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दीदी, शादी के बाद क्या होता है मुझे किसी ने नहीं बताया…

मैंने पूछा, “छुटकी, शादी के बाद सिर्फ रोमांस ही नहीं रह जाता है जीवन में, तुम दोनों के बीच शारीरिक संबंध भी बनता है। सेक्स!”

बदलाव की बात हम सब करते हैं। गली-मोहल्ले में आपको ऐसे ज्ञानी  लोग मिल जाएंगे जो अपनी वाणी से बदलाव की हवा बुनते हैं। सतही तौर पर इस भीड़ का एक हिस्सा भी अपना मन लोगों को जागरूक करने में लगाए तो आस-पास की रूपरेखा जरूर बदलने लगेगी। मैं इतना दावे से कैसे कह सकती हूँ? तीन-चार वर्ष पहले मैंने इस बड़बोली भीड़ से इस्तीफा दे दिया।

अब ऐसा नहीं हैं कि इस भीड़ से निकल मैं क्रांतिकारी परिवर्तन का पर्याय हो गई हूँ। बस फ़िज़ूल की बातों से कट लेती हूँ, मुझे लगता है जब आप कुछ करना चाहते हैं तो जिंदगी आपको मौके ज़रूर देती है। मैंने जाना लिखकर मन की बातों को या अपनी सीख को मैं दूसरों तक पहुँचा सकती हूँ। जो अच्छा लग रहा था वह सब कर रही थी, फिर भी संतुष्टि नहीं थी। 

 एक दिन मेरी एक छोटी कजिन की शादी की खबर आई। यह छुटकी मुझे बेहद प्रिय है। थोड़ी भोली सी है, इंट्रोवर्ट भी और दुनियादारी से कुछ अनजान। शादी उसकी मर्ज़ी से हो रही थी बेहद खुश थी मैं। 

एक दिन यूं ही बातों-बातों में मैंने पूछा, “और कैसा है तुम्हारा दुल्हा?”

लाज से उसके गाल लाल हो गए।

जो बात मुझे खटकी वो थी उसका पसीना-पसीना होना, फिर विडियो काल भी थोड़ी देर में उसने डिस्कनेक्ट कर दिया। थोड़ा विचित्र था। सोचा पूछ लूँ लेकिन अगले रोज़ उसका फोन आया, “दी आप बिज़ी हैं क्या?” आवाज़ की बैचेनी मुझे महसूस हो गई।

मेरे न कहने पर उसने एक सांस में कहा, “कल मैंने फोन काट दिया आपका क्योंकि उसका मैसेज आया था, अब तो एक किस दे दो लिखा था उसने।”

मुझे उसके कान-गाल लाल होने का आभास इस पार तक हो रहा था। वैसे हँसी मेरे होंठों तक आ कर बेजान रह गई जब उसने कहा, “फिर उसके बाद क्या होता?”

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धीमी पड़ती आवाज़ में उसने मुझसे ज्यादा खुद से कहा था। फिर बिना कुछ सोचे मैंने पूछा, “छुटकी, शादी के बाद सिर्फ रोमांस ही नहीं रह जाता है जीवन में, तुम दोनों के बीच शारीरिक संबंध भी बनता है… सेक्स… तुम जानती हो न?”

फिर तो जैसे वो सकपका गई और हड़बड़ा कर फोन काट दिया।

उस रात मेरी सोच में निकली कि कैसे मैं स्वयं कितना कम जानती थी इस बारे में और मुझे कैसी परेशानियां और झिझक का सामना करना पड़ा था। छुटकी तो अपने छोटे शहर से कभी बाहर गई भी नहीं थी। आधी रात तक सोचती रही, “आंटी क्यों नहीं बात करती हैं?” हालांकि मुझे इसके जवाब का आभास था पर अंतर्द्वंद्व की उठा-पटक में मुझे कुछ सटीक सूझ नहीं रहा था। फिर उसका मैसेज फ़्लैश देखकर मैंने भी एक निर्णय ले ही लिया।

उसका यह पहला झुकाव था तो उसकी अनभिज्ञता समझाना मेरे लिए भी नया ही था। हिचकिचाहट दोनों तरफ़ थी। फिर बातों का सिलसिला शुरू हुआ।

“तुम क्या जानती हो सेक्सुअल रिलेशन के बारे में?”

