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सामाजिक मुद्दे
क्यों आज ये शांति बुरी लग रही है?

तूने भी तो यही माँगा था कि घर बैठ कर परिवार के साथ वक़्त बिताये, अब जब घर पर चाय पी रहा है तो क्यों, चाय भी अब बोर हो गई? तू क्यों अशांत हो रहा है?

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रामायण के प्रेम, अनुबंधन और निस्वार्थता के मूल्यों को हम अक्सर अनदेखा करते हैं!

नब्बे के दशक में, धारावाहिक रामायण ने पूरे देश की सोच पर कब्ज़ा कर लिया था और उस समय समाज में कुछ ऐसे बदलाव दिखे जिनकी किसी को उम्मीद नहीं थी।  हमने देशव्यापी लॉकडाउन के पहले सप्ताहांत में प्रवेश किया है। COVID-19 के 3rd स्टेज में प्रवेश करने के डर से हम में से ज्यादातर […]

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क्या लॉकडाउन का मतलब ये है कि आप वायरस से तो बच जाएँ लेकिन घरेलु हिंसा से मर जाएँ?

लॉकडाउन में कहने को तो कहा जा रहा है स्टे होम, स्टे सेफ पर शायद समाज के एक तबक़े के लिए स्टे होम इस नॉट ऑलवेज़ स्टे सेफ, और वो हैं महिलाएं।  

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इस बार जो बच पाओ तो हर हाल में ज़िंदा रहना

इस बार जो बच पाओ तो हर हाल में जिंदा रखना, दिलों में इंसानियत कि हैवान भी, तुम पर नज़र डाले तो शर्मिंदा न हो पाए!

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लॉकडाउन के दौरान क्या हमारे देश में सैनिटरी नैपकिन पर्याप्त मात्रा में हैं?

सैनिटरी नैपकिन COVID-19 लॉकडाउन के दौरान महिलाओं को साफ और सुरक्षित रखने के लिए एक आवश्यक वस्तु है। क्या हमारे देश में इसका इंतज़ाम पर्याप्त मात्रा में है?

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लॉक डाउन में कैसे हैं हमारे किसान परिवार के बच्चे और महिलाएं – एक आँखों देखी तस्वीर

पहले हमें जागरूक होना होगा तभी हम दूसरों को जागरूक कर पाएंगे वरना फिर कोई विशाल मिलेगा जिसका पेट खाली होगा या कोई रामस्नेही, जिसके शरीर पर ज़ख्म होगा।

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