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क्या ‘तलाक़’ निर्भया केस के दोषियों को बचाने की एक और कवायद है?

Posted: March 18, 2020

फांसी के पहले निर्भया बलात्कार के एक दोषी अक्षय ठाकुर की पत्नी ने फांसी के पहले मांगा तलाक और कहां मुझे उसकी विधवा कहलाना मंजूर नहीं।

16 दिसंबर 2012 की जिस सर्द रात को चलती बस में बेरहमी से एक बलात्कार हुआ, उसके बाद पीड़िता को बचाया नहीं जा सका हमने पीड़िता को एक नाम दिया, ताकि उसकी असली पहचान छुपाई जा सके, नाम था निर्भया

निर्भया के साथ जीते जी बलात्कार और मरने के बाद क्रूरता पर क्रूरता

निर्भया के साथ केवल एक क्रूरता नहीं हुई! जी हां! बिल्कुल सही पढ़ा आपने! निर्भया के साथ केवल एक क्रूरता नहीं हुई, उसके साथ बार-बार क्रूरता हुई है, न्यायालय के अंदर और बाहर कई दफे क्रूरता की जा चुकी है।

क्या केवल छ: ही आरोपी हैं?

नहीं! निर्भया का बलात्कार छ: लोगो ने जरूर किया, पर आज इन आरोपियों की मदद करने वाले भी निर्भया के आरोपियों में शामिल है। जिस तरीके से आरोपियों के वकील, हमारी लचीली न्याय व्यवस्था का इस्तेमाल कर रहे हैं, उसे देख कर मुझे बहुत अफसोस होता है।

 देर से मिलने वाला न्याय अन्याय के बराबर होता है

कोर्ट में न्याय किसे मिलना है निर्भया को या उसके आरोपियों को? क्योंकि जिस तारीख पर फांसी के लिए डेथ वारंट  निकलता है, दोषियों के वकील कोई ना कोई कानूनी दांवपेच खेलकर उस दिन फांसी रुकवा देते हैं। देर से मिलने वाला न्याय अन्याय के बराबर ही होता है। उसे न्याय की श्रेणी में नहीं रखा जा सकता।

आरोपियों के वकील ए.पी सिंह ने कानूून का हर छोटा बड़ाा रास्ता आजमा लिया ताकि आरोपियों को फांसी के तख्ते से दूर रख सके। इस तरह से वे कोर्ट का बहुत समय खराब कर चुके हैं इसी कवायद में एक और पैंतरा अपनाया गया है वह है दोषी अक्षय ठाकुर की पत्नी का तलाक की अर्जी जमा करना।

अक्षय की पत्नी पुनीता का तलाक मांगना

जैसे-जैसे फांसी की तारीख नजदीक आ रही है वैसे वैसे नए-नए दांवपेच खेले जा रहे हैं। अब अक्षय की फांसी से पहले उसकी पत्नी कह रही है कि उसे रेेपिस्ट की विधवा नहीं कहलाना। औरंगाबाद फैमिली कोर्ट में लगा उसने तलाक की अर्जी लगा दी है।

निर्भया कांड के चार दोषियों में एक अक्षय ठाकुर की फांसी से पहले उसकी पत्नी पुनीता देवी ने तलाक के लिए मुकदमा दाखिल करते हुए कहा कि उसके पति रेप के केस में आरोपी साबित हुए हैं और उन्हें फांसी दी जानी है। वह नहीं चाहती है कि वह उनकी विधवा कहलाए।

परिवार न्यायालय में अगली तिथि को सुनवाई होगी

इस मामले की सुनवाई के लिए 19 मार्च की तिथि तय की गई है। पुनीता देवी के वकील मुकेश कुमार सिंह ने बताया कि दोषी की पत्नी को इस मामले में तलाक का अधिकार है। इसके लिए कानून में प्रावधान भी है और उसी लिहाज से यह केस हमने दाखिल किया है।

न्यायालय में  इस पर सुनवाई होगी। इधर दोषी अक्षय की पत्नी अपने बच्चे के साथ अदालत में मौजूद रही और अपनी निराशा भी व्यक्त की। उसने कहा कि उसके पति निर्दोष हैं लेकिन अदालत ने जब उन्हें सजा दे दी है तो, वह खुद को उससे अलग कर लेना चाहती है। मैं उसकी विधवा नहीं कहलाना चाहती।

20 मार्च को फाँसी सुनिश्चित

अक्षय कुमार ठाकुर के खिलाफ डेथ वारंट जारी की गई है और 20 मार्च को फांसी दिए जाने की तारीख तय है, इस तारीख को फांसी रुकवाने के लिए ही यह सारा ड्रामा किया जा रहा है। इसी तरह एक अन्य आरोपी के परिवार वालों ने भी अन्य याचिका दाखिल की थी जो सोमवार को खारिज हो गई।

अब अक्षय ठाकुर की पत्नी के दर्ज केस से होने से सजा में एक नई कानूनी अड़चन आती दिख रही है। हालांकि कोर्ट से निर्णय आने के बाद ही पूरी स्थिति स्पष्ट होगी। दोषियों को फांसी ना हो इसलिए देश के न्याय व्यवस्था की धज्जियां अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी दोषियों के वकील के द्वारा उड़ाई जा रही हैं, वहां पर भी एक अर्जी भेजी गई है, ताकि दोषियों को फांसी के तख्ते से बचाया जा सके।

फिर भी हम आशा करते हैं कि निर्भया की मां का संघर्ष बेकार नहीं जाएगा और आने वाली 20 तारीख को चारों आरोपियों को सजा-ए-मौत दे दी जाएगी और उसके साथ ही दोषियों के वकील का मानसिक दिवालियापन भी खत्म हो जाएगा।

मूल चित्र : YouTube

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