कोरोना वायरस के प्रकोप में, हम औरतें कैसे, इस मुश्किल का सामना करते हुए भी, एक दूसरे का समर्थन कर सकती हैं?  जानने के लिए चेक करें हमारी स्पेशल फीड!

कथा और कविता
समाज तेरे ताने-बाणों के रंग…

पैरों में समाज के ताने-बाने पहनाकर, लोग क्या कहेंगे से दहलीज़ ना पार करना सिखाया,मूरत पूरी रंग-बिरंगे रंगों से भरकर, बस एक रंग ना भरा...

टिप्पणी देखें ( 0 )
मोहे बिटिया न कीजो… कोई मर्द समझ पाया क्या?

अगली बार मुझे लाल, हरा, भगवा, नीले रंग का परचम बना देना, अक्सर लोगों के खून में उबाल आ जाता है, पड़े किसी की भी इन पर गलती से भी जो निगाह मैली!

टिप्पणी देखें ( 0 )
अब ये मेरी नकचढ़ी बहू नहीं लाडली बहू है…

दूसरे दिन बारह बजने को आए पर बहू का कोई अता-पता नहीं! आज तो रसोई की रस्म थी! सुप्रिया जी लोगों के बीच छिपते-छुपाते बहू के कमरे में गईं।

टिप्पणी देखें ( 0 )
काग़ज़ के रावण बहुत जलाए कब मन के रावण फूँकोगे…

इन प्रश्नों के उत्तर लेने हर वर्ष मैं आता हूँ, एक दुष्कर्म की सजा आज तक पाता हूँ, पर धरती पर चहुँ ओर कितने ही रावण पाता हूँ, सीता से भी बुरी दशा में लाखों को मैं पाता हूँ।

टिप्पणी देखें ( 0 )
अपने अंदर के रावण को अब स्वयं जलाना है…

तुमने मर्द बनकर कौन सा नाम कमाया है? शोषण करके स्त्री का मुंह बस दबाया है, बस अपने घमंड को ऊंचा रखने खातिर, रावण का तुमने पुतला जलाया है!

टिप्पणी देखें ( 0 )
माँजी, बहुएं काम करने की मशीन नहीं होतीं हैं…

"दरअसल गलती इनकी भी नहीं। इनको इनके माता-पिता पढ़ा लिखाकर आत्मनिर्भर तो बना देते हैं, लेकिन संस्कार देना और घर के काम सीखाना भूल जाते हैं।"

टिप्पणी देखें ( 0 )
topic
short-stories-poetry
और पढ़ें !

The Magic Mindset : How to Find Your Happy Place

अपना ईमेल पता दर्ज करें - हर हफ्ते हम आपको दिलचस्प लेख भेजेंगे!

Women In Corporate Allies 2020

All Categories