सामाजिक मुद्दे
जीने की राह – अतीत की काली परछाइयों से निकल और आगे बढ़

राघव ने कई बार सुम्मी से मिलने की कोशिश की, परन्तु सुम्मी के पास समय नहीं है। वह अतीत की काली परछाइयों से निकल, जीवन पथ पर बहुत आगे निकल चुकी थी।

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सात फेरों का आठवाँ वचन – हैसियत का प्रदर्शन करने के लिए केवल शादी का मंडप ही ना चुनें

कार्तिक ने आठ वचन की शादी के लिए कई पत्रकार दोस्तों को आमंत्रण दिया। आमंत्रण पत्र के प्रारुप को पढ़कर जिज्ञासा वश कई लोग इस शादी में आने को उत्सुक होने लगे।

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समय आ गया है कि भारतीय समाज अब औरतों के प्रति अपनी सोच बदले

यह नए भारत की औरतें हैं, जो ज़रुरत पड़ने पर पुरुष के साथ कदम से कदम मिलाकर चल सकती हैं और  अपने साथ हो रहे अन्याय का जवाब देने का भी सामर्थ्य रखतीं हैं।

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चिता की लकड़ी अब भी मायके से आएगी क्या? अब तो छोड़ें ऐसे रिवाज़ों को।

सरकार ने नारा तो दे दिया है बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ, पर जब तक हम बेटियों के माँ-बाप के बोझ को हल्का नहीं होने देंगे, तब तक यह नारा चरितार्थ नहीं हो पाएगा। 

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नारी! है शक्ति की अवतारी अब तू

चल उठ अपनी रक्षक बन, ले ले कवच ढाल हाथों में अब तू, ना कृष्ण कोई तुझे बचाने आएगा अबबन काली दिखा दे अब तू

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माननीय खट्टर साहब, कश्मीरी लड़कियां को ना तो आपकी ज़रुरत है ना ही दूसरे पुरुषों की

माननीय खट्टर साहब, अगर कश्मीरी गोरी’ की, धारा 370 के रहते, आप में रुचि नहीं थी, तो वह अब भी आप में कोई दिलचस्पी नहीं लेगी।

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