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सात फेरों का आठवाँ वचन – हैसियत का प्रदर्शन करने के लिए केवल शादी का मंडप ही ना चुनें

Posted: सितम्बर 6, 2019

कार्तिक ने आठ वचन की शादी के लिए कई पत्रकार दोस्तों को आमंत्रण दिया। आमंत्रण पत्र के प्रारुप को पढ़कर जिज्ञासा वश कई लोग इस शादी में आने को उत्सुक होने लगे।

सौम्या एक मध्य वर्गीय परिवार की सुसंस्कृत एवं गुणी लड़की है। उसके पिता किसी सरकारी दफ्तर में क्लर्क के पद पर कार्यरत हैं। छोटा सा परिवार अपना गुज़र-बसर आराम से करता है। सभ्य, सुसंस्कृत, गुणी सौम्या की शादी के लिये लड़का आसानी से मिल गया।

बेटी की शादी के लिये जोड़ी गयी रकम कहीं कम ना पड़ जाए तो उसकेे पिता गाँव के मकान को गिरवी रखने की बात उसकी मां से कर रहे थे। सौम्या के कान में जब ये बात पड़ी तो उसने इस बात का विरोध करते हुए अपने पिता को समझाया, ‘शादी प्रदर्शन की चीज़ तो नहीं होती, पर हम सभी भेड़ चाल में लगे हुये हैं। कोई तो पहल करेगा, सादगी से होने वाले विवाह की।’

पिता ने समझते हुए कहा, ‘हमारे अकेले के बदलने से क्या होगा? वर पक्ष को भी ये बात स्वीकार्य होनी चाहिये।
सौम्या ने पिता को आश्ववस्त करते हुए कहा, ‘पहले मैं और कार्तिक( सौम्या का होने वाला पति)चर्चा कर लेते हैं। यदि सब सही रहा तो आप कार्तिक के घर जाकर बात करना।’

सौम्या की माँ को डर था कि कहीं हाथ में आया अच्छा रिश्ता ना टूट जाए। सौम्या ने दिलासा दिया, ‘ऐसा कुछ नहीं होगा माँ।’

खैर, निश्चित समय में कार्तिक और सौम्या मिले। जब आडंबर रहित शादी की बात सौम्या ने कही तो कार्तिक को अजीब लगा। उसने बहुत सपने सजाये थे कि कोई कसर नहीं रखेगा वह इस विवाह में, मगर सौम्या के तर्क के आगे वह भी हार गया।

आज के परिदृश्य में जहाँ महंगाई सर चढ़कर बोल रही है, वहां खर्चे पर लगाम लगाना बहुत ज़रूरी है, और समाज को आइना दिखाना भी। उसे खुद के ऊपर लज्जा आ रही थी कि वह पत्रकार होते हुए कैसे दूसरों की नकल कर सकता है? वह सिर्फ अपने बारे में सोच रहा था। सौम्या अपने माँ-बाप के बारे में सोच रही थी कि उसकी धूमधाम से की गई शादी का उन बुज़ुर्गों की आर्थिक स्थिति के ऊपर क्या प्रभाव पड़ेगा।अपने पिता की कल्पना अगर ऐसे करता, तो वह सह नहीं पाता। उसने सौम्या का साथ देने का वादा किया।

कार्तिक ने अपनी आठ वचन की शादी के लिए अपने कई पत्रकार दोस्तों को आमंत्रण दिया, कई युवा जोड़ों को भी निमंत्रण भेजा। आमंत्रण पत्र के प्रारुप को पढ़कर जिज्ञासा वश कई लोग इस शादी में आने को उत्सुक होने लगे। उसके बाद सौम्या के पिता ने कार्तिक के पिता के साथ बात करके शादी की तैयारी करी।

निश्चित तिथी को दिन के समय विवाह का मुहूर्त रखा गया, ताकि रात को होने वाली लाइटिंग से अनावश्यक खर्चा ना बैठे, ना लाइटिंग का, ना पटाखों का और ना ही रात के समय होने वाली असुविधा का।

वैदिक रीति से विवाह संपन्न हुआ और असीमित मात्रा में भोजन पदार्थ के बदले चुनिंदा चीज़ें रखने का तय हुआ और हर किसी को प्रार्थना की गई कि अनावश्यक भोजन थाली में बच जाए तो जानवरों को खिलाने के लिए एक बर्तन में जमा कर दें। एक वृद्ध आश्रम में भी फोन कर दिया गया, ‘जितनी चीजें खाने की बच गई हैं, कृपया ले जाएं और वृद्धों को यह भोजन कराएं।’

जितने मेहमान आए थे, उन्होंने सौम्या और कार्तिक के इस कदम को बहुत सराहा। कई जोड़ों ने प्रण किया कि वह भी सौम्या और कार्तिक के द्वारा लिए गए इस साहसिक कदम का अनुसरण करेंगे और शादी ब्याह में होने वाले व्यर्थ के खर्चे को रोकेंगे। इससे ना केवल लड़की के पिता को अनावश्यक खर्चे से रोक पाएंगे बल्कि नव-दंपति के भविष्य के लिए कुछ ज़रूरी चीज़ें भी जोड़ पाएंगे।

हमें जो शक्ति प्रदर्शन करना है, जो अपनी पूंजी का दिखावा करना है, तो क्यों ना हम यह प्रदर्शन कमज़ोर, असहाय, अपाहिज, मासूम लोगों की ज़्यादा से ज़्यादा सहायता करके करें? अगर होड़ लगानी है तो वृद्ध आश्रम और अनाथ आश्रम में आवश्यक चीजें भेज कर प्रतिस्पर्धा करें। जिन लोगों ने हज़ारों खाने के व्यंजन रखे हैं उनके सामने अगर आप कुछ और हज़ार व्यंजन रख देंगे, तो भी वे आपको सराहेंगे नहीं।

जोड़े ने अग्नि के सात फेरे लेने के बाद, आँठवा वचन अपने और अपने जीवन साथी के माता-पिता के लिए भी लिया कि दोनों के माता-पिता का सम्मान बराबरी से किया जाएगा। वर एवं वधु दोनों के माता-पिता के प्रति कर्तव्य समान रूप से निभाए जाएंगे।

कार्तिक ने निर्णय लिया, ‘सौम्या का नाम उसे उसके माँ बाप ने दिया है जिसे कभी नहीं बदला जाएगा। सरनेम बदलना या ना बदलना सौम्या की अपनी मर्ज़ी होगी। सौम्या के लिए जैसे मेरे माता-पिता के प्रति अपने उत्तरदायित्व निभाना अनिवार्य माना जाएगा, मैं भी उसके माता-पिता के प्रति अपने कर्तव्य निभाऊंगा। और शादी में हुए खर्च दोनों परिवार आधा-आधा बाटेंगे क्योंकि शादी लड़का और लड़की दोनों की हुई है। केवल लड़की का ब्याह नहीं हुआ है जो उसके परिवार वाले अकेले ही सारा खर्चा उठाएंगे।’

इस शादी की चर्चा पूरे शहर में हुई। पत्रकारों को ख़ासकर बुलाया गया ताकि एक नई पहल को कवर किया जा सके और पूरे समाज को एक संदेश दिया जा सके कि अपनी हैसियत का प्रदर्शन करने के लिए शादी का मंडप ही ना चुनें, बल्कि, अधिक से अधिक दान करने की होड़ लगाएं। इस होड़ से कम से कम किसी का भला तो हो सके।

मूल चित्र : Pixabay 

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