कोरोना वायरस के प्रकोप में, हम औरतें कैसे, इस मुश्किल का सामना करते हुए भी, एक दूसरे का समर्थन कर सकती हैं?  जानने के लिए चेक करें हमारी स्पेशल फीड!

मेरे पास अपने और अपनी बेटी के लिए, कुछ भी न बचा और पति ने पैसे देने से इंकार किया

Posted: April 28, 2020

जहां मैं एक तरफ शादी से पहले कमाती थी, वहीं घर छोड़ते हुए, मेरे पास अपने और बेटी के लिए, कुछ भी ठोस न बचा और मेरे पति ने मुझे पैसे देने सी इंकार कर किया। 

23 मई 2017,  उस दिन मेरी बेटी, मेरी नन्ही सी परी, का बर्थडे था। पूरा दिन थोड़ी-थोड़ी देर में आ कर वो मुझे पूछती रही, “मम्मी, पापा का फ़ोन आया? क्या उन्होंने कोई गिफ्ट भेजी है मेरे लिये? कितनी बार तो वो बाहर  जा कर देख आयी, कि कहीं कोई कुरियर वाला गिफ्ट लेके आ जाये। ये सोचते, रात के 12 बजे तक उसने अपने पापा की राह देखी और फिर मेरी बेटी ने मुझे जो कहा मैं सिर्फ उसे देखती ही रह गयी।

“मम्मी आज के बाद मेरे सामने उनका नाम मत लेना। मेरे कोई पापा नहीं हैं, सिर्फ मम्मी, सिर्फ तुम हो मम्मी”, और फिर आँखों में आंसू लिये वो मुझसे लिपट कर सो गयी।

मेरी बेटी के दिमाग में ना जाने क्या चल रहा होगा

मेरी छोटी सी जान, पता नहीं उसके दिमाग में क्या चल रहा होगा। उसका गुस्सा देख के मुझे साफ-साफ पता चल रहा था कि वो बहुत गुस्सा है अपने पापा से। नन्ही सी जान और कितना सारा बोझ उसके छोटे से दिमाग पर। हाँ समझ सकती हूँ मैं ये, क्यूँकि, जब उसके पापा ने अफेयर किया तो, सबसे पहले उसे ही तो पता चला था।  मुझे भी तो उसी ने ही बताया था, वर्ना मुझे कहाँ से पता चलना था?

वैसे उसने तो प्लान किया था कि शनिवार को वो पार्टी रखेगा, और उस पार्टी में वो अपनी गर्लफ्रेंड को भी बुलायेगा और फिर उसकी दोस्त से मेरी दोस्ती करवाता, ताकि मुझे कभी कुछ पता ही ना चले कि इन दोनों के बीच में क्या चल रहा है।

पर ये पार्टी हो, उसके पहले ही बेटी ने मुझे बता दिया, और उन दोनों की व्ट्सअप्प चैट मेरे हाथ लग गयी। अच्छा हुआ व्ट्सअप्प चैट मेरे पास है, वर्ना ये आदमी तो मुझे ही बदनाम करता की तू झूठ बोल रही है।

समझ सकती हूँ मेरी बेटी के माइंड में क्या चल रहा होगा। मैं पूरी कोशिश कर रही हूँ कि इन सब का कोई असर मेरी बेटी पर ना पड़े। पर आज उसका जन्म दिन था, और ये कैसा बाप है जिसको अपनी छोटी सी बेटी की थोड़ी सी भी याद नहीं आयी?

इस बात से मेरा दिमाग चकरा गया। मैं यही सोचती रही कि इस नन्ही सी जान का क्या कसूर है? इतना उस आदमी को कौन सा ईगो है, जो बेटी को एक फ़ोन तक नहीं कर सका? इतना कैसे कोई आदमी किसी के प्यार में अँधा हो जाता है कि उसे अपनी बेटी तक की भी याद नहीं आती?

