कोरोना वायरस के प्रकोप में, हम औरतें कैसे, इस मुश्किल का सामना करते हुए भी, एक दूसरे का समर्थन कर सकती हैं?  जानने के लिए चेक करें हमारी स्पेशल फीड!

Anuradha Agnihotri

Voice of Anuradha Agnihotri

हाँ मैं एक औरत हूँ और औरत होने पर गर्व है मुझे

औरत कमजोर नहीं है वो लोगों की बातों से अपने को कमजोर समझती है, जो एक नये जीवन को दुनिया में ला सकती है वो कुछ भी करने की ताक़त रखती है। 

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करवा चौथ है आज भी मेरे लिए ख़ास…

ज़िंदगी की उलझनों से ठहरकर फिर याद दिलाना, हम एक दूसरे के लिए बहुत ख़ास, इस दिन के बहाने ही सही, एक बार फिर अपने प्यार को पुलकित करते हैं...

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अब बस! बेटी शादी करेगी तो अपनी मर्ज़ी से…

बेटी आपकी मर्ज़ी से शादी तो कर लेगी पर वो ख़ुश नहीं रह पाएगी। रोहिणी चाहे तो आपके ख़िलाफ़ पुलिस कम्प्लेन भी कर सकती है पर उसने ऐसा नहीं किया।

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और उसकी ये लड़ाई अपनी बेटी के लिए थी…

वह इस बात का अनुभव कर चुकी थी कि एक औरत, चाहे वो जो भी हो, किसी की पत्नी हो, बहु हो या माँ हो, हर रूप में उसका शिक्षित होना बहुत ज़रूरी है।

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…और इस तरह सास बहु के इस रिश्ते को एक नया जीवन मिल जाएगा…

एक माँ सदा अच्छी है तो फिर सास क्यों बुरी है? एक बेटी सदा अच्छी है तो बहु ही क्यों बुरी है? जब दोनो ही करुणामई हैं, तो फिर सास बहु के रिश्ते से करुणा कहाँ गयी है।

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तब समझना प्रेम पूर्ण और साकार हुआ है…

जब एक के बिना दूसरा अपूर्ण हो जाए, तब समझना इस संसार में सबसे बड़ी जीत हंसिल की है तुमने। तब समझना प्रेम पूर्ण हुआ है!

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अब फ़ैसलों में मजबूरी नहीं मंज़ूरी शामिल होनी चाहिए…

जब ज़रूरी हो, तब अपने लिए भी, मौन व्रत भंग कर कदम और आवाज़ उठानी चाहिए अपने फ़ैसलों को अपने दमख़म पर लेना चाहिए...

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तुम मेरे जिस्म को डरा सकते हो आत्मा को नहीं!

ऐसा करके तुम अपने को मर्द समझ रहे थे? जिस्म को जलाकर आत्मा को डरा रहे थे? मीडिया फिर भरा था ब्रेकिंग न्यूज़ से, न्यूज़ वही बस लड़की बदल गयी!

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कई रिश्तों में प्रेम नहीं सिर्फ सात फेरों का बंधन होता है…

कई रिश्ते लोग सात फेरों का बंधन समझ निभाते रहते हैं, कभी आर्थिक निर्भरता, तो कभी बच्चों की निर्भरता और ये हमारे समाज का एक और कड़वा सत्य है!

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मुझे देवी बना कर हर किये की माफ़ी क्यों चाहते हो तुम?

मेरी झल्लाहट पर तुम,अपना रौद्र रूप दिखलाते हो, ऐसा होने पर भी तुम काली मुझे ही बतलाते होऔर फिर एक बार शोषण मेरा कर जाते हो?

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बहु भी बेटी बन जाए अगर सास माँ बन जाए…

बहु ने घर के पर्दे बदल दिए हैं, किचन का समान भी अपने हिसाब से मंगाती है सुरेश से। ऐसे ही और भी कई घर की चीजें...अब क्या क्या बताऊँ तुझे?

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हाँ! तुम मेरे कातिल हो।

हाँ! तुम मेरे कातिल हो। उस रूह के, जिसमें क्षमा थी। उस आत्मा के, जिसमें दया थी। हाँ! तुम मेरे कातिल हो।

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कठघरे में हर बार हम ही खड़े थे…

विश्वास के क़त्ल को हम सह ना सके थे, अपनों से दग़ा खाकर ज़हर का घूँट हम पी रहे थे। इतने मजबूर थे की फिर भी हम जी रहे थे...

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ज़िंदगी को आज फिर गले लगा लिया है…

आँखों की नमी को फिर पोंछ लिया है, लबों को आज फिर मुस्कुरा लिया है। छोड़कर सारी चिंताएँ ज़िंदगी को आज फिर गले लगा लिया है।

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मैं भी सही हूँ, पर ये तू नहीं समझेगा…

मैं भी सही हूँ, पर ये तू नहीं समझेगा, तेरा अहम तुझे कभी समझने ही नहीं देगा...तेरा अहम तुझे कभी समझने ही नहीं देगा...!

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ये वक्त भी गुज़र जाएगा…

ज़िंदगी तो जंग है इम्तिहानों की, हम नहीं डरते इम्तिहानों से, तू बस ख़ुद पर विश्वास रख, उस विश्वास से ही तू जीत जायेगा।

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मीठी सी नोक-झोंक और थोड़ी सी तकरार, कुछ ऐसा ही है पति और पत्नी का प्यार!

पति-पत्नी का प्रेम जैसे - लबों पर शिकायतें, आँखों में प्यार, वो मीठी सी नौक झोंक और थोड़ी सी तकरार, कुछ देर बाद, फिर वो पहले जैसा प्यार!

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