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फेमिनिस्ट
हम बबिता जयशंकर के मास्क चैलेंज के लिए तैयार हैं, और आप?

क्यों न अब साड़ी चैलेंज के बाद बबिता जयशंकर के मास्क चैलेंज को पूरा किया जाये और और दिखाया जाए अपने सुई धागे का कमाल? तो क्या तैयार हैं आप?

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क्या आपके घर में भी ‘करो-ना क्रांति’ का बिगुल बज रहा है?

करो-ना क्रांति का बिगुल बज गया था, "अपने बेटों को हुक्म देने वाला नहीं, साथ देने वाला पुरुष बनाना होगा। समाज में सकारात्मक परिवर्तन के हम सभी पक्षधर हैं।"

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क्या इस लॉक डाउन में भी जीत पुरुषवाद की ही होगी?

प्रथाओं की बेड़ियों में जकड़ी ज़्यादातर महिलाएं आज भी घर की चार दीवारी में अपनी दुनिया गुज़ार देती हैं, ओर वो इस कैद को भी अभिमान से जी जाया करती हैं, ताउम्र!

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लॉक डाउन – महिलाओं का सदियों से पुरुषवाद ने लॉक डाउन ही तो किया हुआ है

महिलाएं इस लॉक डाउन की कब से साक्षी रहीं हैं क्यूंकि पुरुषवाद इस लॉक डाउन को महिलाओं पर कई सदियों से चलाता आ रहा है, क्या इसे पुरुषों ने कभी महसूस किया?

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तोड़ दे इस चुप्पी को और कर खुद को आबाद अब 

उम्मीद है कि यह कविता उन औरतों का दर्द बयां कर पाए जो एक घर की, एक रिश्ते की चार दिवारी में कैद हैं, और नयी उम्मीद का सृजन कर, उनको सालों की चुप्पी तोड़ने को प्रेरित कर दे।

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आज रंग लेने दो मुझे मेरे ही रंग में

नहीं रंगना पिया तेरे रंग में, ना तेरे प्रेम रंग में, इस होली रंग लूंगी खुद को, बस अपने ही रंग में, रंग लेने दो, मुझे मेरे ही रंग में।

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