संजय दत्त का एक वीडियो, जो काफी पुराना दिखता है, बीते दिनों अचानक से बहस के दायरे में आ गया है। ऐसा क्या है इस वीडियो में?

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अगर आप थोड़े से ठहराव की तलाश में हैं तो ज़रूर देखें फिल्म स्केटर गर्ल

फिल्म स्केटर गर्ल के एक संवाद में महारानी जैसिका से कहती हैं, “यहां के लोगों को बदलाव नहीं पसंद है। खासकर तब जब बदलाव एक औरत ला रही हो।"

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‘समाज क्या कहेगा’ की सोच पर हथौड़ा मारती है फिल्म शादीस्थान

फिल्म शादीस्थान का ये डायलाग बहुत कुछ कहता है, "हम जैसी औरतें लड़ाई करती हैं ताकि आप जैसी औरतों को अपनी दुनिया में लड़ाई न करनी पड़े।"

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कौन है राबिया नाज़ शेख़ जिसने यूट्यूबर बनकर अपनी ज़िंदगी बदल डाली?

राबिया नाज़ शेख़ ने भले ही अपने शौक को इंटरनेट से जोड़कर उसको रोजगार में बदल दिया, परंतु उसके लिए यह सफर आसान कतई नहीं था।

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के. शारदामणि: वे मेरे सामने हमेशा एक मार्गदर्शक की तरह खड़ी रहीं

मैं यह बात बिल्कुल ही नहीं जानता था कि अरूणिमा मैम के. शारदामणि की बेटी हैं जिनकी किताबों के संदर्भ मैं नोट्स के बतौर लिखा करता था।

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फैमली मैन सीजन 2 पति-पत्नी के बीच काउंसलिंग की ज़रुरत की बात भी करता है

फैमली मैन सीजन 2 में पहले सीजन में आगे क्या हुआ इसकी जानकारी फ्लैश बैक में आती है और नए सीजन की कहानी भी साथ-साथ चलती है।

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क्या वेब सीरीज महारानी राबड़ी देवी की कहानी है?

रानी भारती कैसे-कैसे भष्ट्राचार, नरंसहार और पति के गोली कांड के तह तक पहुँचती है, यह सब जानने के लिए आपको वेब सीरीज महारानी देखनी होगी।

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पारुल खख्खर की 14 लाइन की शव वाहिनी गंगा और हजारों-लाखों अपशब्द

पारुल खख्खर की कविता शव वाहिनी गंगा सिर्फ एक माध्यम था उनका अपनी मन की तकलीफ को व्यक्त करने का लेकिन ट्रोल्स ने इसे कोई और ही रूप दे दिया। 

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साइको थ्रिलर द वुमन इन द विंडो की नायिका को क्या आप समझ पाते हैं?

फिल्म द वुमन इन द विंडो में हर पल नया मोड़ आता है, जो क्राइम, थ्रिलर और मनोविज्ञानिक रूप में कहानी को रोचक बना देता है।

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राधे – योर मोस्ट वांस्टेड भाई में किसी भी हीरोइन का होना ज़रूरी नहीं था

ईद के मौके पर सलमान खान की ईदी उनकी फ़िल्म राधे - योर मोस्ट वांस्टेड भाई, निराश भी करती है महिलाओं के छवि को लेकर।

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वेब सीरीज़ एस्पायरेंट्स क्यों छू रही है युवाओं के दिल के तार…

वेब सीरीज़ एस्पायरेंट्स यूपीएससी तैयारी करने वालों के सवलों को जवाब देती है या नही? मसलन अगर सफल नहीं हुए तो प्लान बी क्या रहेगा?

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माँ, तुम्हारे बारे में कुछ भी कहना आसान नहीं…

माँ तुम कौन हो? कहां से आई हो माँ? क्या माँ सिर्फ वह चेहरा है, जिसे मैंने जन्म लेने के बाद सबसे पहले देखा या मांँ उसके भी परे है, एक भाव या...

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माँ बस माँ होती है, साबित कर रही हैं ये माएँ…

पिछले दिनों कोरोना महामारी के दौरान अचानक ट्विटर पर मनीषा मंडल का मैसेज वायरल होने लगा कि "क्या कोई डोनर ब्रेस्ट मिल्क दे सकती हैं?"

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जो झलकारी बाई ‘झाँसी की रानी’ बन 12 घंटे लड़ती रही, उसे वही सम्मान क्यों नहीं?

युद्ध में वो झाँसी की रानी की ढाल बनीं, अंग्रेज़ों को लगा कि उन्होंने लक्ष्मीबाई को पकड़ लिया है मगर यह झलकारी बाई की रणनीति थी।

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क्या किसी झूठ पर टिकी थी हिज़ स्टोरी की ये परफेक्ट शादी?

‘हिज़ स्टोरी’ देखने के बाद जो पहला सवाल ज़हन में आया वह यह कि एलजीबीटीक्यू (lgbtq) समाज के लोगों कि अन्य समस्याएं और क्या-क्या हो सकती हैं।

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असमिया महिलाओं के सम्मान के लिए लड़ने वाली चंद्रप्रभा सैकयानी

असम के राजनीतिक, सामाजिक, सांस्कृतिक तथा आर्थिक जीवन में महिलाओं को समान स्तर दिलाने के संघर्ष में चंद्रप्रभा सैकयानी का नाम अग्रिम है।

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काठमांडू कनेक्शन एक ज्वलंत स्त्री पक्ष को सामने लाने की एक नाकाम कोशिश है

सोनी लिव की नई सीरीज काठमांडू कनेक्शन का थ्रिल महिलाओं के सवाल से जुड़ता है, जिसपर अब तक बातेें नहीं होती थीं।

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महिलाएं किताबें पढ़ती कम और उन्हें जीती ज़्यादा हैं…

जब यह बात मैंने अपने कुछ महिला साथियों से पूछी, तो उन्होंने मिली-जुली प्रतिक्रिया दी, जिसको वाक्य में समेटने का प्रयास मैंने किया है...

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कहानियां आपने बहुत सुनी होंगी लेकिन ‘अजीब दास्तान्स’ सी नहीं!

अजीब दास्तान्स को देख कर आप बिल्कुल हक्के-बक्के रह जाते हैं क्योंकि इन कहानियों के अंत कल्पना से परे हैं और किरदारों का अभिनय कमाल का है।

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बाबा भीमराव अंबेडकर : महिला अधिकारों के लिए उनका योगदान क्या आपको याद है?

कहा जाना चाहिए की भारतीय महिलाओं को मौजूदा दौर में अधिकांश अधिकारों को दिलाने की पहली नींव बाबा भीमराव अंबेडकर ने ही रखी थी।

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मिसेज श्रीलंका पुष्पिका डिसिल्वा से उनका ताज छीन लेना क्या ठीक था?

मिसेज श्रीलंका पुष्पिका डिसिल्वा के ताज के छिन जाने के बाद एक ही सवाल आया और वो ये कि तलाकशुदा या सिंगल मदर से समाज को एतराज क्यों है?

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शॉर्ट फिल्म ‘दहेज़ का स्कूटर’ बहुत ही प्यारे अंदाज़ में अपनी बात रखती है!

मानते हैं ना आप भी शार्ट फिल्म 'दहेज़ का स्कूटर' की इस बात को, 'प्रथाओं का क्या है कोई मान के चले तो इच्छा, न माने तो रीत।' 

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मणिबेन नानावटी: अपने पति की याद में बनवाया था मुंबई का नानावटी हॉस्पिटल

मणिबेन नानावटी एक आम इंसान के लिए अस्पताल और महिलाओं का आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर होने की ज़रूरत को अपने जीवन संघर्ष से अच्छे से जानती थीं।

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क्या पुलेला गोपीचंद के बिना साइना नेहवाल की बायोपिक पूरी हो सकती है?

