कथा और कविता
नारी तुम क्या हो – कल्पना चावला या दुर्गा, सीता या लक्ष्मीबाई?

बुद्धिमती, कर्मठ प्रयत्नशील नारी शक्ति हो तुम, अंतरिक्ष में उड़ने वाली कल्पना चावला हो तुम - नारी एक, रूप अनेक की परिकल्पना को पूर्ण करती है ये सुंदर कविता।  

टिप्पणी देखें ( 0 )
शादी के बाद करियर की कुर्बानी हमेशा औरत ही क्यों दे?

शादी से पहले किये हुए वादों को अक्सर लोग शादी के बाद भूल जाया करते हैं, इसका तात्पर्य क्या निकालें, ये हम पाठकों पर छोड़ते हैं और पढ़ते हैं ये रोचक लेख।   

टिप्पणी देखें ( 0 )
आज फिर से बचपन बहुत याद आया

कभी जब आपने ख़ुद को तन्हा पाया, क्या आपको भी बचपन तब याद आया, बचपन के झगड़ों में बीता, भाई बहन का साथ याद आया, क्या आपको भी बचपन फिर याद आया!

टिप्पणी देखें ( 0 )
मेरी नियत पर सवाल उठाने वालों से मेरा भी इक सवाल!

मेरी मेहनत और मेरी नियत पे सवाल उठाने वालो, कभी आइना देख लेना और बस एक सवाल पूछ लेना, कि मैंने सही किया? जो किया सो किया पर क्या वो सही किया?

टिप्पणी देखें ( 0 )
तलाश में अपने अस्तित्व के अब तुझे ख़ुद ही निकलना है!

चाहे रास्ते में कांटे हो हज़ार, लोग तम्हें हर मोड़ पर गिराने को हो तैयार, तुम्हें बस अपने काबिल बनना है, गिरने के बाद खुद संभालना है। 

टिप्पणी देखें ( 0 )
अपने जीवन-साथी की ख़ुशी के लिए आप किस हद तक जाने को तैयार हैं?

हमारे मैनेजर ने एक ही बात बोली, 'पति-पत्नी का रिश्ता जन्मों-जन्मों का होता है, जब प्यार दिल से किया है तो यह रिश्ता भी दिल से निभाना दोनों।'

टिप्पणी देखें ( 0 )
topic
short-stories-poetry
और पढ़ें !

अपना ईमेल पता दर्ज करें - हर हफ्ते हम आपको दिलचस्प लेख भेजेंगे!

क्या आपको भी चाय पसंद है ?