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Prashant Pratyush

किसी भी व्यक्ति का परिचय शब्दों में ढले, समय के साथ संघर्षों से तपे-तपाये विचार ही दे देते है, जो उसके लिखने से ही अभिव्यक्त हो जाते है। सम्मान से जियो और लोगों को सम्मान के साथ जीने दो, स्वतंत्रता, समानता और बधुत्व, मानवता का सबसे बड़ा और जहीन धर्म है, मुझे पूरी उम्मीद है कि मैं अपने वर्तमान और भविष्य में भी इन चंद उसूलों के जीवन जी सकूंगा और मानवता के इस धर्म से कभी मुंह नहीं मोड़ पाऊगा।

Voice of Prashant Pratyush

नवाज़उद्दीन और पंकज त्रिपाठी बनाते हैं ‘अनवर का अजब किस्सा’ को एक कल्ट…

नवाज़उद्दीन और पंकज त्रिपाठी की अनवर का अजब किस्सा एक प्रयोगधर्मी फिल्म है जिसमें डार्क कांमेडी भी है, थोड़ी सी जासूसी भी है और रोमांस भी...

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क्या फिल्म सूरज पर मंगल भारी खींच रही है दर्शकों को सिनेमाघर की ओर?

फिल्म सूरज पर मंगल भारी को हास्य और व्यंग्य के खूबसूरत धागे में पिरोने की कोशिश की गई है, जो शुरू से अंत तक मनोरंजन करने से नहीं चूकती है।

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द क्वीन्स गैम्बिट एक क्वीन्स के झंडे गाड़ने की कहानी है

द क्वीन्स गैम्बिट सीरीज शह और मात के एक खेल जैसा दिखती है जिसमें किसी की हार नहीं होती है क्योंकि पूरी सीरिज ही दिल जीत लेती है।

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अगर पुरुषों को पीरियड्स होते तो यह दुनिया कैसी होती?

महिलाओं को, पुरुषों को पीरियड्स होने पर, उनको कैसी प्रतिक्रिया दें, कैसे उनका ध्यान रखना चाहिए, इसकी ट्रेनिग हर संस्था में दी जाती।

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मंदिर की लक्ष्मी और एक जीती-जागती घर की लक्ष्मी…

हम अपने घर की लक्ष्मी को सम्मान देकर ही अपने मंदिर की लक्ष्मी को रूठने से रोक सकेंगे। सोच क्या रहे हैं आप, हर रोज़ 'लक्ष्मी पूजन' मनाएं!

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कुछ अलग देखना चाहते हैं तो अनुराग बासु की फिल्म लूडो ज़रूर देखें!

फिल्म लूडो एक ऐसी कहानी है जिसमें हीरो कौन है ये आप सोच कर बताएं, लेकिन इस फिल्म में हर किरदार, चाहे वो एक मर्द हो या औरत, को बराबर का चांस मिला है।  

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मुथुलक्ष्मी रेड्डी : देश की पहली महिला विधायक का रोमांचक सफर

मुथुलक्ष्मी रेड्डी के प्रयासों से स्थापित कस्तुरबा चिकित्सालय और कैंसर राहत के लिए अखिल भारतीय संस्थान आज एम्स के रूप में प्रसिद्ध हैं।

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अक्षय कुमार की फिल्म लक्ष्मी अपने लक्ष्य से कोसों दूर है…

अक्षय कुमार की फिल्म लक्ष्मी ट्रांसजेंडर के सामाजिक समस्या पर बात करती हुई फिल्म हारर-कामेडी में भटक कर फेल हो जाती है। 

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अनुसूयाबेन साराभाई ने की थी भारत में महिला श्रम आंदोलन की शुरुआत।

अनुसूयाबेन साराभाई श्रम के क्षेत्र में महिलाओं के अधिकारों के लिए संघर्ष करने वाली प्रमुख महिलाओं में से हैं। वे केवल एक श्रमिक नेता न थीं।

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‘नींद क्यों नहीं आती है रातभर’, इस सवाल के जवाब है पर काम कोई नहीं करते…

व्यक्तिगत रूप से मैंने यह महसूस किया है कि कई बार बहुत थकान होने पर भी नींद नहीं आती है तो कई बार थकान नहीं होने पर भी नींद नहीं आती है।

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फिल्म ‘काली खुही’ भारत में कन्या शिशु हत्याओं की सच्चाई को उजागर करती है

शाबाना आजमी स्टारर 'काली खुही' अपने अंदर परंपरा और रीति-रिवाज के नाम पर दमन, शोषण और अत्याचार की कहानियों को समेते हुए है।

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जयश्री रायजी के, बेवफा पति को जेल की सजा दिये जाने के, प्रस्ताव का बहुत विरोध हुआ…