साइना नेहवाल की इस बायोपिक फ़िल्म में अमोल गुप्ते ने भावुकता पर इतना फोकस किया है कि उसमें उनका वर्ल्ड चैपियन बनने का संघर्ष खो गया है।

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पगलैट: क्या ये एक पढ़ी-लिखी होनहार बहू की कहानी है?

आस्तिक की मौत से उसकी तेहरवीं तक संध्या की ज़िन्दगी कैसे बदलती है? पगलैट और भी कई गंभीर मुद्दों को बहुत ही हलके-फुल्के अंदाज़ में कहती है।  

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महादेवी वर्मा: ‘निराला’ ने उन्हें हिंदी के विशाल मंदिर की सरस्वती यूँ ही नहीं कहा

मेरे लिए महादेवी वर्मा की कविता में ये लाइन हमेशा से प्रेरणादायक रही है, “घर तिमीर में, उर तिमीर में, आ! सखि एक दीपक बार ली।”

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सुप्रीम कोर्ट ने स्त्रीवादी न्याय पक्ष में दी ये ऐतिहासिक गाइडलाइन्स

देश के सुप्रीम कोर्ट ने स्त्रीवादी न्याय के पक्ष में कुछ गाइडलाइन्स दी हैं, जिसको ऐतिहासिक बताया जा रहा है। सच में! ऐतिहासिक है!

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कौन थीं मीरा बहन जिन्हें 20वीं सदी की आधुनिक मीरा बाई कहते हैं?

मेडलीन स्लेड यानि मीरा बहन को भारत में कई लेखक मीरा बाई का दूसरा जन्म मानते हैं और उन्हें बीसवी सदी का मीरा बाई भी कहते हैं।

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लगता है इन ‘मर्दों’ को अभी और वक्त चाहिए

जनाब, सदियों से असमानता की जो खाई खोद कर स्वयं मलाई खाई है, उसको कम करने के लिए विशेषाधिकार तो मात्र एक पेन-किलर है, समस्या का समाधान नहीं।

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बॉम्बे बेगम्स खास और आम महिला के अस्तित्व की कहानी है!

बॉम्बे बेगम्स इस बात को स्थापित करने में कामयाब हो जाती है कि सभी महिलाएं समाज की एक ही मानसिकता से लड़ रही है और वह है पितृसत्ता।

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स्त्री की सीक्वल फिल्म रूही में चुड़ैल तो महिला ही है पर कुछ नयेपन के साथ

शानदार कामेडी हॉरर फिल्म रूही में सबसे अच्छी खूबी यह है कि इसमें चुड़ैल तो महिला ही है पर वह अपने स्वतंत्र अस्तित्व के बारे में भी सचेत है।

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द मैरिड वुमन: खुद की तलाश में एक शादीशुदा महिला की कोशिश

समलैंगिकता का अपराध श्रेणी से निकलने के बाद दो महिलाओं के आकर्षण और सामाजिक बंधनों को “द मैरिड वुमन” दिखाने में कामयाब होती है।

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इन पहली लेडी ड्राइवर का संदेश है- आओ! अपना दायरा तोड़ें

इन पहली लेडी ड्राइवर ने जब दुनिया को चौंका दिया तो, देश की न जाने कितनी ही महिलाओं के लिए संदेश दे दिया था, “आओ! अपना दायरा तोड़ें...”

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गीता यथार्थ की ये तस्वीर 1000 शब्दों से ज़्यादा प्रभावशाली है…

गीता यथार्थ ने इस तस्वीर को शेयर किया और कहा, "वॉशरूम का लास्ट टाइम गेट कब क्लोज किया था, याद नहीं!" उनका इतना करते ही सोशल मीडिया पर बवाल हो गया। 

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बस इतना कि हर बेटी को उसका आसमान छूने दें…

एक दिन यही रेस आपकी अपनी बेटी जीत लेगी और वह उसकी अपनी जीत होगी, कोई नहीं होगा उसका जीत का दावेदार या हकदार।

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‘जागो!’ ये थी महिलाओं के लिए बेगम रुकैया सखावत हुसैन की आवाज़

बेगम रुकैया सखावत हुसैन ने मुस्लिम महिलाओं को शिक्षा के माध्यम से अपने अधिकारों और जिम्मेदारियों के प्रति जागृत करने का प्रयास किया था।

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‘क्यूंकि मैं जो थी, अब मैं वो लड़की नहीं हूँ…’ कहती है द गर्ल ऑन द ट्रेन

सस्पेंस थ्रिलर के साथ द गर्ल ऑन द ट्रेन की कहानी अंत में एक महत्वपूर्ण बात करती  है वह यह बीकाज आई एम नांट द गर्ल आई यूज्ड टू बी...

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कोई ख़ास सामाजिक संदेश नहीं सिर्फ एंटरटेनमेंट से बांधे रखती है दृश्यम 2

फिल्म दृश्यम 2 कोई सामाजिक संदेश देने की जगह दर्शकों को क्राइम थ्रिलर में बांध कर रखना चाहती है और वह कामयाब भी होती है।

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कमला चौधरी के नारीवादी लेखन को आकर्षक और बोल्ड क्यों माना गया?

कमला चौधरी के बारे में न तो अधिक जानकारी मिलती है, न ही उनकी तस्वीर उपलब्ध है, बस उनका लिखा साहित्य ही उनकी थोड़ी जानकारी देता है।

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बसंत ने कर दिया है आगाज़, उदासी न रहे आस-पास

जैसे प्रकृत्ति में बसंत का मौसम है, वैसे ही हर इंसान के जीवन में भी बसंत होता है पर वह प्रत्यक्ष रूप से दिखाई नहीं देता है। 

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मैं तुम्हारे प्यार में गिरना नहीं उड़ना चाहती हूँ…

पहले तो आप प्रेमिका को विजेता की ट्रॉफ़ी के तरह सजा-धजा कर घूमते हो। फिर वही प्रेमिका अलग-अलग रूप में इस रिश्ते का बोझ उठाती है...  

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‘भारत की बुलबुल’ सरोजनी नायडू को आज याद करने के कई कारण हैं

जाहिर है सरोजनी नायडू का लालन पालन उस घर के महौल में हो रहा था जो उस वक्त देश के अधिकांश लड़कियों के लिए कल्पना से परे था।

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दहेज़ का सामान और पति को लादे घूम रही है नुमाइश की दुल्हन

दहेज के खिलाफ 'दहेज खोरी बंद करो' कैंपेन UN Women की ओर से चलाया जा रहा है और अली जीशान की 'नुमाइश' इसी कैंपेन का हिस्सा है। 

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तुम आराम करो क्यूँकि मैंने पैटरनिटी लीव ली है…

रात भर तो तुम जागती रहीं, थोड़ा सो लो, मैं हूं न! मैं नैपी बदल देता हूं, तुम दूध तैयार कर लो। क्या है पैटरनिटी लीव और इसके प्रावधान?

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क्या आप उड़ीसा की बुलबुल कुतंला कुमारी सबत को जानते हैं?

कुतंला कुमारी सबत आजीवन महात्मा गांधी की अनुयायी रहीं और देश की आज़ादी के साथ उन्होंने महिलाओं की पितृसत्तामक गुलामी से भी आज़ादी चाही। 

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एम्स के गठन की प्रथम अध्यक्षा और बापू की ‘मुर्खा’ राजकुमारी अमृत कौर

राजकुमारी अमृत कौर कपूरथला की महारानी थीं, पर उन्होंने स्वयं को एक महारानी के तरह ज़ाहिर नहीं किया, लेकिन उनके व्यक्तित्च में एक तेज था!

