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सामाजिक मुद्दे
जब समानता का पाठ पढ़ाने वाले खुद ही असामनता की बातें करने लगें तो…

मैं अपनी संकुचित सोच के लिए माफ़ी चाहता हूँ। आपने सच कहा, शिक्षा का सभी पर समान अधिकार है, फिर चाहे पढ़ने का हो या पढ़ाने का।

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मैं बस इतना जानती हूँ कि ये मेरा बच्चा है…

कितना भेदभाव करते हैं हम अपने ही कोख से जन्मे ऐसे बच्चों के साथ। अब वक्त आ गया है कि हमारा ये समाज अपने बनाये बेतुके नियमों को बदलें। 

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लेकिन मुझे दहेज चाहिए क्यूंकि ये मेरा हक़ है…

"हम सभी को सुरभि पसंद आई, हम और कुछ नहीं चाहते, दहेज तो हम ना लेते हैं ना देते हैं।" तभी सुरभि ने कहा, "मुझे कुछ बोलना है। मुझे दहेज चाहिए।"

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‘रसोड़े में कौन था?’ रसोड़े में महिलाएं थीं, हैं और तब तक रहेंगी जब तक…

रसोड़े में पुरुष कभी-कभी ही विचरण करता है लेकिन हाय-तौबा अधिक मचाता है, "आज खाना कितना टेस्टी बना है। तुम इतना अच्छा खाना क्यों नहीं बनातीं?"

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एक अनचाहे सफ़र की पीड़ा ब्यान करती है कीरित खुराना की ये फिल्म…

NGO गूंज ने किरीत खुराना के साथ मज़दूरों की आवाज़ बनने का फ़ैसला करते हुए एक प्रोजेक्ट शुरू किया जो अब तैयार है जिसका नाम है सफ़र #safar 

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बुढ़ापे को अभिशाप न मानें, ये आने वाली पीढ़ी के लिए अनुभवों की टोकरी है…

घर आकर मैं काफी देर सोचती रही कि क्यों उम्र के आखिरी हिस्से में बूढ़े मां बाप को अकेला छोड़ दिया जाता है? ज्यादातर बच्चे साथ होकर भी साथ नहीं होते?

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