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कला और संस्कृति
इस बार होली होगी मेरी बेटी की पसंद की…

मेरी बेटी होली को लेकर बहुत उत्साहित है क्योंकि इस बार तो उसका 2 साल का शैतान भाई जो उसके साथ है, उस चुटकी ने तो पहले से सब प्रोग्राम फ़िक्स कर लिया है।

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अब तो होली खेलन आओ कन्हाई…

ज़रूरत है मानव जाति को, फिर गीता के सन्देश की, महाभारत से भी बड़ा युद्ध है, कैसे होगी भरपाई, ब्रज की रज में होली खेलन तुम फिर से आओ कन्हाई।

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अबके होली में मोहे रंग ऐसा पक्का दीजो कि छुटन न जाए…

होली मोहब्बत और अपनेपन के साथ ऐसे खेलें कि सारे बाहरी रंग छूट जाएं, लेकिन प्यार के पक्के रंग सामने वाला से न छूटें और न ही वह छुड़ाना चाहे।

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होली खेलने के नाम पर मर्यादा की सीमा ना पार करें

होली के नाम पर दूसरों के साथ गलत ना करें। ऐसा करने से त्योहार मनाने की सारी इच्छा ही खत्म हो जाती है। क्यों गलत व्यवहार से रिश्तों की मर्यादा खराब की जाए? 

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जाने कहाँ गए वो दिन – याद आती है वो बसंत

अब मैं सुहाग देने आने वाली किसी पंडिताइन के इंतजार में नहीं सजती, मैं पार्लर जाती हूं, बसंत थीम वाली किटी पार्टी में होने वाले फैशन शो में भाग लेने को।

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इस बार मकर संक्रांति जाते-जाते मेरी कुछ यादें ताज़ा कर गयी…

वह दिन मैं आज भी नहीं भूलती...किस तरह से इस दिन भगवान ने मेरी सूनी गोद में एक सुंदर सी परी को दिया था और मुझे माँ बनने का गौरव प्राप्त हुआ था। 

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