कोरोना वायरस के प्रकोप में, हम औरतें कैसे, इस मुश्किल का सामना करते हुए भी, एक दूसरे का समर्थन कर सकती हैं?  जानने के लिए चेक करें हमारी स्पेशल फीड!

कथा और कविता
वक़्त की नज़ाकत को हम क्या समझेंगे…जाने हम कब सुधरेंगे!

"लॉक डाउन है तो क्या? आज तेरी भांजी का पहला बर्थडे है, इसी शहर में रहकर हम अगर नहीं गए तो समधी जी क्या सोचेंगे?" क्या ये आप हैं?

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एक विकल्प इस वैश्विक महामारी को हराने का

माना कि आसान नहीं, ये मुश्किल की घड़ी, पर मुश्किलों को हरा के ही मिलती हैं खुशियाँ बड़ी, मुश्किल है ये युद्ध पर असम्भव नहीं, कोरोना को हरा कर विजय पाएँगे हम।

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ज़माना बीत गया सुने हुए दादी नानी की कहानियां

वो कहानी जो सिखाती थी, सदाचार की बातें, परोपकार के गुण, नैतिक मूल्यों को अपनाती थी, कहानियाँ दादी नानी की बच्चों की मनभावन थी। 

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हमें कोरोना से डरना नहीं अपितु डट के सामना करना है

कोरोना के समय में भी इस माँ ने अच्छाई ढूंढ ली और कहा, "सच कहूं तो इस कोरोना की वजह से ही मेरा परिवार साथ में समय व्यतीत कर रहा है।"

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चक्रव्यूह : तुम अभिमन्यु नहीं अर्जुन हो इस महाभारत की

औरत का पूरा जीवन एक युद्ध ही है, और इसमें रचा है एक चक्रव्यूह, जिसमें धकेलते तो उसे सब हैं, लेकिन बाहर निकलने का रास्ता उसे कोई नहीं बताता। 

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तू नारी है फुलकारी है, शोषण के खिलाफ एक चिंगारी है

तू फूल है, तू आग तो है शोला भी है, शोषण के खिलाफ चिंगारी है, तू सब की पायेदारी है, धरती हो या आकाश कहीं, तेरे ही लिए सरदारी है।

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