कोरोना वायरस के प्रकोप में, हम औरतें कैसे, इस मुश्किल का सामना करते हुए भी, एक दूसरे का समर्थन कर सकती हैं?  जानने के लिए चेक करें हमारी स्पेशल फीड!

अब मैंने भी अपनी मर्ज़ी से जीना सीख लिया है!

Posted: अप्रैल 4, 2021

जब मेरा मन करता है, सजती हूँ, संवरती हूँ, सिंदूर भी लगाती हूँ, पर दकियानूसी बातों पर अब मैं एतराज जताती हूँ, क्यूंकि अब मैं अपनी मर्ज़ी से जीती हूँ!

हूँ जगत जननी हूँ शक्ति स्वरूपा,
जिसने पीड़ा में भी सुख को ही देखा,
पर पीड़ा और अत्याचार में,
अब मैंने फ़र्क़ करना है सीखा।

हाँ, अब मैंने भी अपनी मर्ज़ी से जीना है सीखा,
नहीं है मुझे कोई गुरेज़ चूड़ी बिंदी पायल से,
जब मेरा मन करता है,
सजती हूँ, संवरती हूँ, सिंदूर भी लगाती हूँ,
पर दकियानूसी बातों पर अब मैं एतराज जताती हूँ!

नहीं है गुरेज़ मुझे चूल्हा चौका करने से,
सेवा को आज भी अपना कर्म समझती हूँ,
पर ये चार दिवारी ही सिर्फ़ मेरी दुनिया है,
इस बात से अब मैं साफ़ इंकार करती हूँ।

खुले आसमान में आज मैं निडर हो,
अपने सपनों के पग पसारती हूँ,
हाँ मैं अब अपनी मर्ज़ी से जीती हूँ,
नहीं हूँ प्रतिद्वंदी मैं पितृसत्ता की।

इतिहास गवाह है कि,
एक स्त्री ने भी दूसरी स्त्री को
कब आगे बढ़ने दिया है,
ना जाने कितनी बार,
उसका पैर खींच कामयाबी,
को उससे छीन लिया है,
और फिर उसे किसी ना किसी के
मोहताज कर दिया है।

दुनिया समाज से लड़ने से पहले,
हमें खुद से लड़ना होगा,
अपनी रूढ़िवादी सोच की
क़ैद से आज़ाद होकर,
उन्मुक्त आसमान में उड़ना होगा।

स्त्रियों की तरक़्क़ी के लिए
ना केवल पुरुष के ख़िलाफ़,
बल्कि कई बार, एक स्त्री को स्त्री के,
ख़िलाफ़ भी खड़ा होना होगा।

मूल चित्र : Still from the Short Film Shiddat Se, YouTube

पसंद आया यह लेख?

पाइये विमेन्सवेब के सारे दिलचस्प हिंदी लेख अपने ईमेल इनबॉक्स मे!

विमेन्सवेब एक खुला मंच है, जो विविध विचारों को प्रकाशित करता है। इस लेख में प्रकट किये गए विचार लेखक के व्यक्तिगत विचार हैं जो ज़रुरी नहीं की इस मंच की सोच को प्रतिबिम्बित करते हो।यदि आपके संपूरक या भिन्न विचार हों  तो आप भी विमेन्स वेब के लिए लिख सकते हैं।

घर के बाहर काम करने से क्या मैं बुरी माँ बन जाऊँगी?

टिप्पणी

Women In Corporate Allies 2020

अपना ईमेल पता दर्ज करें - हर हफ्ते हम आपको दिलचस्प लेख भेजेंगे!

Women In Corporate Allies 2020