जयश्री रायजी दहेज विरोधी, बच्चों को गोद लिए जाने, महिलाओं के अवैध व्यापार रोकने और महिलाओं के तलाक संबंधी विधेयकों के लिए अधिक सक्रिय रहीं। 

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शार्ट फिल्म ‘लघुशंका’ के विषय पर आज भी समाज में खुल कर बात नहीं होती है

मात्र 15 मिनट की शार्ट फिल्म 'लघुशंका' में नींद में बिस्तर गीला करने की परेशानी पर बात करी गई है जिस पर सामान्यत: बात नहीं की जाती है।

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बैड बॉय बिलियनेयर्स इंडिया : महत्वकांक्षी व्यापारियों के साहस और फरेब की कहानी है

इस सीरीज में इन तीनो महत्वकांक्षी व्यापारियों की कहानी इतना तो बता देती है कि भारत के लोगों के पास वह तमाम सम्भावनाएं मौजूद है।

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मातंगिनी हाजरा : देश की बूढ़ी गांधी की अनसुनी कहानी!

आज ही के दिन जन्मी थीं बूढ़ी गांधी उर्फ मातंगिनी हाजरा जिन्होंने दोनों हाथों में गोलियां लगने के बाद भी तिरंगे को गिरने नहीं दिया।

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स्कैम 1992 – द हर्षद मेहता स्टोरी सिर्फ एक सच्ची कहानी नहीं…

हर्षद मेहता के फर्श से अर्श और अर्श से फर्श की कहानी 'स्कैम 1992- द हर्षद मेहता स्टोरी' एक महिला पत्रकार के ज़ज्बे को भी दर्शाती है।

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मारग्रेट कजिन्स : भारतीय महिलाओं को मताधिकार दिलाने वाली पहली आवाज़

मारग्रेट कजिन्स ने भारतीय लड़कियों को शिक्षित करने के लिए और महिलाओं के मताधिकार के अधिकार के लिए सबसे पहले आवाज़ उठायी थी।

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दुर्गा भाभी का बलिदान राष्ट्र सदा याद रखेगा…

दुर्गा देवी का घर क्रांतिकारियों का आश्रय था। वे उनका स्नेहपूर्वक सेवा-सत्कार करतीं, इसलिए सभी क्रांतिकारी उन्हें दुर्गा भाभी कहने लगे थे। 

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एशना कुट्टी की साड़ी, हूला-हूप और स्नीकर्स वाला ‘ससुराल गेंदा फूल’…

एशना कुट्टी का बिंदास और अल्हड़ 'ससुराल गेंदा फूल' हमारे अंदर के संवेदनशील कलात्मक मन को झकझोरता है जो हमेशा खुश रहना चाहता है।

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कस्तूरबा और महात्मा गाँधी : एक दूसरे के ‘बा’ और ‘बापू’

महात्मा गाँधी की सेवा करती कस्तूरबा की तस्वीर पर अक्सर सवाल होता कि गांधीजी स्वयं उनसे पैर धुलवाते थे और वे स्त्री मुक्ति की बात कैसे करते थे?

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क्या आप जानते हैं कि एनी बेसेंट कौन थीं और उनको भारत से इतना लगाव क्यों था?

क्या आप जानते हैं कि वाराणसी में एनी बेसेंट की स्वीकृति से सेंट्रल हिंदू कॉलेज बना और इसके साथ ही काशी हिंदू विश्वविद्यालय भी स्थापित हुआ।

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लैंगिक असमानता की ट्रेनिंग शरू होती है बचपन में, अपने परिवार से…

लैंगिक असमानता हटाने के लिए हमें उस प्रक्रिया को ही परिवर्तित करना होगा जो बचपन से ही शारीरिक भेद को सामाजिक विभेद में बदल देती है।

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बहुरिया रामस्वरूप देवी : ‘बिहार की लक्ष्मीबाई’ ने जीता वहाँ का पहला विधानसभा चुनाव

बिहार की लक्ष्मीबाई के नाम से प्रसिद्ध बहुरिया रामस्वरूप देवी महिलाओं के लिए प्रेरणा रहीं और उन्होंने बिहार के पहले विधानसभा चुनाव भी जीते।

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एनोला होम्स लायीं है एक और होम्स की रोमांचक दुनिया, एक नटखट अंदाज़ में…

एनोला होम्स, केवल एक होम्स नाम जुड़ने के कारण एक रोमांचक, जासूसी और क्राईम थ्रीलर बिल्कुल भी नहीं है, बल्कि उससे अलग हटकर थोड़ा नटखटी सा है। 

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डॉ असीमा चटर्जी बनीं देश की पहली महिला वैज्ञानिक जिन्हें डॉक्टरेट की उपाधि मिली

