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वसुधैव कुटुम्बकम्

वसुधैव कुटुम्बकम् यह शब्द कितना मज़बूत लगता है, वास्तव में मनुष्य ने उसको अधिक कमज़ोर बना दिया है, जिसका अंत दुखदायी हो सकता है। 

वसुधैव कुटुम्बकम् यह शब्द कितना मज़बूत लगता है, वास्तव में मनुष्य ने उसको अधिक कमज़ोर बना दिया है, जिसका अंत दुखदायी हो सकता है। 

वसुधैव कुटुम्बकम् सिर्फ पढ़ा हमने,
कभी आत्मसात नहीं किया..
जल, वायु, जमीं, जंगल किए दूषित,
अन्य जीवों पर हर घात किया।

इस पृथ्वी ने सब देखा है,
आखिर भेदभाव, कब तक सहती,
उसने सबको उनका हिस्सा लौटा दिया,
देखो ज़रा कितने खुश हैं,
फूल, पंछी, हवा और ये नदियाँ बहती।

हमें घरों में बंद रख, सिखाया सबक,
बात अपनी, इशारों में कह दी,
अब हमें हमेशा याद रखना होगा,
ये धरती सबकी है,
यहां सिर्फ आदम जात नहीं रहती।

मूल चित्र : Youtube


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