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रजोनिवृत्ति के लक्षण: मीनोपॉज में महिलाओं को क्यों होता है डिप्रेशन?

मेनोपॉज मतलब सिर्फ पीरियड्स रुकना नहीं होता है। रजोनिवृत्ति के लक्षण में महिलाओं में डिप्रेशन देखा जाता है। ऐसे में क्या करें?

मेनोपॉज मतलब सिर्फ पीरियड्स रुकना नहीं होता है। रजोनिवृत्ति के लक्षण में महिलाओं में डिप्रेशन देखा जाता है। ऐसे में क्या करें?

रजोनिवृत्ति या मेनोपॉज के दौरान महिला के शरीर में कई हार्मोनल बदलाव होते हैं, जिसके कारण ओवरी में अंडे नहीं बनते और पीरियड्स रुक जाते हैं। इसमें महिलाओं को कई शारीरिक बदलाव महसूस होते हैं। लेकिन क्या आप जानते हैं मीनोपॉज में आप मानसिक रूप से भी कई परेशानियों से लड़ते हैं। 

अफ़सोस इसके बारे में बहुत कम बात होती है। इस पर ध्यान नहीं दिया जाता है क्योंकि सबको लगता है कि रजोनिवृति मतलब सिर्फ पीरियड्स रुकना है। इसी अनदेखी की वजह से कई बार तनाव घातक डिप्रेशन (menopause depression) का रूप ले लेता है। 

इसीलिए मेनोपोज में डिप्रेशन के बारे में पूरी जानकारी रख कर समय पर इलाज़ ज़रूरी है। 

डिप्रेशन और मीनोपॉज के बीच संबंध : 40-50 की उम्र में महिलाओं को मेनोपॉज से मानसिक बदलाव क्यों होते हैं?

मेनोपोज में एस्ट्रोजन हॉर्मोन का उत्पादन कम हो जाता है। इसके कारण उदासी, भावनाओं की कमी, नियमित कार्यों में परेशानी आदि मानसिक विकार रहने लगते हैं। शारीरिक बदलावों की वजह से भी चिड़चिड़ापन रहने लगता है। 

इन सबके अलावा 40-50 की उम्र में कई महिलाओं को अकेलापन और इंसिक्योरिटी भी महसूस होने लगती है। बच्चें बड़े हो जाते हैं और अपने माता-पिता की बढ़ती उम्र की भी फ़िक्र सताती है।

इन सब कारणों से कई बार ये सामान्य दिखने वाले लक्षण बड़ी बीमारी का रूप ले लेते हैं। इसीलिए मेनोपॉज के दौरान ज्यादातर महिलाओं में डिप्रेशन की समस्या पाई जाती है। (rajonivrutti ke lakshan)

मेनोपोज में डिप्रेशन के लक्षण क्या हैं? (rajonivrutti ke lakshan)

  • किसी से बात करने का मन न होना
  • चिड़चिड़ापन 
  • अधिक गुस्सा आना
  • चिंता, बेचैनी और लगातार निराशावाद की भावना
  •  किसी काम में मन न लगना
  • भूलने की बीमारी होना
  • ज़्यादा नींद आना या बिलकुल नींद नहीं आना
  • जल्दी थकान एवं कमजोरी महसूस होना
  • भूख में बदलाव होना
  • ध्यान केंद्रित करने, या निर्णय लेने में कठिनाई होना
  • दर्द, सिर दर्द, ऐंठन/क्रेम्प्स या पाचन संबंधी समस्याएं

मेनोपोज में डिप्रेशन के ये लक्षण महसूस होने पर तुरंत डॉक्टर से परामर्श लें। 

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रजोनिवृत्ति के दौरान आप अपने मानसिक स्वास्थ्य की देखभाल के लिए क्या कर सकते हैं? (rajonivrutti me dekhbhaal kaise krein)