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द ग्रेट इंडियन किचन की कहानी है हर महिला की रसोई और उसके अस्तित्व की

द ग्रेट इंडियन किचन हर महिला की कहानी है चाहे हाउस वाइफ हो या वर्किंग वूमेन। ये कहती है कि अपने अस्तित्व को पहचानो, उसके सम्मान को पहचानो।

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क्या आप दिल्ली की तूफानी बहन सत्यवती देवी को जानते हैं?

सत्यवती देवी के जोशपूर्ण भाषणों को सुनने के लिए दिल्ली के रूढ़िवादी समुदायों की महिलाएं बड़ी संख्या में आतीं जिनके बीच वे एक किंदवंती महिला बन गईं।

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ये आधी-आबादी आज भी ढूंढ रही है समानता वाला स्वतंत्र गणतंत्र…

हम स्वतंत्र गणतंत्र की बात कैसे करें जब आज भी आधी आबादी का एक बड़ा हिस्सा कई तरह की असमानताओं का सामना करने के लिए विवश है।

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शॉर्ट फिल्म सुट्टाबाजी सेहत के लिए बिलकुल भी हानिकारक नहीं है

बीते हफ्ते सुष्मिता सेन की 21 साल की बेटी रिनी सेन की शॉर्ट फिल्म सुट्टाबाजी रिलीज़ हुई जो धीरे-धीरे नोटिस की जा रही है।

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त्रिभंग में रची गयी औरत की गरिमा को भँग करती है वेब सीरीज़ तांडव…

वेब सीरीज़ तांडव में हर महिला किरदार को अंतत: एक वेश्या केटेगिरी में लाकर खड़ा कर दिया, फिर चाहे वे प्रधानमंत्री हो या स्टुडेंट, डीन या डिफेंस मंत्री।

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जब नारीवाद की कोई पूर्व-परंपरा नहीं थी तब मैरी वोलस्टोनक्राफ्ट ने इसकी नींव रखी

मैरी वोलस्टोनक्राफ्ट ने अपनी किताब में उस सामाजिक व्यवस्था की आलोचना की जिसमें स्त्रियों को अच्छी महिला बनने पर जोर दिया जाता है...

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तीन महिला और उनकी अभंग-समभंग और त्रिभंग कहानी है ये फिल्म…

फिल्म त्रिभंग से, "कभी-कभी सोचती हूं काश ये मेरे किरदार होते, फिर मैं उन्हें अपनी मनचाही दिशा में ले जाती और फिर वो मुझे प्यार करते" ज़हन में बस गयी है... 

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विधवा जीवन में रंग भरती फ़िल्म द लास्ट कलर एक खूबसूरत अहसास है…

पहली नज़र में फ़िल्म द लास्ट कलर केवल विधवाओं की कहानी लगती है लेकिन कई गंभीर मुद्दों पर समाज में घृणित मानसिकता की भी एक खूबसूरत कहानी है यह। 

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लोकसभा में महिला हित के कई सवालों के साथ शामिल होने वाली डॉ सुशीला नायर

डॉ सुशीला नायर के ये सवाल स्त्री आंदोलनों, स्त्री संघर्ष और महिलाओं के सामाजिक विकास में आज भी अपने जवाब की तलाश कर रहे हैं।

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सिमोन द बोउवार : स्त्री पैदा नहीं होती है बनाई जाती है!

सिमोन द बोउवार ने आधी आबादी के अनुभवों को अस्तित्ववादी, दार्शनिक, सामाजिक और राजनीतिक आयाम दिया है और इससे कोई इंकार नहीं कर सकता है।

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काग़ज़ है हमारी-आपकी, हम सबकी कहानी

कबीर वाणी में एक चौपाई है “मैं कहता हूँ आंखन देखी, तू कहता है काग़ज़ की लेखी”। इस चौपाई  को सतीश कौशिक ने “काग़ज़” फिल्म का केंद्रीय थीम बनाकर एक कहानी कही है।

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सीमा पाहवा की कॉमेडी रामप्रसाद की तेरहवीं के साथ करें नए साल की शुरुआत

सीमा पहावा ने जिस अंदाज में रामप्रसाद की तेरहवीं की कहानी कही है, उसका नरेटिव दुनियादारी, रिश्ते और रिश्तों के पीछे का मतलब समझने का है।

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रेणुका रे : महिलाओं के जीवन में परिवर्तन लाने में समर्पित रहीं

यह रेणुका रे का संगठन नेतृत्व था कि उन्होंने शरणार्थी शिवरों में चलाए जा रहे स्कूलों से शत-प्रतिशत साक्षरता लोगों को प्रदान की।

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जाते-जाते ये साल बहुत सारे सवालों का जवाब भी देता गया…

जाते-जाते ये साल न जाने कितने ही सवाल हम सबों के ज़हन में छोड़ रहा है, लेकिन साथ में बहुत सारे सवालों का जवाब भी दे गया।

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पौरूषपुर केवल वासना, अय्याशी और अश्लील प्रदर्शन की कहानी नहीं है!

पौरूषपुर में कहानी को कहने के लिए जिस भव्यता, प्यार वासना और अय्याशी का सहारा लिया है, वह दर्शकों का ध्यान आने देगी इसमें संदेह है।

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बल्लीमारा की गलियों का बेज़ोड़ उर्दू शायर मिर्ज़ा ग़ालिब

मिर्ज़ा ग़ालिब ने अपने बारे में खुद ही कहा था कि लोग उनके मरने के बाद ही उनकी शायरी के उच्च स्तर को समझेंगे और उनका सही मूल्यांकन करेंगे। 

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मैरिटल रेप के खिलाफ इंसाफ मांगती है वेब सीरिज़ क्रिमिनल जस्टिस सीज़न 2

क्रिमिनल जस्टिस सीज़न 2 के संवाद बार-बार यह सवाल पूछते हैं कि आखिर पुरुष अच्छी बीबी तो चाहते है पर अच्छे पति क्यों नहीं होना चाहते?

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अनपॉज़्ड – कोविड के दिनों की 5 कहानियों से बुनी एक प्यारी फिल्म

अमेजन प्राइम पर रिलीज अनपॉज़्ड की ये 5 कहानियाँ इस सत्य को ही बयां करती है कि भले ही लॉकडाउन के समय जीवन ठिठक सा गया था पर ठहरा नहीं था।

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सुशीला चैन त्रेखन : स्वतंत्रता की लड़ाई की विस्मृत नायिका

स्वतंत्रता की लड़ाई में सुशीला चैन त्रेखन अन्य महिलाओं के साथ बढ़-चढ़ कर भाग लिया करती और पुलिस की यातनाओं का भी सामना करती।

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पावा कढ़ईगल मतलब है ‘पाप कथाएं’, जिसे आज भी औरत जीती है!

महिलाओं के शरीर और दिमाग पर हिंसा की मानवविज्ञानी व्याख्या को पावा कढ़ईगल सटीक तरीके से कहानी और फिल्मांकन के माध्यम से कहने में सफल होती है।

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तोरबाज़ बेहद संवेदनशील विषय पर बनी थकी हुई सी फिल्म है!

तोरबाज़ एक बेहद गंभीर विषय पर कही गई कहानी है जो संजय दत्त के अभिनय और कुछ बच्चों के मासूम कंधों पर टिकी हुई बोझिल सी फिल्म है।

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संवेदनशील विषय से जुड़ी कॉमेडी बनाती है पति पत्नी और पंगा को बेहद कमज़ोर!

