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क्या आप महिलाओं के इन 40 अधिकारों के बारे में जानते हैं?

यहां अलग-अलग 11 कैटेगरीज़ में महिलाओं के 40 अधिकार सरल भाषा में बताये गये हैं जिनके बारे में हर आम महिला को पता होना चाहिए।

यहां अलग-अलग 11 कैटेगरीज़ में महिलाओं के 40 अधिकार सरल भाषा में बताये गये हैं जिनके बारे में हर आम महिला को पता होना चाहिए।

भारत में विशेषकर महिलाओं के लिए कई अधिकार और कानून हैं। अक्सर कानून में लिखी जटिल भाषा के चलते, तो कई बार जागरूकता कम होने के कारण महिलाएँ इनका प्रयोग नहीं कर पाती हैं। या कई बार कानून पता होने पर उनका सही प्रयोग नहीं कर पाते हैं। इस वजह से कम संख्या में केस रिर्पोट होते हैं और अपराधी बच कर निकल जाते हैं।

लेकिन अगर आप थोड़ा समय निकाल कर सरल भाषा में नीचे दिए अधिकारों को पढ़ लेंगे तो आप अपने साथ कई महिलाओं की मदद कर पाएंगे। यहां लिव इन रिलेशनशिप में महिलाओ के अधिकार से लेकर आरोपित महिलाओं के अधिकार, सब कुछ साझा किया गया है।

साथ ही कुछ ऐसे महत्वपूर्ण लिंक्स भी दिए गए हैं जिनसे आप अपनी शिकायत सीधा दर्ज कर सकती हैं। हाँ, आपको कहीं ढूंढने के ज़रूरत नहीं है। अपनी समस्या से संबंधित अधिकारों के बारे में पढ़े और सीधा शिकायत दर्ज़ करवाएं।

यहां अलग अलग कैटेगरीज़ में लगभग आपके 40 अधिकारों को बताया गया है। तो पढ़िए और अपनी और ज़रूरतमंदों की मदद करिए।

1. आरोपित महिलाओं के अधिकार

  • किसी भी महिला को सूर्योदय से पहले और सूर्यास्त के बाद गिरफ्तार नहीं किया जा सकता है। हालांकि किसी खास मामले में एक प्रथम श्रेणी के मजिस्ट्रेट से लिखित अनुमति के बाद ये संभव है।
  • अगर आरोपी महिला है तो, उसके साथ उसकी गरिमा और शालीनता का ध्यान रखना अनिवार्य है।
  • उस महिला की कोई भी चिकित्सा जांच प्रक्रिया किसी महिला द्वारा या किसी दूसरी महिला की उपस्थिति में ही की जानी चाहिए।

2. महिला से अपराध की स्थिति में ये हैं अधिकार

  • किसी भी महिला की एफआईआर दर्ज़ करने के लिए पुलिस यह कहकर मना नहीं कर सकती कि ये मामला उनके क्षेत्र का नहीं है।
  • पीड़ित महिला को पुलिस दूसरों के सामने बयान देने के लिए मज़बूर नहीं कर सकती है।
  • दुष्कर्म पीड़िता का नाम सार्वजनिक नहीं किया जाना चाहिए।
  • दुष्कर्म या अन्य किसी अपराध से पीड़ित महिला को मुफ्त कानूनी मदद पाने का पूरा अधिकार है।
  • बलात्कार से सम्बंधित मुकदमों की सुनवाई महिला जज ही करेगी।
  • एक महिला को यह अधिकार है कि वह दशकों बाद भी कोर्ट में यौन शोषण की घटना आगे ला सकती है।

3. कार्यस्थल पर महिलाओं के अधिकार

  • अगर आपके साथ कार्य स्थल पर उत्पीड़न जैसी कोई दुर्घटना होती है, तो आप उसकी शिकायत कार्य स्थल पर महिलाओं के यौन उत्पीड़न (रोकथाम, निषेध और निवारण) अधिनियम, 2013 के अंतर्गत भी करवा सकती हैं।
  • समान काम के लिए महिलाओं को पुरुषों के बराबर वेतन पाने का अधिकार है।
  • मातृत्व लाभ संशोधन अधिनियम 2017 के अनुसार महिला को 26 सप्ताह की मैटरनिटी लीव लेने का अधिकार है। इसमें आपको भुगतान किया जाता है।
  • यदि किसी कारण की वजह से किसी महिला का मिसकैरेज होता है या उसे मेडिकल टर्मिनेशन करना पड़ता है तो उसे 6 हफ़्तों की पेड मैटरनिटी लीव दी जाएगी।
  • सरोगेट मां को एवं एडॉप्शन के केस में भी मातृत्व अवकाश दिया जाता है।

4. संतान से सम्बंधित महिलाओं के अधिकार

  • हिन्दू एडॉप्शन एंड सेक्शन एक्ट के तहत कोई भी वयस्क विवाहित या अविवाहित महिला बच्चे को गोद ले सकती हैं।
  • दाखिले के लिए स्कूल के फॉर्म में दोनों में से किसी भी एक अभिभावक का नाम लिखना ही पर्याप्त है।
  • शादीशुदा लोग पत्नी पत्नी दोनों की रज़ामंदी के बाद ही बच्चा गोद ले सकते हैं।
  • गर्भाधान और प्रसव से पहले लिंग की पहचान कराने वाले टेस्ट (लिंग चयन) पर रोक है।

5. हिंदू कानून के तहत महिलाओं के संपत्ति के अधिकार

  • हिंदू कानून महिलाओं को संपत्ति विरासत में देने की अनुमति देता है और संपत्ति विरासत में उन्हें समान अधिकार देता है।