मैंने सोच लिया कि मैं डिवोर्स ले लूंगी

मैंने कुछ दिन और राह देखी, उसके बाद मैंने सोच लिया कि मैं डिवोर्स ले लूंगी, ताकि मैं और मेरी बेटी इस रिश्ते से बाहर आ जाएँ और कभी फिर मुड़ के पीछे ना देखें। मैं एडवोकेट को जा के मिली और मैंने उनको अपनी पूरी कहानी बताई। एडवोकेट भी स्तब्ध रह गया और बोला, “बहन जी, आप कैसे इस इंसान के साथ इतने साल रहे? आज कल तो लड़किया थोड़ा सा कुछ होता है और निकल जाती हैं और आप 10 साल ऐसे आदमी के साथ कैसे रहे? आप बोलो तो डोमेस्टिक वॉयलेंस के केस में पूरी फैमिली को अंदर कर दूँ क्या?”

केस की पहली तारीख थी। वो कोर्ट में आया। मेरे सामने गुस्से से देख रहा था और बोला, “ये सब करने की क्या जरुरत थी? मैंने कभी सोचा भी नहीं था कि मुझे तुम्हारे सामने कोर्ट में आना पड़ेगा। ये सब क्या कर रही हो तुम? पागल हो गयी हो क्या तुम?”

मैंने उससे कोई बात नहीं की, क्यूँकि इतना सब होने के बाद भी, ये आदमी की अकड़ अभी तक गयी नहीं है, और मुझे पूछ रहा है कि क्यों किया ये सब मैंने?

कोर्ट रूम में ड्रामा

कोर्ट रूम में जज के सामने, मैंने जो कुछ हुआ था, वो सब सच-सच बताया। जब मैं बता रही थी तब बीच बीच में वो हर बात पर यही बोल रहा था, “ये झूठ है, मैंने ऐसा कुछ नहीं किया।” जज ने कहा भी उसको कि इससे पहले तेरे एक-एक कर के सब पत्ते खुल जाएँ, उस से पहले सोच ले, मेंटेनन्स देना है या डिवोर्स।

उसने कोई जवाब नहीं दिया तो, जज ने उसको पूछा, “तुम भरण पोषण का खर्चा तो दे सकते हो ना?”

उसने कहा, “नहीं।”

जज ने पूछा, “क्यों?”

उसने कहा, “मैं इनको वापस ले के जाना चाहता हूँ।”

जज ने मुझे पूछा, “आप जाना चाहते हो?” मैंने कहा, “जज साहब, ये आदमी आपके सामने मेरी हर बात को झूठ बोल रहा है। ऐसा उसने कुछ नहीं किया, ये भी झूठ बोल रहा है। कैसे करुँगी इस आदमी पर भरोसा मैं? इतने समय के बाद आज आया है ये मेरे सामने, और आपके सामने बोल रहा है, मैं ले के जाने को तैयार हूँ? जज साहेब, मेरी और मेरी बेटी की जान को खतरा है इसके साथ वापस जाने में।”

जज ने उसको कहा, “आपको एक मौका देता हूँ। अगर आप आपकी नाराज़ पत्नी को मना सको तो अच्छी बात है, क्यूँकि हर कोर्ट, हमेशा पहले दोनों पति पत्नी में सुलह हो जाये ऐसा सोचती है। तो, आप अपनी पत्नी को मना लो, फिर अगली तारीख को मिलते हैं।”

कोर्ट रूम से बाहर निकलते ही

कोर्ट रूम से बाहर निकलते ही, हम दोनों कोर्ट के डिस्कशन रूम में बैठे। ये मुझे मनाने या खुद की गलती कबूल करने की बजाय, ऐसी बातें करने लगा। उसने मुझे कहा, “तुम्हारी वजह से मेरे भाई मेरी फैमिली मुझसे दूर हो गई। तुम मुझे जब चाहिए तब सेक्स नहीं देती थीं, तो मैं क्या करूँ? मुझे भगवान ने, सेक्स भर-भर के दिया है, तो मैं कहाँ जाऊं?”

