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परवरिश
आधुनिक भारतीय माँ के दृष्टिकोण से बच्चों के पालन-पोषण के बारे में
और मेरी माँ के वो कड़े शब्द मेरी हिम्मत बन गए…

छोटी सी जान को उसकी मां की गोद में देते हुए डॉक्टर ने कहा, "घबराइए नहीं, बच्ची का रंग थोड़ा दबा हुआ है पर नैन नक्श बहुत अच्छे हैं।"

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मैं आपके बच्चे के बारे में गलत नहीं बोल रही हूँ…

लेकिन निशा की बात सुनते ही शिवानी उल्टा निशा को ही बातें सुनाने लगी, “मेरी बच्ची तुम्हारे घर खेलने क्या गई तुमने तो उसे चोर ही बना दिया।”

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आपको अपने बच्चों के सामने नहीं लड़ना चाहिए…

वैसे आप दोनों तो काफ़ी पढ़े-लिखे दिखते हैं, आपसे तो ऐसी भाषा सीखी नहीं होगी, क्यों?" उन्होंने दोनों के चेहरे को व्यंग्यात्मक मुस्कान से देखा।

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माँ, मेरे बच्चे कोई सजावट का सामान नहीं हैं!

ये क्या तरीका है रिया, तुम दोनों भाई बहन ने क्या हाल कर रखा है घर का, एक तो दो कमरों का मकान और जहाँ देखो खिलौने बिखरे पड़े हैं।

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जी हाँ, मैंने अपने लड़के को लड़कियों की इज़्ज़त करना सिखाया है…

हर माँ की जिम्मेदारी दुगनी होती है क्यूँकि उसे सिर्फ अपनी संतान को पालना ही नहीं होता बल्कि संस्कारों की खाद से सींचना भी होता है।

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मम्मा, मैंने तो वही किया जो आप करती हो…

उसे बहुत गुस्सा आया पर वह खुद को शांत करके बोली, "बेटा आपने मुझसे पूछा भी नहीं और मुझे कुछ बताया भी नहीं, ये तो गलत बात है।"

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