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सामाजिक मुद्दे
नज़रें घुमाएं और पहचानें अपने आसपास भरे हुए नेपोटिज़म को

आज हर तरफ एक ही शोर मचा है, नेपोटिज़म। क्या कोई भी ऐसा  क्षेत्र है जहां ये ना होता हो? ज़रा नज़रें घुमाएं और पहचानें अपने आसपास भरे नेपोटिज़म को...

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क्या गुवाहाटी हाईकोर्ट का फैसला पुरुषवादी फेमिनिज़्म का पहला पाठ है?

अब से महिलाओं के साथ-साथ शादीशुदा पति भी प्रतिकात्मक चिन्ह का प्रयोग करे, नहीं तो इस पुरुषवादी फेमिनिज़्म की हमें कोई ज़रुरत नहीं।

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सामाजिक पितृसत्ता ही आज हमारी सबसे बड़ी बाधा है…जानिये कैसे?

सामाजिक पितृसत्ता का ही परिणाम है कि दिल्ली में कोरोना को लेकर जब घरों में सर्वे हो रहे हैं, तो लोग अपनी जानकारी देने से कन्नी काट करे हैं।

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लड़का क्या करता है? लड़का कितना कमाता है? दोनों ही गलत सवाल हैं, जानिये क्यों…

लड़कों की शादी लड़का क्या करता है के बल पर होना कितना सही है? क्या ये उतना ही गलत नहीं जितना कि लड़की को शादी के लिए खाना पकाना आता है पूछना...

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शादी डॉट कॉम ने रंग के फ़िल्टर हटा दिए तो क्या, लड़की तो हम गोरी…

हाल ही में शादी डॉट कॉम ने एक क्रांतिकारी फैसला लिया कि अब उनकी वेबसाईट पर स्किन शेड कार्ड के आधार पर लड़की की प्रस्तुति नहीं होगी। 

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पुराने आदर्शवादी परिवारों में पिसते हमारे माता-पिता के जीवन का कड़वा सत्य

अगर आप आज भी अपनी असफलता का ठीकरा अपने माता-पिता पर ही फोड़ कर फिर अपनी जिम्मेदारी से भाग रहे हैं तो आपसे कोई भी उम्मीद रखना बेकार है।  

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