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वो खुद परेशान थी मगर उसने दूसरा घर संवार दिया…

Posted: नवम्बर 6, 2020

वैसे तो सब ठीक ही था मगर रीता में बदलाव आने लगा था। उसने अपने सारे पुराने कपड़े बांध कर रख दिये। जितने नए कपड़े थे सब पहनने लगी थी।

कमरे से चिल्लाने और दोनों बच्चों के रोने की आवाज आ रही थी। अक्षय भाग कर कमरे में गया, पिंकी गाल पर हाथ रखकर रो रही थी और सोनू भी डरा सहमा सा खड़ा था।

“क्या हुआ?” अक्षय गुस्से में रीता का हाथ पकड़ कर बोला।

“दिमाग़ ख़राब हो गया इन बद्तमीजों का, हर दिन नई फरमाइश। कितनी बार बोला है कि पैसे पेड़ पर नहीं उगते हैं, ना तो तुम्हारे बाप की कमाई इतनी है कि जो तुम्हारे मुंह से निकले फौरन उसे पूरा कर दूं। तीनों टाइम खाना मिल रहा है उतनी सैलरी में क्या ये कम है? जाऊं मांग कर ले आऊं कहीं से इनके लिए।”

“पिंकी बेटा!! आप दोनों जाओ मुंह हाथ धो लो, मैं थोड़ी देर में आता हूँ। फिर हम बाहर आइसक्रीम खाकर आते हैं” अक्षय ने पिंकी का आंसू साफ करते हुए कहा।

“तुम्हारा दिमाग़ ख़राब हो गया है क्या? देख रहा हूँ जब से नए पडोसी आए हैं तब से तुम अजीब हो गई हो। तुम्हारी ऊल जलूल हरकतें मैं सिर्फ इसलिए सह रहा था क्योंकि इससे पहले तुमने कभी भी इतना गलत काम नहीं किया था। मगर बात मेरे बच्चों की है, मैं हरगिज़ बर्दाश्त नहीं करुंगा कि तुम उनके अंदर एहसा से कमतरी भर दो।

मैं जितना भी कमाता हूँ उसमें मेरे बच्चे खुश रहते हैं। हां तुम्हारी सारी जरूरतें पूरी नहीं कर पा रहा हूँ इसका मुझे इल्म है, मगर उसके लिए भी मैं कोशिश कर रहा हूँ। दो जगह इंटरव्यू दिया है, अगर कहीं जॉब लग गई तो वहाँ पैसे ज्यादा मिलेंगे। तुमको लगता है मेरे कुछ समझ में नहीं आता कि बच्चों के साथ तुम्हें भी…”, वो गुस्से को ज़ब्त करने की कोशिश कर रहा था मगर कर नहीं पाया तो बाहर निकल गया।

थोड़ी देर में गाड़ी स्टार्ट होने की आवाज आई। रीता बाहर आई तो वो बच्चों को लेकर जा चुका था। इतने गुस्सा अक्षय ने आज तक नहीं किया था। वो अपने बच्चों से बहुत प्यार करता था। आज रीता ने बच्चों पर हाथ ही नहीं उठाया था बल्कि उसके अंदर बहुत कुछ तोड़ भी दिया था।

कुछ महीने पहले ही तो नए पड़ोसी आए थे। नीलम नाम था उसका। बहुत खूबसूरत, बहुत पैसे वाली भी लग रही थी। दो बेटे थें जो पिंकी के हम उम्र ही थे या शायद उससे बडे़ थे और पति एकदम स्मार्ट और हैंडसम। अपनी खुद की भी गाड़ी थी।

मुलाकात हुई तो पता चला कि नीलम के पति अपनी नई फैक्ट्री के सिलसिले में यहाँ आएं हैं। उनके घर में कुछ काम बाकी रह गया था इसलिए किराये के घर में रह रहे हैं। जैसे ही काम पूरा होगा चले जाएंगे।

रीता नीलम से बहुत मुतासिर थी। उसके ब्रांडेड कपड़े उसके रहन सहन। उसका पैसा सब कुछ। नीलम वैसे तो बहुत पैसे वाली थी मगर नेचर बहुत अच्छा था। सबसे बात करती रीता से तो अच्छी दोस्ती हो गई थी। वो भी कभी कभी अपने हस्बैंड के साथ फैक्ट्री काम देखने जाती थी।

रीता अपना काम खत्म करके नीलम के पास चली जाती। नीलम बहुत खुश होती थी। वो भी कभी कभार रीता के घर आ आती थी।

वैसे तो सब ठीक ही था मगर रीता में बदलाव आने लगा था। उसने अपने सारे पुराने कपड़े बांध कर रख दिये। जितने नए कपड़े थे सब पहनने लगी थी। अक्षय ने कुछ भी नहीं कहा मगर बदलाव महसूस ज़रूर किया था।

नीलम गले में बहुत खूबसूरत सा मंगल सूत्र पहनती थी। उसका भी बहुत दिल करता कि अक्षय उसके लिए ऐसा ही मंगलसूत्र ले आए मगर कभी कहने की हिम्मत नहीं हुई। बस जो मोती वाला पहना था उसे उतार दिया। अक्षय ने जब देखा तो पूछ लिया..

