रिश्ते
अपने जीवन में विशेष रिश्तों के बारे में भारतीय महिलाओं की सच्ची कहानियाँ
आज एक ख़त, तहे दिल से, अपनी बाईसा के नाम लिख रही हूँ

इस सुंदर से पत्र के माध्यम से एक बाईसा दूसरी बाईसा से अपने दिल की बात साझा करना चाह रही हैं, अब उम्मीद है बस एक दुसरे को समझने की!

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यदि हम ज़िंदगी में आये बदलाव को स्वीकार कर लें तो ज़िंदगी गुलज़ार है!

अब हमारी बातें भी सिर्फ बच्चों की होती हैं और गानों की जगह, अब लोरियां आ गई हैं जिसको सुनते-सुनाते कभी-कभी तो हम दोनों ही अपने बच्चों से पहले सो जाते हैं!

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अपने बचपन की कहानियां याद करते हुए मुझे आज इमली वाली अम्मा याद आ गयीं!

बात तब की है जब मैं स्कूल में थी, तब इमली बेचने वाली अम्मा रोज़ हमारे स्कूल के पास आती और सारी लड़कियां उससे इमली खरीदतीं।

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मानते हैं ना आप कि बात करना बहुत आसान है पर निभाना मुश्किल?

चाहे कोई कुछ भी कहे पर अभी भी ज़्यादातर माँ-बाप को बेटी के ससुराल के साथ निभाना ही पड़ता है, चाहे वो लड़की के परिवार के साथ कैसा भी व्यवहार क्यों न करें।

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यदि पैसा सब कुछ नहीं है तो इसके कारण करीबी रिश्तों में दूरियां क्यों?

माँ आप ही बताओ मुझे कुछ चाहिए तो मैं किसके पास आऊँगा? आपके पास ना? तो आपको कुछ चाहिए तो आप अपनी मम्मी से ही मांगोगे ना?

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ज़िंदगी इक सफर है सुहाना यहां कल क्या हो किसने जाना…ओड्लई ओड्लई ओहू…

जब तक जीवन है तब तक कोई ना कोई मुश्किलें आती रहेंगी। इन्ही में से कुछ लम्हे चुरा के मुस्करा लो, ज़िंदगी कबूल करो और अपना लो। एक बार मुस्कुरा दो यार!

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