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रिश्ते
अपने जीवन में विशेष रिश्तों के बारे में भारतीय महिलाओं की सच्ची कहानियाँ
देवर जी, आप तो छुपे रुस्तम निकले…

मम्मीजी जी ने ये कह फ़ोन रख दिया कि देखना कोई कमी ना रह जाये, लेकिन ये पूछना तो भूल ही गईं कि "तुम्हें आटे का हलवा तो बनाने आता है ना?"

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लेकिन माँ, तोहफ़े तो मायके से आते हैं ससुराल से नहीं…

"ये कौन सी नई रीत शुरू कर रही है बहु? तोहफ़े तो बहुओं के मायके से आते हैं, ना कि ससुराल से भेजे जाते हैं", बहू ऐसा कहती थीं मेरी सासु माँ...

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शादी में नमक जितना झूठ तो चलता है…

"एक झूठ बोलने से अगर रिश्ते सवंरते हैं तो मुझे नहीं लगता इसमें कुछ हर्ज है। तुम अपनी मां से फोन पर कह देना कि मैंने तुम्हें यह सब करने को कहा है..."

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मेरी बहू रफूगर नहीं है…

"मुझे माफ़ कर दीजिए मां! पर साड़ी कटने में मेरा कोई दोष नहीं, मैंने सारे एहतियातों का ध्यान रखा था, पर वो पिन की वजह से..."

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घर के काम मैं करूँ या तुम, क्या फ़र्क़ पड़ता है?

सीमा को अपने पति पर गर्व होता। उसने सपने में न सोचा कि उसका पति उसका साथ देगा। क्या करती, बचपन से उसने देखा कि ज़रूरत सिर्फ पति की होती है।

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भाभी, आपको किसी के लिए बदलनी की ज़रुरत नहीं है…

बेहद ही बदतमीज औरत है! पहले दोस्ती करती है, खाना-पीना, देना-लेना सब कर लेती है। और जब मन भर जाता है तो बहाने से लड़ाई कर लेती है, दूर रहना...

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