कोरोना वायरस के प्रकोप में, हम औरतें कैसे, इस मुश्किल का सामना करते हुए भी, एक दूसरे का समर्थन कर सकती हैं?  जानने के लिए चेक करें हमारी स्पेशल फीड!

माँ! वापस आ जाओ…

"मम्मा यार! मैं आपकी तरह बहादुर नहीं हूँ। कहीं और जाकर रहना, वो भी सारी जिंदगी के लिए .सोचकर भी मेरा बी.पी डाउन होने लगता है।"

“मुझे शादी नहीं करनी मम्मा! आप प्लीज़ नीरज के घर वालों को मना कर दीजिए…”

“लेकिन क्यों? मम्मा ने प्यार से अपनी लाडली बेटी के चेहरे पर आए बालों को पीछे करते हुए कहा…”

“मैं आपको भाई को छोड़ कर कहीं नहीं जाऊंगी… वो आंखों में आंसू भर कर बोली…”

“बच्चा! हर लड़की को शादी करनी पड़ती है… देखो मैं भी तो सब छोड़ कर आई थी ना…”

“मम्मा यार! आप समझ नहीं रही हैं! मैं आपकी तरह बहादुर नहीं हूँ। सच्ची बोल रही हूँ कहीं और जाकर रहना, वो भी सारी जिंदगी के लिए… सोचकर भी मेरा बी.पी डाउन होने लगता है। और तो  और भाई कैसे रहेगा मुझसे लड़े बिना? वो अब उनकी गोद में सर रखकर लेट गयी।

“सब रह लेंगे। तुम फिक्र ना करो। बस तुम मान जाओ। वो लोग दो दिन बाद आएंगे रिश्ता तय करने।”

“मम्मा!” वो एकदम सीरियस होकर बोली।

“अगर नीरज के साथ रहने में या फिर उसके परिवार के साथ रहने में मुझे को प्राब्लम हुई तो… तो आप…”

Never miss real stories from India's women.

Register Now

“पहली बात तो ऐसा कभी होगा नहीं और अगर हो गया तो तुम्हारी माँ हमेशा तुम्हारे साथ रहेगी हर कदम पर और बेटा नीरज की माँ भी तो तुम्हारी माँ ही होंगी…वो भी तुम्हे ऐसे ही प्यार करेंगी जैसे मैं करती हूँ”, माँ ने बेटी को प्यार करते हुए कहा था।

“उठ जाओ महारानी! आठ बज गया है अभी तक सोए पड़ी हो। नाश्ता नहीं बनेगा क्या आज?” सासु माँ की आवाज पर शीना ने आंख खोलने की कोशिश की मगर खोल नहीं पाई।

“मेरी ही किस्मत खराब है ऊपर वाले ने दो दो बहुएं! दी दोनों ही कामचोर। वो बड़बड़ा रही थीं…”, उसने पूरी ताकत से आंख खोली फिर उठकर बैठ गयी।

“मम्मा! वो इधर-उधर देखने लगी। शायद माँ को ढूंढ रही थी। अभी तो मेरे पास थी फिर कहाँ चली गयी? वो अभी भी ख्वाब से बाहर नहीं आई थी। उसे लग रहा था मम्मा उसके पास हैं। उनकी गोद में सर रखकर वो लेटी थी।

“कहाँ चलीं गयीं? मम्मा आपने तो कहा था मुझे जब भी आप की जरूरत होगी आप हमेशा मेरा साथ देंगी, फिर क्यों नहीं आतीं? क्यों? प्लीज़ मम्मा! मैं बहुत थक गयी हूँ। मैं आपके लिए तड़प रहीं हूँ, आ जाइए ना। मैं अब कोई जिद नहीं करूंगी। भाई को भी परेशान नहीं करुंगी बस आप आ जाइए”, वो जैसे किसी और दुनिया में थी।

“ओ महारानी! उठो और फटाफट से किचन में जाओ। हम भूखे बैठे हैं और तुम आराम से सो रही हो?” सासु माँ ने उसकी हरकत को नजरअंदाज करते हुए कहा।

“मम्मा! आप इतनी जल्दी क्यों चली गयीं। मैं बहुत अकेली हो गई हूँ। आपकी बहुत याद आती है।  मम्मा यार वापस आ जाओ ना ऐसे कोई अपने बच्चों को तड़पाता है? मैंने कहा था ना मैं आपके बिना नहीं रह सकती फिर क्यों आप चलीं गयीं? आपने कहा था आप मेरा साथ देंगी हमेशा मेरे ससुराल वाले अच्छे नहीं होंगे तो आप साथ देंगी। मैं तो आपको कुछ बता भी नहीं पाई…

