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फेमिनिस्ट
मर्द करे तो ठीक, लेकिन औरत करे तो बदचलन…!

हमारे पाठकों का भी मानना है कि औरत अगर अपनी मर्ज़ी के मुताबिक कोई काम करे तो उसको रोकने के लिए समाज उसे बदचलन कह देता है।

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अगर आप समाज को बदलना चाहते हैं तो पहले खुद को बदलें…

तराजू के दोनों पलड़े बराबर होते हैं तभी न्याय होता है, इसी प्रकार जब स्त्री और पुरुष दोनों के अधिकार बराबर होंगे तब समाज को बदलना पड़ेगा।

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बिहार चुनाव में इस बार महिलाओं का वोटिंग प्रतिशत पुरुषों से ज़्यादा!

बिहार चुनाव में इस बार महिलाओं का वोटिंग प्रतिशत बढ़ना एक सुखद खबर है क्योंकि इससे महिला सशक्तिकरण का नींव को मजबूती मिलती है।

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क्या भारत को अपनी महिलाओं से कोई लगाव नहीं है?

भारत में महिलाओं के खिलाफ हो रही हिंसा में लगातार इज़ाफ़ा हो रहा है। हर रोज़ खबरों में किसी न किसी रेप या अन्य केस के प्रति आक्रोश भड़क रहा होता है।

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मैं तीज त्यौहार पर व्रत रखूँ या नहीं, यह सिर्फ मेरी इच्छा पर निर्भर करेगा! 

घरेलु हिंसा, मानसिक शोषण और एक ख़राब शादी, कोई भी चीज़ उन्हें अपने पति की लम्बी उम्र के लिए किसी भी तीज त्यौहार पर व्रत करने से नहीं रोकती।

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नारीवादी तरीके से होनी चाहिए अब धर्म की व्याख्या…

वैसे तो धर्म हमारी सहूलियत, हमारे समाज को एक आदर्श समाज की ओर बढ़ाने में सहायक होना चाहिए, अब उसकी भी नारीवादी व्याख्या होनी चाहिए।

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