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Gayatri Prabha Karan

मानव वादी.... लोग नारीवादी कह सकते हैं... क्यूंकि अब भी स्त्री को पुरुष जितना इंसान समझने मे समय लगेगा......

Voice of Gayatri Prabha Karan

ये घर मेरे लिए है, मैं घर के लिए नहीं…

“यार औरतें अपना ध्यान नहीं रखतीं।” सच कहा, मैं रखूँगी अपना ध्यान, क्योंकि कोई और नहीं रखता, क्योंकि मैं तुमसे शादी करना चाहती हूँ, घर से नहीं।

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काश आपने अपने बेटे को भी अच्छे संस्कार दिए होते…

आप ही डिसाइड कर लें कि मेरा राशन के लिए पैसे देना ज़रूरी है या खाना पकाना? अगर काम ना करूँ तो पकाने के लिए खाना ही नहीं होगा।

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आखिरी बार कह रही हूँ अब मुझे विदा दो…

अपनी आँखों के सपने तकिये पे सूखाकर, सबके लिए वो बनने की कोशिश करते हूँ जो मैं नहीं...और तुम्हें बस मेरा शरीर दिखता है, मेरा मन नहीं...

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माँ मुझे वो सवेरा देखना है…

अभी वो दिन ले कर भी तो आना है, वो दिन नाना नानी, मामा से ना मिल पाएगा, ना समाज देगा, ना सरकार! वो तुम लाओगी माँ, तुम उठो!

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अगर तुम कहते हो कि घर मेरा है तो इसे अपना लगने तो दो…

जहां मेरे देर से आने को जिम्मेदारी समझा जाये, मौज नहीं और जहां मुझे भी थकने पर अदरक वाली चाय मिले, नसीहत नहीं...

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