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क्यों फोर मोर शॉट्स प्लीज़ – सीज़न 2 का फेमिनिज़्म मुझे निराश करता है…

अमेज़न प्राइम वीडियो के फोर मोर शॉट्स प्लीज़ के पहले सीज़न की शानदार सफलता के बाद, दूसरा सीज़न पहले सीज़न के तरह कमाल कर सकेगा इसमें मुझे संदेह है।

अमेज़न प्राइम वीडियो के फोर मोर शॉट्स प्लीज़ के पहले सीज़न की शानदार सफलता के बाद, दूसरा सीज़न पहले सीज़न के तरह कमाल कर सकेगा इसमें मुझे संदेह है।

वेब सीरीज़ की दुनिया में एक सीज़न आने के बाद दूसरा सीज़न लाना एक व्यावसायिक मज़बूरी बनकर उभरी है। पर मुख्य मसला यही है कि एक ही ट्रैक पर कहानी कहने की मज़बूरी दर्शकों को खींच लाएगी, यह तय नहीं है। भारतीय संदर्भ में अब तक जितने भी वेब सीरीज़ तैयार हुयी हैं, अपने दूसरे सीज़न में फुस्स होकर रह गयी हैं। हां! दशर्कों में उत्सुक्ता जरूरी रही है, इस बात से इंकार नहीं किया जा सकता है।

अमेज़न प्राइम वीडियो के फोर मोर शॉट्स प्लीज़ के पहले सीज़न की शानदार सफलता के बाद, दूसरे सीज़न के प्रति उत्सुकता अपने चरम पर रही, जो 17 अप्रैल, 2020 से अमेज़न पर आई। यह पहले सीज़न के तरह कमाल कर सकेगी इसमें संदेह है।

फोर मोर शॉट्स प्लीज़ प्लीज़ रंगिता प्रीतीश नंदी द्वारा निर्मित और प्रीतीश नंदी कम्युनिकेशंस लिमिटेड सिज़न 2 द्वारा निर्मित है जिसे नूपुर अस्थाना ने निर्देशित किया है। अमेज़न मूल श्रृंखला फ़ोर मोर शॉट्स प्लीज़ में सयानी गुप्ता, कीर्ति कुल्हारी, बानी जे और मानवी गगरू के साथ प्रतीक बब्बर, लिजा रे, मिलिंद सोमन, नील भूपालम, सिमोन सिंह और अमृता पुरी नज़र आते है।

अगर इस वेब सीरीज को देखें तो शराब, सेक्स और गालियों के प्रयोग को देखते हुए वैधानिक चेतावनी में प्रोड्कशन टीम को यह ज़रूर लिख देना चाहिए कि इन सब चीजों का फेमिनिज्म से कोई मतलब नहीं है। वजह ये कि रिबेल, फेमिनिस्ट और आत्मनिर्भर महिला होने का सही मतलब यह कभी नहीं है। और महिलाओं के जीवन में मोटापा, ब्रेक-अप, चीटिंग और पिरीयड में टैम्पान कैसे इस्तेमाल करते हैं, इसके अलावा और बहुत सारी समस्याएं है।

इस दूसरे सीज़न को देखकर यही लगा कि मैं पहले सीजन की कहानी को एक नये अलहदा अंदाज में देख रहा हूं और मैंने अपना वक्त क्यों बर्बाद किया? बहरहाल, फोर मोर शॉट्स प्लीज़ – सीज़न 2 वहीं से शुरू होता है जहां पिछले सीज़न में खत्म हुआ था। चारों अपने झगड़े के चार महीने बाद इस्तांबुल में अपने शिकवे-शिकायत के निपटने के बाद जिंदगी में नया क्या चल रहा है यह बतियाते हुए वापस इंडिया आते हैं। उसके बाद चारों के जिंदगी में मोड़ आता है जिसकी कहानी दस एपिसोड में दिखाई गई है।

कहानी की बात करें तो लगता है कि नया सीज़न लाने का दवाब प्रोडक्शन पर अधिक था। इसलिए चारों अहम किरदार अपनी कहानी में क्या कहना चाह रहे है कुछ स्पष्ट नहीं है। मुझे लगा कि मीलिंद सोमन ने किरदार बांधे रखने की कोशिश की है, पर एक किरदार के दम पर दस एपिसोड को झेलना मज़बूरी लगती है।

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चारों अहम किरदार के अभिनय में दोहराव अधिक लगता है, वो नए शेड्स में ढलते हुए नहीं लगते है। बानी पूरी सीरिज में अपने रोड़ीज़ के ज़ोन से बाहर आती नहीं दिखती है। कृति अपने किरदार के साथ ईमानदार दिखती है इस सीजन में वह उन चुनौतियों से लड़ती-भिड़ती दिखती है जो वर्किग तलाकशुदा कामकाजी महिलाओं के साथ होते है। मानवी पहले सीजन के तरह ही इस सीज़न में भी सबसे अधिक पैम्पर किरदार है, जिसको पता नहीं है कि उसको करना है, उसको अपने मोटापे से परेशान रहना है या बांयफ्रेड नहीं है या वह खुद अपने कैरियर के लिए सिरियस नहीं है। चौथी और आखरी हैं सयानी गुप्ता जो एक किताब लिख रही है लेकिन अपने अतीत से पीछा नहीं छुड़ा पा रही है।

इन चारों की कहानी जिस तरीके से कही गयी वह दिल को तो छूती नहीं ही है। सबसे अधिक परेशान करती है कि फ़िमिनिस्म को इस तरह से दिखाने का क्या कोई खास संदर्भ है या शराब, सिगरेट और सेक्स के मामले में आज़ाद ख्याल लड़किया ही फैमिनिस्ट होती है यह साबित करने की होड़ मची हुई है।

किसी भी महिला के जीवन में तलाक, किसी रिश्ते में धोखा या समलैंगिक रिश्ते उसके जीवन का वह दाग नहीं है, जिसका गिल्ट रखकर वह अपना बाकी का जीवन जाया करें। कोई जरूरी नहीं है वह इसे गिल्ट समझे और इससे उबरने के लिए वह सब करे जो फोर मोर शॉट्स प्लीज़ में दिखाया जा रहा है और एक बड़ा वर्ग उसको फेमिनिज़्म समझकर सामने तो नहीं पीठ पीछे मुंह बिचका रहा है।

इस सीज़न में पिछले सीज़न के सफलता के बाद बहुत संभावनाएं मौजूद थी, पर ऎसा कुछ देखने को मिलता नहीं है। अपने बोल्ड कंटेंट के चलते सर्खियों में रहने वाला सीजन चार दोस्त के आजाद ख्याली को इस सी़ज़न में पसंद जरूर करेगा, पर बहुत जल्द निराश हो जाएगा।

मूल चित्र : YouTube

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