मम्मा नीरज की मम्मी बिल्कुल भी आपकी तरह नहीं हैं वो मुझसे प्यार भी नहीं करतीं। मैं आपको कैसे बताऊँ…”

वो उठकर वाशरूम में भागी क्योंकि उसे बहुत ज्यादा रोना आ रहा था।

शादी के दो महीने बाद ही मम्मा बीमार पड़ी थीं। उनकी बीमारी सुनकर कैसे तड़प गयी थी मगर नयी नयी बहू होने की वजह से सासु माँ को उसपर प्यार ज्यादा आ रहा था इसलिए उन्होंने कहा था देखकर वापस आ जाना रुकना नहीं हमे तुम्हारे बिना अच्छा नहीं लगता और नीरज भी वापस अमेरिका चला जाएगा।

वो चाहकर भी नहीं रुक पाई वैसे भी उसे लगा मम्मा जल्द ही ठीक हो जाएंगी और नीरज भी चले जाएंगे तो मैं आकर कुछ दिन मम्मा के साथ रहूंगी। भाई ने भी रोका था मगर वो फिर आने का बोलकर चली आई।

भाई को फोन करके खैरियत पूछती तो, “हां माँ ठीक हैं। मैं हूँ ना उनके साथ तू अपने ससुराल वालों का ख्याल रख। परेशान मत हो…”, बोलकर दिलासा देकर फोन रखवा देते।

नीरज चले गए। उन्होंने कहा था, “मैं सोच रहा हूँ वापस आ जाऊं। तुमको ले नहीं जा सकता क्योंकि मम्मी ने कसम ली थी कि तुम्हे अपने साथ वहाँ नहीं ले जाऊंगा नहीं तो ऐसा ना हो कि हम कभी वापस ही ना आएं। मैं माँ को समझ सकता हूँ, भाई हमारे साथ नहीं रहते इसलिए हम दोनों को ही मम्मी-पापा का ख्याल रखना पड़ेगा। तुम अपना और मम्मी-पापा का ख्याल रखना। और हाँ! मम्मी से पूछकर अपनी मम्मा के पास चली जाना। चाहो तो कुछ दिनों के लिए रुक जाना उन्हें अच्छा लगेगा।”

नीरज की बात पर वो बहुत खुश हुई थी।

सासु माँ ने एक हफ्ता रुकने की आज्ञा दे दी थी। उसके जाने से भाई बहुत खुश और थोड़ा नाराज था।

“माँ ठीक नहीं हैं यार! सोच रहा हूँ हास्पिटल में एडमिट करवा दूं। उन्होंने कहा था…”

“क्या हुआ माँ को भाई?? वो बहुत ज्यादा परेशान हो गई।

“पता नहीं समझ में ही नहीं आ रहा है। उनकी तबियत बिगड़ती ही जा रही है।”

“आपने मुझे क्यों नहीं बताया भाई?” वो भाई से लगकर रोने लगी।

“नीरज को बताया था। उसने तुम्हें बताने के लिए मना कर दिया था। बोला तुम परेशान हो जाओगी।  खैर, तू परेशान ना हो, मम्मा ठीक हो जाएंगी”, वो दिलासा देने लगे।

शीना को नीरज के ऊपर गुस्सा आ रहा था मगर इस वक़्त कुछ कर भी नहीं सकती थी।

माँ बहुत कमज़ोर हो गई थीं। उसे देखते ही रोने लगी थीं। उसे सीने से लगाकर कितना प्यार किया था। खूब दुआएँ दे डालीं थीं। वो भी तो उनके सीने से लगकर कितना सुकून महसूस कर रही थी।  उसे क्या पता था कि वो आखिरी बार उनके सीने से लग रही थी, आखिरी बार वो उसे प्यार कर रही थीं।

हास्पिटल में उनकी तबियत थोड़ी बेहतर हुई थी मगर दो दिन के बाद उनकी तबियत खराब होने लगी तो फिर ठीक नहीं हो पाई। भाई को रोते देखकर ही वो कुछ अनहोनी के बारे में सोचकर कांप गई थी मगर दिल मजबूत करके भाई के करीब आकर खडी़ हो गई। भाई ने उसे सीने से लगाकर बताया था, “हम बेसहारा हो गए मेरी बहन…”

मगर उसे लगा उसने कुछ गलत सुना है।

“भाई! रो क्यों रहें हैं आप? चलिए माँ के पास चलते हैं। उनसे बात करते हैं…”, उसने जैसे भाई की बात को सुना ही नहीं।