डॉ असीमा चटर्जी का देश को एहसानमंद होना चाहिए क्योंकि कोरोना के वैक्सीन बनाने में या कोरोना के नियंत्रण में उनकी दवा से भी मदद ली जा रही है।

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आपको ‘सुपर वुमन’ बना कर आपके घरवाले चैन की नींद सो रहे हैं…

औरतों को समझना है कि उनको 'सुपर वुमन' बनाये रखने में ही उनके परिवार, समाज और बाजार का फायदा है। पितृसत्ता नहीं चाहता कि वे कोई भी काम छोड़ें। 

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अलंकृता श्रीवास्तव की डॉली किट्टी और…के ‘वो चमकते सितारे’ महिला ही हैं

अलंकृता श्रीवास्तव की डॉली किट्टी और वो चमकते सितारे कहानी है महिलाओं की यौन इच्छा को जाहिर करने की, जो सामाजिक दायरों में समान्य नहीं है।

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‘रसोड़े में कौन था?’ रसोड़े में महिलाएं थीं, हैं और तब तक रहेंगी जब तक…

रसोड़े में पुरुष कभी-कभी ही विचरण करता है लेकिन हाय-तौबा अधिक मचाता है, "आज खाना कितना टेस्टी बना है। तुम इतना अच्छा खाना क्यों नहीं बनातीं?"

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भारत रत्न से सम्मानित एम एस सुब्बालक्ष्मी का संगीत आज भी करोड़ों दिलों को छूता है

दस साल के उम्र में गायिका एम एस सुब्बालक्ष्मी का पहला रिकार्ड बता देता है कि छोटी सी आयु में ही उनका संगीत शिक्षण आरंभ हो गया होगा। आज उनका जन्म दिवस है।

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इंसानी रिश्ते की दबी-छुपी घुटन को बयां करती है फॉरबिडेन लव की चार कहानियां

फॉरबिडेन लव की इन दोनों कहानियों में तो मानवीय रिश्तों की कहानी है जिसमें विवाह संस्था में अब तक तय की जा चुकी नैतिकताओं के कारण पैदा हुई घुटन की दास्तां है।

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हिंदी भाषा के सांस्कृतिक समाजीकरण में महिलाओं की आज भी बहुत बड़ी भूमिका है!

हमें हिंदी को दूसरी भाषा से कमतर नहीं बनाना है न ही दूसरी भाषा को हिंदी के सामने कमतर बनाना है, दोनों ही भाषाओं की पहचान और इज़्ज़त बनाये रखनी है। 

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चीटियाला अइलम्मा – बहुजन महिला संघर्ष की इस बेमिसाल महिला ने दास प्रथा को ललकारा

“यह मेरी जमीन है, यह मेरी फसल है। किसी में हिम्मत है जो मेरी फसल और मेरी जमीन ले ले? यह तभी संभव है जब मैं मर जाऊं।”- चीटियाला अइलम्मा

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फ़िल्म अटकन-चटकन कहती है कि सपने औकात नहीं देखते हैं

अटकन-चटकन स्ट्रीट बच्चों के सपनों को हकीकत में बदलने की कहानी है जो बच्चों को संदेश देने में कामयाब साबित हुई है। 

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सरला देवी चौधरानी : टैगोर की भतीजी और पंजाब की शेरनी!

सरला देवी चौधरानी ने ना सिर्फ 'वंदे मातरम' के शेष संगीत को तैयार किया, बल्कि उसे गाकर विदेशी शासकों के पांव तले गहरी नींद में सोये राष्ट्र को जगा दिया था।

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मसाबा मसाबा आपको हर सामाजिक पाबंदी को तोड़ कर आगे बढ़ने की प्रेरणा देती है

मसाबा मसाबा में एक चीज कॉमन है जिससे शायद ही कोई लड़की भारतीय समाज में मुक्त होना चाहती है, पर चाहकर भी नहीं हो सकती है और वह है उसकी माँ से उसकी तकरार। 

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कमाल के अभिनय और अलग तरह की कहानी है JL50

शैलेंदर व्यास ने एक अलग तरीके से JL50 की कहानी कहने की कोशिश की है जिसके ट्विस्ट और टर्न पूरी सीरिज देखने के लिए मजबूर कर देते हैं।

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नापसंद करने के लिए जब आप सड़क 2 देखें तो इस डायलॉग पर ग़ौर ज़रूर फरमाएं

सड़क-2 में ढोंगी बाबाओं के फैलाए अंधविश्वास और उसके पीछे पैसे, सत्ता और मानवीय जीवन के अंतहीन घुटन को कहने की कोशिश की गई है।

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भारत की पहली महिला इंजीनियर, ए. ललिता, को क्या आप जानते हैं?