पति पत्नी और पंगा में तालाक की मांग दूसरे मर्द या औरत के संग अवैध संबंध को लेकर नहीं है, यहां तलाक की वज़ह है 'लिंग परिवर्तन' आपरेशन है। 

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महिलाओं के हक का पैरोकार मोहम्मद अकबर

मोहम्मद अकबर के बहीखाते में कई बातें इतिहास में दर्ज की जाती हैं, जो उसके दौर में महिलाओं के हक में मील का पत्थर कही जाती थीं।

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राधिका आप्टे की ए कॉल टू स्पाई में है तीन बहादुर महिलाओं की सच्ची कहानी…

11 दिसंबर को अमेजन प्राइम पर ए कॉल टू स्पाई, हिंदी और अंग्रेजी में रिलीज हुई। इस सच्ची कहानी में राधिका आप्टे का किरदार काफी सराहनीय है।

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डॉ रखमाबाई राऊत हैं कानूनन तलाक लेने वाली पहली भारतीय महिला!

डॉ रखमाबाई राऊत के संघर्षों से ही भारत में शादी की उम्र तय करने और हिंदू विधान में महिलाओं के तलाक अधिकार पर बहस की शुरुआत हुई थी।

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नवाज़उद्दीन और पंकज त्रिपाठी बनाते हैं ‘अनवर का अजब किस्सा’ को एक कल्ट…

नवाज़उद्दीन और पंकज त्रिपाठी की अनवर का अजब किस्सा एक प्रयोगधर्मी फिल्म है जिसमें डार्क कांमेडी भी है, थोड़ी सी जासूसी भी है और रोमांस भी...

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क्या फिल्म सूरज पर मंगल भारी खींच रही है दर्शकों को सिनेमाघर की ओर?

फिल्म सूरज पर मंगल भारी को हास्य और व्यंग्य के खूबसूरत धागे में पिरोने की कोशिश की गई है, जो शुरू से अंत तक मनोरंजन करने से नहीं चूकती है।

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द क्वीन्स गैम्बिट एक क्वीन्स के झंडे गाड़ने की कहानी है

द क्वीन्स गैम्बिट सीरीज शह और मात के एक खेल जैसा दिखती है जिसमें किसी की हार नहीं होती है क्योंकि पूरी सीरिज ही दिल जीत लेती है।

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अगर पुरुषों को पीरियड्स होते तो यह दुनिया कैसी होती?

महिलाओं को, पुरुषों को पीरियड्स होने पर, उनको कैसी प्रतिक्रिया दें, कैसे उनका ध्यान रखना चाहिए, इसकी ट्रेनिग हर संस्था में दी जाती।

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मंदिर की लक्ष्मी और एक जीती-जागती घर की लक्ष्मी…

हम अपने घर की लक्ष्मी को सम्मान देकर ही अपने मंदिर की लक्ष्मी को रूठने से रोक सकेंगे। सोच क्या रहे हैं आप, हर रोज़ 'लक्ष्मी पूजन' मनाएं!

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कुछ अलग देखना चाहते हैं तो अनुराग बासु की फिल्म लूडो ज़रूर देखें!

फिल्म लूडो एक ऐसी कहानी है जिसमें हीरो कौन है ये आप सोच कर बताएं, लेकिन इस फिल्म में हर किरदार, चाहे वो एक मर्द हो या औरत, को बराबर का चांस मिला है।  

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मुथुलक्ष्मी रेड्डी : देश की पहली महिला विधायक का रोमांचक सफर

मुथुलक्ष्मी रेड्डी के प्रयासों से स्थापित कस्तुरबा चिकित्सालय और कैंसर राहत के लिए अखिल भारतीय संस्थान आज एम्स के रूप में प्रसिद्ध हैं।

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अक्षय कुमार की फिल्म लक्ष्मी अपने लक्ष्य से कोसों दूर है…

अक्षय कुमार की फिल्म लक्ष्मी ट्रांसजेंडर के सामाजिक समस्या पर बात करती हुई फिल्म हारर-कामेडी में भटक कर फेल हो जाती है। 

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अनुसूयाबेन साराभाई ने की थी भारत में महिला श्रम आंदोलन की शुरुआत।

अनुसूयाबेन साराभाई श्रम के क्षेत्र में महिलाओं के अधिकारों के लिए संघर्ष करने वाली प्रमुख महिलाओं में से हैं। वे केवल एक श्रमिक नेता न थीं।

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‘नींद क्यों नहीं आती है रातभर’, इस सवाल के जवाब है पर काम कोई नहीं करते…

व्यक्तिगत रूप से मैंने यह महसूस किया है कि कई बार बहुत थकान होने पर भी नींद नहीं आती है तो कई बार थकान नहीं होने पर भी नींद नहीं आती है।

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फिल्म ‘काली खुही’ भारत में कन्या शिशु हत्याओं की सच्चाई को उजागर करती है

शाबाना आजमी स्टारर 'काली खुही' अपने अंदर परंपरा और रीति-रिवाज के नाम पर दमन, शोषण और अत्याचार की कहानियों को समेते हुए है।

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जयश्री रायजी के, बेवफा पति को जेल की सजा दिये जाने के, प्रस्ताव का बहुत विरोध हुआ…

जयश्री रायजी दहेज विरोधी, बच्चों को गोद लिए जाने, महिलाओं के अवैध व्यापार रोकने और महिलाओं के तलाक संबंधी विधेयकों के लिए अधिक सक्रिय रहीं। 

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शार्ट फिल्म ‘लघुशंका’ के विषय पर आज भी समाज में खुल कर बात नहीं होती है

मात्र 15 मिनट की शार्ट फिल्म 'लघुशंका' में नींद में बिस्तर गीला करने की परेशानी पर बात करी गई है जिस पर सामान्यत: बात नहीं की जाती है।

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बैड बॉय बिलियनेयर्स इंडिया : महत्वकांक्षी व्यापारियों के साहस और फरेब की कहानी है

इस सीरीज में इन तीनो महत्वकांक्षी व्यापारियों की कहानी इतना तो बता देती है कि भारत के लोगों के पास वह तमाम सम्भावनाएं मौजूद है।

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मातंगिनी हाजरा : देश की बूढ़ी गांधी की अनसुनी कहानी!

आज ही के दिन जन्मी थीं बूढ़ी गांधी उर्फ मातंगिनी हाजरा जिन्होंने दोनों हाथों में गोलियां लगने के बाद भी तिरंगे को गिरने नहीं दिया।

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स्कैम 1992 – द हर्षद मेहता स्टोरी सिर्फ एक सच्ची कहानी नहीं…

हर्षद मेहता के फर्श से अर्श और अर्श से फर्श की कहानी 'स्कैम 1992- द हर्षद मेहता स्टोरी' एक महिला पत्रकार के ज़ज्बे को भी दर्शाती है।

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मारग्रेट कजिन्स : भारतीय महिलाओं को मताधिकार दिलाने वाली पहली आवाज़

मारग्रेट कजिन्स ने भारतीय लड़कियों को शिक्षित करने के लिए और महिलाओं के मताधिकार के अधिकार के लिए सबसे पहले आवाज़ उठायी थी।

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दुर्गा भाभी का बलिदान राष्ट्र सदा याद रखेगा…

दुर्गा देवी का घर क्रांतिकारियों का आश्रय था। वे उनका स्नेहपूर्वक सेवा-सत्कार करतीं, इसलिए सभी क्रांतिकारी उन्हें दुर्गा भाभी कहने लगे थे। 

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एशना कुट्टी की साड़ी, हूला-हूप और स्नीकर्स वाला ‘ससुराल गेंदा फूल’…

एशना कुट्टी का बिंदास और अल्हड़ 'ससुराल गेंदा फूल' हमारे अंदर के संवेदनशील कलात्मक मन को झकझोरता है जो हमेशा खुश रहना चाहता है।

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कस्तूरबा और महात्मा गाँधी : एक दूसरे के ‘बा’ और ‘बापू’

महात्मा गाँधी की सेवा करती कस्तूरबा की तस्वीर पर अक्सर सवाल होता कि गांधीजी स्वयं उनसे पैर धुलवाते थे और वे स्त्री मुक्ति की बात कैसे करते थे?