मैंने कहा, “उसके लिये ज़बरदस्ती नहीं होती है। तुम्हारे मन होने से कुछ नहीं होता। तुमने कभी मुझे फील ही नहीं कराया कि तुम मुझे आज भी उतना प्यार करते हो, जिस प्यार की वजह से हमने शादी की थी। कहाँ है वो प्यार? तुम्हें पत्नी नहीं, जीवनसाथी नहीं, तुम्हें सिर्फ एक ऐसी औरत चाहिये, जो दिन रात सिर्फ तुम्हारे साथ सोने को तैयार रहे। तुम्हारी एक्सपेक्टेशन कुछ ज़्यादा ही थी, इसी लिये तुझे मैं नहीं, दूसरों की पत्नियां अच्छी लगती थीं।”

अपनी गलती मानने की बजाय मुझे कोसता रहा

मेरे पास ये आदमी उस लड़की से, बेहद प्यार करता है, उसका पूरा सबूत है और ये आदमी खुद से गलती हुई है, ये स्वीकार करने की बजाय मुझे कह रहा है कि घर तुमने छोड़ा है, तो गलती तुम्हारी है? मुझे गुस्सा आये इसीलिए ये आदमी जानबूझ के ऐसी गलत बातें करने लगा, और इतने वक्त में उसने एक भी, ऐसा शब्द नहीं कहा जिससे मुझे उस पर भरोसा हो। ऊपर से जैसे धमकी दे रहा हो ऐसे बोला, “ये कोर्ट केस करके तुमने अच्छा नहीं किया।”

मैंने कहा, “ये तुम्हारे ही किये कर्मों का फल है। तुमने सोचा, ये तो चली गयी। कुछ कर सके, ऐसी तो है नहीं। तो अपने लिये तो खुल्ला आसमान है। तुम्हे लगा होगा ये तो बिचारी है, इसको कौन मदद करेगा? जो मदद करने जायेगा उसको तुम मेरे खिलाफ भड़काओगे, तो कहाँ जाऊँगी मैं? मेरी तो जाने दो, तुम्हें तो, बेटी तक की परवाह नहीं है और तुम्हारी खुद की गलती होते हुये भी, तुम्हारी माँ और मासी तुझे कुछ नहीं बोली? ऊपर से तुम्हारी माँ मुझे बोल रही हैं, ‘तुम्हे तो सिर्फ एक बेटी है, बेटा तुम पैदा कर नहीं सकती, तो मेरे बेटे को जो करना है करने दे, उसे कुछ मत बोल…?’ क्या मतलब है इसका?”

“मेरा भाई और बहन उसी वक्त मुझे ले जाने को तैयार थे, पर मैं नहीं गई क्यूँकि मुझे मेरा घर नहीं तोड़ना था। मैंने बहुत कोशिश की तुमसे बात करने की, पर तुम तो उस वक्त तुम्हारी माशूका के प्यार में खोये हुये थे। घर में ये सब चल रहा था, फिर भी तुम पूरा दिन संगीत क्लास में जाते थे, या संगीत का बहाना करके उस लड़की से मिलने जाते होंगे।”

“तुमने तो साफ साफ कह दिया था ना, निकल जा, यहाँ अब तेरी कोई ज़रूरत नहीं है। जैसी आयी है, ऐसी ही वापस चली जा? उसके बाद तुम आज कोर्ट में आये हो, और वो भी जज के सामने और अभी मेरे सामने झूठ पर झूठ बोले जा रहे हो? मुझे मनाने की जगह तुम मुझे और परेशान कर रहे हो? इसका मतलब, हम हों या ना हों,  उससे कोई फ़र्क़ ही नहीं पड़ता?”

आदमी चाहे कुछ भी करे उनकी कोई गलती नहीं?

