कथा और कविता
समझ वक़्त का इशारा और चमका अपने वजूद का सितारा

उठा हिम्मत की मशाल तू, बन खुद ही अपनी पतवार तू, दौड़ जा मंजिल के उस पार तू, क्योंकि वक़्त को भी है इंतजार, दे अपने वजूद का कोई तो प्रमाण

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सबकी जोड़ियां बनाना हमारा काम नहीं है…

क्या अजीब जोड़ी है लड़की कितनी सुंदर है, नैन नक्श भी अच्छे हैं और लड़की की हाइट भी माशा अल्लाह काफी अच्छी है, लेकिन इसने क्या देखा इस लड़के में?

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सपने तो सपने हैं : सपनों पर सबका हक़ एक समान है

हर कामयाब आदमी के पीछे एक औरत का हाथ होता है ये तो यह लेख कहता ही है। लेकिन ऐसा नहीं कि दुनिया में बस औरत ही है जिसके सपने कुचले जाते हैं।

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आइये एक ब्रेक लें और इस जीवन को जीवंत बनाएं!

ओस की नमी के स्पर्श से, भिगो लो अपने पाँवों को, इन्हीं पैरों से पगडंडियों पे, कुछ निशान बना लो! जीवन को अपने कुछ तो जीवन्त बना लो!

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हां अब…. देह विहीन उसकी आत्मा सुकून से लौट सकेगी अपने घर!

कितनी रातें दर्द से भरी, कितने दिन वेदना से घिरे, सब नोच गए वो वहशी सरफिरे। क्या उसकी मुस्कुराहट ही थी उसका पाप? या उसका यूं स्वछंद घूमना ना आया उनको रास?

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मौजूद-ओ-मयस्सर…कल किसने देखा है? आज पर गौर करें फिलहाल!

'तुम्हारी बेरुखी ने हमे शायरा बना दिया, कहीं गलती से इश्क कर बैठते, तो हम मुआलज़ीमजान ना होते?' रिश्ते होते ही कुछ ऐसे हैं, अच्छे अच्छे शायर बन बैठे!

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