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क्या आप जानते हैं कि एनी बेसेंट कौन थीं और उनको भारत से इतना लगाव क्यों था?

क्या आप जानते हैं कि वाराणसी में एनी बेसेंट की स्वीकृति से सेंट्रल हिंदू कॉलेज बना और इसके साथ ही काशी हिंदू विश्वविद्यालय भी स्थापित हुआ।

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लैंगिक असमानता की ट्रेनिंग शरू होती है बचपन में, अपने परिवार से…

लैंगिक असमानता हटाने के लिए हमें उस प्रक्रिया को ही परिवर्तित करना होगा जो बचपन से ही शारीरिक भेद को सामाजिक विभेद में बदल देती है।

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बहुरिया रामस्वरूप देवी : ‘बिहार की लक्ष्मीबाई’ ने जीता वहाँ का पहला विधानसभा चुनाव

बिहार की लक्ष्मीबाई के नाम से प्रसिद्ध बहुरिया रामस्वरूप देवी महिलाओं के लिए प्रेरणा रहीं और उन्होंने बिहार के पहले विधानसभा चुनाव भी जीते।

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एनोला होम्स लायीं है एक और होम्स की रोमांचक दुनिया, एक नटखट अंदाज़ में…

एनोला होम्स, केवल एक होम्स नाम जुड़ने के कारण एक रोमांचक, जासूसी और क्राईम थ्रीलर बिल्कुल भी नहीं है, बल्कि उससे अलग हटकर थोड़ा नटखटी सा है। 

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डॉ असीमा चटर्जी बनीं देश की पहली महिला वैज्ञानिक जिन्हें डॉक्टरेट की उपाधि मिली

डॉ असीमा चटर्जी का देश को एहसानमंद होना चाहिए क्योंकि कोरोना के वैक्सीन बनाने में या कोरोना के नियंत्रण में उनकी दवा से भी मदद ली जा रही है।

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आपको ‘सुपर वुमन’ बना कर आपके घरवाले चैन की नींद सो रहे हैं…

औरतों को समझना है कि उनको 'सुपर वुमन' बनाये रखने में ही उनके परिवार, समाज और बाजार का फायदा है। पितृसत्ता नहीं चाहता कि वे कोई भी काम छोड़ें। 

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अलंकृता श्रीवास्तव की डॉली किट्टी और…के ‘वो चमकते सितारे’ महिला ही हैं

अलंकृता श्रीवास्तव की डॉली किट्टी और वो चमकते सितारे कहानी है महिलाओं की यौन इच्छा को जाहिर करने की, जो सामाजिक दायरों में समान्य नहीं है।

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‘रसोड़े में कौन था?’ रसोड़े में महिलाएं थीं, हैं और तब तक रहेंगी जब तक…

रसोड़े में पुरुष कभी-कभी ही विचरण करता है लेकिन हाय-तौबा अधिक मचाता है, "आज खाना कितना टेस्टी बना है। तुम इतना अच्छा खाना क्यों नहीं बनातीं?"

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भारत रत्न से सम्मानित एम एस सुब्बालक्ष्मी का संगीत आज भी करोड़ों दिलों को छूता है

दस साल के उम्र में गायिका एम एस सुब्बालक्ष्मी का पहला रिकार्ड बता देता है कि छोटी सी आयु में ही उनका संगीत शिक्षण आरंभ हो गया होगा। आज उनका जन्म दिवस है।

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इंसानी रिश्ते की दबी-छुपी घुटन को बयां करती है फॉरबिडेन लव की चार कहानियां

फॉरबिडेन लव की इन दोनों कहानियों में तो मानवीय रिश्तों की कहानी है जिसमें विवाह संस्था में अब तक तय की जा चुकी नैतिकताओं के कारण पैदा हुई घुटन की दास्तां है।

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हिंदी भाषा के सांस्कृतिक समाजीकरण में महिलाओं की आज भी बहुत बड़ी भूमिका है!

हमें हिंदी को दूसरी भाषा से कमतर नहीं बनाना है न ही दूसरी भाषा को हिंदी के सामने कमतर बनाना है, दोनों ही भाषाओं की पहचान और इज़्ज़त बनाये रखनी है। 

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चीटियाला अइलम्मा – बहुजन महिला संघर्ष की इस बेमिसाल महिला ने दास प्रथा को ललकारा

“यह मेरी जमीन है, यह मेरी फसल है। किसी में हिम्मत है जो मेरी फसल और मेरी जमीन ले ले? यह तभी संभव है जब मैं मर जाऊं।”- चीटियाला अइलम्मा

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फ़िल्म अटकन-चटकन कहती है कि सपने औकात नहीं देखते हैं

अटकन-चटकन स्ट्रीट बच्चों के सपनों को हकीकत में बदलने की कहानी है जो बच्चों को संदेश देने में कामयाब साबित हुई है। 

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सरला देवी चौधरानी : टैगोर की भतीजी और पंजाब की शेरनी!

सरला देवी चौधरानी ने ना सिर्फ 'वंदे मातरम' के शेष संगीत को तैयार किया, बल्कि उसे गाकर विदेशी शासकों के पांव तले गहरी नींद में सोये राष्ट्र को जगा दिया था।

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मसाबा मसाबा आपको हर सामाजिक पाबंदी को तोड़ कर आगे बढ़ने की प्रेरणा देती है

मसाबा मसाबा में एक चीज कॉमन है जिससे शायद ही कोई लड़की भारतीय समाज में मुक्त होना चाहती है, पर चाहकर भी नहीं हो सकती है और वह है उसकी माँ से उसकी तकरार। 

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कमाल के अभिनय और अलग तरह की कहानी है JL50

शैलेंदर व्यास ने एक अलग तरीके से JL50 की कहानी कहने की कोशिश की है जिसके ट्विस्ट और टर्न पूरी सीरिज देखने के लिए मजबूर कर देते हैं।

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नापसंद करने के लिए जब आप सड़क 2 देखें तो इस डायलॉग पर ग़ौर ज़रूर फरमाएं

सड़क-2 में ढोंगी बाबाओं के फैलाए अंधविश्वास और उसके पीछे पैसे, सत्ता और मानवीय जीवन के अंतहीन घुटन को कहने की कोशिश की गई है।

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भारत की पहली महिला इंजीनियर, ए. ललिता, को क्या आप जानते हैं?

ए. ललिता की कहानी किसी प्रेरणादायक महिला के संघर्ष के कहानी से कम नहीं है, साथ ही साथ वो भारत की पहली महिला इलेक्ट्रिकल इंजीनियर तो थी ही।

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एक भी एक्टर घर से नहीं निकला और शूट हो गयी वेबसीरिज़ THE GONE GAME

The Gone Game के निर्देशक निखिल भट्ट ने इस दौरान लोगों के मध्य तनाव पर अलग तरह से सोचा और एक कहानी की पटकथा तैयार की, जो सस्पेंस थ्रिलर बनकर निकली।

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बीना दास : हथियार उठाकर अंग्रेज़ों को धूल चटाने वाली एक क्रांतिकारी महिला थीं!