“मैंने तुमसे कई बार बात करनी चाही पर तुम्हारे पास तो हमारे लिए कोई वक्त ही नहीं था, तुम तो अपनी ही मस्ती में थे। तुम्हारे घर वालों से तुमने लफड़ा किया, इस बात से उनको कोई फरक नहीं पड़ा? क्या मतलब इसका? हाँ, आदमी चाहे कुछ भी करे उनकी कोई गलती नहीं? और मुझे मेरी गलती ना हो तो भी बदनाम किया जा रहा था? छोटी-छोटी सी बातों में पूरी फैमिली आ जाती थी लड़ने को? क्यों? जब तुमने इतनी बड़ी गलती की, तब क्यों कोई तुम्हें डांटने या टोकने नहीं आया? क्यूँकि तुम उनके बेटे और भाई हो इसी लिये?”

“तो क्या मैं किसी की बेटी नहीं हूँ? मेरे साथ ऐसा करते वक्त तुम्हें एक बार भी मेरा या मेरी बेटी का ख्याल नहीं आया? कहाँ जाऊं मैं? कौन करता मेरी मदद? कौन मेरी बात सुनता? तेरे पास तो मेरी बात सुनने की फुर्सत ही नहीं थी। और तेरी फैमिली? तो तू गलत है, फिर भी तुझे सपोर्ट कर रही है और मुझसे लड़ रही है? तो ऐसे में, मैं जाऊं कहाँ? बता मुझे, कहाँ जाऊं मैं?”

“और तू बोल रहा है, क्यों कोर्ट केस किया?”

अभी भी खुद की गलती मानने की जगह वो यही झूठ बोल रहा है कि ऐसा मैंने कुछ नहीं किया? उस वक्त उस लड़की ने अपनी गलती मान ली थी कि ‘माफ़ करना भूल हो गई 40% मेरी भी गलती है’, पर ये आदमी फिर भी झूठ बोल रहा है? एक बार भी उसने मुझे ये नहीं कहा कि, चलो घर वापस, मैं तुम दोनों को लेने आया हूँ। माफ़ कर दे मुझे, मेरी भूल हो गई। ऊपर से झूठ बोल कर, मुझे गुस्सा दिला रहा था। ऐसे आदमी पर मैं कैसे विश्वास करूँ?

ये आदमी झूठ पर झूठ बोले जा रहा था

मैंने ऐसे कई आदमी देखे हैं, जो जब तक अपनी रूठी हुई पत्नी मान नहीं जाये तब तक वो इतनी कोशिश करते हैं कि, एक बार तो वो पिघल ही जाती है और यहाँ तो इस आदमी को खुद की गलती होते हुए भी कितनी अकड़ थी।

मैंने उसे बोला, कि वह डिवोर्स ले ले, ताकि हम फ्री हो जाएँ। और एलिमनी उसको देनी ही पड़ेगी ताकि मैं एक नए सिरे से अपनी ज़िंदगी शुरू कर सकूँ। कोर्ट की अगली तारीख पर वो अपने वकील को लेके आया, और मेरी नोटिस का जवाब उसने दिया, उसने मेरी सब बातों का गलत जवाब दिया था। उसने ये भी झूठ लिखा कि मेरी डिलीवरी और मेरी बेटी का जन्म मेरे मायके में हुआ है। इतना बड़ा झूठ?

उस दिन तो उसने मुझे मनाया नहीं और माफ़ी भी नहीं मांगी, पर जैसे ही जज के सामने आया, तो गिरगिट की तरह रंग बदलते बोला, “जज साहब, बहुत कोशिश की इसको मानाने की पर ये सुनती ही नहीं, अभी भी मैं इनको लेके जाने को तैयार हूँ। आप इसे बोलो कि ये मेरे साथ आये।”

जज साहेब ने कहा, “मैं आपकी पत्नी को उसकी मर्जी के बिना, आपके साथ ज़बरदस्ती नहीं भेज सकता। कानून तो क्या कोई भी उसे ज़बरदस्ती कहीं नहीं भेज सकता। आप जो बात कर रहे थे, वो पूरी बात मुझे सुनायी दे रही थी, इसी लिये, अब आप बोलो आप भरण-पोषण का खर्चा देने को तैयार हे या फिर केस लड़ना है?”

