परवरिश
आधुनिक भारतीय माँ के दृष्टिकोण से बच्चों के पालन-पोषण के बारे में
बच्चों में हिंसा और नकारात्मक मानसिकता के लिए ज़िम्मेदार कौन?

बच्चों में हिंसा व नकारात्मक सोच का क्या कारण है? यदि मेरे बच्चे गलत संगति में पड़ गए तो? यदि मेरे बच्चों के साथ कुछ गलत हुआ तो?

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गर्मी की छुट्टियों में अपने बच्चों को देख लेने दो खुला आसमान

अपने बच्‍चों को उनके अरमानों को पूरा करने का एक मौका अवश्‍य दीजिए, तभी वे आत्‍म-निर्भर बनकर जिंदगी की परीक्षा में पूर्ण रूप से पास हो सकेंगे।

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5 बातें जो मैं अपनी माँ से नहीं सीखना चाहती!

मैंने कुछ बातों पर गौर किया और बदलते वक्त का तक़ाज़ा कहता है, जो बातें हमें हमारी मां ने सिखाईं, वो हमारे बच्चों को, सिखाना पर्याप्त नहीं होगा।

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आत्मा के प्रचारक हमारे नन्हे बच्चे-हम इनके ऋणी हैं

जिस लम्हे में हमारे बच्चे हमारे जीवन में आते हैं, उसी पल से वह हमारे जीवन का महत्वपूर्ण अंग बन जाते हैं। उनके जन्म लेते ही हमारी सोच में और कर्मों में अंतर आने लगता है।

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