रिश्ते
अपने जीवन में विशेष रिश्तों के बारे में भारतीय महिलाओं की सच्ची कहानियाँ
प्रीती सुख का स्वागत, भावों के नाद मधुर सुर ताल के साथ

दोनों की समागम भावनाओं से होगी रस बरसात, बुनियादों का कर त्याग हमें करना कुरितियों का हनन, गर तुम निभाओ साथ मेरा सुखद होगा ये नवजीवन

टिप्पणी देखें ( 0 )
बहु की अच्छाई कभी भी नहीं दिखाई दी?

सुबह हुई नहीं कि सबकी फरमाइशें शुरू हो गईं। किसी को चाय तो किसी को स्पेशल कुछ। किसी को न दीपू से मतलब और ना ही रागिनी की नौकरी से।

टिप्पणी देखें ( 0 )
मिलन होगा, ओ मन थोड़ी धीर धरो

कभी-कभी हम इतने स्वार्थी हो जाते हैं कि सिर्फ अपने ही बारे में सोचने लगते हैं, लेकिन हमें दूसरों के बारे में भी सोचना चाहिए।

टिप्पणी देखें ( 0 )
मेरा नया परिवार मेरा इंतज़ार कर रहा है

जिस कलेजे के टुकड़े को रात-रात भर जाग कर, पाल-पोस कर इतना बड़ा किया, आज उसे माता-पिता से दूर जाने में ज़रा सा भी अफ़सोस नहीं था।

टिप्पणी देखें ( 0 )
घर के सूरज में खिलता मेरा सनफ्लावर

"अच्छा, यदि एकादशी का उपवास ना रख पाए तेरी बहु, तो भी अच्छी रहेगी क्या?" प्रभात ने माँ की आँखों में झाँकते हुए कहा।

टिप्पणी देखें ( 0 )
जीवन में बदलाव आते हैं पर यह कैसी मानसिकता है

शादी को एक साल बीत गया। सोमेश दो-चार बार आया भी, लेकिन उसका आना ना आना, एक समान ही होता था। दिया को इस इंतज़ार से अब घुटन होने लगी थी।

टिप्पणी देखें ( 0 )

अपना ईमेल पता दर्ज करें - हर हफ्ते हम आपको दिलचस्प लेख भेजेंगे!

क्या आपको भी चाय पसंद है ?