कथा और कविता
सोशल मीडिया स्टेटस अपडेट – अवेलेबल! असल ज़िंदगी में, ना जाने कब से अनअवेलेबल

आज जिसे भी देखो सोशल मीडिया पर दिखावे में फोटो डालता है। वो और ना जाने कितने दुनिया को दिखाने में लगे है कि देखो, हम कितना सुखी जीवन जी रहे हैं।

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क्यूँकि मैं सौतेला हूँ इसलिए आप मुझे प्यार नहीं करते ना?

अभी चीकू जो देखना चाहता है वही देख रहा है। अब हमें बच्चों को ऐसा माहौल देना होगा कि बाहरी कोई उसके दिमाग में गंदगी न डाल सके।

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सिर्फ़ अपने लिए करेंगे हम प्यार की दोबारा शुरूआत! क्या सोचा है तुमने?

बरखा को देख मैं हैरान था। आज भी वो उतनी ही सुन्दर लग रही थी जैसे पहले लगती थी। पर बरखा यहाँ कैसे? उसने बताया कि वो अक्सर इस पार्क में आती है शाम को।

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एक इस घर की लड़की, एक दुसरे घर से आई! फिर शादी के बाद फर्क क्यों?

क्यों शादी के बाद भी रोली में बचपना दिखता था और राधा में सुशील बहु, जिससे पूरा घर संभालने की उम्मीद रहती? शादी के छः महिने तक राधा ससुराल ही रही, कुछ रस्में चल रही थीं, कुछ तीज, त्यौहार भी थे। वैसे तो राधा ने अपने घर में ज़्यादा काम नहीं किया था, पर ससुराल […]

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बहा ले जाएँगी एक दिन मुझे, मन की कश्तियाँ अपने संग!

लहरों में कश्तियाँ भी होती हैं कुछ, जिन पर निकल जाती हूँ मन ही मन, फिर मेरा लौटना ज़रूरी हो जाता है, व्यवस्थाओं को सींचने शायद!

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बिन ब्याही माँ! अब मैं सोच रहा था, आखिर बच्ची किसकी है?

अब मेरा मन, पहले से ज़्यादा उसके बारे में सोचने लगा। क्या वो बिन ब्याही माँ है? इतना अच्छा मौका उसके बारे में जानने का, हाथ से चला गया।

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