24 अगस्त 1911 को बीना दास, सुभाष चंद्र बोस के गुरू प्रसिद्ध ब्रह्मसमाजी शिक्षक बेनी माधव दास और समाज सेविका सरला देवी के घर पैदा हुई। 

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आपने विक्रम सेठ की किताब नहीं पढ़ी? तो भी मीरा नायर की A Suitable Boy ज़रूर देखिये

मीरा नायर ने A Suitable Boy में उस दौर के युवा पीढ़ी के अंदर हो रहे उठा-पठक और भावनाओं को बारीक तरीके से पिरोने की कामयाब कोशिश की है।

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स्वरा भास्कर की वेब सीरीज फ्लेश ह्यूमन ट्रैफिकिंग के खिलाफ एक दमदार लड़ाई है!

स्वरा भास्कर की नई वेब सीरीज फ्लेश/Flesh सच्ची घटनाओं से प्रभावित है, जिसमें मानव तस्करी और सेक्स ट्रैफिकिंग जैसे अहम मसलों की परतें खुलेंगी।

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फ़िल्म मी रक़्सम : शबाना आज़मी द्वारा प्रोड्यूस की गयी फ़िल्म कुछ अहम सवाल पूछती है

शबाना आज़मी द्वारा प्रोड्यूस की गयी फ़िल्म मी रक़्सम पूछती है कि अगर कोई मुस्लिम लड़की डांस सीखना चाहती है तो क्या यह गैर मज़हबी हो जाता है?

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सुभद्रा कुमारी चौहन की कविताओं ने बच्चे-बच्चे को देशभक्त बना दिया!

16 अगस्त 1904 को जन्मी सुभद्रा कुमारी चौहन की कविता 'झांसी की रानी' ने देश के बच्चे-बच्चे को देशभक्त बना दिया और इसी कविता ने उन्हें अमर कर दिया। 

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तारकेश्वरी सिन्हा : इन्हें लोग ‘ग्लैमर गर्ल ऑफ इंडियन पॉलिटिक्स’ के नाम से जानते थे!

तारकेश्वरी सिन्हा को पुरुषवादी राजनीतिक महौल ने बेबी ऑफ हाउस, ग्लैमर गर्ल ऑफ इंडियन पॉलिटिक्स, ब्यूटी विद ब्रेन और ना जाने क्या-क्या बना दिया!

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गुंजन सक्सेना: द करगिल गर्ल – हौसले के साथ-साथ, पिता और बेटी के खूबसूरत रिश्ते की कहानी है

गुंजन सक्सेना: द करगिल गर्ल अपनी हौसले और संघर्ष की कहानी कहने के साथ-साथ महिलाओं के साथ हो रहे असमानता के व्यवहारों के कारणों को भी बताती चलती है।

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अलविदा इलीना सेन : अपनी असहमतियों को कम नहीं होने देना, वही तुमको गतिशील बनाए रखेंगी

प्रोफ़ेसर इलीना सेन का मानना था, “स्त्री विमर्श इंसान को बेहतर संवेदनशील इंसान बनाने का विमर्श है यह किसी लिंग के विरुद्ध का विमर्श तो है ही नहीं।"

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प्रकाश झा की नयी फिल्म परीक्षा ने मुझे फिल्म निल बट्टे सन्नाटा की याद दिला दी!

कहानी प्रकाश झा की फिल्म परीक्षा की हो या कहानी निल बट्टे सन्नाटा की, दोनों की मुख्य बात यही है कि गुरबत में भी एक चिराग जलने से अंधेरा दूर हो सकता है।

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अबला बोस : जगदीश चंद्र बोस की जीवन संगिनी जिन्होंने बदला विधवाओं का जीवन

सर जगदीश चंद्र बोस की धर्मपत्नी लेडी अबला बोस का जन्म 8 अगस्त 1865 को हुआ था। उनके जीवन का अंतिम वर्ष 1951, काफी विशिष्ट था।

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मैं आज़ाद नहीं : कहाँ हैं महिलाओं के सामाजिक अधिकार और उनकी आज़ादी?

आज़ादी शब्द जब भी स्त्री के सामने आता है तो वह जाग उठती है, आज भी वह आज़ाद होकर आज़ाद क्यों नहीं है? कहाँ हैं महिलाओं के सामाजिक अधिकार और उनकी आज़ादी?

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रशीद जहाँ : ‘अंगारे’ के बाद ‘अंगारे वाली रशीद जहाँ’ के नाम से जानी जातीं!

प्रसिद्ध कथाकार, नाटककार और नारी समस्याओं को बेबाक अंदाज़ में प्रस्तुत करने वाली  रशीद जहाँ, 5 अगस्त 1905 को उत्तरप्रदेश के अलीगढ़ शहर में पैदा हुईं।

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अब रक्षाबंधन की राखी बांधेगी विश्वास और समानता का रिश्ते को…

आज जरूरत है भाईयों को कि वे अपने विकसित सोच का परिचय दें और अपने साथ-साथ अपनी बहनों के उड़ने के लिए पंख लगाएं, जिससे दोनों साथ-साथ अपनी उड़ान भरें!

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गुंजन सक्सेना : द करगिल गर्ल, केवल जज़्बा नहीं, सेना में असमानता की कहानी भी है!

फिल्म गुंजन सक्सेना : द करगिल गर्ल और सर्वोच्च अदालत का हलिया फैसला, भारतीय सेना में महिलाओं का हौसला बढ़ाने का बहुत बड़ा काम करेगा।

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एक मां के जीवन के भावपूर्ण उतार-चढ़ाव की कहानी है फिल्म शकुंतला देवी

फिल्म शकुंतला देवी एक ऐसी मां की भी कहानी है जो अपने स्वतंत्र जीवन को जीने के लिए ऐसा जीवन जीती है जो उस दौर के तयशुदा मान्याताओं के बेड़ियों को तोड़ता है। 

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महाश्वेता देवी से मेरी वो मुलाकात : मैंने महाश्वेता देवी को पढ़ा, सुना, और कई बातें की…

प्रतिष्ठित नारीवादी लेखिका महाश्वेता देवी के उपन्यासों को ट्रेन और बसों के सफर में पढ़ना और उनके रचना संसार में खो जाना तो मेरे लिए आम बात थी।

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हमेशा याद रहेंगी हमें फियरलेस नादिया जिन्होंने फिल्मों में महिलाओं की पहचान बदल दी

जब फिल्मों में महिलाओं का रोल बंधित हुआ करता था तब 'एंग्री यंग वुमन' यानि फियरलेस नादिया ने फिल्मों में महिलाओं के रूढ़िवादी चरित्र को हिलाकर रख दिया। 

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विभाजन का दर्द झेल रही महिलाओं की आवाज़ थीं, बेगम अनीस किदवई

आज बेगम अनीस किदवई की पुण्यतिथी है, उनके बारे में तारीक के शक्ल में यह दर्ज है कि वह 1906 में पैदा हुईं और साहित्य अकादमी सम्मान से नवाज़ी गयीं।

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उमराव जान ‘अदा’ : उनकी ज़िंदगी हकीकत से अधिक अफसाना है

यूँ तो लख़नऊ की तमाम तवायफों का ज़िक्र मिलता है, लेकिन सबसे अधिक शोहरत अगर किसी को मिली तो वह हैं - उमराव जान 'अदा'।

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क्या आप ‘फलों का राजा’ आम से जुड़े इन 9 तथ्यों से परिचित हैं?

फलों का राजा आम अनेक तहज़ीब, ज़ुबा, रहन-सहन, बोली और अपने-अपने मज़हब को मानने वाले देश भारत की संस्कृति का एक अटूट हिस्सा है। 

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क्या ‘सिंदूर से इंकार, तलाक का आधार’ पुरुषवादी फेमिनिज़्म का पहला पाठ है?

