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फ़िल्में इत्यादि
शहरी महत्त्वकांक्षा और ग्रामीण भावनाओं के नोक-झोक की कहानी है ‘पंचायत’

अमेज़ॉन प्राइम पर रिलीज हुई वेब सीरीज़पंचायत हमारे देश के पंचायतों में महिला सरपंचों की पंचायतों की मौजूदा स्थितियों का शानदार मूल्य़ाकंन है।

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नेटफ़्लिक्स फ़िल्म ‘मस्का’ ईरानी परंपरा और महत्वकांक्षा की नर्म और मीठी कहानी है

नेटफ़्लिक्स पर आज रिलीज़ हुयी 'मस्का' लॉकडाउन के दौर परिवार के साथ देखने वाली कहानी है जिसमें अपनी परंपरा की तरफ नई पीढ़ी को संवेदनशील बनाने की कोशिश भी है।

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इम्तियाज़ अली की वेब सीरीज़ ‘शी’ है सीक्रेट मिशन कर लगी एक महिला कांस्टेबल की कहानी

शी के किरदार को लिखने के लिए बड़ी खोजबीन करके एक महिला कांस्टेबल की ज़िंदगी को देखा परखा और दर्शाया गया, जो खुद अपने आप से डरती है।

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यो यो हनी सिंह के ‘मखना’ और ‘लोका’ पर आप थिरक तो रहे हैं, लेकिन क्या आप इन्हें सुन भी रहे हैं?

हनी सिंह जैसे कलाकारों को हमें एहसास कराने की ज़रूरत है कि वे कोई भी भद्दा गाना बनाकर हमें अपनी धुनों पर नचा नहीं सकते। क्या ऐसा करने के किये तैयार हैं आप?

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दुआ-ए-रीम कुछ ही पलों में महिलाओं की असल स्तिथि को उजागर करती है

दुआ-ए-रीम जो पंक्ति मुझे तोड़ गई और कोरी सच्चाई भी बता गई समाज की, वह है, "धमकियां दें तो तसल्ली हो के थप्पड़ न पड़ा, पड़े थप्पड़ तो करूँ शुक्र के जूता न पड़ा।"

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पाकिस्तानी गीत दुआ-ए-रीम : एक करारा जवाब समाज की रूढ़िवादी सोच को

दुआ-ए-रीम में दो पीढ़ी की महिलाओं का अपने साथ होने वाली हिंसा पर चुप्पी और नई पीढ़ी की महिलाओं का हिंसा पर खुदमुख्तार तरीके से बोलना उभर कर सामने आता है।

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