कोरोना वायरस के प्रकोप में, हम औरतें कैसे, इस मुश्किल का सामना करते हुए भी, एक दूसरे का समर्थन कर सकती हैं?  जानने के लिए चेक करें हमारी स्पेशल फीड!

मैं आत्मसम्मान से जीना चाहती हूँ!

Posted: मार्च 25, 2021

माँ को देखा हर बात में सर झुका कर, ग़लत को भी सही बताते, यही शिक्षा पाई उनसे, ‘आत्मसम्मान चाहे ना रहे, पर परिवार को तुम बचाना…’

क्या ऊँचाइयों पर मैं चढ़ने के लिए,
हाँ में हाँ मिलाना सीख जाती?
मैं आत्मसम्मान से जीना चाहती हूँ,
तभी समझौता करना नहीं सीखना चाहती हूँ।

माँ को देखा हर बात में सर झुका कर,
सही को सही और ग़लत को भी सही बताते।
यही शिक्षा पाई उनसे ‘कभी पति की बात मत काटना,
आत्मसम्मान चाहे ना रहे, पर परिवार को तुम बचाना।’

पर मैं सीता नहीं द्रौपदी सी बनना चाहती हूँ,
रानी लक्ष्मी बाई सी लड़ना चाहती हूँ,
बस आत्मसम्मान से जीना चाहती हूँ।
हाथ फैलाना नहीं है मंज़ूर मुझको,
इसलिए आत्मनिर्भर बनना चाहती हूँ।

अपने निर्णय स्वयं लेना चाहती हूँ,
कभी अपने भी मन का करना चाहती हूँ,
स्त्री हूँ पर आत्मसम्मान से जीना चाहती हूँ।

समाज में सबका अधिकार है,
पत्नी माँ और बेटी से अलग भी,
मेरी पहचान है,
अपनी पहचान को,
पूरे जग को बताना चाहती हूँ,
स्त्री हूँ पर आत्मसम्मान से जीना चाहती हूँ।

बोलने का अधिकार चाहती हूँ,
पहनावे पर, अकेले सफ़र करने पर,
कोई कटाक्ष नहीं चाहती हूँ,
स्त्री हूँ पर आत्मसम्मान से जीना चाहती हूँ।

मूल चित्र : Anil via pexels 

पसंद आया यह लेख?

पाइये विमेन्सवेब के सारे दिलचस्प हिंदी लेख अपने ईमेल इनबॉक्स मे!

विमेन्सवेब एक खुला मंच है, जो विविध विचारों को प्रकाशित करता है। इस लेख में प्रकट किये गए विचार लेखक के व्यक्तिगत विचार हैं जो ज़रुरी नहीं की इस मंच की सोच को प्रतिबिम्बित करते हो।यदि आपके संपूरक या भिन्न विचार हों  तो आप भी विमेन्स वेब के लिए लिख सकते हैं।

I am Shalini Verma ,first of all My identity is that I am a strong

और जाने

घर के बाहर काम करने से क्या मैं बुरी माँ बन जाऊँगी?

टिप्पणी

Women In Corporate Allies 2020

अपना ईमेल पता दर्ज करें - हर हफ्ते हम आपको दिलचस्प लेख भेजेंगे!

Women In Corporate Allies 2020