रिश्ते
अपने जीवन में विशेष रिश्तों के बारे में भारतीय महिलाओं की सच्ची कहानियाँ
शिक़स्त दिल और मायूसी – इश्क़ किया या गुनाह किया!

रिश्तों के टूटने पर दिल से निकलती है ये दुआ, " जाओ आजा़द किया तुम्हें हमारे ख्यालों की हवालात से, शायद मेरी फिजा़ का तुम पर कुछ असर हो जाए?"

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ये रिश्ते – सिर्फ बातें ही नहीं, कुछ मुलाकातें भी ज़रूरी हैं

क्या फोन के ज़रिये की गयी चंद बातें रिश्तों को निभाने के लिए काफी हैं? कुछ नज़दीकी रिश्ते इससे ज़्यादा की उम्मीद रखते हैं! और ये ज़रूरी भी है...

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अब लोक-दिखावे के लिए काहे का स्टाइलिश होना

बच्चों के सामने लड़ाई-झगड़ा करने से, उनके बारे में बुरे, गलत तरीके से बोलने से बनती बात भी बिगड़ सकती है और इसका असर पूरे परिवार को भुगतना पड़ता है।

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‘वो जैसी भी है मेरी पत्नी है’ क्या आप भी ऐसा मानते हैं?

"कसम से आप इतनी मासूम हो कि मेरे जैसा इंसान आपके ऊपर होने वाली ज्यादती बर्दाश्त नहीं कर पा रहा है। पता नहीं ये लोग किस मिट्टी के बने हैं।"

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अरे! जाते समय मुझे बोलकर जाने की तो बनती है न सैंया जी!

अपने बहु-बेटे या बेटी-दामाद के विवाह होने के बाद ज़िम्मेदारियों और अपेक्षाओं पर खरे उतारने के पूर्व उनको एक दूसरे को समझने का अवसर अवश्य ही प्रदान करें।  

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माता-पिता होने के नाते अपने बच्चों का सहारा बनें दुश्मन नहीं

कल मेरी एक सहेली रिया मुझसे मिलने आई। बहुत उदास थी। पूछा तो उसने जो मुझे जो कहानी बताई, वह मैं आप सबको बयान करती हूँ। सच में ऐसा भी होता है?

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