जैसे जैसे केस आगे चलता गया वैसे इसके बारे में पता चलता गया की ये आदमी कितना घटिया है और मैं थी कि इतना होने के बाद भी, इस आदमी और उसके फैमिली के खिलाफ डोमेस्टिक वाइलेंस का केस नहीं किया और यहाँ ये आदमी यही सब बात का फायदा उठाये झूठ बोले जा रहा था। ना कभी इस आदमी ने मुझे मनाने फ़ोन किया, ना ये मुझे मिलने आया और ये झूठा आदमी जज के सामने और लोगों के सामने झूठ बोलता रहा कि उसने मुझे मनाने की बहुत कोशिश की।

ये सब झूठ  बोल के तुझे क्या मिला? क्या तेरे माँ बाप ने तुम्हे ये संस्कार दिए हैं?

मैंने जब जज को बताया कि इसकी माँ भाई और भाभी ने कितना मानसिक त्रास दिया था, तो उसने अपने भाई भाभी और माँ को बचाते हुए कहा कि, नहीं हम सब ने तो बहुत अच्छे से रखा था इसे, पर इसने आते ही अपने रंग दिखा दिये। तेरी माँ तेरे भाई भाभी ने जो किया वो तुझे भी पता हे और फॅमिली में ऐसे कई लोग हे उन सब को पता है, फिर भी आज तूने झूठ बोल के ये साबित कर दिया कि वो तो ठीक, तू आदमी ही नालायक है।

जब उसने मुझे 2015 की दिवाली के कुछ दिन पहले मारा था, तो इसके जवाब में ये आदमी ने खुद का बचाव करते हुये, और 2012 में जब मेरा हाथ फ्रैक्चर हुआ था उसका मेडिकल सर्टिफिकेट लेके आया और ये दिखाया कि, ये मार के निशान झूठे हैं।

क्या तुझे “इतना बड़ा झूठ बोलते हुये जरा सी भी शर्म नहीं आयी? कितनी बड़ी  घटिया हरकत की है तूने झूठ बोलके के। सिर्फ खुद को बचाने के लिये? अगर तूने तेरी सारी गलती मान ली होती तो, मैंने कब का तुझे माफ़ किया होता, और हमें घर छोड़ने की नौबत नहीं आती….पर आज पता चला तू कितना निर्लज और बेशरम है।”

पैसों के मामले में वह इतनी हद तक गिर जायेगा, ये कभी मैंने सोचा तक नहीं था

उसने खुद का सैलरी अकाउंट तो दिखाया ही नहीं, और हमारा जॉइंट अकाउंट दिखाया, जिसमें वो कभी-कभी मन हुआ तो पैसा डालता था। वो भी कब, जब मैं उसके साथ सोती तो। बाकि वो उस महीने घर चलाने के भी पैसे नहीं देता था। हमारे जाने के दो-तीन महीने पहले से ही उसने उसमें पैसे डालना बंद किया था। उसके बाद आज तक उसने कभी उसमें पैसे डाले ही नहीं, और कोर्ट में उसने ये झूठ बोला की मैं इसमें रेगुलर पैसा डालता हूँ, और मेरी पत्नी इसमें से पैसा उठाके खर्चा करती है।

वह इतनी हद तक गिर जायेगा, ये कभी मैंने सोचा तक नहीं था। वह मेरे चित्र और फोटोग्राफी एक्सिबिशन के फोटो लेके आया, ये दिखाने कि ये तो सेलिब्रिटी है, और लाखों रुपये कमाती है। तो मैं क्यों भरण-पोषण का खर्चा दूँ? इस आदमी को और मेरे ग्रुप के सभी मेम्बर को पता है कि एक्सिबिशन में कभी मेरी तो क्या किसी की फोटो की सेल नहीं हुई है।