ए. ललिता की कहानी किसी प्रेरणादायक महिला के संघर्ष के कहानी से कम नहीं है, साथ ही साथ वो भारत की पहली महिला इलेक्ट्रिकल इंजीनियर तो थी ही।

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एक भी एक्टर घर से नहीं निकला और शूट हो गयी वेबसीरिज़ THE GONE GAME

The Gone Game के निर्देशक निखिल भट्ट ने इस दौरान लोगों के मध्य तनाव पर अलग तरह से सोचा और एक कहानी की पटकथा तैयार की, जो सस्पेंस थ्रिलर बनकर निकली।

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बीना दास : हथियार उठाकर अंग्रेज़ों को धूल चटाने वाली एक क्रांतिकारी महिला थीं!

24 अगस्त 1911 को बीना दास, सुभाष चंद्र बोस के गुरू प्रसिद्ध ब्रह्मसमाजी शिक्षक बेनी माधव दास और समाज सेविका सरला देवी के घर पैदा हुई। 

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आपने विक्रम सेठ की किताब नहीं पढ़ी? तो भी मीरा नायर की A Suitable Boy ज़रूर देखिये

मीरा नायर ने A Suitable Boy में उस दौर के युवा पीढ़ी के अंदर हो रहे उठा-पठक और भावनाओं को बारीक तरीके से पिरोने की कामयाब कोशिश की है।

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स्वरा भास्कर की वेब सीरीज फ्लेश ह्यूमन ट्रैफिकिंग के खिलाफ एक दमदार लड़ाई है!

स्वरा भास्कर की नई वेब सीरीज फ्लेश/Flesh सच्ची घटनाओं से प्रभावित है, जिसमें मानव तस्करी और सेक्स ट्रैफिकिंग जैसे अहम मसलों की परतें खुलेंगी।

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फ़िल्म मी रक़्सम : शबाना आज़मी द्वारा प्रोड्यूस की गयी फ़िल्म कुछ अहम सवाल पूछती है

शबाना आज़मी द्वारा प्रोड्यूस की गयी फ़िल्म मी रक़्सम पूछती है कि अगर कोई मुस्लिम लड़की डांस सीखना चाहती है तो क्या यह गैर मज़हबी हो जाता है?

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सुभद्रा कुमारी चौहन की कविताओं ने बच्चे-बच्चे को देशभक्त बना दिया!

16 अगस्त 1904 को जन्मी सुभद्रा कुमारी चौहन की कविता 'झांसी की रानी' ने देश के बच्चे-बच्चे को देशभक्त बना दिया और इसी कविता ने उन्हें अमर कर दिया। 

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तारकेश्वरी सिन्हा : इन्हें लोग ‘ग्लैमर गर्ल ऑफ इंडियन पॉलिटिक्स’ के नाम से जानते थे!

तारकेश्वरी सिन्हा को पुरुषवादी राजनीतिक महौल ने बेबी ऑफ हाउस, ग्लैमर गर्ल ऑफ इंडियन पॉलिटिक्स, ब्यूटी विद ब्रेन और ना जाने क्या-क्या बना दिया!

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गुंजन सक्सेना: द करगिल गर्ल – हौसले के साथ-साथ, पिता और बेटी के खूबसूरत रिश्ते की कहानी है

गुंजन सक्सेना: द करगिल गर्ल अपनी हौसले और संघर्ष की कहानी कहने के साथ-साथ महिलाओं के साथ हो रहे असमानता के व्यवहारों के कारणों को भी बताती चलती है।

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अलविदा इलीना सेन : अपनी असहमतियों को कम नहीं होने देना, वही तुमको गतिशील बनाए रखेंगी

प्रोफ़ेसर इलीना सेन का मानना था, “स्त्री विमर्श इंसान को बेहतर संवेदनशील इंसान बनाने का विमर्श है यह किसी लिंग के विरुद्ध का विमर्श तो है ही नहीं।"

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प्रकाश झा की नयी फिल्म परीक्षा ने मुझे फिल्म निल बट्टे सन्नाटा की याद दिला दी!

कहानी प्रकाश झा की फिल्म परीक्षा की हो या कहानी निल बट्टे सन्नाटा की, दोनों की मुख्य बात यही है कि गुरबत में भी एक चिराग जलने से अंधेरा दूर हो सकता है।

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अबला बोस : जगदीश चंद्र बोस की जीवन संगिनी जिन्होंने बदला विधवाओं का जीवन

सर जगदीश चंद्र बोस की धर्मपत्नी लेडी अबला बोस का जन्म 8 अगस्त 1865 को हुआ था। उनके जीवन का अंतिम वर्ष 1951, काफी विशिष्ट था।

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मैं आज़ाद नहीं : कहाँ हैं महिलाओं के सामाजिक अधिकार और उनकी आज़ादी?

