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कथा और कविता
क्या इस साल मायके की बस रहेगी आस?

क्या तुमने सोचा था कभी, इक ऐसा साल भी आएगा, पिता का आँगन, माँ का खाना, मैके की बस रहेगी आस,ना भाभी की ठिठोली होगी, ना भैया के सँग उल्लास।

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मोल तेरा कुछ नहीं, इनके बिना तू मान ले!

हे मानव! अब क्यूँ करता है क्रन्दन? पर्यावरण दूषित करने का तू ही तो है कारण, मोल तेरा कुछ नहीं,इनके बिना तू मान ले...तू मान ले!

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एक श्रद्धांजलि – हाँ! आज मैं शर्मिंदा हूं खुद से!

जली थी मैं भी कहीं-कहीं उस आग में, जो सब ने तुम पर बरसाई थी, उस आग की झुलस से काश मैं उन्हें भी जला पाती, और लिपटा कर तुम्हें खुद से, तुम्हें छुपा पाती...

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अगर सोच सकारात्मक है तो सफलता दूर नहीं …

एक कहानी आप लोगों के समक्ष प्रस्‍तुत कर रही हूँ, निधि छोटी सी मासूम की कहानी और उसको और उसकी बहन को संबल देकर सशक्‍त बनाने में जुटी उसकी माँ।

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बहू-बेटी में ये अंतर क्यों?

बहू बेटी में अंतर क्यूं....दोनों की संरचना एक ही तो है, क्यों बेटी के नखरे तुम सह लेते हो, बहू की मन की इच्छा के लिए, बुरा भला तुम क्यूं कहते हो?

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और मैंने तय कर लिया कि क्या करना है….!

आज बहुत दिनों बाद अच्छी नींद आई क्यूंकि आज मैं सुबह का अलार्म बंद करके सोई थी और मैं अब वापस पीछे मुड़ने के मूड में बिल्कुल नहीं थी।

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