कथा और कविता
बेड़ियाँ तोड़ मुझे मिला आगे बढ़ने का हौसला

आपने ही मुझे ग़लत बातों से लड़ने का पाठ पढ़ाया। आपने ही मुझे आगे बढ़ने का हौसला दिया। आपके ही कारण मैं अपने पाँव में जकड़ी बेड़ियाँ तोड़ पाई।

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बहुत हुआ धैर्य एवं संयम का बांध,अब और नहीं महोदय!

इतनी तन्मयतापूर्वक कार्य करने के बाद भी आप संतुष्ट नहीं हैं। आपको सिर्फ काम से ही मतलब है और घरवालों को पैसा से।

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बचपन में ही बहुत कुछ छूट गया

बचपन में मुझे कभी भी पिताजी ने महंगी आइसक्रीम नहीं दी। कभी भी इतने रूपये नहीं थे। और जब थे, तब भी नहीं दिलायी। 

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हाँ, मैं माँ भी हूँ और स्त्री का एक पूरा अस्तित्व भी

अब हदें तोड़ने का जी करता है, मन की घुटन से बाहर निकल, दूसरों के बताए नहीं, ख़ुद के लिए, नये रास्ते ढूँढने का मन करता है। 

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साइकिल पर सवार, पैरों में पहिए और पहियों में हौंसला

'साईकल पर सवार उसकी ज़िन्दगी अब संतुलित होने को है।' विश्व साईकल दिवस के अवसर पर एक सच्ची कहानी, जिसे बहुतों ने जिया है, अपने-अपने तरीकों से। 

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ठहराव की तलाश में हम भटकते रहे

इरादे मुक़म्मल करने को अक्सर रूह के कुछ हिस्से सिसकते रहे, ठहराव की तलाश में हम भटकते रहे।

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