मैं शादी से पहले कमाती थी

मैं शादी से पहले कमाती थी, पर शादी के बाद तुरंत बेटी का जन्म हुआ और मेरा पूरा वक्त मेरी बेटी और पति को संभालने में गया। शादी के 9 साल के बाद, मैंने वापस काम करना चालू किया और 10 वें साल में तो मुझे घर छोड़ना पड़ा। कहाँ हुई मेरी कमाई? अगर होती कमाई तो आज भरण-पोषण के लिए, ये नीच गिरे हुए आदमी से पैसे नहीं मांगती थी।

उसने संगीत ग्रुप के साथ प्रेम गीत गाके, सैनिक वेलफेर असोसिअशन में डोनेशन दे के खुद को बहुत सज्जन और महान बनाया और जो सहानुभूति ली, वो किस काम की? जब उसके पास बेटी को देने के लिए कुछ नहीं है? ये कैसा पिता है? और लोगों को झूठ बोल के वह ये दिखा रहा है कि उसको बेटी की याद आती है।

उसको ना बेटी की परवाह है ना मेरी

उसकी ये सब हरकतों को देख के साफ पता चल रहा था कि उसको ना बेटी की परवाह है ना मेरी। वो बिना कुछ दिए मस्सोमियत का ढोंग करके छूट जाना चाहता था। बड़ी-बड़ी बातें करने वाला वो और उसकी पूरी फैमिली ढोंगी और मतलबी हैं। जॉइंट फैमिली की बातें करते थे पर मैंने देखा, तो पता चला कि पहले से उन लोगो में किसी की किसी से बनती नहीं है। सिर्फ मेरे सामने सब नौटंकी चल रही थी। सच में तुम सब ने तुम्हारा ही घर बर्बाद किया है। मुझे समझ में नहीं आता ऐसा आप सब ने क्यों किया? ऐसे लोग सिर्फ मतलबी होते हैं और कुछ नहीं। इसलिए मैंने और मेरी बेटी ने खुद पर ध्यान देना ज्यादा बेहतर समझा ।

मैंने सोच लिया कि अब मुझे क्या करना है

मेरी बड़ी बहन ने तो मुझे सहारा देके उसका फ़र्ज़ अदा कर दिया, पर कब तक बहन के घर पर रहूंगी। मैंने सोच लिया था कि मुझे अगर नये से ही जिंदगी शुरू करनी है, तो क्यों ना, ऐसी जगह से करूं, जो मुझे और मेरी बेटी को बहुत पसंद हो, जहाँ मुझे सहारा देने वाला कोई ना हो, ताकि मैं खुद को जान सकूँ कि मुझमें कितनी हिम्मत है और मैं कितनी स्ट्रॉन्ग हूँ। तब जाके पता चलेगा कि मैं अकेली क्या कर सकती हूँ, अपने दम पर।

और फिर मैं  और मेरी बेटी मनाली चले गए एक दिन।  मेरे पास यही समय था, जब बेटी की स्कूल का रिजल्ट आकर गर्मी की छुट्टियां  शुरू हुईं।

मनाली जाने के बाद मेरे वकील ने मेरा केस संभाला

जब जज के सामने खुद की सैलरी कितनी है, ये बताने की बारी आयी तो उसने झूठा सैलरी स्टेटस दिखाया। वह मुंबई की नंबर वन कंपनी में डिप्युटी मैनेजर की पोस्ट पर काम करता है और एक डिज़ाइन स्टूडियो का हेड है। लाख रुपये से ज्यादा महीने की सैलरी है। उसके अलावा घर से डिजाइनिंग का काम करता हे, वो कमाई अलग। एक सिंगिंग क्लास चलाता है, वो कमाई भी अलग, मतलब की महीने की डेढ़ लाख कमाई समझो। पर इस आदमी की नियत देखो, एक भी रुपया देने को तैयार नहीं है। उसने उसकी नोटिस के जवाब में लिखा था, कि ये औरत तो एक रुपया भी देने को लायक नहीं है।

