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साथ समय के चल रही हूँ, ऐ ज़िंदगी तेरी कहानी मैं ख़ुद ही लिख रही हूँ

टूट गयी जो गुड़िया वक़्त के आघात से, उसको फिर से गढ़कर नयी सी कर रही हूँ, समय को बदलकरसाथ समय के चल रही हूँ, ऐ ज़िंदगी तेरी कहानी मैं ख़ुद ही लिख रही हूँ। 

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टूट गयी जो गुड़िया वक़्त के आघात से, उसको फिर से गढ़कर नयी सी कर रही हूँ, समय को बदलकर
साथ समय के चल रही हूँ,
ऐ ज़िंदगी तेरी कहानी मैं ख़ुद ही लिख रही हूँ। 

समय को बदलकर
साथ समय के चल रही हूँ
ऐ ज़िंदगी तेरी कहानी मैं ख़ुद ही लिख रही हूँ ।

टूट गयी जो गुड़िया
वक़्त के आघात से
उसको फिर से गढ़कर
नयी सी कर रही हूँ
ऐ ज़िंदगी तेरी कहानी मैं ख़ुद ही लिख रही हूँ।

बैठे थे मुझको जो
कमज़ोर मान के
उनके नाम भी
निशानी कर रही हूँ
ऐ ज़िंदगी तेरी कहानी मैं ख़ुद ही लिख रही हूँ।

करे सितम जो वक़्त भी
हँस कर ही सह रही हूँ
ऐ ज़िंदगी तेरी कहानी मैं ख़ुद ही लिख रही हूँ।

मानोगे तुम भी मुझको
सोना खरा ही एक दिन
इम्तिहान की अगन में
हर पल जो जल रही हूँ
ऐ ज़िंदगी तेरी कहानी मैं ख़ुद ही लिख रही हूँ।

मूल चित्र : Pexels 

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Swati Kanojia

Dreamer , creative , luv colours of life , Teacher , love adventure, singer , Dancer , P☺️ read more...

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