कोरोना वायरस के प्रकोप में, हम औरतें कैसे, इस मुश्किल का सामना करते हुए भी, एक दूसरे का समर्थन कर सकती हैं?  जानने के लिए चेक करें हमारी स्पेशल फीड!

माँ, काश तुम मुझे समझ पातीं…

धीरे-धीरे बिंदु ने अकेले बड़बड़ाना सीख लिया। जितना गुस्सा होता था वह अकेले कमरे में बोलकर निकालती थी और ऐसे ही वो बड़ी हो गयी...

धीरे-धीरे बिंदु ने अकेले बड़बड़ाना सीख लिया। जितना गुस्सा होता था वह अकेले कमरे में बोलकर निकालती थी और ऐसे ही वो बड़ी हो गयी…

आंगन में बारात के निकलने की तैयारी हो रही थी। बाहर बैंड बाजे वाले फिल्मी गानों की धुन बजा रहे थे। मामी और उनकी देवरानी जेठानी तरह-तरह की रस्में कर रही थीं। नानी सबको निर्देश देती घूम रही थी। चारों तरफ चहल-पहल, मिठाइयों की खुशबू, बढ़िया नए सर सराते कपड़े पहने मौसियां, दीदियां हंसती मुस्कुराती आपस में मजाक करती घूम रही थीं।

अनु भी यही सब देखती अपना लहंगा संभालती लड़कियों के ग्रुप में सबसे बोलती बतियाती घूम रही थी। तभी उसका ममेरा भाई आया और कहने लगा “क्या तुम लोगों को पेड़ से तोड़कर अमरूद खाने हैं?”

सबका मन ललचा गया। पेड़ से तोड़कर अमरूद खाना का मौक़ा, यह भला आसानी से कहां मिलता है। लड़कियों ने पूछा, “पेड़ पर कैसे चढ़ेंगे?”

वह हंसता हुआ बोला, “बेवकूफ हो तुम लोग। घर के बगल में लगे अमरूद के पेड़ से अमरूद छत पर चढ़कर तोड़े जा सकते हैं।”

उसकी बात मानते हुए वे सब छत की सीढ़ियों की तरफ भागी। दरवाजा खुला हुआ था, छत पर चढ़कर जब ऊपर पहुंची तब सुनाई दिया कि छत पर बनी बरसाती का दरवाजा कोई जोर जोर से पीट रहा है। अनु एकदम से घबरा गई और अपने ममेरे भाई की तरफ देखने लगी। वह बोला, “डरो नहीं बिंदु बुआ है।”

अनु को याद है, बिंदु बुआ मतलब उसकी बिंदु मौसी जो कुछ अजीब तरह का व्यवहार करती थी।वह बोली, “चलो दरवाजा खोल देते हैं, मौसी को बाहर निकाल लें।”

उसका भाई कहने लगा, “अगर ऐसा किया तो अच्छी तरह से पिटाई होगी। जानती नहीं हो दादी ने बुआ को इसीलिए कमरे में बंद किया है ताकि वे मेहमानों के सामने ना आएं। आएंगी तो तरह तरह की हरकतें करेंगी और सब का मजाक उड़ेगा कि बिंदु बुआ पागल है।”

Never miss real stories from India's women.

Register Now

अनु का अमरूद खाने का सारा उत्साह खत्म हो गया और वह नीचे जाने लगी। बाकी लड़कियां भी उसके साथ नीचे आ गई।

बारात चली गई। रूढ़िवादी परिवार था इसलिए महिलाएं बारात में नहीं गई केवल पुरुष गए। रात भर गाना बजाना होता रहा और अनु मन ही मन सोचती रही बेचारी बिंदु मौसी किस तरह से छत पर अकेले कमरे में रह रही होंगी।

किशोरावस्था की आयु जिसमें मन वैसे ही बहुत जल्दी व्याकुल हो जाता है। अनु के दिमाग से यह बात निकल नहीं रही थी। उसकी निगाह बार-बार छत की सीढ़ियों की तरफ जा रही थी। उसने देखा छोटी नानी चुपचाप प्लेट में खाना लेकर छत पर जा रही हैं। उसे तसल्ली हुई कि बिंदु मौसी को कम से कम खाना तो मिल ही गया होगा।

