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क्या आप देश की पहली महिला शिक्षिका सावित्रीबाई फुले के बारे ये जानते हैं?

सावित्रीबाई फुले भारत की पहली महिला शिक्षक और नारी मुक्ति आंदोलन की पहली नेता बनीं। उन्हें आधुनिक मराठी काव्य का अग्रदूत भी माना जाता है।

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भारतीय महिलाओं को अपने अधिकारों के लिए हमेशा कठिन संघर्ष करना पड़ा है फिर चाहे बात शिक्षा की हो या समानता की हो। यदि हम बीसवीं सदी का समय देखेंगे तो महिलाओं के लिए वह समय दुष्कर था जब उन्हें दूसरे दर्जे का नागरिक समझा जाता था उनका जन्म लेना तक पाप समझा जाता था। सोचिए जब बेटी पैदा होने को भी अपमान माना जाता हो तो उन्हें पढ़ाने की तो सोचना भी असंभव था। उस समय में एक दलित महिला ने भारतीय महिलाओं को शिक्षा का अधिकार दिलाने के लिए बहुत कुछ सहा वह महिला कोई और नहीं सावित्रीबाई फुले थीं और उनके द्वारा जो असाधारण काम किया गया उसे उस समय सोचना भी कठिन था।

सावित्रीबाई फुले भारत के नारी मुक्ति आंदोलन की पहली  समाज सुधारक और नेता थीं। भारत की इस पहली महिला शिक्षिका को अनेक मुश्किल दौर से गुज़रना पड़ा था। इस लेख में ऐसी साहसी और हिम्मती महिला शिक्षिका सावित्रीबाई फुले के बारे में कुछ रोचक तथ्य जानते हैं :

  • सावित्री बाई फुले एक दलित परिवार में 3 जनवरी 1831 को महाराष्ट्र के सतारा जिले के नयागांव में जन्‍म लिया था। उनके पिता का नाम खन्दोजी नैवेसे तथा माता का नाम लक्ष्मी था।
  • सावित्रीबाई की शादी ज्योतिराव फुले से केवल नौ साल की उम्र में वर्ष 1940 में हो गई थी।
  • जब उनका विवाह ज्योतिराव फुले से हुआ उस समय वह पढ़ना लिखना नहीं जानती थीं। परंतु पढ़ने की ललक उनके अंदर थी और इस लगन को देखकर उनके पति ने उन्हें पढ़ने के लिए प्रेरित किया ।
  • सावित्रीबाई ने और उनके पति समाजसेवी महात्मा ज्योतिबा फुले ने बालिकाओं के लिए एक विद्यालय की स्थापना 3 जनवरी 1848 में की थी।
  • कन्याओं को पढ़ाने के दौरान लोग उनके ऊपर पत्थर ,गंदगी, कीचड़, गोबर आदि तक फैंकते थे इसलिए वह अपने थैले में एक साड़ी लेकर जाती थीं और स्कूल पहुँच कर अपनी साड़ी बदल लेती थीं।
  • 1854 में विधवाओं की बुरी हालत देखकर उन्होंने विधवाओं,निराश्रित महिलाओं के लिए एक शरणस्थल खोला और उनको शिक्षा देना आरंभ किया।
  • सावित्रीबाई फुले भारत की पहली महिला शिक्षक और नारी मुक्ति आंदोलन की पहली नेता बनीं।
  • वह एक मराठी कवयित्री भी थीं और उन्हें आधुनिक मराठी काव्य का अग्रदूत माना जाता है।
  • उन्होंने सभी रीतियों को तोड़ते हुए अपने पति ज्योतिराव की चिता को अग्नि देकर उनका अंतिम संस्कार किया। 
  • 10 मार्च 1897 को प्लेग की बीमारी में लोगों की मदद करते हुए वह स्वयं प्लेग से संक्रमित हो गई और उनका निधन हो गया।

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About the Author

shalini verma

I am Shalini Verma ,first of all My identity is that I am a strong woman ,by profession I am a teacher and by hobbies I am a fashion designer,blogger ,poetess and Writer . मैं सोचती बहुत हूँ , विचारों का एक बवंडर सा मेरे दिमाग में हर समय चलता है और जैसे बादल पूरे भर जाते हैं तो फिर बरस जाते हैं मेरे साथ भी बिलकुल वैसा ही होता है ।अपने विचारों को ,उस अंतर्द्वंद्व को अपनी लेखनी से काग़ज़ पर उकेरने लगती हूँ । समाज के हर दबे तबके के बारे में लिखना चाहती हूँ ,फिर वह चाहे सदियों से दबे कुचले कोई भी वर्ग हों मेरी लेखनी के माध्यम से विचारधारा में परिवर्तन लाना चाहती हूँ l दिखाई देते या अनदेखे भेदभाव हों ,महिलाओं के साथ होते अन्याय न कहीं मेरे मन में एक क्षुब्ध भाव भर देते हैं | read more...

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