माँ की जुबानी
माँ बन कर जाना, मेरी दुनिया मेरे बच्चे

उस समय मानो सब कुछ मिल गया, खुशी के दो आंसू निकल पड़े। समय निकलता गया। मेरे बच्चे के साथ मेरा रिश्ता भी बनता रहा।

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बुरी माँ-हर माँ को होना चाहिए

मैं अपनी बेटी को अजनबी नहीं बना पाऊँगी, हर दुःख-दर्द में उसका साथ निभाऊँगी, ज़्यादा से ज़्यादा एक बुरी माँ ही तो कहलाऊँगी। 

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माँ मेरी, मेरा अभिमान है तू – मेरी रुह का आकर है तू

"नाज़-नज़र और रक्षा-कवच, तेरी तरह बस बन जाती माँ" - एक बेटी द्वारा अपनी माँ को समर्पित, जिसकी समता वह ख़ुद माँ बनने के बाद ही समझ पाई।   

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सर्वगुण संपन्न पति यहाँ मिलते हैं – नो बुकिंग अमाउंट रिक्वायर्ड

एक बार आप भी देखिए! ये तो मल्टीप्ल चॉइस क्वेश्चन से भी ज़्यादा चोइसेस वाला पेपर मालूम पड़ता है। इतनी वैरायटी! समझ नहीं आ रहा कि सेलेक्ट कैसे करूँ?

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मेरा संडे कभी आया ही नहीं ! मेरे लिए कोई संडे क्यों नहीं बना?

मेरे लिए कोई संडे क्यों नहीं बना? आख़िर, मेरा संडे कब आएगा? "जैसे बाकी सबकी दिनचर्या संडे को चैन की सांस लेती है, मेरी अकड़ कर सर पर सवार हो जाती है। मुझसे वही सब काम करवाती है जो मैं आमतौर पर हर रोज़ करती हूँ।" 

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