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सामाजिक मुद्दे
बहु, मैं जुबां की तीखी ज़रूर हूँ लेकिन…

पहले ही घर का काम क्या कम होता था, जो अब ये नए चोंचले? सारा दिन तेरे बेटे को संभालो, घर के काम देखो, बुढ़ापे में मैं क्या क्या करूँ?

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अंधविश्वास और वैज्ञानिक दृष्टिकोण में उलझता महिलाओं का निर्णय

बहरहाल वैज्ञानिक नज़रियों और अंधविश्वासों का झगड़ा तब तक चलता रहेगा जब तक देश के हर ग्रामीण इलाकों तक शिक्षा और सही सूचना नहीं पहुंच जाती है।

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क्या नाता प्रथा सच में लिव इन रिलेशनशिप का एक स्वरुप है?

कहने को तो यह नाता प्रथा महिलाओं को अधिकार देने और अपने पसंदीदा साथी के साथ जीवन जीने का अधिकार देने की बात करती है, लेकिन...

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निशा रावल-करण मेहरा केस : कितना आसान होता है औरत को गलत मान लेना?

निशा रावल-करण मेहरा केस में अभी कोई इन्वेस्टीगेशन नहीं हुई है फिर भी सोशल मीडिया पर सिर्फ निशा रावल की  आलोचना क्यों हो रही है? 

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बच्चा गोद लेने से माँ की ममता कम नहीं हो जाती…

कॉलोनी और नातेदारी वालों में एक बार फिर कानाफूसी शुरू हो गई, "बच्चा पैदा किए बिना कोई भी औरत संपूर्ण नहीं होती।"

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हाँ मैं हूँ मोटी, तुम्हें इससे क्या?

“तुम इतनी मोटी हो कि कोई तुमसे शादी नहीं करेगा। तुम्हें न स्लीवलेस टॉप नहीं पहननी चाहिए। तुम्हें न ढीले कपड़े पहनने चाहिए।”

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