Pallavi Verma

कुछ गुणवत्तायुक्त लिखने का प्रयास रहा है मेरा,ताकि पाठकों को एसे लेख प्रस्तुत कर सकूँ जो उनके लिये लाभप्रद हो।

Voice of Pallavi Verma

ज़िंदगी इक सफर है सुहाना यहां कल क्या हो किसने जाना…ओड्लई ओड्लई ओहू…

जब तक जीवन है तब तक कोई ना कोई मुश्किलें आती रहेंगी। इन्ही में से कुछ लम्हे चुरा के मुस्करा लो, ज़िंदगी कबूल करो और अपना लो। एक बार मुस्कुरा दो यार!

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दुर्गा माँ कहीं वापस नहीं जातीं, वे समा जाती हैं हम में!

मुझे गर्व है कि तुम्हें अपने, अपनी बहन व अपनी सहेली के सम्मान को बचाने के लिए किसी पुरुष के कन्धों की कोई आवश्यकता नहीं है।

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फर्ज़

नाम में क्या रखा है बेटा। मुझे इस धरती ने बिना मांगे ही सब दिया।मैं भी कुछ आने वाली पीढ़ी को विरासत मे देना चाहता हूं।ये घने वृक्ष और इनकी छाया।

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सोचें कबीर सिंह और प्रीति सिक्का जैसे किरदारों का हमारे युवाओं पर क्या असर होगा?

हमारे युवा नशे में डूबें, शराब-खोरी करें, ग़ैर जिम्मेदाराना रवैया अपनाएं, हीरो का अनुकरण करने वाले देश में फिल्मों का ऐसा विषय नहीं होना चाहिए।

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सूरत अग्निकांड – अपनों का, सपनों का अग्निकांड

इन सभी बच्चों में शीतल भी थी। उसके मुंह से लगातार 'मम्मी-मम्मी' निकल रहा था। वह नहीं जानती थी कि हर दुःख से दूर रखने वाली उसकी मम्मी यहां नहीं है। 

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सात फेरों का आठवाँ वचन – हैसियत का प्रदर्शन करने के लिए केवल शादी का मंडप ही ना चुनें

कार्तिक ने आठ वचन की शादी के लिए कई पत्रकार दोस्तों को आमंत्रण दिया। आमंत्रण पत्र के प्रारुप को पढ़कर जिज्ञासा वश कई लोग इस शादी में आने को उत्सुक होने लगे।

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कड़वा सच – क्या स्त्री के सुंदर ना होने से उसके गुणों का कोई मोल नहीं?

क्या स्त्री का गुण पर्याप्त नहीं होता। उससे क्यों अपेक्षा रखी जाती है कि सुन्दरता ही उसका मूलभूत गुण है? सुंदर ना होने से उसके गुणों का कोई मोल नहीं?

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चंदर! हाँ, यही नाम तो बताया था उसने।

चंदर आपके दिए खाने की भीख या दया को मेहनत की कमाई में बदल रहा है। उसके सम्मान की दौड़ में मेरे जूते उसे जीत दिलाएंगे। आप उसे ये जूते दे दो।

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मैं केवल ज़रूरतें ही नहीं बल्कि सपने भी पूरे करती हूँ

हिसाब के अनुसार उसके पास महीने भर के खर्चे निकालने के बाद केवल तीन हज़ार रुपये ही बचते हैं, यह भी खर्च हो गए तो, पूरा महीना और खाली बटुआ। 

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