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रिश्ते
अपने जीवन में विशेष रिश्तों के बारे में भारतीय महिलाओं की सच्ची कहानियाँ
बहु, तुम्हारे हिस्से की रोटी हम क्यूँ बनाएँ…

अब यहां कोई नौकर तो लगा नहीं है, जो तुम्हारे लिए रोटी सेक रखेगा। हमने रोटी सेककर खा ली है। तुम अपने लिए रोटी सेक लेना।”

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सिर्फ बहु ही क्यों ले इजाज़त हर बार…

अविनाश प्यार करता था नेहा को लेकिन माँ बाप के सामने होंठ सिल लेता कुछ बोलता ही नहीं क्या गलत क्या सही जैसे विवेक ही ख़त्म हो जाता उसका।

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भाभी, आप रात को ऑनलाइन क्या कर रहीं थीं?

मैं सोचने लगी कि अब तक तो मुझ पर निगरानी रखी जाती थी अब आज ये बात भी पता चली कि ऑनलाइन  निगरानी भी मेरी रखी जाती है।

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मैं एक कड़क सास बनने की कोशिश कर रही हूँ…

"अरे गरिमा तेरी मत मारी गयी है? कितना समझाया था क्यों 'बूढ़ी घोड़ी लाल लगाम बन रही है?' अपना मजाक खुद क्यों बना रही है? मेरी बात मान।"

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जो मेरे साथ हुआ, क्या वो हर घर में होता है?

मेरे ससुराल वाले मेरी तारीफ किया करते, जिससे मेरी जेठानी को बहुत प्रॉब्लम होती और वो रोज नए तरीके ढूंढतीं मुझे नीचा दिखाने के।

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अपनी सासू माँ में मुझे मेरी खोयी माँ वापस मिल गई…

विदाई के समय दुल्हन बनी दिव्या ने माँ की तस्वीर ऐसे सीने से लगा रखी थी कि मानो हर पल माँ को साथ रखना चाहती थी। 

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