सामाजिक मुद्दे
दुर्गा माँ कहीं वापस नहीं जातीं, वे समा जाती हैं हम में!

मुझे गर्व है कि तुम्हें अपने, अपनी बहन व अपनी सहेली के सम्मान को बचाने के लिए किसी पुरुष के कन्धों की कोई आवश्यकता नहीं है।

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क्यों हमारी असली रिश्तों की जगह भर रहे हैं ये बेजान खिलौने?

मानसिक अवसाद या अकेलापन आज के दिन एक बहुत ही गंभीर समस्या के रूप में उभर रहा है, खास कर शहरी अकेलापन, जहां गहरे संवाद की कोई जगह ही नहीं है।

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हम तो जज करेंगे क्यूंकि जजमेंटल हैं हम!

हम लोग किसी को ना जानते हुए, पहचाने बिना, बाहरी स्थिति को देखकर, दूसरे के प्रति एक धारणा बना लेते हैं, दूसरों को जज करने की आदत हो गयी है हमारी।    

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हमेशा नए कपड़े ही क्यों? इस त्यौहार अपनी खूबसूरत सी, कभी न फीकी पड़ने वाली मुस्कान पहनें!

ख़ुशी दिखावे में नहीं अपनों के साथ सुकून से रहने में है, तो अब कपड़ों को रिपीट करिये, साथ में एक नई जोश से भरी खूबसूरत मुस्कान को भी पहनिए। 

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आइये इस दिवाली पटाखों और मिठाइयों के साथ थोड़ा इन बातों पर भी ध्यान दें

तैयार है भारत की लक्ष्मी, विश्व में परचम लहराने को क्यूं न इस दीवाली पर हम, छोटा सा एक प्रण करें, अपमानित न हो कोई लक्ष्मी, इसका दृढ़ संकल्प करें!

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KBC 11 की कर्मवीर सुनीता कृष्णन हैं यौन तस्करी से पीड़ित महिलाओं के लिए एक प्रज्वल उम्मीद!

KBC 11 की कर्मवीर सुनीता कृष्णन पूछती हैं, 'जब यौन शोषण करने वाले हमारे समाज का हिस्सा हैं, तो यौन पीड़िताओं को समाज का हिस्सा क्यों नहीं बनने दिया जाता?'

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