Pallavi Verma

कुछ गुणवत्तायुक्त लिखने का प्रयास रहा है मेरा,ताकि पाठकों को एसे लेख प्रस्तुत कर सकूँ जो उनके लिये लाभप्रद हो।

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सूरत अग्निकांड – अपनों का, सपनों का अग्निकांड

इन सभी बच्चों में शीतल भी थी। उसके मुंह से लगातार 'मम्मी-मम्मी' निकल रहा था। वह नहीं जानती थी कि हर दुःख से दूर रखने वाली उसकी मम्मी यहां नहीं है। 

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सात फेरों का आठवाँ वचन – हैसियत का प्रदर्शन करने के लिए केवल शादी का मंडप ही ना चुनें

कार्तिक ने आठ वचन की शादी के लिए कई पत्रकार दोस्तों को आमंत्रण दिया। आमंत्रण पत्र के प्रारुप को पढ़कर जिज्ञासा वश कई लोग इस शादी में आने को उत्सुक होने लगे।

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कड़वा सच – क्या स्त्री के सुंदर ना होने से उसके गुणों का कोई मोल नहीं?

क्या स्त्री का गुण पर्याप्त नहीं होता। उससे क्यों अपेक्षा रखी जाती है कि सुन्दरता ही उसका मूलभूत गुण है? सुंदर ना होने से उसके गुणों का कोई मोल नहीं?

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चंदर! हाँ, यही नाम तो बताया था उसने।

चंदर आपके दिए खाने की भीख या दया को मेहनत की कमाई में बदल रहा है। उसके सम्मान की दौड़ में मेरे जूते उसे जीत दिलाएंगे। आप उसे ये जूते दे दो।

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मैं केवल ज़रूरतें ही नहीं बल्कि सपने भी पूरे करती हूँ

हिसाब के अनुसार उसके पास महीने भर के खर्चे निकालने के बाद केवल तीन हज़ार रुपये ही बचते हैं, यह भी खर्च हो गए तो, पूरा महीना और खाली बटुआ। 

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