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रिश्ते
अपने जीवन में विशेष रिश्तों के बारे में भारतीय महिलाओं की सच्ची कहानियाँ
मेरी बहु मेरे लिए हमेशा चाँद का टुकड़ा रहेगी…

बहु के रूप में एक बेटी क्या मिली, निर्मला के सपनों को पँख लग गए। साथ में चाय पीने से ले कर बाजार में सेल और साथ में फिल्मे देखने जाना। 

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मैं सिर्फ आपका दामाद नहीं बेटा भी हूँ सासू माँ…

आपका हक़ है मुझपे। जब मेरी इतनी चिंता कर सकती हैं,  मेरे लिये प्रार्थना कर सकती हैं, तो मुझे मेरी गलती पे डाँट क्यों नहीं सकतीं?

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देवर-भाभी के बीच में अब कुछ मत बोलना…

जबसे अजय को पता चला है कि भाभी मां बनने वाली है, तब से वह अपनी भाभी की सेवा में लगा है, कभी फ्रूट्स ले आता है तो कभी जूस ले आएगा।

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मैं सिर्फ आपकी बहु नहीं, बेटी भी हूँ माँ…

दस साल की बच्ची के मुँह से ये सुन रूपा को बहुत गुस्सा आया, "बिहेव योर सेल्फ सलोनी। वो दादी हैं तुम्हारी और जरुरी नहीं जो नानी करें वही दादी भी करें तुम्हें।"

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बड़े तोहफों से रिश्तों को छोटा नहीं करते…

उनके जाने के बाद निशा ने कहा, "माँ क्या जरूरत थी उनको मिठाई और चांदी के सिक्के देने की? वो कौन सा उपहार लेकर आये थे।"

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क्या शादी के बाद आप इस जेठ-बहु की जोड़ी को अपनाएंगे?

इस शादी के बाद विशाल सर मेरे जेठ हो जाएंगे और एक जेठ और बहु के नाच गान को हमारा समाज क्या परिवार भी स्वीकार नहीं करेगा।'

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