अब से महिलाओं के साथ-साथ शादीशुदा पति भी प्रतिकात्मक चिन्ह का प्रयोग करें, नहीं तो इस पुरुषवादी फेमिनिज़्म की हमें कोई ज़रुरत नहीं।

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हंसा मेहता : उनके महिलाओं के स्तर में सुधार के प्रयासों को संयुक्त राष्ट्र संघ ने सराहा

3 जुलाई 1897 को हंसा मेहता का जन्म बड़ौदा राज्य में दर्शनशास्त्र के प्राध्यापक, जो बाद में बड़ौदा राज्य के दिवान भी रहें सर मनुभाई मेहता के घर हुआ।

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सामाजिक पितृसत्ता ही आज हमारी सबसे बड़ी बाधा है…जानिये कैसे?

सामाजिक पितृसत्ता का ही परिणाम है कि दिल्ली में कोरोना को लेकर जब घरों में सर्वे हो रहे हैं, तो लोग अपनी जानकारी देने से कन्नी काट करे हैं।

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अनुष्का शर्मा की फिल्म बुलबुल बीसवीं सदी में महिलाओं की समस्याओं के आसपास बुनी नारीवादी कहानी है

अनुष्का शर्मा की फिल्म बुलबुल बीसवीं सदी के भारत में बाल विवाह, बेमेल विवाह, घरेलू हिंसा,  प्रतिशोध और बलात्कार की पीड़ा की कहानी है।

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शारदा मेहता, जिनकी कोख से जन्म लेना चाहते थे महात्मा गाँधी

26 जून 1882 में शारदा मेहता का जन्म उस दौर में हुआ था जब भारतीय महिलाओं को वे सारे अधिकार नहीं प्राप्त थे, जो आज उनके पास हैं।

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फिल्म चमन बहार – लड़कों के प्यार में एक लड़की की मर्ज़ी कितने मायने रखती है?

फिल्म चमन बहार की कहानी में एक लड़की की  मर्ज़ी जाने बगैर सब उससे एक तरफा प्रेम करने लगते हैं और अगर उसमें उनको रिजेक्शन मिल जाए तो....

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पूर्वोत्तर की ज़िन्दगी में झांकती फिल्म एक्सोन चंद अहम सवाल उठाती है

फिल्म एक्सोन / अखुनी , यह सवाल पूछती है कि क्या आजाद लोकतंत्र में अपने पसंद का खाना खाने या पकाने की आजादी क्यों नहीं है? 

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हमारे मानसिक स्वास्थ्य और उसके प्रति समाज की संवेदना का गहरा रिश्ता है…

विनोद कुमार शुक्ल जी की ये कविता हताशा के पल में मनुष्य का मानसिक स्वास्थ्य और उससे उबरने के लिए समाज के साथ चलने की जरूरत को समझाती है।

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सुचेता कृपलानी – यूपी की पहली महिला मुख्यमंत्री बन कर इतिहास रचा

सुचेता कृपलानी ने एक ऐसे समय में यूपी जैसे राज्य का मुख्यमंत्री पद संभाला, जब राजनीति में विरले ही किसी महिला को इतना ऊंचा पद दिया जाता था।

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कोरोना देवी का जन्म : कोराना देवी है, देव नहीं, यह तय कैसे होता है?

कोरोना नर है या मादा इसका निर्धारण कहां और कैसे हो जाता है? कोरोना देवी है देव नहीं यह तय कैसे होता है? और इसकी पूजा स्त्री ही क्यों कर रही है?

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अनुराग कश्यप की फ़िल्म ‘चोक्ड – पैसा बोलता है’ नोटबंदी में मिडिल क्लास स्ट्रग्ल की कहानी है

अनुराग कश्यप की नई फ़िल्म चोक्ड - पैसा बोलता है, एक साधारण से लगने वाले असाधारण राजनैतिक टॉपिक, नोटबंदी, पर कसी गई एक सरल और खूबसूरत फ़िल्म है।

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…आखिर गायब कहाँ हो जाती हैं हमारी टॉपर लड़कियाँ?

एक बात मुझे अक्सर खटकती थी, 'हमारे साथ लड़कियां इतनी कम क्यों है हर क्लास में?" कहीं सात, कहीं चार और कहीं मात्र एक। कहां चली जाती है ये टॉपर लड़कियाँ?'

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नंदिता दास की शॉर्ट फिल्म ‘लिसन टू हर’ आपकी और मेरी कहानी क्यों लगती है?

नंदिता दास की शॉर्ट फिल्म 'लिसन टू हर' उन दोनों शोषण की चर्चा को सतह पर लाने की कोशिश करती है जिसका अनुभव हर महिला ने कभी न कभी किया है।

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हर एक, सिखाए एक को – नारा दिया था कुलसुम सयानी ने प्रौढ़ शिक्षा को बढ़ावा देने के लिए!

क्या आप जानते हैं, हर एक, सिखाए एक को के नारे के साथ कुलसुम सयानी ने व्यस्क शिक्षा की नींव रखी जो बाद में प्रौढ़ शिक्षा के नाम से जाना गया।

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फिल्म घूमकेतु – एंटरटेनमेंट से चूक जाती है अनुराग कश्यप और नवाज़ुद्दीन सिद्दीकी की ये फिल्म

फिल्म घूमकेतु में महिला पात्रों को जिस तरह से दिखाया गया है कमोबेश हमारे आस-पास भी उसी परिवेश की महिलाएं देखने को मिलती हैं।

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तारीके शेरशाही अब किसी को क्यों याद नहीं …..

मात्र पांच साल के शासन में शेरशाह ने जो काम किए वह बताते है कि वह कितना महान शासक था। ये हिंदुस्तान का दुर्भाग्य है कि शेरशाह इतने कम समय तक ही शासन कर सका।

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राजा राममोहन राय ने सती प्रथा को दूर कर नव भारत की नींव रखी

राजा राममोहन राय की आज 248 वीं जयंती है, बीते हुए समय और आज के दौर में मेरे सामने ऐसा कोई शख्स नहीं जिसकी बौद्धिकता, मानवीयता और आकर्षण राममोहन राय जैसा हो।

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अनुष्का शर्मा की नई वेब सीरीज़ पाताल लोक सबको खूब पसंद आ रही है

अमेज़न प्राइम की वेब सीरीज पाताल लोक में किरदारों की कहानियों जुड़ने के साथ, फेक न्यूज़ कैसे समाज में काम करता है इसकी कहानी सामने आती है।

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दुर्गाबाई देशमुख ने अपने बाल-विवाह को मना करके नारी-अधिकारों के लिए काम किया

दुर्गाबाई देशमुख ने संविधान सभा में लगभग 750 संशोधन प्रस्ताव रखे और उनसे से महात्मा गाँधी से लेकर जवाहरलाल नेहरू और भीमराव आंबेडकर तक, सब प्रभावित थे। 

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सामाजिक मुद्दों के लिए अपना जीवन समर्पित करने वाली मृदुला साराभाई

मृदुला साराभाई महिलाओं के मौलिक अधिकार, गर्भपात, तलाक और अवैध संतान जैसे मुद्दों पर राज्य से महत्वपूर्ण सिफारिशें करती रहीं।

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नयी सीरीज़ ‘गर्लफ्रेंड चोर’ आपको अपने अतीत की प्यारी यादों में ले जायेगी

गर्लफ्रेंड चोर  की कहानी वैसी ही कहानी है जिसमें देखने वाला अपनी अतीत में खो जाता है और अपनी-अपनी कहानी का मूल्यांकन खुद करने लगते हैं।

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अम्मू स्वामीनाथन : संविधान सभा में महिला अधिकार को बुलंद करने वाली थीं

किसी स्कूल-कालेज में शिक्षित नहीं होने के बाद भी अम्मू स्वामीनाथन एक महिला नहीं, कई संभावनाओं की कहानी हैं, वह संभावना, जो तमाम महिलाओं में दबकर रह जाती है। 

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नेवर हैव आई एवर की इंडियन अमेरिकन लड़की की कहानी लोगों को ख़ूब पसंद आ रही है

नेवर हैव आई एवर  नए जमाने की पीढ़ी पर आधारित है, जो अकसर खुद को गंभीरता से लेने से बचते हैं लेकिन अपनी चिंताओं व भावनाओं को चुपचाप व्यक्त कर देते हैं।

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लारा दत्ता-रिंकू राजगुरु की सीरीज़ हंड्रेड में है कॉमेडी, एक्शन और एक जानदार एक्टिंग!

