महिला-इतिहास
सावित्री बाई फुले की 189 वीं जयंती – उनके नारीवादी विचार अभी भी प्रासंगिक हैं  

सावित्री बाई फुले की 189 वीं जयंती पर याद करते हैं भारत की पहली स्कूल हेडमिस्ट्रेस सावित्रीबाई फुले जो अपने समय से काफी आगे थीं।

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हिंदी साहित्य और लेखन में महिलाएं – तब से अब तक हमेशा रहा योगदान और भागीदारी

ख़ुशी की बात है कि महिला लेखक अपने अनूठे अनुभवों और विचारों को सक्षमता से प्रस्तुत कर रही हैं। हिंदी साहित्य और लेखन में महिलाएं अपना स्थान बनाये हुए हैं। 

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क्या अगस्त क्रांति की इन असमिया वीरांगनाओं को आप जानते हैं?

भारत छोड़ो आंदोलन में समाज के हर छोर से ऐसी ही औरतें शामिल हुईं जिन्होंने अपने साहस, नेतृत्व और त्याग से भारत में नारीवाद का एक नया इतिहास लिखा।

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राष्ट्रमाता मूलमती देवी-प्रसिद्ध क्रांतिकारी और कवि रामप्रसाद बिस्मिल की महीयशी माँ

आत्मकथा में रामप्रसाद लिखते हैं, "यदि मुझे ऐसी माता नहीं मिलती तो मैं भी अति साधारण मनुष्यों के भांति संसार चक्र में फंस कर जीवन निर्वाह करता।"

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एक वीरांगना – लीनी की याद में

कुछ लोग ऐसे भी होते हैं जो अपनों की ख़ुशी के साथ-साथ, समाज के प्रति भी अपना धर्म बख़ूबी निभाते हैं। ऐसी ही एक वीरांगना थी लीनी। 

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क्या आप भारत की इन 5 महिला मुख्यमंत्रियों को जानते हैं ?

निरिक्षण से ये पता चला है कि देश में केवल १०% महिला राजनेता हैं. भारत को स्वतंत्रता मिलने के बाद यहाँ बहुत कम महिला मुख्यमंत्री हो पायी हैं. आइये इन पर एक नज़र डालें.

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