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उस दिन की बरसात और पतिदेव का सरप्राइज़…

मेरी आँखें भर आईं। मेरी आँखें बरस रही थीं और बारिश का बरसना कम हो रहा था और परीक्षा देने के लिये जब मैं घर से निकली तो बारिश रुक चुकी थी।

मेरी आँखें भर आईं। मेरी आँखें बरस रही थीं और बारिश का बरसना कम हो रहा था और परीक्षा देने के लिये जब मैं घर से निकली तो बारिश रुक चुकी थी।

बी ए पार्ट-3 की परीक्षा थी, सावन का महीना था। परीक्षा दिलवाने के लिए हसबैंड बाइक से लेकर जाते थे। परीक्षा रोज नहीं थी, दो दिन का गेप था।

मैं मायके में थी, प्रेग्नेंट भी थी और मधुश्रावणी भी चल रहक था मेरा। पति अपने घर से परीक्षा के एक दिन पहले रात में आते थे, परीक्षा दिलवाकर दूसरे दिन सुबह चले जाते थे। 

पहली सिटिंग ही एग्जाम था, घर से परीक्षा केंद्र की दूरी 30 किलोमीटर थी।

तीन पेपर हो चुके थे, चौथे पेपर के एक दिन पहले से ही मूसलधार, घनघोर, जोरदार बारिश होने लगी थी। एक मिनट के लिए भी बारिश न रुकी थी। मैं तो मधुश्रावणी और प्रेगनेंसी के कारण साथ ही परीक्षा सिर पर थी तो परेशान तो थी ही, ऊपर से एक दिन पहले शाम में हसबैंड अत्यधिक वर्षा के कारण आ न सके।

सुबह मेरी परीक्षा थी। अब कैसे जा पाऊँगी परीक्षा के लिए नजदीक तो है नहीं, घर में न बाइक है न कोई जेंट्स, सिर्फ मैं और मेरी मम्मी। कौन परीक्षा दिलवाने ले जायेगा। मेरी परीक्षा छूट न जाये, रात में हसबैंड से बात हुई तो वो बोले आ पाऊँगा तब न? बारिश तो रुक ही नहीं रही।

मुझे रोना आ रहा था कि एग्जाम छूटेगा तो एक साल पीछे हो जाऊँगी। बारिश को कोस रही थी। पति से लड़ाई भी हो गई, मेरी परीक्षा छूटनी न चाहिए।

सुबह सात बजे चाय पीकर मैं  नहाकर तैयार थी कि कैसे भी एग्जाम के लिये जाना है। तभी पतिदेव, पेंट घुटने तक समेटे, रेनकोट पहने घर में दाखिल हुए, बाइक घर से 10 मिनट दूर ही रोककर भींगते हुए पैदल ही घर तक आये। क्योंकि घर तक का रास्ता कीचड़ युक्त था।

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मेरी नजर पड़ते ही मैंने कहा, “मुझे बताया क्यों नहीं कि आप आ रहे हैं? मैं कितनी परेशान थी। बारिश तो रुकने का नाम ही नहीं ले रही थी।”

 उन्होंने कहा, “मैं तो कल शाम ही आ जाता, माँ आने नहीं दे रही थी, की बारिश काफी तेज है परीक्षा ज्यादा जरूरी नहीं है। पर सुबह मैं आने से खुद को रोक न पाया। आखिर तुम्हारे एक साल की मेहनत है, जो एक दिन के बारिश से कैसे धुलने देता? तैयार हो जाओ चलो परीक्षा देनी है तुम्हें। किसी को बिना बताये घर से तुम्हें परीक्षा दिलवाने आया हूँ और तुम्हें सरप्राइज भी देना था।”

मेरी आँखें भर आईं। मेरी आँखें बरस रही थीं और बारिश का बरसना कम हो रहा था। और परीक्षा देने के लिये जब मैं घर से निकली तो बारिश रुक चुकी थी। लगता था बारिश को उनका ही इंतजार था। या मेरे इम्तहान देने का ही इम्तहान थी लगातार बारिश।

मैं परीक्षा देने गई। एग्जाम अच्छा गया, और खुश भी थी कि एक प्यार करने वाला जीवनसाथी मिले तो, कोई परिस्थिति परेशान न कर सकती है। हर इम्तिहान में पास हो जाऊँगी।

मैंने बारिश का भी शुक्रिया किया कि मेरे पति की भावनाओं को मैं जान पाई कि मैं और मेरे सपने उनके लिए कितना अहम है। ये बारिश के कारण ही जान पाई मैं।

मूल चित्र: Still from movie Eeram

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