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फिल्म घूमकेतु – एंटरटेनमेंट से चूक जाती है अनुराग कश्यप और नवाज़ुद्दीन सिद्दीकी की ये फिल्म

फिल्म घूमकेतु में महिला पात्रों को जिस तरह से दिखाया गया है कमोबेश हमारे आस-पास भी उसी परिवेश की महिलाएं देखने को मिलती हैं।

फिल्म घूमकेतु में महिला पात्रों को जिस तरह से दिखाया गया है कमोबेश हमारे आस-पास भी उसी परिवेश की महिलाएं देखने को मिलती हैं।

अनुराग कश्यप और नवाज़ुद्दीन सिद्दीकी अब तक जब भी साथ किसी फिल्म में काम किया है। तब दर्शकों को निर्देशन और अभिनय देखने को मिला है। लॉक डाउन के चौथे दौर में दोनों जोड़ी ने ज़ी5 पर सालों से डिब्बे में बंद पड़ी फिल्म घूमकेतु रिलीज़ करके दर्शकों को घोर निराश किया।

फिल्म में एक डायलांग है कि “ये कांमेडी बहुत कठिन चीज है, लोगों को हंसी आनी भी तो चाहिए।” पर पांच साल से जिस फिल्म को कोई डिस्ट्रीब्य़ूटर नहीं उठा रहा था, वज़ह शायद यह हो कि “फिल्म दर्शकों को पसंद आए, इसके लिए फिल्म में भी कुछ होना चाहिए।” बहरहाल यह कहना सही नहीं है कि घूमकेतू में कुछ नहीं है। यह फिल्म अपने खरे भदेसी कलेवर में हंसाती भी है और अपनी अधपकी मेहनत और गंभीरता के कारण उकता भी इतना देती है कि मनोरंजन दूर भाग जाता है। अपने हिस्से में हर कलाकार ने अपने अभिनय के साथ पूरा न्याय किया। पर पूरे फिल्म में ऐसा सा कुछ भी नहीं है कि दर्शक उससे जुड़ सके।

क्या है कहानी फिल्म घूमकेतु की

मोहना गांव के घूमकेतू(नवाज़) जो लड़की शादी के कार्ड और ट्रकों के पीछे शायरी लिखने के शौकिन है, को राइटर बनना है और इस इच्छा को पूरा करने के लिए गांव के अखबार “गुदगुदी” मे नौकरी पाने के लिए चक्कर लगाता है। वहां उसे स्ट्रगल करके कहा जाता है और घूमकेतू अपनी शादी के दस दिन बाद भावी लेखक बंबई भाग आता स्ट्रगल करने। वहां प्रोडूयूसर को कहानियां सुनाता है जिसका नतीजा कुछ नहीं निकलता। घर के भाग के आने के कारण थाने में रपट लिखाई जा चुकी है और मुंबई में जिस पुलिस के पास उसको खोजने कि जिम्मेदारी है वह है अनुराग कश्यप।

पुलिस घूमकेतू को पकड़ आती है या नहीं। घूमकेतू फिल्म लिख पाता है या नहीं इन सारे सवालों का जवाब पाने के लिए फिल्म देखनी होगी।

फिल्म में महिला पात्रों को जिस तरह से दिखाया गया है कमोबेश हमारे आस-पास भी उसी परिवेश की महिलाएं देखने को मिलती हैं। बेहद प्यार करने वाली बुआ, एक सौतेली मां, एक अदद पत्नी और पुलिस इंस्पेक्टर की पत्नी। शानदार कलाकारों का जमाबड़ा और बेहतर अभिनय कराने के बाद भी कमजोर स्कीप्ट के कारण “घूम केतू” शानदार फैमली ड्रामा बनने से चुक जाती है।

दर्शक इस फिल्म को अनुराग और नवाज़ के वज़ह से देखना पसंद करेगे। इस कम्बों अभिनय के बाद जिस खालीपन को महसूस करेंगे वह भसड़ मचा सकती है। वैसे भी सिनेमा देखने के बाद न ही खुशी मिलती है न ही अधिक अफसोस होता है। वज़ह नवाज़ और अनुराग का कम्बों थोड़ा-बहुत मनोरंजन भी और बोझील भी करती है।

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यह सच है कि फिल्म घूमकेतु में अनुराग और जवाज़ के कम्बों के अतिरिक्त अमिताभ बच्चन, रणवीर सिंह, निखील आडवाणी और सोनाक्षी भी मौजूद है आइटम नंबर भी मौजूद है। इसके बावजूद भी फिल्म अधिक दर्शकों को मनोरंजन और बोझीलपन के दंव्द में बांध देती है।

मूल चित्र : YouTube

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