जब जज ने उसको बोला कि आपकी सैलरी का 35% देना है तो, उसने पैसे देने से इनकार किया। जब  बहस हुई कि कितना दे सकते हो, तो वो लास्ट में उसकी सैलरी का 5% देने को तैयार हुआ। मैंने 40 हजार माँगे  थे, उसके लिए ये ज्यादा पैसे नहीं थे, वो महीने के 1 लाख से ज्यादा कमाता है, और फिर भी उसको, खुद की ही बेटी और पत्नी को पैसे देने में तकलीफ हो रही हे,  बेटी तक का ख्याल नहीं आया उसे….और लोगों को कहता है, बेटी पर करोड़ों रुपये उड़ाऊ? मेंटेनन्स के पैसे तो दे नहीं सकता, क्या वह बेटी की परवाह करेगा?

आज की महंगाई वाली ज़िंदगी में 13 हजार में क्या होगा?

कोर्ट ने हमारे जॉइंट अकाउंट को ध्यान में रखते हुये, महीने के 13 हजार रुपये तय किये। डिवोर्स हुआ नहीं क्योंकि वह एलिमनी देने को तैयार नहीं था, इसी लिए कोर्ट ने मुझे उससे अलग रहने की परमिशन दी और मेरा और बेटी का खर्चा पिता को देना पड़ेगा, ये तय हुआ।

मेरा सवाल इतना है कि उसको झूठ बोलते शर्म नहीं आई कि मैं अकाउंट से पैसे हमेशा निकाल रही हूँ ? बता मुझे लास्ट कब पैसे तूने डाले थे अकाउंट में? दिसंबर 2017 में? क्या मिला तुझे ये सब करके? और क्यों किया ये सब तूने मेरे साथ?  हम खाना खाये पेट भर, या भूखे सोये? बेटी की स्कूल की फीस भरूँ या घर पर बैठाऊँ उसे? ऊपर से वकील की फीस, घर का खर्चा-पानी।

इस आदमी की गलती की वजह से हमें घर छोड़ना पड़ा। इसकी वजह से मुझे मेरी बेटी को बहुत तकलीफ उठानी पड़ी है, और फिर भी ये आदमी खुद की गलती स्वीकार करने की जगह मुझसे चीटिंग करके, धोका देके खुद को बहुत होशियार समझता है? तुम्हें क्या लगता है, चीटिंग करके, पैसे कम देके तुमने बहुत बड़ा काम कर दिया है? तो ये तेरी बहुत बड़ी भूल है।

तुम्हें उस वक्त तो बहुत बड़ी ख़ुशी हुई होगी, है न? देखना चाहते होंगे कि मैं कैसे जिन्दा रहती हूँ? तुम चाहते होंगे की मेरी हालत ख़राब हो जाये। है ना? वो तो तुम, जब मैं तुम्हारे साथ रहती थी, तब भी करते थे, इसमें क्या नया है?

पर तुमने जो किया है वो माफ़ी के लायक नहीं है।

हमेशा नोटिस भेजने पर ही मुझे पैसे मिलते हैं

आज 2020 चल रहा है, पर वो मुझे सामने से कभी पैसे नहीं भेजता, हर साल मुझे नोटिस भेजनी पड़ती है, तब भी वो डायरेक्ट मेरे अकाउंट में पैसे नहीं डालता, पर चेक कुरियर करेगा अपने वकील को, उसका वकील चेक मेरे वकील को देगा, मेरा वकील फिर मेरे अकाउंट में चेक भरेगा, तब जाके 15 दिन के बाद मुझे पैसे मिलते हैं, वो भी वो एक साथ नहीं देता.

