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क्या लड़की के जीवन का मक़सद सिर्फ शादी करना होता है?

Posted: अप्रैल 25, 2020

हमारा समाज पता नहीं कब इस बात को समझेगा कि शादी हर समस्या का हल नहीं है, शिक्षित होना उतना ही ज़रूरी है जितना ज़रूरी हमारे लिए साँस लेना। 

“अरे उषा, क्या तुम सारा दिन अपने कमरे में बैठ कर पढ़ती रहती हो? इतना पढ़कर क्या करोगी?” दादी ने गुस्से में अपनी पोती उषा से कहा।

“दादी आप भी न जब आपको पता है कि मुझे IAS का एग्जाम देना है, तो इसके लिए मुझे पढ़ना होगा और मेहनत करूंगी। तभी तो एक दिन IAS बनूंगी।”

“अब तुझे कौन समझाए? न तुझे समझ आता है, ना ही तेरे पिता को। जब देखो दोनों बाप बेटी लग जाते हो मुझे समझाने”, दादी ने गुस्से से कहा।

“अब तू 30 बरस की हो गयी है। मेरी तो 18 में ही शादी हो गयी थी। तेरी उम्र में मैं जब थी तो मेरे चार बच्चे हो गए थे और तेरी माँ के तू पैदा हो गयी थी, लेकिन मेरा सुनना किसी ने नहीं है सबको अपनी मनमानी करनी है।

दादी का गुस्सा बढ़ता हुआ देख उषा ने वहाँ से चले जाना ही ठीक समझा…

सुमन, “देख ले तेरी छोरी को गुस्सा तो इसकी नाक पर रहता है। एक तो उम्र बढ़ती जा रही है। मुझे इसकी शादी की चिंता है कि इसके लिए कोई लड़का नहीं मिलेगा? अभी तो रिश्ते आ रहे हैं, तो तुम दोनों मियां बीवी किसी को हाँ नहीं कर रहे और मैंने इतना क्या कह दिया कि मुँह फूलाकर चल पड़ी।”

“मम्मी जी, आप भी ना हमेशा शुरू हो जाती हो उसको टोकने में। एक दिन तो शादी हो ही जाएगी। अब आपका और मेरा जमाना नहीं है जब माता-पिता लड़की की पढ़ाई रूकवाकर उसकी शादी कर देते थे। अब समय बदल गया है अब लड़कियों को भी पूरी आज़ादी है अपने पढ़ाई करने, नौकरी करने और शादी करने की।”

“माना हमारी बेटी की उम्र शादी लायक हो गयी है, लेकिन उसकी इच्छा है कि वो IAS का एग्जाम दे तो हम दोनों भी उसके साथ हैं। जब हमारी उषा IAS बन जायेगी तब आप देख लेना अगर उसने चाहा तो एक दिन लड़कों  की लाइन लग जायेगी। तब आप ही पसंद कर लेना अपनी पोती के लिए मनचाहा वर”,  सुमन ने अपनी सास से कहा।

“सुमन बहू अब तुम भी मेरे बेटे की तरह बोलने लगीं? अब तो तुम सब जीते मैं हार गयी।”

आप भी अपने बच्चों के सपने को अपना सपना बना लो…उनका साथ दीजिये।

मूल चित्र : Canva

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