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रिश्ते
अपने जीवन में विशेष रिश्तों के बारे में भारतीय महिलाओं की सच्ची कहानियाँ
बेटी का पिता बना तो पता चला इस दर्द का

दामाद के हाव भाव मुझे कुछ याद दिला रहे थे, हूबहू ..मेरी ... मैं ...अरे! नहीं नहीं! ...मैं..मैं कतई ..ऐसा नहीं हूँ। मैंने अपने विचार और सर दोनों को जोर से झटका।

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क्या पति-पत्नी का रिश्ता सिर्फ एक बेडरूम तक सीमित रहना चाहिए?

अगर मेरी फ़ैमिली और मेरे पति जैसे लोग आपके पास भी हैं, जिनको आपके होने ना होने से कोई फर्क नहीं पड़ता, तो बी वैरी केयरफुल और अपनी ज़िंदगी को बर्बाद ना होने दें। 

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लाखों में एक मेरी माडर्न बहु!

"कल से मेरा आफिस है, तो समय कम होगा। घर के काम में ज्यादा हाथ नहीं बटा सकती हूँ। इसिलिए एक खाना बनाने वाली को बुलाया है।" 

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होली के असली रंग सिर्फ़ अपनों के संग

अपने परिवार को छोड़ना एक बेटी के लिए कितना मुश्किल होता है! ये वही जान सकता है जिसके बेटी हो, लेकिन प्रिया की ससुराल में न तो ननद है ना ही कोई बुआ।

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क्यों मेरी कमाई से तुम्हारा घर नहीं चलता?

मैं सुबह 4 बजे से रात 11 बजे तक घर और ऑफिस के काम में लगी रहती हूँ, कभी थकती भी हूँ, फिर भी यही सुनने को मिलता है कि करती क्या हो?

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एक को मनाओ तो दूजा रूठ जाता है – हम एक साथ सब को खुश नहीं रख सकते!

सभी पढ़ी-लिखी बहू की उम्मीद करते हैं, कमाऊ बहू ढूँढ़ते हैं, मगर कर्तव्य वह गाँव की अनपढ़ बहू जैसे निभाए। दिमागदार हो, पर अधिकार की जानकारी ना हो।

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