आज़ादी शब्द जब भी स्त्री के सामने आता है तो वह जाग उठती है, आज भी वह आज़ाद होकर आज़ाद क्यों नहीं है? कहाँ हैं महिलाओं के सामाजिक अधिकार और उनकी आज़ादी?

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रशीद जहाँ : ‘अंगारे’ के बाद ‘अंगारे वाली रशीद जहाँ’ के नाम से जानी जातीं!

प्रसिद्ध कथाकार, नाटककार और नारी समस्याओं को बेबाक अंदाज़ में प्रस्तुत करने वाली  रशीद जहाँ, 5 अगस्त 1905 को उत्तरप्रदेश के अलीगढ़ शहर में पैदा हुईं।

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अब रक्षाबंधन की राखी बांधेगी विश्वास और समानता का रिश्ते को…

आज जरूरत है भाईयों को कि वे अपने विकसित सोच का परिचय दें और अपने साथ-साथ अपनी बहनों के उड़ने के लिए पंख लगाएं, जिससे दोनों साथ-साथ अपनी उड़ान भरें!

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गुंजन सक्सेना : द करगिल गर्ल, केवल जज़्बा नहीं, सेना में असमानता की कहानी भी है!

फिल्म गुंजन सक्सेना : द करगिल गर्ल और सर्वोच्च अदालत का हलिया फैसला, भारतीय सेना में महिलाओं का हौसला बढ़ाने का बहुत बड़ा काम करेगा।

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एक मां के जीवन के भावपूर्ण उतार-चढ़ाव की कहानी है फिल्म शकुंतला देवी

फिल्म शकुंतला देवी एक ऐसी मां की भी कहानी है जो अपने स्वतंत्र जीवन को जीने के लिए ऐसा जीवन जीती है जो उस दौर के तयशुदा मान्याताओं के बेड़ियों को तोड़ता है। 

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महाश्वेता देवी से मेरी वो मुलाकात : मैंने महाश्वेता देवी को पढ़ा, सुना, और कई बातें की…

प्रतिष्ठित नारीवादी लेखिका महाश्वेता देवी के उपन्यासों को ट्रेन और बसों के सफर में पढ़ना और उनके रचना संसार में खो जाना तो मेरे लिए आम बात थी।

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हमेशा याद रहेंगी हमें फियरलेस नादिया जिन्होंने फिल्मों में महिलाओं की पहचान बदल दी

जब फिल्मों में महिलाओं का रोल बंधित हुआ करता था तब 'एंग्री यंग वुमन' यानि फियरलेस नादिया ने फिल्मों में महिलाओं के रूढ़िवादी चरित्र को हिलाकर रख दिया। 

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विभाजन का दर्द झेल रही महिलाओं की आवाज़ थीं, बेगम अनीस किदवई

आज बेगम अनीस किदवई की पुण्यतिथी है, उनके बारे में तारीक के शक्ल में यह दर्ज है कि वह 1906 में पैदा हुईं और साहित्य अकादमी सम्मान से नवाज़ी गयीं।

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उमराव जान ‘अदा’ : उनकी ज़िंदगी हकीकत से अधिक अफसाना है

यूँ तो लख़नऊ की तमाम तवायफों का ज़िक्र मिलता है, लेकिन सबसे अधिक शोहरत अगर किसी को मिली तो वह हैं - उमराव जान 'अदा'।

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क्या आप ‘फलों का राजा’ आम से जुड़े इन 9 तथ्यों से परिचित हैं?

फलों का राजा आम अनेक तहज़ीब, ज़ुबा, रहन-सहन, बोली और अपने-अपने मज़हब को मानने वाले देश भारत की संस्कृति का एक अटूट हिस्सा है। 

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क्या ‘सिंदूर से इंकार, तलाक का आधार’ पुरुषवादी फेमिनिज़्म का पहला पाठ है?

अब से महिलाओं के साथ-साथ शादीशुदा पति भी प्रतिकात्मक चिन्ह का प्रयोग करें, नहीं तो इस पुरुषवादी फेमिनिज़्म की हमें कोई ज़रुरत नहीं।

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हंसा मेहता : उनके महिलाओं के स्तर में सुधार के प्रयासों को संयुक्त राष्ट्र संघ ने सराहा

3 जुलाई 1897 को हंसा मेहता का जन्म बड़ौदा राज्य में दर्शनशास्त्र के प्राध्यापक, जो बाद में बड़ौदा राज्य के दिवान भी रहें सर मनुभाई मेहता के घर हुआ।

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सामाजिक पितृसत्ता ही आज हमारी सबसे बड़ी बाधा है…जानिये कैसे?

