माँ की जुबानी
ये रोटी बनाना नहीं आसां गालिब, बस यूं समझिए आग का दरिया है

पहले प्रयास के अगर मार्क्स मिलते तो मेरे नंबर नेगेटिव में आते। भगवान जी ने कोई ऐसी संरचना और इंसान ने कोई ऐसा नक्शा नहीं बनाया जैसा मेरी रोटी का आकार।

टिप्पणी देखें ( 0 )
माँ बन कर जाना, मेरी दुनिया मेरे बच्चे

उस समय मानो सब कुछ मिल गया, खुशी के दो आंसू निकल पड़े। समय निकलता गया। मेरे बच्चे के साथ मेरा रिश्ता भी बनता रहा।

टिप्पणी देखें ( 0 )
बुरी माँ-हर माँ को होना चाहिए

मैं अपनी बेटी को अजनबी नहीं बना पाऊँगी, हर दुःख-दर्द में उसका साथ निभाऊँगी, ज़्यादा से ज़्यादा एक बुरी माँ ही तो कहलाऊँगी। 

टिप्पणी देखें ( 0 )
माँ मेरी, मेरा अभिमान है तू – मेरी रुह का आकर है तू

"नाज़-नज़र और रक्षा-कवच, तेरी तरह बस बन जाती माँ" - एक बेटी द्वारा अपनी माँ को समर्पित, जिसकी समता वह ख़ुद माँ बनने के बाद ही समझ पाई।   

टिप्पणी देखें ( 0 )
सर्वगुण संपन्न पति यहाँ मिलते हैं – नो बुकिंग अमाउंट रिक्वायर्ड

एक बार आप भी देखिए! ये तो मल्टीप्ल चॉइस क्वेश्चन से भी ज़्यादा चोइसेस वाला पेपर मालूम पड़ता है। इतनी वैरायटी! समझ नहीं आ रहा कि सेलेक्ट कैसे करूँ?

टिप्पणी देखें ( 0 )
मेरा संडे कभी आया ही नहीं ! मेरे लिए कोई संडे क्यों नहीं बना?

मेरे लिए कोई संडे क्यों नहीं बना? आख़िर, मेरा संडे कब आएगा? "जैसे बाकी सबकी दिनचर्या संडे को चैन की सांस लेती है, मेरी अकड़ कर सर पर सवार हो जाती है। मुझसे वही सब काम करवाती है जो मैं आमतौर पर हर रोज़ करती हूँ।" 

टिप्पणी देखें ( 2 )
topic
stories-from-moms
और पढ़ें !

अपना ईमेल पता दर्ज करें - हर हफ्ते हम आपको दिलचस्प लेख भेजेंगे!

क्या आपको भी चाय पसंद है ?