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ब्रेस्ट आयरनिंग सिर्फ इसलिए ताकि लड़के मेरी तरफ आकर्षित न हों?

ब्रेस्ट आयरनिंग प्रक्रिया कुमार अवस्था में आने वाली लड़कियों पर की जाती है, जिससे उसकी ओर पुरुष आकर्षित न हों और वो लैंगिक शोषण से बची रहे।

हर देश की, हर राज्य की, हर कौम की अपनी एक परंपरा होती है, संस्कृती होती है जिसे आगे की पीढ़ी तक लेके जाना-बढ़ाना हर कोई चाहता है। पर क्या आप जानते हैं ये रीति-रिवाज़ और परंपराएं कई बार हिंसा का रूप ले लेती हैं और फिर इनके खिलाफ जल्दी कोई आवाज़ नहीं उठा पाता क्योंकि ये प्राचीन दौर से चलीं आ रहीं हैं? सबसे ज्यादा इन रीति-रिवाज़ों और परंपराओं का शिकार औरतें ही होती हैं फिर चाहें वे किसी भी देश की हो, समाज की हो या धर्म की हों। उनका कोई दोष भी न हो तब भी।

भारत में आज कई सारी प्रथाओं ने कुप्रथाओं का रूप ले लिया है पर वे प्रथाएँ बहुत समय से चली आ रहीं हैं इसलिए लोग इनके खिलाफ आवाज नहीं उठा पाते। अभी भी जब स्त्रियों को उनके अधिकार और उनके प्रति होने वाली हिंसा को कानूनी सुरक्षा मिल चुकी है। फिर भी दबे पाँव आज भी कई सारी कुप्रथाएं निभाई जाती हैं। हमें लगता होगा की भारत में ही दहेज़, बलात्कार, घरेलु-हिंसा, विनयभंग, कौमार्य परिक्षण जैसी घटनाएँ होती हैं पर ऐसा नहीं है।

आज मैं आपको उस प्रथा के बारे में बताना चाहती हूँ, जिसे दक्षिण अफ्रीका में ‘ब्रेस्ट आयरनिंग’ या जिसे ‘ब्रेस्ट फ्लैटनिंग’ भी कहा जाता है। स्त्री के स्तन को इस्त्री करके उनके प्राकृतिक विस्तार को रोकना।

यह प्रक्रिया कुमार अवस्था में आने वाली लड़कियों पर की जाती है, जिससे उसकी ओर पुरुष आकर्षित न हों और वो लैंगिक शोषण से बची रहे। दस साल की उम्र से ही यह प्रकिया करना शुरू कर देते है और वो कई महीने तक चलती है। यह प्रक्रिया उनके परिवार की ही किसी महिला सदस्य जैसे- माँ, दादी, चाची या बुआ से करवाई जाती है। यह प्रक्रिया करते वक़्त घर के पुरुष सदस्य को भी इसकी भनक नहीं लगने देते हैं। कोयला, पत्थर, चिमटा, इस्त्री जैसी चीज़ों को गरम करके स्तन पर रख उसे चपटा बना दिया जाता है।

कई परिवारों में बच्चियों को इस दर्दनाक प्रक्रिया से न गुजरना पड़े इसलिए उनकी छाती पर एक बहुत ही तंग कपड़ा बाँध देते हैं। जिससे कई लड़कियों को सांस लेने में भी तकलीफ होती है। यह सब करते वक़्त अगर कोई लड़की रोती है या चिल्लाती है तो उसे वैसा करने की भी इज़ाज़त नहीं होती है। ऐसा करने पर उसके घर की इज़्ज़त मिटटी में मिल जाती है और उससे कहा जाता है कि वह बिल्कुल भी मजबूत नहीं है

यह प्रथा दक्षिण अफ्रीका के कैमरून, नाइजेरिया, चाड और वहाँ से स्थलांतरित होकर ब्रिटेन और उत्तर अमेरिका में भी होने लगी। ऐसा पाया गया है की ब्रिटेन में करीब एक हजार से ज्यादा लड़कियां इस प्रकिया से गुजर चुकी हैं। कैमरून में कुमारावस्था मे आने वाली लड़की को यौन क्रिया के उपयुक्त माना जाता है तथा उसको अगवा करके उसका यौन शोषण और भद्दी टिप्पणियां की जाती हैं। बाल-विवाह, यौन शोषण और छोटी उम्र में गर्भावस्था से बचने के लिए वहाँ की लड़कियों को इस ददर्नाक अनुभव का सामना करना पड़ता है। हालांकि उनका हेतु अच्छा है पर कृती शर्मसार है।

जब इन लड़कियों से उनकी आपबीती पूछी गयी तब उनके अनुभव दिल दहलाने वाले थे। जो जो लड़कियां इस प्रकिया से गुजरी हैं, उन्हें आगे जाके डिप्रेशन, बॉडी शेमिंग, छाती पर दाग, सिस्ट, ब्रेस्ट कैंसर, स्तनपान में दिक्कत इन सब मुश्किलों का सामना करना पड़ा है। बचपन में किये गए इस दर्द को पीड़िता अपने बुढ़ापे में भी भुला नहीं पाती है।

भारतीय महिलाओं को भी अनेक प्रथाओं का सामना करना पड़ता है पर अब तक भारत में ब्रेस्ट आयरनिंग की सिर्फ एक ही शिकायत सामने आई है। एक केस स्टडी के अनुसार मैसूर के एक हॉस्पिटल मे अरकलगुडी गांव जो कर्नाटक के हासन जिले से है। वहाँ इस तरह की एक वारदात हुई थी जो 2013 में दर्ज की गई है।

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उसके पहले बच्चे की गर्भाशय में ही मृत्यु होने के बाद उस औरत के स्तन पर नीले रंग की रेखाएँ दिखीं, जिससे उसके घर वालों को लगा की वह साँप है और उसकी वजह से गर्भ में ही बच्चे की मृत्यु हो गई है। यही वाकया उसकी ननंद के साथ भी हुआ था और वहाँ के तांत्रिक ने उन्हें ऐसे करने के लिए बताया था। फिर, तांत्रिक के कहने पर उसकी ननंद को इस प्रकिया से गुजरना पड़ा और उसका दूसरा बच्चा सुरक्षित पैदा हुआ। उसकी बात को प्रमाण मानकर इस औरत को भी वही करने पर मजबूर किया गया पर दूसरे बच्चे के वक़्त उसे अंतर्गत तकलीफ हुई और उसे अस्पताल लाया गया जब उसके स्तन पर दाग दिखे तब इस बात का खुलासा हुआ।

श्रद्धा बुरी बात नहीं है पर ध्यान रखना होगा की कही वो श्रद्धा अंधश्रद्धा मे तो परिवर्तित नहीं हो रही है? इसलिए शिक्षा बेहद ज़रूरी है। साक्षरता और संवेदना ही इस समस्या का हल हैं। वो एक औरत होने से पहले एक इंसान है। उसे भी दर्द होता है अगर इस बात को ध्यान में रखा जाए तो कई औरतों को हिंसा और शोषण का सामना नहीं करना पड़ेगा और न ही कानून का सहारा लेना पड़ेगा। औरत को तकलीफ देने से कुछ नहीं बदलेगा ना किसी की नजर बदलने से कुछ होगा। हमें नज़रिया बदलना होगा तब ही परिवर्तन आएगा।

ईमेज सोर्स : Sujay_Govindraj from Getty Images Signature via Canva Pro (for representational purpose only)

 

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