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एक भी एक्टर घर से नहीं निकला और शूट हो गयी वेबसीरिज़ THE GONE GAME

The Gone Game के निर्देशक निखिल भट्ट ने इस दौरान लोगों के मध्य तनाव पर अलग तरह से सोचा और एक कहानी की पटकथा तैयार की, जो सस्पेंस थ्रिलर बनकर निकली।

The Gone Game के निर्देशक निखिल भट्ट ने इस दौरान लोगों के मध्य तनाव पर अलग तरह से सोचा और एक कहानी की पटकथा तैयार की, जो सस्पेंस थ्रिलर बनकर निकली।

कोविड 19 के लांकडाउन के दौरान का समय चुनौतियों से भरा हुआ रहा है। जिन चुनौतियों से दुनिया का हर व्यक्ति कुछ न कुछ सीखने की कोशिश कर रहा है, हम लोगों ने भी बहुत कुछ सीखा है। द गॉन गेम / The Gone Game के निर्देशक निखिल भट्ट ने इस दौरान लोगों के मध्य तनाव पर अलग तरह से सोचा और एक कहानी की पटकथा तैयार की, जो सस्पेंस थ्रिलर बनकर निकली।

बीते हफ्ते ओटीटी प्लेटफार्म पर रिलीज हुई वेबसीरिज़ और फिल्मों में सोनी लिव पर रिलीज हुई एक वेब सीरिज द गॉन गेम / THE GONE GAME भी थी, जिसको बहुत कम नोटिस किया गया।

मेरा दावा है जिसने भी देखाना शुरू किया होगा उसने चारों एपिसोड देख लिए होगे और अब अगले एपिसोड के इंतजार कर रहा होगा। कहानी को इस तरह रचा ही गया है कि वह अपने जोनर में बांध लेती है। शुरुआत इस तरह से होती है कि कोरोना शुरू हो चुका है और भारत में प्रधानमंत्री के संदेश के बाद लोग थाली-घंटी बजा रहे है। एपिसोड खत्म होने से पहले ही अगले एपिसोड का कम्टीमेंट करवा लेती है।

क्या है कहानी है THE GONE GAME की

कहानी तो कोविड 19 को लेकर लिखी गई है। राजीव गुजराल(संजय कपूर) का बेटा साहिल गुजराल (अर्जुन माथुर) बैंकॉक से वापस लौटता है। उसी समय इंडिया में लॉकडाऊन हो जाता है। साहिल गुज़राल अपनी पत्नी सुहानी( श्रेया पिलगांवकर) से अलग खुद को कमरे में क्वारंटाइन कर लेता है।

सस्पेंस क्रिएट करने के लिए एक वकील सुभाष चौधरी (दिबेंन्दू भट्टाचार्य) का किरदार गढ़ा गया है। सुभाष चौधरी के राजीव गुजराल पर कुछ पैसे हैं। सुभाष राजीव गुजराल और उसके बेटे को धमकी देता है। कहानी में जिससे सस्पेंस बना रहे।

साहिल गुजराल को खांसी है। उसकी तबियत बिगड़ने लगती है। साहिल गुज़राल का जीजू प्रतीक जिंदल(इंद्रनील सेनगुप्ता) उसे हॉस्पिटल में जांच के लिए लेकर जाता है। हॉस्पिटल से साहिल की चिता के फोटो के साथ मेसेज आता है कि साहिल गुजराल नहीं रहा।

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उसके पूरे परिवार में शोक की लहर दौड़ जाती है। यही कहानी का टविस्ट बनना शुरू होता है जब साहिल गुजराल के मरने के दूसरे दिन ही उसकी बहन को साहिल का फोन आता है।

क्या साहिल गुजराल वाकई मर गया या उसका किडनैप हुआ है? साहिल के मौत हुई या वो कोरोना से मरा? अगर कोरोना से मरा तो कोविड लिस्ट में उसका नाम क्यों नहीं है? उसका फोन कौन इस्तेमाल कर रहा है? क्या साहिल की पत्नी भी इस क्राइम में शामिल है? जब लाकडाउन में घर के बाहर नहीं निकलना है तो इसका जवाब कैसे खोजा जाए? इसी टविस्ट और स्स्पेंस में चार एपिसोड खत्म हो जाते है जो मात्र तीस मिनट के आसपास के है।

क्यों देखे यह सीरिज़

इस सीरिज़ की तारिफ इसलिए करना चाहिए क्योंकि सारे शूट घर के अंदर हुए है। हर किरदार के सामने कोइ दूसरा किरदार वर्चुअल ही खड़ा हो सकता था वास्तव में नहीं। कैमरा के सामने अकेला किरदार दूसरे किरदार को बस महसूस करके एक्टिग कर रहा है। आसान तो नहीं ही कहा जा सकता है।

इसलिए सिनेमाटोग्राफर को शाबासी मिलनी चाहिए उनकी पूरी मेहनत ही सीरीज को दिलचस्प बनाती है। कभी-कभी लगता है पूरी फिल्म मोबाइल विडियों चैट में ही खत्म हो जाएगी। क्योंकि बार-बार एक ही लोकेशन से अलग-अलग सिच्वेशन पर बात हो रही होती है। जिस दौर की कहानी कहने की कोशिश है उसको देखकर सही भी लगता है क्योंकि लांकडाउन है और सब घरों में बंद हैं।

अभिनय के स्तर पर कलाकारों के चेहरे पर वह भाव की कमी जरूर दिखती है। कोरोना काल में एक परिवार के सदस्य के मरने के बाद पैदा हुई चुनौतियों को दिखाती हुई यह फिल्म उस महौल में ले जाकर बांध देती है। इसमें निर्देशक कामयाब हो जाता है पर अभिनय की कलाकारों में कमी वापस जमीन पर पटक देती है। पर रहस्य और रोमांच को कम नहीं होने कहानी अंत से पहले तो साहिल गुजराल की पत्नी को ही कसूरवार मान लेते है। परंतु, चौथे एपिसोड का अंत आकर कहता है कि ‘पिक्चर अभी बाकी है दोस्त’, थोड़ा इंतजार करें।

मूल चित्र : YouTube से फिल्म के स्क्रीनशॉट 

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