मुझे बस इतना कहना है कि गलती तेरी है और तुझे तेरी गलती का एहसास नहीं हो रहा है। और ऊपर से तू मुझे अपना ईगो दिखा रहा है? कितना निर्लज पिता है, खुद की बेटी और पत्नी को देने के लिये पास पैसे नहीं हैं? तेरी लाखों की कमाई किस काम की? तूने मेरी और बेटी की जिन्दगी के साथ बहुत बड़ा खिलवाड़ किया है। तूने हमारे साथ खेल खेला है।

गीता की कसम खाकर, कानून के साथ भी उसने खिलवाड़ किया है

मेरे मनाली जाने के बाद मेरे वकील ने ही केस हैंडल किया, जब मुझे  मेरे वकील ने बताया की 13 हजार देने का तय हुआ है, तो सच में मुझे बहुत दुःख हुआ। वापस गुजरात आकर नया केस फाइल करना मुश्किल था। जब अपने ही घर के लोग, मेरे ही पति ने मुझे धोखा दिया, सच बताऊं तो रिश्तों पर से विश्वास उठ चुका है। वैसे मैं बहुत स्ट्रॉन्ग हूँ, पर जहाँ भरोसे की बात आती है, अब किसी पर भरोसा करते हुये भी डर लगता है।

में 10 साल एक ऐसे घटिया आदमी के साथ रही जिसको ये तक नहीं पता की परिवार क्या होता है? पत्नी क्या होती है और बेटी क्या होती है। और ये आदमी जॉइंट फॅमिली क्या होती है, इस बारे में लोगों को भाषण देता था।

तू कैसा पिता है जो अपनी ही बेटी के खाने-पीने भरण-पोषण की रकम पर बवाल कर रहा था? बेटी की पढ़ाई  की रकम पर रोक लगा रहा था? जहाँ  पूरा हिंदुस्तान ‘बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ’ के नारे लगा रहा है, वहाँ ये आदमी झूठ  बोल रहा है, दावपेच खेल रहा है?  मतलब इसको कैसा बाप बोलना चाहिये? लगता है कि “बेटी पढ़ाओ” की जगह “बेटों को पढ़ाओ” करना चाहिए। बेटे कुछ सीखेंगे तो, बेटियां अपने आप बच जाएंगी।

मैंने  सोचा था कोर्ट केस करुँगी तो शायद  इस आदमी में कुछ फरक पड़ेगा, शायद वो सब गलती मान लेगा, और मैं जो मांग रही हूँ उतना दे देगा, ताकि उसकी अच्छाई देख के, मैं उसे माफ़ कर देती, पर ऐसे नालायक लोगो को कौन पत्नी, कौन बेटी, इस से कोई फरक नहीं पड़ता।

नोट : अभी तक डिवोर्स हुआ भी नहीं है और उसको, फिर से किसी और की पत्नी से प्यार हो गया है……..ये बात मैं मेरी अगली स्टोरी में बताऊँगी।

मूल चित्र : Unsplash

पसंद आया यह लेख?

पाइये विमेन्सवेब के सारे दिलचस्प हिंदी लेख अपने ईमेल इनबॉक्स मे!

विमेन्सवेब एक खुला मंच है, जो विविध विचारों को प्रकाशित करता है। इस लेख में प्रकट किये गए विचार लेखक के व्यक्तिगत विचार हैं जो ज़रुरी नहीं की इस मंच की सोच को प्रतिबिम्बित करते हो।यदि आपके संपूरक या भिन्न विचार हों  तो आप भी विमेन्स वेब के लिए लिख सकते हैं।

महिलाओं का मानसिक स्वास्थ्य - महत्त्वपूर्ण जानकारी आपके लिए

टिप्पणी

अपने विचारों को साझा करें, विनम्रता से (व्यक्तिगत हमला न करें! वेबसाइट के नीची भाग में पूरी टिप्पणी नीति पढ़ें |)

Women In Corporate Allies 2020

अपना ईमेल पता दर्ज करें - हर हफ्ते हम आपको दिलचस्प लेख भेजेंगे!

Women In Corporate Allies 2020