कथा और कविता
जनाब ये ज़िंदगी है, ये आपको पूरा तो नहीं होने देगी!

जनाब ये ज़िन्दगी है आपको पूरा नहीं होने देगी! जी हाँ, शायद इसी में जीवन जीने की खूबसूरती भी है क्यूंकि जो पूरा हो गया वो आगे कैसे बढ़ेगा?

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रोके तो भी ना रुके, नारी तेरी शक्ति असीम!

इतिहास गवाह है कई उदाहरण हैं, नारी हर क्षेत्र में आगे बढ़ी है, उनकी वीर गाथायें असाधारण हैं, पहले भी थी मुश्किलें कुछ अब भी खड़ी हैं।  

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क्यों ना हम सब फिर से बच्चे बन जाएँ!

कोई क्या कहेगा, किसने क्या कहा, भूल जाएँ सब कुछ एक बच्चे की तरह, यकीन मानिए, ज़िंदगी बहुत आसान हो जाएगी, ना बोझ लगेगी, आसानी से कट जाएगी!

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मुखौटा! क्यों हर किसी की असलियत है ये नकली मुखौटा!

मुखौटा ओढ़े लोगों से थी जब मैं अनजान, तो खुशियां बांटते नहीं थकती थी, वाकिफ क्या हुई मैं उन चेहरों की फितरत से, अब अपनों को भी बेगाना समझती हूँ।

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आखिर कब तक नारी अपने अस्तित्व की लड़ाई लड़ेगी? आखिर कब तक?

मैं ही तो वह कुंजी हूँ, जो घर आँगन महकाऊँ, पर मेरे भी, कुछ सपने हैं, जिनका तुम सम्मान करो, सिर्फ औरत ही क्यों करे समर्पण, तुम भी कुछ योग्यदान दो। 

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कण कण में बसी क्षण क्षण में रची नारी तेरी ये कहानी!

बचपन बीता सकुचा सिमटा, यौवन आया नई आस लिए, आयी है पार झरोखों के, मन में स्वतंत्र उल्लास लिए नारी की विषम कहानी है।

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