“वो मोती खराब हो गई थी। अजीब लग रहा था इसलिए उतार दिया। वैसे भी सिंदूर और बिंदी तो…”

“मैंने ये तो नहीं कहा? जो तुम्हारा दिल करे वो करो। तुम्हे वो बहुत पसंद था ना इसलिए पूछा।”

“हमेशा तो एक ही चीज नहीं पसंद कर सकती ना। पसंद बदल भी तो सकती है। वैसे भी मेरा दिल भर गया था उसकी डिजाइन से। कुछ दिन बाद पहनूंगी तब अच्छा लगेगा।”

“हां पसंद तो बदल रही है तुम्हारी।” अक्षय ने इतना ही कहा था।

“सुनिए! हम अपना घर कब लेंगे?” एक दिन रीता ने अक्षय से पूछा था। वो कुछ नहीं बोला बस खामोशी से एक नज़र उसके चेहरे पर डाला और हल्के से मुस्कुरा दिया।

“अच्छा नया फर्नीचर तो हम ले सकते हैं ना?” एक और फरमाइश।

“सुनिए हम बच्चों का एडमीशन बडे़ वाले स्कूल में करा दें क्या? हमारे बच्चे पढने में बहुत होशियार हैं। फटाफट दाखिला मिल जाएगा।”

“रीता! बच्चे जहाँ पढ़ रहें हैं वो भी अच्छा स्कूल है। वहाँ बच्चे हमारी तरह माँ बाप के बच्चे पढ़ते हैं।बड़े स्कूल में बड़े माँ बाप के बच्चे आतें हैं। पहली बात तो ये कि वहाँ जल्दी एडमिशन होता नहीं अगर मान लो हो गया जो कि उम्मीद बहुत ही कम है। तुमको नहीं लगता हमारे बच्चे पढ़ने से ज्यादा उनकी तरह बनना चाहेंगे या फिर उनके साथ खुद को ना ढाल पाए तो उनका मन पढाई से हट जाएगा फिर क्या करोगी? मैं सब कुछ बर्दाश्त कर लूंगा मगर मेरे बच्चों की बारी आएगी तो बिल्कुल बर्दाश्त नहीं करुंगा। वो उसे समझाने की हर कोशिश कर रहा था और आज उसने क्या कर दिया था बच्चों को ही।”

वो लोग बहुत देर में लौटे थे। अक्षय ने खाने से मना कर दिया, पिंकी ने बताया कि वो लोग बाहर खाकर आए हैं मगर पापा ने नहीं खाया कुछ भी। रीता ने खाने के लिए कहा तो उसने मना कर दिया। फिर रीता की हिम्मत नहीं हुई कि कुछ बोले।

वो बहुत नाराज था। उससे बात भी नहीं कर रहा था। खामोशी से खाना खाता और खुद ही वापस सब रख आता। घर में बहुत कम रहता। कभी कभी रात को आता ही नहीं था। रीता बहुत परेशान रहने लगी थी। इतना नाराज तो वो कभी हुआ ही नहीं था। वो एकदम मुरझा गई थी। अब तो नीलम के घर भी बहुत कम ही जाती।

एक दिन दिल बहुत परेशान हुआ तो उसकी तरफ चली गई। नीलम ने उसे देखते ही मुस्कुरा कर उसे खुद ही पकड़ कर अपने पास बिठाया। पता नहीं क्या था नीलम के चेहरे पर रोज़ वाली चमक गायब था जैसे बहुत बीमार लग रही थी। शायद वो रोई थी आंखें शुर्ख़ हो रही थी। नाक भी लाल थी।

“क्या हुआ सब ठीक तो है”, रीता ने पूछा।

“हाँ! मैं तो ठीक हूँ तुम बताओ?”

उल्टा नीलम ने ही पूछ लिया। रीता एकदम खामोश सर झुकाए बैठी रही तो एकदम से नीलम ने उसका हाथ पकड़ लिया, “बोलो! अपनी बड़ी बहन और दोस्त बोलती हो ना मुझे?”