लारा दत्ता और रिंकू राजगुरु की वेब सीरीज़ हंड्रेड में कॉमेडी, इमोशनज़, एकदम खतरनाक एक्टिंग, बहुत अपीलिंग है और यह इस वेब सीरिज़ को खास बना देती है।

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जीवन और जीवाणु के जंग में कुदरत मुस्कुरा रही है…..

रात को आसमान में सितारे नज़र आ रहे हैं, दिन के समय हवा एकदम साफ हो गई है। जब कुदरत मुस्कुरा रही है तो इंसान घरों के खिड़कियों से बाहर देख पा रहा है।

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क्यों फोर मोर शॉट्स प्लीज़ – सीज़न 2 का फेमिनिज़्म मुझे निराश करता है…

अमेज़न प्राइम वीडियो के फोर मोर शॉट्स प्लीज़ के पहले सीज़न की शानदार सफलता के बाद, दूसरा सीज़न पहले सीज़न के तरह कमाल कर सकेगा इसमें मुझे संदेह है।

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नेटफ्लिक्स सीरीज़ ताज महल 1989 है पूरी ज़िंदगी की एक रूमानी फिलॉसफ़ी

ताजमहल 1989 को देखने के बाद कुछ तो है जो महसूस होता है, वह है प्रेम, मतलब किसी को याद करना और शायद इसलिए इस सीरीज़ का नाम ताज महल 1989  रखा गया है।

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एक थी बेगम : एक असफल बेगम की सफलता की कहानी है ये क्राइम सीरीज़

एक थी बेगम चौदह एपीसोड में जुर्म के दुनिया के बादशाहों के बीच में एक बेगम की कहानी है। जो एक-एक करके सारे बादशाहों को मात देती जाती है। 

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कैसे इन पीरियड्स ने मुझे, एक लड़के को, पितृसत्तात्मक बना दिया…

मेरे पास पीरियड्स से जुड़ा वो अनुभव है, जिसने पहली बार मुझे यह बताया कि मैं समाज के उस वर्ग का हिस्सा हूँ जिसे पुरुष वर्ग कहा जाता है और वह सब से बेहतर है।

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वेब सीरीज़ पंचायत क्या आपको भी दे रही है एक हल्का-फुल्का सा मीठा सुकून?

अमेज़न प्राइम पर रिलीज हुई वेब सीरीज़पंचायत हमारे देश के पंचायतों में महिला सरपंचों की पंचायतों की मौजूदा स्थितियों का शानदार मूल्य़ाकंन है।

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लॉकडाउन में अपने ही घर में चहल-कदम करती हमारी दुनिया

सोशल मीडिया पर लड़कियों को साड़ी चैलेंज मिल रहे हैं तो लड़कों को धोती चैलेंज। शायद ये सारी कोशिशें लॉकडाउन में स्वयं को और दूसरों को अवसाद से दूर रखने की हैं।

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नेटफ़्लिक्स फ़िल्म मस्का पारिवारिक परंपरा और महत्वकांक्षा की नर्म और मीठी कहानी है

नेटफ़्लिक्स पर आज रिलीज़ हुयी 'मस्का' लॉकडाउन के दौर परिवार के साथ देखने वाली कहानी है जिसमें अपनी परंपरा की तरफ नई पीढ़ी को संवेदनशील बनाने की कोशिश भी है।

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उमा नेहरू : भारतीय महिलाओं के अधिकारों की शुभ चिंतक

उमा नेहरू आज से 110 साल पहले महिला अधिकारों के लिए लिख रही थीं और आज़ादी के बाद एक सांसद के रूप में भी महिलाओं के अधिकारों के लिए आवाज़ बुलंद करती रहीं।

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यूट्यूब वीडियो ‘मेरा फर्ज़ है’ अपनी चुप्पी तोड़ने के साथ, नागरिकों को ज़िम्मेदार बनाता है

#MeraFarzHai वीडियो अच्छा कैंपेन है, पर वीडियो महिलाओं के खिलाफ हिंसा को केवल सार्वजनिक क्षेत्रों में ही देखा और उस पर अपनी खामोशी तोड़ने की बात की।

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मालती चौधरी : गांधी की तूफानी और टैगौर की मिनु

मालती चौधरी भारत की पहली महिला मार्क्सिस्ट लीडर्स में से एक थीं जिन्होंने राजनीति से अलग रहते सामाजिक एक्टिविस्ट के तरह काम करना तय किया।

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इम्तियाज़ अली की वेब सीरीज़ ‘शी’ है सीक्रेट मिशन कर लगी एक महिला कांस्टेबल की कहानी

शी के किरदार को लिखने के लिए बड़ी खोजबीन करके एक महिला कांस्टेबल की ज़िंदगी को देखा परखा और दर्शाया गया, जो खुद अपने आप से डरती है।

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पाकिस्तानी गीत दुआ-ए-रीम : एक करारा जवाब समाज की रूढ़िवादी सोच को

दुआ-ए-रीम में दो पीढ़ी की महिलाओं का अपने साथ होने वाली हिंसा पर चुप्पी और नई पीढ़ी की महिलाओं का हिंसा पर खुदमुख्तार तरीके से बोलना उभर कर सामने आता है।

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वेब सीरिज़ ‘सेक्स एजुकेशन’, मज़े-मज़े में करती है सेक्स पर बात

बेन टेलर के निर्देशन में बनी इस वेब सीरीज़ में, स्कूली बच्चों से लेकर अधेड़ उम्र के लोगों की सेक्स से जुड़ी समस्याएं को बेहतरीन ढंग से पेश किया गया है।

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जी हाँ! आप, मैं और ये समाज, हम सभी हैं ‘गिल्टी’

यौन शोषण की घटना को जब कोई सबके सामने लाता है, तो या तो सब एक चुप्पी साध लेते हैं या उस आवाज़ को चुप करने की तमाम साज़िशें होती हैं।

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अबके होली में मोहे रंग ऐसा पक्का दीजो कि छुटन न जाए…

होली मोहब्बत और अपनेपन के साथ ऐसे खेलें कि सारे बाहरी रंग छूट जाएं, लेकिन प्यार के पक्के रंग सामने वाला से न छूटें और न ही वह छुड़ाना चाहे।

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‘सिर्फ एक थप्पड़, पर नहीं मार सकता’ या ‘थप्पड़ से डर नहीं लगता है साहब, प्यार से लगता है’

थप्पड़ में है पुरुषवादी हिंसा के खिलाफ प्रतिरोध, जो अब तक हिंदी सिनेमा के इस रूमानी डायलाग में खो जाता था, “थप्पड़ से डर नहीं लगता है साहब, प्यार से लगता है।”

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Women In Corporate Allies 2020

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