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अपनी सासू माँ में मुझे मेरी खोयी माँ वापस मिल गई…

विदाई के समय दुल्हन बनी दिव्या ने माँ की तस्वीर ऐसे सीने से लगा रखी थी कि मानो हर पल माँ को साथ रखना चाहती थी। 

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मेरी सास की सास आयी, तो मुझे सांस आयी…

छः महीने हुए थे शादी को नई-नई शादी में मनु के भी अरमान थे, लेकिन मम्मीजी ने उन्हें अकेले नहीं छोड़ा था, हर जगह साथ लग जाती।

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आजकल बहु को भी बेटी बना कर रखना पड़ता है…

सही कहा तुमने, बहुओं का हक कल भी एहसान था, आज भी एहसान है और ना जाने, आने वाले कल में भी शायद एहसान ही होगा।

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हमारी बहु हमारे न चाहने पर भी नाईट शिफ्ट में काम करती है…

हालत ये हो गई थी कि सुबह बहू सोती मिलती और बेटे के आने पर बहू का आफिस जाने का चक्कर होता। मीनल जी का पारा तो सातवें आसमान पर था।

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बहु, अपने सपने भूलो और इस घर को संभालो!

एक तरफ़ ऐसे शोज़ हैं जो औरतों का सशक्तिकरण दिखा रहे हैं, और दूसरी ओर ससुराल सिमर का जैसे शोज़ जो हमें रूढ़ियों की चौखट पे खड़ा कर देते हैं।

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सासु माँ, आपका प्यार एक दिन मुझे ज़रूर मिलेगा!

शादी के बाद शैली जब भी पति संग ससुराल जाती तो सास उसके रंग-रूप का मखौल भी उड़ाती और अब तो छोटी बहू भी आ गई थी।

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