भाई ने उसका चेहरा हाथों में लेकर कहा था, “हमारी मां हमे छोड़ कर हमेशा के लिए चली गई। तू सुन रही है ना? वो बहुत दूर चली गयीं। शीना वो अब हमसे कभी बात नहीं करेंगी। सब खत्म हो गया शीना। हमारी दुनिया खत्म हो गई। हमारी दुनिया हमको छोड़ कर चली गई। हम बेसहारा हो गए शीना। हमेशा से मज़बूत भाई आज शीना से भी कमज़ोर हो गए थे। वो शीना से लगकर रोए जा रहे थे…

“तेरा फोन बज रहा है बहू! कहाँ है तू? माँ जी की आवाज पर वो उठ कर खड़ी हो गयी। वाशरूम में लगे शीशे में खुद को देखा तो अजीब लगा। रो-रो कर चेहरा एकदम सूज गया था। आंखें सूजकर मोटी-मोटी हो गई थीं। चेहरे पर पानी डाला और बाहर आ गयी।

नीरज का फोन था वो इसी हफ्ते वापस आ रहा था वो जानता था कि शीना बहुत परेशान है इसलिए जल्द ही आ रहा था कि उसके आने से शायद वो ठीक हो जाए।

वो  जिस दिन वो माँ को ज्यादा याद करती, उसकी ऐसे ही हालत हो जाती थी। याद तो हर पल आती थीं माँ। दिल कहता ऐसा कुछ हुआ ही नहीं माँ अभी भी है। कितनी बार खुद को यकीन दिलाना पड़ता कि नहीं जो हुआ है सब सच है। दिल हर वक़्त उनको याद करता रहता। भाई ने वो घर किराये पर दे दिया था क्योंकि वहाँ वो रह नहीं पा रहे थे। वैसे भी उनकी नौकरी दूसरे शहर लग गयी थी तो जाना तो उनको था ही। घर बंद रखना भी ठीक नहीं था इसलिए शीना ने ही कहा था कि किराये पर दे दीजिए कम से कम घरकी देखभाल तो होती रहेगी।

“माँ आप हमेशा मेरी धड़कन में रहेंगी। बहुत खूबसूरत होता है माँ बेटी का रिश्ता। मैं आपसे बहुत प्यार करतीं हूँ। माँ बच्चों की रहमत होतीं हैं उनकी बरकत होतीं हैं उनकी दुनिया होतीं हैं। उनकी खुशी में सच्चे दिल से खुश होने वाली होतीं हैं। बच्चों के दर्द में दुखी होने वाली होतीं हैं। बच्चे नाफरमानी भी करते हैं तबभी उनकी सलामती की दुआ करतीं रहतीं हैं। बच्चे अगर कामयाब हो जाते हैं तो उनको लगता है वो कामयाब हो गई हैं। बिन मांगे प्यार और दुआओं की रहमत बरसातीं हैं। हाँ जानती हूँ बेरहम वक़्त ने बहुत जल्द हमारी मां को हमेशा के लिए हमसे दूर कर दिया मगर उनकी यादें हमारे साथ हैं। उन्ही यादों के साएँ में हम जिएंगे। आखिरी सासों तक आप याद आएंगी। हाँ वक़्त के साथ यादें कुछ कम हो जाएंगी मगर मिटेंगी कभी नहीं…”

माँ बहुत अनमोल होतीं हैं। उनकी जगह दुनिया की कोई चीज़ नहीं ले सकती। उनकी तरह कोई प्यार नहीं कर सकता। ऊपर वाला हर बच्चों के सर पर माँ-बाप का साया हमेशा सलामत रखे। आमीन…

इमेज सोर्स: Still from short film Maa-Mother’s Day Special 2020/Besaure via YouTube

पसंद आया यह लेख?

पाइये विमेन्सवेब के सारे दिलचस्प हिंदी लेख अपने ईमेल इनबॉक्स मे!

विमेन्सवेब एक खुला मंच है, जो विविध विचारों को प्रकाशित करता है। इस लेख में प्रकट किये गए विचार लेखक के व्यक्तिगत विचार हैं जो ज़रुरी नहीं की इस मंच की सोच को प्रतिबिम्बित करते हो।यदि आपके संपूरक या भिन्न विचार हों  तो आप भी विमेन्स वेब के लिए लिख सकते हैं।

टिप्पणी

About the Author

29 Posts | 412,706 Views
All Categories