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अलंकृता श्रीवास्तव की डॉली किट्टी और…के ‘वो चमकते सितारे’ महिला ही हैं

अलंकृता श्रीवास्तव की डॉली किट्टी और वो चमकते सितारे कहानी है महिलाओं की यौन इच्छा को जाहिर करने की, जो सामाजिक दायरों में समान्य नहीं है।

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लक्ष्मी बम जैसी फ़िल्मों के मुख्य किरदार एक ट्रांस महिला क्यों नहीं निभा सकती?

ओटीटी प्लेटफॉर्म पर 9 नवंबर को रिलीज़ हो रही अक्षय कुमार की फिल्म लक्ष्मी बम को दर्शक अधिक उत्सुकता से देखते अगर उसमे ट्रांस महिला का किरदार ट्रांस महिला ही निभाती।

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इंसानी रिश्ते की दबी-छुपी घुटन को बयां करती है फॉरबिडेन लव की चार कहानियां

फॉरबिडेन लव की इन दोनों कहानियों में तो मानवीय रिश्तों की कहानी है जिसमें विवाह संस्था में अब तक तय की जा चुकी नैतिकताओं के कारण पैदा हुई घुटन की दास्तां है।

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मसाबा मसाबा आपको हर सामाजिक पाबंदी को तोड़ कर आगे बढ़ने की प्रेरणा देती है

मसाबा मसाबा में एक चीज कॉमन है जिससे शायद ही कोई लड़की भारतीय समाज में मुक्त होना चाहती है, पर चाहकर भी नहीं हो सकती है और वह है उसकी माँ से उसकी तकरार। 

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डॉली किट्टी और वो चमकते सितारे एक औरत की ख्वाहिशों की दुनिया में ले जाती है…

डॉली किट्टी और वो चमकते सितारे प्रश्न उठाती है कि हम जैसे एक आदमी की इच्छाओं पर खुलकर बात कर सकते हैं वैसे ही औरत की इच्छाओं पर बात क्यों नहीं करते?

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नापसंद करने के लिए जब आप सड़क 2 देखें तो इस डायलॉग पर ग़ौर ज़रूर फरमाएं

सड़क-2 में ढोंगी बाबाओं के फैलाए अंधविश्वास और उसके पीछे पैसे, सत्ता और मानवीय जीवन के अंतहीन घुटन को कहने की कोशिश की गई है।

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