छुटकी का जवाब अचंभित करने वाला था, “दो लोग एक साथ रहते हैं। किस, गले लगना और कुछ होता है…दी! मुझे सचमुच नहीं पता।”

फिर अगले कुछ क्लास तक मैं बहन कम टीचर ज्यादा थी। मैंने उसे किस, फोरप्ले, इंटरकोर्स, कन्सेंट, औरगैज़्म से लेकर प्रोटेक्शन तक बताया। यह समझाया कि कैसे स्त्री-पुरुष के क्लाइमेक्स अनुभव करने में अंतर होता है। यह भी बताया कि पहली बार असहजता या दर्द महसूस होगा और यह भी कि कुछ भी तुम्हारी मर्ज़ी के बिना नहीं होना चाहिए। यह भी समझाया कि अगर लगे कि तुम्हारी इच्छा के बिना हो रहा तो मना कर दो , तकलीफ़ विचलित कर रहीं हों तो मना कर दो, और यदि ‘ठीक है पति है, उसे बुरा लगेगा’ ऐसी सोच आए फिर तो जरूर मना कर दो और यह भी कहा कि जब तुम्हें मन करें तो इनिशिएट करने में झिझक को बीच नहीं लाना।

जो अहम बात थी वह ये कि पहले अपने पति से खुलकर बात करना है क्योंकि लड़के भी इसी अज्ञानता के साथ चल रहें होते हैं। हम अक्सर अनुमान लगा लेते हैं कि आजकल के लड़के-लड़कियों को सब पता होगा पर ऐसा है नहीं, आधी-अधूरी जानकारी, कुछ आर्टिकल्स पर राय बना लेना, विडियो से कुछ समझ लेना बहुत नुकसानदायक साबित होता है।

कितना अच्छा हो हमारे माँ-बाप हमें बिठाकर हमें समझाए या किसी एक्सपर्ट की राय का उपाय सुझाए परन्तु जो झिझक, लाज, चुप्पी का पर्दा है हमारे समाज में, जाने कितने शादी-शुदा जोड़ों के जीवन को अंधेरे और अज्ञान में रखे रहता है। हम चुप रह कर सोच लेते हैं कि ये स्वयं सीख लेंगे।
छुटकी से बात करते वक्त मैंने एक बात जानी, बस आँखें मूंद लेने से बदलाव नहीं होता, एक कदम उस ओर बढ़ाना पड़ता है फिर कारवां बनता चला जाता है।

जब मैं छुटकी की शादी में पहुंची उसने दौड़ कर मुझे गले से लगा लिया।

“मुझे लगा आप लेट हो जायेंगी।” फिर मेंहदी रचे हाथ को मेरी ओर कर कहा, “कैसी लगी है?”

मैं तो उसे दुल्हन बने देख भावुक हुए जा रही थी, “बहुत  खूबसूरत लगी है, और तुम भी जच रही हो।”

“दीदी आने और उन सभी बातों के लिए धन्यवाद”, कहकर उसने ऐसे गले लगाया जैसे पहली बार मिले हो।

उसके बाद मैंने फिर एक और कज़िन से बातें की, उनकी मां के कहने पर। अंधेरा है तो  जानकारी की रौशनी से उसे दूर भगाया जा सकता है। 

बदलाव तो ऐसे ही आता है न ?

इमेज सोर्स:  Still from Alright!/Part1: Dulhan via YouTube

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Shilpee Prasad

A researcher, an advocate of equal rights, homemaker, a mother, blogger and an avid reader. I write to acknowledge my feelings. I am enjoying these roles. read more...

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