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फ़िल्में इत्यादि
कहानियां आपने बहुत सुनी होंगी लेकिन ‘अजीब दास्तान्स’ सी नहीं!

अजीब दास्तान्स को देख कर आप बिल्कुल हक्के-बक्के रह जाते हैं क्योंकि इन कहानियों के अंत कल्पना से परे हैं और किरदारों का अभिनय कमाल का है।

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इन 6 महिला केंद्रित कोरियन ड्रामा को अब आप भी देख ही डालिये!

आजकल सब कोरियाई ड्रामा यानि के-ड्रामा की देखते हैं, आप भी कर सकते हैं अपनी शुरुआत इन 6 महिला केंद्रित कोरियन टीवी ड्रामाज़ के साथ। 

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बहु, अपने सपने भूलो और इस घर को संभालो!

एक तरफ़ ऐसे शोज़ हैं जो औरतों का सशक्तिकरण दिखा रहे हैं, और दूसरी ओर ससुराल सिमर का जैसे शोज़ जो हमें रूढ़ियों की चौखट पे खड़ा कर देते हैं।

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शॉर्ट फिल्म ‘दहेज़ का स्कूटर’ बहुत ही प्यारे अंदाज़ में अपनी बात रखती है!

मानते हैं ना आप भी शार्ट फिल्म 'दहेज़ का स्कूटर' की इस बात को, 'प्रथाओं का क्या है कोई मान के चले तो इच्छा, न माने तो रीत।' 

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क्या पुलेला गोपीचंद के बिना साइना नेहवाल की बायोपिक पूरी हो सकती है?

साइना नेहवाल की इस बायोपिक फ़िल्म में अमोल गुप्ते ने भावुकता पर इतना फोकस किया है कि उसमें उनका वर्ल्ड चैपियन बनने का संघर्ष खो गया है।

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पगलैट: क्या ये एक पढ़ी-लिखी होनहार बहू की कहानी है?

आस्तिक की मौत से उसकी तेहरवीं तक संध्या की ज़िन्दगी कैसे बदलती है? पगलैट और भी कई गंभीर मुद्दों को बहुत ही हलके-फुल्के अंदाज़ में कहती है।  

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