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महिला-इतिहास
अबला बोस : जगदीश चंद्र बोस की जीवन संगिनी जिन्होंने बदला विधवाओं का जीवन

सर जगदीश चंद्र बोस की धर्मपत्नी लेडी अबला बोस का जन्म 8 अगस्त 1865 को हुआ था। उनके जीवन का अंतिम वर्ष 1951, काफी विशिष्ट था।

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रशीद जहाँ : ‘अंगारे’ के बाद ‘अंगारे वाली रशीद जहाँ’ के नाम से जानी जातीं!

प्रसिद्ध कथाकार, नाटककार और नारी समस्याओं को बेबाक अंदाज़ में प्रस्तुत करने वाली  रशीद जहाँ, 5 अगस्त 1905 को उत्तरप्रदेश के अलीगढ़ शहर में पैदा हुईं।

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हमेशा याद रहेंगी हमें फियरलेस नादिया जिन्होंने फिल्मों में महिलाओं की पहचान बदल दी

जब फिल्मों में महिलाओं का रोल बंधित हुआ करता था तब 'एंग्री यंग वुमन' यानि फियरलेस नादिया ने फिल्मों में महिलाओं के रूढ़िवादी चरित्र को हिलाकर रख दिया। 

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विभाजन का दर्द झेल रही महिलाओं की आवाज़ थीं, बेगम अनीस किदवई

आज बेगम अनीस किदवई की पुण्यतिथी है, उनके बारे में तारीक के शक्ल में यह दर्ज है कि वह 1906 में पैदा हुईं और साहित्य अकादमी सम्मान से नवाज़ी गयीं।

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उमराव जान ‘अदा’ : उनकी ज़िंदगी हकीकत से अधिक अफसाना है

यूँ तो लख़नऊ की तमाम तवायफों का ज़िक्र मिलता है, लेकिन सबसे अधिक शोहरत अगर किसी को मिली तो वह हैं - उमराव जान 'अदा'।

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हंसा मेहता : उनके महिलाओं के स्तर में सुधार के प्रयासों को संयुक्त राष्ट्र संघ ने सराहा

3 जुलाई 1897 को हंसा मेहता का जन्म बड़ौदा राज्य में दर्शनशास्त्र के प्राध्यापक, जो बाद में बड़ौदा राज्य के दिवान भी रहें सर मनुभाई मेहता के घर हुआ।

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