इसके बारे में पूरी डिटेल यहां पढ़ें।

6. तलाक़ से संबंधित महिलाओं के अधिकार

  • पति या पत्नी में से कोई भी एक व्यक्ति यौन रोगों का शिकार है और अगर साथ के साथ में यौन संबंध बनाने से यह रोग फैल सकता है, तो ऐसी स्थिति में तलाक दिया जा सकता है।
  • पति या पत्नी में से कोई भी एक शादी के बाहर किसी अन्य के साथ में यौन संबंध बनाता है। इसे अडल्ट्री कहा जाता है। इस केस में आप तलाक़ ले सकते हैं।
  • बाल विवाह के मामलों में, अगर पत्नी पंद्रह साल से ऊपर और अठारह साल से कम उम्र की है, तो वे भी तलाक़ के लिए अर्ज़ी डाल सकती हैं।
  • तलाक़ के समय पत्नी खुद के लिए और अपने बच्चे के लिए एक मेंटेनेंस याचिका दायर कर सकती है।

7. घरेलु हिंसा के खिलाफ अधिकार

  • दहेज़ की मांग, महंगी वस्तु की मांग, सम्पति की मांग, आपको या आपके बच्चे के खर्च के लिए आर्थिक सहायता न देना ,रोजगार न करने देना या मुश्किल पैदा करना ,आय-वेतन आपसे ले लेना, संपत्ति से बेदखल करना या डर देना आदि भी घरेलु हिंसा में ही आते हैं।
  • यदि किसी महिला की इच्छा के विरूद्ध उसके पैसे, शेयर्स या बैंक अकाउंट का इस्तेमाल किया जा रहा हो तो इस कानून का इस्तेमाल करके वह इसे रोक सकती है|

(इस कानून के अंतर्गत आने वाली सभी चीज़ों के बारे में यहां विस्तार से ज़रूर पढ़ लें।)

8. स्त्री धन से जुड़े आपके अधिकार

  • शादी के वक्त जो उपहार, जेवर, आदी लड़की को दिए जाते हैं, उसे स्त्रीधन कहते हैं और इस पर लड़की का पूरा हक़ होता है।
  • इसके अलावा लड़के और लड़की, दोनों को जो फर्नीचर, टीवी या दूसरी चीजें दी जाती हैं, वे भी स्त्रीधन के दायरे में आती हैं।
  • स्त्रीधन पर स्त्री का पूरा अधिकार है और ये दहेज नहीं है। लेकिन शादी के वक्त लड़के को दिए जाने वाले जेवर, कपड़े, आदि दहेज के दायरे में आते हैं।

9. गर्भपात से जुड़े महिलाओं के अधिकार

  • भारतीय कानून के अनुसार, गर्भपात कराना अपराध की श्रेणी में आता है, लेकिन गर्भ की वजह से यदि किसी महिला के स्वास्थ्य को खतरा हो तो वह गर्भपात करा सकती है।
  • अगर गर्भ का कारण बलात्कार या पारिवारिक अनाचार हो तो भारत में गर्भपात करवाया जा सकता है।
  • कोई भी व्यक्ति प्रसूता को गर्भपात के लिए बाध्य नहीं कर सकता है।
  • अगर आप मानसिक रूप से स्वस्थ बालिग़ हैं तो गर्भपात के लिए आपको किसी की भी सहमति या अनुमति लेने की ज़रूरत नहीं है।

10. लिव इन रिलेशनशिप से जुड़े भारतीय महिलाओं के अधिकार

  • लिव इन में रहने वाली महिलाओं के पास वो सारे कानूनी अधिकार हैं, जो भारतीय पत्नी को संवैधानिक तौर पर दिए गए हैं।
  • लिव इन रिलेशनशिप में रह रही महिला भी घरेलु हिंसा कानून में अपनी शिकायत दर्ज करा सकती है।
  • लिव इन में रह रहे जोड़े की सन्तान को उनकी सम्पति में हिस्सा मिलता है।
  • पहली पत्नी के जीवित रहते हुए यदि कोई पुरुष दूसरी महिला से लिव इन रिलेशनशिप रखता है तो दूसरी पत्नी को भी गुजाराभत्ता पाने का अधिकार है।

11. साइबर क्राइम से संबंधित महिलाओं के अधिकार

  • साइबर क्राइम की शिकायत cybercrime.gov.in पर दर्ज़ करवा सकते हैं।
  • इसमें भी महिलाएं और बच्चे अज्ञात रहकर भी रिपोर्ट कर सकते हैं और अपनी जानकारी देकर रिपोर्ट पर क्या कार्रवाई हुई, उसको ट्रैक भी कर सकते हैं।
  • अगर आपको कोई सोशल मीडिया पर स्टॉक कर रहा है तो उसकी शिकायत भी आप दर्ज करवा सकती हैं।

शिकायत कहां दर्ज़ करें

आप अपने नज़दीकी थाने में जाकर शिकायत लिखवा सकते हैं। लेकिन अगर आपको पुलिस स्टेशन नहीं जाना तो आप अपनी शिकायत राष्ट्रीय महिला आयोग के पोर्टल पर यहां से सीधा रजिस्टर कर सकते हैं। इसके अलावा महिला हेल्पलाइन नंबर 1091 पर भी कॉल कर सकते हैं। भारत सरकार के इस पोर्टल पर और अधिक पढ़ें।

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इमेज : #caseforchange, YouTube   

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About the Author

Shagun Mangal

A strong feminist who believes in the art of weaving words. When she finds the time, she argues with patriarchal people. Her day completes with her me-time journaling and is incomplete without writing 1000 read more...

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