कथा और कविता
प्यार और प्रायश्चित – आंखों में आँसू और लब खामोश! हाँ, अब यही मेरी सज़ा है

अगले दिन मैं शहर आ गया और बस से उतरते ही मेरा ऐक्सिडेंट हो गया। एक हफ्ता बेहोश था मैं और उस एक हफ्ते में मेरी ज़िंदगी बदल गई।

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हे भगवान! मैं तो अभी भी जिंदा हूँ!

हे भगवान! मेरा ऑपरेशन हो रहा है और ये डॉक्टर क्या कर रहे हैं। इन्हें अपनी छुट्टियों का प्लान बनाने के लिए यही जगह मिली है क्या? 

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साड़ी सेल – एक अनार सौ बीमार

ये तो 'एक अनार और सौ बीमार' वाली बात हो गई क्योंकि एक सोने का सिक्का पाने के लिए हजारों महिलाओं की भीड़ जमा हो गई थी।

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कब तक बस एक दूसरे में खोए रहेंगे जान, चलो आज थोड़ा हम भी फ़र्ज़ निभा आयें

मुझे सताना हो गया हो तो जान, उस लड़के को सबक सिखा आयें, छेड़ा था उसने कल जिस लड़की को, थोड़ा आराम उसे भी दे आयें। 

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धन्य हो तेरी यह काया! ऐ वीर! तुझे प्रणाम!

ऐ वीर तेरी ख़ाकी वर्दी पर नाज़ है हमें, झुक कर तुझे सलाम करता हूँ, एक बार नहीं बारंबार प्रणाम करता हूँ

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रंग लाई है दोस्ती

एक सुंदर वीणा जो मन में तान छेड़ती, लगता है दोस्त अपने बारे में बात कर रहे, इसका ही मतलब है, दोस्ती!

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