कला और संस्कृति
मेरे हृदय के तारों को सुर से मिलाती, बेमिसाल जादुई फ़नकार है हिंदी!

मेरे हृदय के तारों को सुर से मिलाती, बेमिसाल जादुई फ़नकार है हिंदी, मेरी मातृभाषा का मान सहेजे, माँ सा अपनत्व और व्यवहार है हिंदी!

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हिंदी मेरी मातृभाषा – मेरी शान, मेरी आन

बोलने में हिंदी होता है ख़ुद पे गर्व, सीखने में हिंदी करती हूं फक्र। हिंदी मेरी है संस्कृति, हिंदी मेरी है विरासत। हिंदी है मेरी आन, हिंदी है मेरी शान।

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हिन्दी मेरा अभिमान – मेरा गर्व, मेरा सम्मान, मेरी सोच, मेरा ज्ञान है

मुझे विदेशी भाषाओं से नफरत नहीं। हम चाहे कितना भी घूम लें, सुकून तो घर आकर ही मिलता है, वैसा ही हिन्दी में एहसास है। हिन्दी के लिए क्या बताऊँ, वो तो मां है!

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हिन्दी मां है, रूह है मेरी – हर दिन हिन्दी दिवस है मेरा उसपे क्या लिखूं

चाहे कितने देश घूमें करे जतन, मातृभाषा का सुकून है वैसा, जैसा लौट के घर आओ तो झूमे मन, हर दिन हिन्दी दिवस है मेरा, हर दिन उसके ही नाम जियूं। 

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हिन्दी के सम्मान में, कुछ भावनायें मेरी समर्पित है

हिन्दी के सम्मान में, कुछ भावनायें मेरी समर्पित है। बड़ों के लिए आदर हिन्दी में, छोटों के लिए प्यार है। जो हिन्दी को व्यवहार में लाए, उसके लिए आदर सत्कार है!

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हिंदी साहित्य और लेखन में महिलाएं – उनकी भागीदारी और योगदान

ख़ुशी की बात है कि महिला लेखक अपने अनूठे अनुभवों और विचारों को सक्षमता से प्रस्तुत कर रही हैं। हिंदी साहित्य और लेखन में महिलाएं अपना स्थान बनाये हुए हैं। 

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