सामाजिक पितृसत्ता का ही परिणाम है कि दिल्ली में कोरोना को लेकर जब घरों में सर्वे हो रहे हैं, तो लोग अपनी जानकारी देने से कन्नी काट करे हैं।

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अनुष्का शर्मा की फिल्म बुलबुल बीसवीं सदी में महिलाओं की समस्याओं के आसपास बुनी नारीवादी कहानी है

अनुष्का शर्मा की फिल्म बुलबुल बीसवीं सदी के भारत में बाल विवाह, बेमेल विवाह, घरेलू हिंसा,  प्रतिशोध और बलात्कार की पीड़ा की कहानी है।

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शारदा मेहता, जिनकी कोख से जन्म लेना चाहते थे महात्मा गाँधी

26 जून 1882 में शारदा मेहता का जन्म उस दौर में हुआ था जब भारतीय महिलाओं को वे सारे अधिकार नहीं प्राप्त थे, जो आज उनके पास हैं।

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फिल्म चमन बहार – लड़कों के प्यार में एक लड़की की मर्ज़ी कितने मायने रखती है?

फिल्म चमन बहार की कहानी में एक लड़की की  मर्ज़ी जाने बगैर सब उससे एक तरफा प्रेम करने लगते हैं और अगर उसमें उनको रिजेक्शन मिल जाए तो....

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पूर्वोत्तर की ज़िन्दगी में झांकती फिल्म एक्सोन चंद अहम सवाल उठाती है

फिल्म एक्सोन / अखुनी , यह सवाल पूछती है कि क्या आजाद लोकतंत्र में अपने पसंद का खाना खाने या पकाने की आजादी क्यों नहीं है? 

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हमारे मानसिक स्वास्थ्य और उसके प्रति समाज की संवेदना का गहरा रिश्ता है…

विनोद कुमार शुक्ल जी की ये कविता हताशा के पल में मनुष्य का मानसिक स्वास्थ्य और उससे उबरने के लिए समाज के साथ चलने की जरूरत को समझाती है।

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सुचेता कृपलानी – यूपी की पहली महिला मुख्यमंत्री बन कर इतिहास रचा

सुचेता कृपलानी ने एक ऐसे समय में यूपी जैसे राज्य का मुख्यमंत्री पद संभाला, जब राजनीति में विरले ही किसी महिला को इतना ऊंचा पद दिया जाता था।

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कोरोना देवी का जन्म : कोराना देवी है, देव नहीं, यह तय कैसे होता है?

कोरोना नर है या मादा इसका निर्धारण कहां और कैसे हो जाता है? कोरोना देवी है देव नहीं यह तय कैसे होता है? और इसकी पूजा स्त्री ही क्यों कर रही है?

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अनुराग कश्यप की फ़िल्म ‘चोक्ड – पैसा बोलता है’ नोटबंदी में मिडिल क्लास स्ट्रग्ल की कहानी है

अनुराग कश्यप की नई फ़िल्म चोक्ड - पैसा बोलता है, एक साधारण से लगने वाले असाधारण राजनैतिक टॉपिक, नोटबंदी, पर कसी गई एक सरल और खूबसूरत फ़िल्म है।

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…आखिर गायब कहाँ हो जाती हैं हमारी टॉपर लड़कियाँ?

एक बात मुझे अक्सर खटकती थी, 'हमारे साथ लड़कियां इतनी कम क्यों है हर क्लास में?" कहीं सात, कहीं चार और कहीं मात्र एक। कहां चली जाती है ये टॉपर लड़कियाँ?'

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नंदिता दास की शॉर्ट फिल्म ‘लिसन टू हर’ आपकी और मेरी कहानी क्यों लगती है?

नंदिता दास की शॉर्ट फिल्म 'लिसन टू हर' उन दोनों शोषण की चर्चा को सतह पर लाने की कोशिश करती है जिसका अनुभव हर महिला ने कभी न कभी किया है।

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हर एक, सिखाए एक को – नारा दिया था कुलसुम सयानी ने प्रौढ़ शिक्षा को बढ़ावा देने के लिए!

क्या आप जानते हैं, हर एक, सिखाए एक को के नारे के साथ कुलसुम सयानी ने व्यस्क शिक्षा की नींव रखी जो बाद में प्रौढ़ शिक्षा के नाम से जाना गया।

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फिल्म घूमकेतु – एंटरटेनमेंट से चूक जाती है अनुराग कश्यप और नवाज़ुद्दीन सिद्दीकी की ये फिल्म

फिल्म घूमकेतु में महिला पात्रों को जिस तरह से दिखाया गया है कमोबेश हमारे आस-पास भी उसी परिवेश की महिलाएं देखने को मिलती हैं।

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तारीके शेरशाही अब किसी को क्यों याद नहीं …..

