Swati Kanojia

Voice of Swati Kanojia

साथ समय के चल रही हूँ, ऐ ज़िंदगी तेरी कहानी मैं ख़ुद ही लिख रही हूँ

टूट गयी जो गुड़िया वक़्त के आघात से, उसको फिर से गढ़कर नयी सी कर रही हूँ, समय को बदलकरसाथ समय के चल रही हूँ, ऐ ज़िंदगी तेरी कहानी मैं ख़ुद ही लिख रही हूँ। 

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माना के हम नारी हैं पर हिम्मत कभी न हारी है!

हमसे जन्म लेने वाले, हमको कमज़ोर समझते हैं, हाय कितने नादाँ हैं ये, क्या ख़ाक नारी को समझते हैं। माना के हम नारी हैं पर हिम्मत कभी न हारी है!

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