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सच है ज़िंदगी किसी सपने जैसी ही है, यहाँ कब क्या होगा हमें पता ही नहीं कहती हैं स्वाति

Posted: अक्टूबर 30, 2019

विमेंस वेब की लेखिका स्वाति कहती हैं, “मैं चाहती हूँ कि कोई भी उन स्थितयों से न गुज़रे जिनसे हम गुज़र चुके हैं और ज़िंदगी की इस लड़ाई में वो ख़ुद को अकेला न पायें।”

आज दिन मंगलवार अक्टूबर महीने को २९ तारीख़ है।

मुझे आज प्रातः ३.३७ मिनट पर वूमेंस वेब की टीम का मेल प्राप्त हुआ। इस मेल में उन्होंने मुझे बधाई दी है मेरे टॉप १०० लेखिकाओं में २२ श्रेणी पर होने के लिए और साथ ही यह भी बताया की मेरा लेख काफ़ी पढ़े जाने वालों में से है अब।

यह मेल देखकर मेरी ख़ुशी का ठिकाना नहीं था पर साथ ही इतने कम समय में इतनी बड़ी कामयाबी हासिल हो तो ज़िंदगी सपनों सी लगने लगती है। जैसे कल तक ज़िंदगी में सब कुछ खोया ही था और अचानक से ईश्वर ने मेरी झोली में ख़ुशियाँ डाल दीं।

सच है ज़िंदगी किसी सपने जैसी ही है, यहाँ कब क्या होगा हमें पता ही नहीं। पर आज इस मेल को प्राप्त करने के बाद मैं वुमेंस वेब की टीम का पूरे दिल से शुक्रिया अदा करना चाहती हूँ जिन्होंने मुझे इतनी मुहब्बत दी मेरी सोच को इतना सम्मान दिया।

जब हमें हमारे पाठकों से इतना प्यार मिलता है, सम्मान मिलने लगता है, तो हमारी ज़िम्मेदारी और बढ़ जाती है कि हम अपने पाठकों की उम्मीदों पर खरे उतरें और हमेशा उनके दिल में अपनी जगह बनाये रखें। कहीं न कहीं हम लेखकों की नज़र से भी आप सब इस दुनिया को देखने लगते हैं और उस अपनी सोच से मिलता जुलता पाकर दुनिया को एक नये ढंग से भी देखने की कोशिश करते हैं।

इसलिए मैं चाहती हूँ, आप मेरी ज़िंदगी से ज़िंदगी की कुछ परिस्थितयों से रूबरू हों, जो कहीं न कहीं आप सब की मदद करे, ज़िंदगी को जीने में या किसी मुश्किल से निकलने में। मैं यह भी नहीं जानती कि मेरी सोच आपकी किस तरह मदद करेगी, पर मैं पूरी कोशिश करूँगी कि मैं अपने पाठकों की मुश्किलों का हल निकाल सकूँ, उनके दुःख में सहभागी बन सकूँ और मुझमें वो ख़ुद को ही देखें।

मैं आप सब जैसी और आपकी ही होना चाहती हूँ, चाहती हूँ कि मेरी कोई महिला मित्र उन स्थितयों से कभी न गुज़रे जिनसे हम गुज़र चुके हैं, और यदि वो गुज़र भी रही हैं, तो ज़िंदगी की इस लड़ाई में वो ख़ुद को अकेला न पायें। हमें भी ख़ुद के साथ पायें।

अंत में मैं एक बार फिर वुमेंस वेब की टीम का धन्यवाद करती हूँ और बस इतना कहना चाहती हूँ

यूँ लिखना सिर्फ़ नहीं शौक़ मेरा मैं जज़्बातों का मारा हूँ।
अनंत असीम इस आसमान का एक छोटा सा तारा हूँ।।
मूल चित्र : Pixabay

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