मात्र पांच साल के शासन में शेरशाह ने जो काम किए वह बताते है कि वह कितना महान शासक था। ये हिंदुस्तान का दुर्भाग्य है कि शेरशाह इतने कम समय तक ही शासन कर सका।

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राजा राममोहन राय ने सती प्रथा को दूर कर नव भारत की नींव रखी

राजा राममोहन राय की आज 248 वीं जयंती है, बीते हुए समय और आज के दौर में मेरे सामने ऐसा कोई शख्स नहीं जिसकी बौद्धिकता, मानवीयता और आकर्षण राममोहन राय जैसा हो।

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अनुष्का शर्मा की नई वेब सीरीज़ पाताल लोक सबको खूब पसंद आ रही है

अमेज़न प्राइम की वेब सीरीज पाताल लोक में किरदारों की कहानियों जुड़ने के साथ, फेक न्यूज़ कैसे समाज में काम करता है इसकी कहानी सामने आती है।

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दुर्गाबाई देशमुख ने अपने बाल-विवाह को मना करके नारी-अधिकारों के लिए काम किया

दुर्गाबाई देशमुख ने संविधान सभा में लगभग 750 संशोधन प्रस्ताव रखे और उनसे से महात्मा गाँधी से लेकर जवाहरलाल नेहरू और भीमराव आंबेडकर तक, सब प्रभावित थे। 

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सामाजिक मुद्दों के लिए अपना जीवन समर्पित करने वाली मृदुला साराभाई

मृदुला साराभाई महिलाओं के मौलिक अधिकार, गर्भपात, तलाक और अवैध संतान जैसे मुद्दों पर राज्य से महत्वपूर्ण सिफारिशें करती रहीं।

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नयी सीरीज़ ‘गर्लफ्रेंड चोर’ आपको अपने अतीत की प्यारी यादों में ले जायेगी

गर्लफ्रेंड चोर  की कहानी वैसी ही कहानी है जिसमें देखने वाला अपनी अतीत में खो जाता है और अपनी-अपनी कहानी का मूल्यांकन खुद करने लगते हैं।

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अम्मू स्वामीनाथन : संविधान सभा में महिला अधिकार को बुलंद करने वाली थीं

किसी स्कूल-कालेज में शिक्षित नहीं होने के बाद भी अम्मू स्वामीनाथन एक महिला नहीं, कई संभावनाओं की कहानी हैं, वह संभावना, जो तमाम महिलाओं में दबकर रह जाती है। 

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नेवर हैव आई एवर की इंडियन अमेरिकन लड़की की कहानी लोगों को ख़ूब पसंद आ रही है

नेवर हैव आई एवर  नए जमाने की पीढ़ी पर आधारित है, जो अकसर खुद को गंभीरता से लेने से बचते हैं लेकिन अपनी चिंताओं व भावनाओं को चुपचाप व्यक्त कर देते हैं।

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लारा दत्ता-रिंकू राजगुरु की सीरीज़ हंड्रेड में है कॉमेडी, एक्शन और एक जानदार एक्टिंग!

लारा दत्ता और रिंकू राजगुरु की वेब सीरीज़ हंड्रेड में कॉमेडी, इमोशनज़, एकदम खतरनाक एक्टिंग, बहुत अपीलिंग है और यह इस वेब सीरिज़ को खास बना देती है।

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जीवन और जीवाणु के जंग में कुदरत मुस्कुरा रही है…..

रात को आसमान में सितारे नज़र आ रहे हैं, दिन के समय हवा एकदम साफ हो गई है। जब कुदरत मुस्कुरा रही है तो इंसान घरों के खिड़कियों से बाहर देख पा रहा है।

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क्यों फोर मोर शॉट्स प्लीज़ – सीज़न 2 का फेमिनिज़्म मुझे निराश करता है…

अमेज़न प्राइम वीडियो के फोर मोर शॉट्स प्लीज़ के पहले सीज़न की शानदार सफलता के बाद, दूसरा सीज़न पहले सीज़न के तरह कमाल कर सकेगा इसमें मुझे संदेह है।

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नेटफ्लिक्स सीरीज़ ताज महल 1989 है पूरी ज़िंदगी की एक रूमानी फिलॉसफ़ी

ताजमहल 1989 को देखने के बाद कुछ तो है जो महसूस होता है, वह है प्रेम, मतलब किसी को याद करना और शायद इसलिए इस सीरीज़ का नाम ताज महल 1989  रखा गया है।

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एक थी बेगम : एक असफल बेगम की सफलता की कहानी है ये क्राइम सीरीज़

एक थी बेगम चौदह एपीसोड में जुर्म के दुनिया के बादशाहों के बीच में एक बेगम की कहानी है। जो एक-एक करके सारे बादशाहों को मात देती जाती है। 

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कैसे इन पीरियड्स ने मुझे, एक लड़के को, पितृसत्तात्मक बना दिया…

मेरे पास पीरियड्स से जुड़ा वो अनुभव है, जिसने पहली बार मुझे यह बताया कि मैं समाज के उस वर्ग का हिस्सा हूँ जिसे पुरुष वर्ग कहा जाता है और वह सब से बेहतर है।

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वेब सीरीज़ पंचायत क्या आपको भी दे रही है एक हल्का-फुल्का सा मीठा सुकून?