  1. खुद को अवेयर करें: सबसे पहले इस बात का ध्यान रखें कि रजोनिवृत्ति के लक्षणों के साथ मानसिक स्वास्थ्य में भी बदलाव आते हैं। 
  2. मूड स्विंग्स को ट्रैक करें: अपने मूड की निगरानी करें और नींद और तनाव के स्तर के पैटर्न पर ध्यान दें। यदि लक्षण गंभीर हो जाते हैं और दैनिक जीवन में परेशानी आती है तो एक्सपर्ट की मदद लें।
  3. जीवनशैली में बदलाव: अवसाद के लक्षणों को कम करने के लिए जीवनशैली में बदलाव करें जैसे व्यायाम करना, पर्याप्त नींद लेना और तनाव को नियंत्रित करना। 
  4. मदद लें: किसी काम को करने में परेशानी महसूस हो रही है तो दूसरों की मदद लें। खुलकर बात करें।
  5. यह अस्थायी है: आमतौर पर, रजोनिवृत्ति के बाद हार्मोनल परिवर्तनों के साथ होने वाले मूड में बदलाव नहीं रहता है। इसलिए घबराने की बजाय जान लें कि यह अस्थायी है और इसका इलाज संभव है।  
  6. थेरेपी:  एस्ट्रोजन और प्रोजेस्टिन हार्मोन को नियंत्रित करने के लिए एंटीडिप्रेसेंट और हार्मोन थेरेपी भी डॉक्टर द्वारा सुझाई जाती है।
  7. लोगों के संपर्क में रहें: अगर आप खुद को इमोशनली वीक महसूस कर रही हैं तो अपने दोस्तों और परिवार के लोगों की मदद लें और अपनी भावनाओं को शेयर करें।
  8. सेल्फ केयर: अपने लिए अलग से कुछ समय रखें और एक शौक या पसंदीदा गतिविधि का आनंद लें। 
  9. मनोचिकित्सक की मदद लें: मनोचिकित्सक आपकी परेशानी समझ कर आपको बेहतर इलाज देंगे।
  10. संतुलित आहार: आप अपने आहार में हरी सब्जियां, फल, दुध, मेवे, साबुत अनाज, आदि शामिल करें। ध्यान रखें, आप पानी खूब पीएं। 

मेनोपोज में डिप्रेशन से लड़ रही महिला की परिवार के लोग कैसे मदद कर सकते हैं? (Menopause mein depression)

भारतीय परिवारों में महिलाओं की सेहत को नज़रअंदाज़ किया जाता है। ऐसे में मानसिक स्वास्थ्य और रीप्रॉडक्टिव हेल्थ का तो कहीं ज़िक्र ही नहीं होता है। तो एक ये भी मीनोपॉज में डिप्रेशन का कारण है। महिलाएँ जानकारी के अभाव में इसे अनदेखा करती हैं और घर में किसी से कुछ नहीं कहती हैं। लेकिन उन्हें आपकी इस समय ज़रूरत है। 

तो कुछ छोटी-छोटी बातों का ध्यान रखकर आप अपनी माँ, पत्नी या किसी भी अन्य महिला की मदद कर सकते हैं। उनमें रजोनिवृत्ति के लक्षण को अनदेखा न करें। (rajonivrutti ke lakshan)

  • आपके लिए यह जानना ज़रूरी है कि ऐसे में महिला क्या झेल रही है। पहले उनकी परेशानी समझें। आप डॉक्टर के यहाँ साथ में जा सकते हैं। 
  • अपनी मम्मी के साथ वक़्त बिताएं। उनके साथ नयी-नयी एक्टिविटीज़ करें। 
  • जब भी वे परेशान हो तो सहानुभूति दिखाएं। उनके पसंदीदा काम करें। 
  • महिलाओं के ऊपर से अपना भार काम करें। घर के कामों में अपनी ज़िम्मेदारी निभाएं। 
  • उन्हें सेल्फ-केयर के लिए मोटीवेट करें। जब भी वे खुद के लिए वक़्त निकालें तो उन्हें डिस्टर्ब न करें। 
  • मेनोपोज में डिप्रेशन से जूझ रही महिलाओं को भावनात्मक सहारा प्रदान करें।

अगर अब आपको मीनोपॉज से गुज़र रही महिलाओं का बर्ताव अलग लगे, या कोई परेशानी महसूस हो तो उन्हें दोष देने के बज़ाय उनसे बात करें। समझें कि ये रजोनिवृत्ति के लक्षण हैं या कुछ और। मेनोपॉज में डिप्रेशन के बारे में उन्हें बताये और डॉक्टर से परामर्श लेने की सलाह दें। 

मूल चित्र  : Still from LG India Via Youtube 

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