कला और संस्कृति
जाने कहाँ गए वो दिन – याद आती है वो बसंत

अब मैं सुहाग देने आने वाली किसी पंडिताइन के इंतजार में नहीं सजती, मैं पार्लर जाती हूं, बसंत थीम वाली किटी पार्टी में होने वाले फैशन शो में भाग लेने को।

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इस बार मकर संक्रांति जाते-जाते मेरी कुछ यादें ताज़ा कर गयी…

वह दिन मैं आज भी नहीं भूलती...किस तरह से इस दिन भगवान ने मेरी सूनी गोद में एक सुंदर सी परी को दिया था और मुझे माँ बनने का गौरव प्राप्त हुआ था। 

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‘वसुधैव कुटुंबकम्’ की भावना को बस बातों तक ही सीमित ना रखें

मुझे लगता है कि 'वसुधैव कुटुंबकम्', परस्पर भाइचारे और धार्मिक सद्भाव की बातें शायद हम केवल दिखावे के लिए ही किया करते हैं!

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सोलह श्रृंगार करने के लिए तैयार हैं आप?

श्रृंगार को जहां कुछ लोग सौभाग्य वर्धक समझते हैं, वहीं कुछ लोग इसे सौंदर्य वर्धक भी मानते है और इतिहास इसे खुशियों का प्रतीक भी मानता है। 

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दिवाली की कहानियां जो घर की सफाई के साथ-साथ मन की सफाई करने की भी प्रेरणा देती हैं

दिवाली की कहानियां इस दिवाली पटाखे और मिठाइयों के साथ अपनों के साथ सुनें और सुनाएं और समझें कि घर और मन को साफ़ रखने की क्या ज़रुरत है! 

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करवा चौथ व्रत एक रिवाज़ है जिसका हम सम्मान करते हैं पर इस दिन हमें भी आराम चाहिए!

करवा चौथ का व्रत रखने से ही प्यार और उम्र बढ़ेगी ऐसा नहीं है, बस व्रत रखें तो ख़ुशी से रखें और पतिदेव, आप इस करवा चौथ अपनी पत्नी का ख्याल रखें।

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