रिश्ते
अपने जीवन में विशेष रिश्तों के बारे में भारतीय महिलाओं की सच्ची कहानियाँ
मैं ना भी चाहूं तो सुबह जल्दी उठना पड़ता है क्यूंकि बहू देर तक सोती अच्छी नहीं लगती…

सुबह बहू उठेगी, सबके लिए चाय बनाएगी, सबके पैर छुएगी, मंदिर में पूजा करेगी तभी...सिर्फ तभी, घर में लक्ष्मी, सुख और शांति आएंगे।

टिप्पणी देखें ( 0 )
सुना होगा ‘बहू ने सुहाय, पोता गले लगाय’, पर अब ये सोचिये बहु ना हो तो, पोता कहाँ से आये?

हम अपने रिश्तों को बनाए रखने के लिए चुप रहना पसंद करते हैं, खासकर कि हम बहुएं। हमें अपने और अपने परिवार, दोनों के बारे में सोचकर ही कदम उठाना पड़ता है।

टिप्पणी देखें ( 0 )
कुछ तो आपकी भी होंगी भूली-बिसरी यादें, स्कूल और बचपन की!

प्रथम पाठशाला में जो प्रारंभिक शिक्षा और संस्कार सिखाए जाते हैं वह हमारे कुशल व्यक्तित्व में समाहित होते हैं और वह ज्ञान कभी भी भुलाया नहीं जा सकता है।

टिप्पणी देखें ( 0 )
सबको खुश रखने की ज़िम्मेदारी अगर बहु की है तो उसको खुश रखने की ज़िम्मेदारी आपकी है!

आज मेरा मन किचेन में जाने का नहीं है, रविवार को तो मेरी भी छुट्टी है, और एक दिन तो मुझे भी आपकी तरह पूरा आराम करने का हक़ है।

टिप्पणी देखें ( 0 )
अपनी सास को खुश करूँ कि अपने पति को, आखिर कब तक ये सवाल मेरे सामने घूमता रहेगा?

आपके साथ भी ऐसा होता है क्या, पति और सास दोनों को खुश करने के चक्कर में हम महिलाओं की आज़ादी हम से छीन ली जाती है और यह हमारे साथ कब तक होगा? 

टिप्पणी देखें ( 0 )
नए माहौल में अपनी पहचान कैसे बनानी है, इसका फैसला हमसे से बढ़ कर कोई नहीं कर सकता!

अगर तुम उनके बिना खुशी से अपनी ज़िन्दगी गुज़ार सकती हो तो यहां वापस आ जाओ और अगर उनके बिना नहीं रह सकती तो वहीं रहकर अपनी जगह बनाओ।

टिप्पणी देखें ( 0 )
topic
relationships
और पढ़ें !

अपना ईमेल पता दर्ज करें - हर हफ्ते हम आपको दिलचस्प लेख भेजेंगे!

क्या आपको भी चाय पसंद है ?