रीता ने बहुत दिनों से खुद को रोका था। इतना अपनापन पाकर खुद को रोक नहीं पाई और रो पड़ी फिर सब बता दिया। नीलम ने उसे रोने दिया फिर प्यार से उसका आंसू साफ़ किया और बोली…

“मैं तुमको कुछ ना बताती मगर मेरी वजह से तुम्हारा घर बर्बाद हो ये भी मैं नहीं देख सकती। मैं अपने माँ बाप की इकलौती बेटी हूँ। मेरे पापा के पास बहुत ज्यादा तो नहीं मगर फिर भी ठीक ठाक पैसा है। आधी प्रापर्टी उन्होंने मेरे हसबैंड के नाम कर दी है और मेरे ससुर जी भी पैसे वाले हैं। उन्होंने यहाँ प्रापर्टी खरीदी है उसी पर काम चल रहा है।”

“शादी से पहले कई लड़कियों से इनके सम्बन्ध थे। ससुर जी ने सोचा शादी कर देंगे तब ये सुधर जाएंगे। कुछ टाइम तक सब ठीक था मगर जो पैसे पापा ने दिए थे ससुर जी ने वो और अपने पास से लगा कर यहाँ कुछ जमीन खरीदी है। उसी पर घर बना कर बेचने का काम करते हैं। उसकी जिम्मेदारी इन्हें दे दी है। इसलिए हमें भी साथ भेज दिया मगर हर जगह तो हम साथ नहीं हो सकते ना।

अभी कुछ टाइम पहले पता चला कि उनका अफेयर यहाँ भी किसी के साथ चलने लगा है। ससुर जी आए थे बहुत नाराज हो रहे थे इनके ऊपर। मुझसे बोल रहे थे मैं जो सज़ा देना चाहूँ दे सकतीं हूँ। अगर मैं कहूँ तो अपनी जायदाद से बेदखल भी कर देंगे मगर मैंने मना कर दिया मेरे बच्चे बहुत छोटे हैं। उनको मैं क्या जवाब दूंगी और ससुर जी बहुत रो रहे थे। उन्होंने मेरे सामने हाथ जोड़ दिया था और मुझसे माफी मांग रहे थे। मेरा दिल नहीं किया कि एक बाप को उसके बेटे से अलग कर दूं इसलिए माफ तो नहीं किया मगर कुछ कहा भी नहीं।

ससुर जी ने कहा अब हम सब उनके साथ ही रहेंगे और जो कुछ भी है सब मेरे नाम कर देंगे। इन्होंने माफी तो मांग ली है मगर पता नहीं कब तक ठीक रहेंगे। ससुर जी का हाथ कब तक मेरे ऊपर रहेगा।

तुम्हारे पास भले ही पैसे नहीं है मगर ऐसा पति है जो सिर्फ तुम्हारा है। तुम्हारे अलावा किसी और को देखता भी नहीं। तुमसे इतना प्यार करता है। फिर किसी चमकती चीज़ को देखकर तुम कैसे अंदाजा लगा सकती हो कि वो सोना है।”

वो तो वैसे ही बहुत बदल गई थी मगर आज सब वहीं नीलम के घर छोड़ कर आई थी। हसद, जलन, सब…

शाम को जब अक्षय घर आए तो उसने माफी मांगने में ज़रा भी देर नहीं किया। अक्षय ने उसका हाथ पकड़ कर बैठा दिया और अलमारी से एक डिबिया निकाल कर उसे दे दिया। रीता ने खोल कर देखा तो बहुत प्यारी सी रिंग थी।

“मैं चाहता तो था दोनों एक साथ ले आऊं मगर उसमें अभी टाइम है इसलिए अभी यही ला पाया हूँ। मंगलसूत्र देखा है मैंने मगर तुम साथ चल कर पसंद कर लेना। बहुत जल्द मेरे पास पैसे आ जाएंगे। कुछ नहीं बोलना।” रीता ने कुछ बोलने के लिए मुंह खोला तो अक्षय ने चुप करा दिया।

“बताया था ना इंटरव्यू दिया है। मुझे दूसरी नौकरी मिल गई है और मैं एक जगह पार्ट टाइम भी कर रहा हूँ। बस थोड़े टाइम में वहाँ से पैसे मिल जाएंगे तुम तब चलना।”

रीता की आंखों में आंसू आ गए, “मैं अब कभी आपको परेशान नहीं करुंगी, ना तो किसी को देखकर अपनी सोच और दिल बदलने दूंगी। जितना है उसी में खुश रहूंगी।”

उसने अक्षय से कहा तो वो मुस्कुरा दिया। रीता ने दिल से नीलम को भी शुक्रिया कहा जो खुद परेशान थी मगर उसका घर फिर से संवार दिया था।

मूल चित्र : gawrav from Getty Images Signature via CanvaPro

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