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महिला-इतिहास
हर एक, सिखाए एक को – नारा दिया था कुलसुम सयानी ने प्रौढ़ शिक्षा को बढ़ावा देने के लिए!

क्या आप जानते हैं, हर एक, सिखाए एक को के नारे के साथ कुलसुम सयानी ने व्यस्क शिक्षा की नींव रखी जो बाद में प्रौढ़ शिक्षा के नाम से जाना गया।

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रज़िया सुल्तान : दिल्ली सल्तनत की एकमात्र महिला शासक

रज़िया सुल्तान भारत की राजधानी दिल्ली की पहली मुस्लिम महिला शासक थीं और उन्होंने सुलताना की जगह अपने नाम के आगे सुल्तान लगाया। 

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दुर्गाबाई देशमुख ने अपने बाल-विवाह को मना करके नारी-अधिकारों के लिए काम किया

दुर्गाबाई देशमुख ने संविधान सभा में लगभग 750 संशोधन प्रस्ताव रखे और उनसे से महात्मा गाँधी से लेकर जवाहरलाल नेहरू और भीमराव आंबेडकर तक, सब प्रभावित थे। 

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सामाजिक मुद्दों के लिए अपना जीवन समर्पित करने वाली मृदुला साराभाई

मृदुला साराभाई महिलाओं के मौलिक अधिकार, गर्भपात, तलाक और अवैध संतान जैसे मुद्दों पर राज्य से महत्वपूर्ण सिफारिशें करती रहीं।

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अम्मू स्वामीनाथन : संविधान सभा में महिला अधिकार को बुलंद करने वाली थीं

किसी स्कूल-कालेज में शिक्षित नहीं होने के बाद भी अम्मू स्वामीनाथन एक महिला नहीं, कई संभावनाओं की कहानी हैं, वह संभावना, जो तमाम महिलाओं में दबकर रह जाती है। 

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उमा नेहरू : भारतीय महिलाओं के अधिकारों की शुभ चिंतक

उमा नेहरू आज से 110 साल पहले महिला अधिकारों के लिए लिख रही थीं और आज़ादी के बाद एक सांसद के रूप में भी महिलाओं के अधिकारों के लिए आवाज़ बुलंद करती रहीं।

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