अमेज़न प्राइम पर रिलीज हुई वेब सीरीज़पंचायत हमारे देश के पंचायतों में महिला सरपंचों की पंचायतों की मौजूदा स्थितियों का शानदार मूल्य़ाकंन है।

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लॉकडाउन में अपने ही घर में चहल-कदम करती हमारी दुनिया

सोशल मीडिया पर लड़कियों को साड़ी चैलेंज मिल रहे हैं तो लड़कों को धोती चैलेंज। शायद ये सारी कोशिशें लॉकडाउन में स्वयं को और दूसरों को अवसाद से दूर रखने की हैं।

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नेटफ़्लिक्स फ़िल्म मस्का पारिवारिक परंपरा और महत्वकांक्षा की नर्म और मीठी कहानी है

नेटफ़्लिक्स पर आज रिलीज़ हुयी 'मस्का' लॉकडाउन के दौर परिवार के साथ देखने वाली कहानी है जिसमें अपनी परंपरा की तरफ नई पीढ़ी को संवेदनशील बनाने की कोशिश भी है।

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उमा नेहरू : भारतीय महिलाओं के अधिकारों की शुभ चिंतक

उमा नेहरू आज से 110 साल पहले महिला अधिकारों के लिए लिख रही थीं और आज़ादी के बाद एक सांसद के रूप में भी महिलाओं के अधिकारों के लिए आवाज़ बुलंद करती रहीं।

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यूट्यूब वीडियो ‘मेरा फर्ज़ है’ अपनी चुप्पी तोड़ने के साथ, नागरिकों को ज़िम्मेदार बनाता है

#MeraFarzHai वीडियो अच्छा कैंपेन है, पर वीडियो महिलाओं के खिलाफ हिंसा को केवल सार्वजनिक क्षेत्रों में ही देखा और उस पर अपनी खामोशी तोड़ने की बात की।

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मालती चौधरी : गांधी की तूफानी और टैगौर की मिनु

मालती चौधरी भारत की पहली महिला मार्क्सिस्ट लीडर्स में से एक थीं जिन्होंने राजनीति से अलग रहते सामाजिक एक्टिविस्ट के तरह काम करना तय किया।

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इम्तियाज़ अली की वेब सीरीज़ ‘शी’ है सीक्रेट मिशन कर लगी एक महिला कांस्टेबल की कहानी

शी के किरदार को लिखने के लिए बड़ी खोजबीन करके एक महिला कांस्टेबल की ज़िंदगी को देखा परखा और दर्शाया गया, जो खुद अपने आप से डरती है।

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पाकिस्तानी गीत दुआ-ए-रीम : एक करारा जवाब समाज की रूढ़िवादी सोच को

दुआ-ए-रीम में दो पीढ़ी की महिलाओं का अपने साथ होने वाली हिंसा पर चुप्पी और नई पीढ़ी की महिलाओं का हिंसा पर खुदमुख्तार तरीके से बोलना उभर कर सामने आता है।

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वेब सीरिज़ ‘सेक्स एजुकेशन’, मज़े-मज़े में करती है सेक्स पर बात

बेन टेलर के निर्देशन में बनी इस वेब सीरीज़ में, स्कूली बच्चों से लेकर अधेड़ उम्र के लोगों की सेक्स से जुड़ी समस्याएं को बेहतरीन ढंग से पेश किया गया है।

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जी हाँ! आप, मैं और ये समाज, हम सभी हैं ‘गिल्टी’

यौन शोषण की घटना को जब कोई सबके सामने लाता है, तो या तो सब एक चुप्पी साध लेते हैं या उस आवाज़ को चुप करने की तमाम साज़िशें होती हैं।

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अबके होली में मोहे रंग ऐसा पक्का दीजो कि छुटन न जाए…

होली मोहब्बत और अपनेपन के साथ ऐसे खेलें कि सारे बाहरी रंग छूट जाएं, लेकिन प्यार के पक्के रंग सामने वाला से न छूटें और न ही वह छुड़ाना चाहे।

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‘सिर्फ एक थप्पड़, पर नहीं मार सकता’ या ‘थप्पड़ से डर नहीं लगता है साहब, प्यार से लगता है’

थप्पड़ में है पुरुषवादी हिंसा के खिलाफ प्रतिरोध, जो अब तक हिंदी सिनेमा के इस रूमानी डायलाग में खो जाता था, “थप्पड़ से डर नहीं लगता है साहब, प्यार से लगता है।”

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