शादी की गहमागहमी में वह अपनी मम्मी से भी बात नहीं कर पा रही थी। बहू आने के बाद वे लोग अपने शहर लौटने लगे और उधर छोटी मामी भी बिंदु मौसी को लेकर कहीं जाने के लिए तैयार थी। अनु की मम्मी बिंदु मौसी से गले मिलकर फूट-फूट कर रोने लगी। घर लौट कर अनु ने अपनी मम्मी से बिंदु मौसी के बारे में पूछा। मम्मी की आंखों में आंसू आ गए। उनकी ममेरी बहन और बचपन की सहेली बिंदु आज किस हाल में है यह देखकर वह वैसे ही दुखी थी। वह समझ गई कि अनु की उत्सुकता शांत करनी ही होगी। उसे आरंभ से बताने लगी।

बिंदु उनके सबसे छोटे मामा की बेटी थी। तीन भाइयों में सबसे धनी छोटे मामा ही थे। वह व्यापार में व्यस्त रहते थे और उनकी पत्नी अपने पिता और पति के धन के घमंड में चूर रहती थी। दोनों जेठानी उनके सामने फीकी थी। मामी ज्यादा पढ़ी-लिखी नहीं थी पर अकड़ सबसे ज्यादा थी।

बिंदु ने जब चलना बोलना सीखा तभी से दोनों ताई लोगों को समझ में आ गया कि बिंदु का विकास दूसरे बच्चों जैसा नहीं है। उसे हर काम में दूसरे बच्चों से ज्यादा सहायता चाहिए। उसे डॉक्टर को दिखाने की आवश्यकता है।

यह बात जब उन्होंने बिंदु की मां से कहीं तब वह गुस्से में लाल पीली होने लगी और कहने लगी, “मेरी बेटी पागल नहीं है जो उसे डॉक्टर को दिखाने ले जाऊं।”

बस इसी बात से बिंदु पर अत्याचार होने लगे। वह सामान्य बालिका नहीं थी, पर छोटी मामी को यही लगता था कि वह सामान्य है इसलिए उसे तरह-तरह से डांट कर और पीटकर सब कुछ सिखाया जा सकता है। बचपन से ही बिंदु को कड़े अनुशासन में रखकर उन्होंने उसकी सीखने की सभी संभावनाओं को समाप्त कर दिया।

यदि उनमें समझ होती तो प्यार से समझा कर डॉक्टर से सलाह लेकर उसे सामान्य बनाया जा सकता था। मामी शिक्षित नहीं थी बहुत रूढ़ीवादी थी और मामा को पैसा कमाने से फुर्सत नहीं थी इसलिए उस बच्ची पर अत्याचार होते रहे।

बिंदु को भी स्कूल में दाखिला दिला दिया गया। वह कुछ समझ नहीं पाती थी इसलिए कक्षा में बहुत कमजोर थी। साथ के बच्चे भी उसके साथ खेलने से भागते थे। जैसे तैसे पढती रही। स्कूल की एक अध्यापिका से  वह बहुत नजदीकी महसूस करने लगी। वह शायद समझती होगी कि बिंदु को अधिक देखभाल की जरूरत है।

“एक दिन बिंदु टीचर को अपने घर बुला लाई। उन टीचर ने मामी को बिंदु के विषय में कुछ समझाने का प्रयास किया। इस बात से नाराज होकर उन्हें बिठाने की जगह छोटी मामी ने चार बातें सुना दी। टीचर उल्टे पैरों लौट गई।” अनु की माँ ने उससे बताया।

बिंदु का मन बहुत आहत हो गया। ऐसे ही बिंदु के मन को चोट पहुंचाने वाली घटनाएं घटती  रहीं।धीरे-धीरे बिंदु ने अकेले बड़बड़ाना सीख लिया। जितना गुस्सा होता था वह अकेले कमरे में बोलकर निकालती थी।

संयुक्त परिवार था बिंदु की माँ को डर लगता था कि इस बात का मजाक उड़ेगा इसलिए वह बिंदु को कमरे में बंद रखने लगी। उसकी मानसिक अवस्था और ज्यादा खराब होती चली गई। बिंदु के पिता ने सोचा अब उसका विवाह कर देना चाहिए। लड़के वालों से बात छुपा कर उसकी शादी कर दी गई।

यह बात छुपने वाली तो थी नहीं। बहुत जल्दी लड़के वालों को पता चल गया कि बिंदु सामान्य नहीं है। उन्होंने डॉक्टरी जांच कराई और तलाक का मुकदमा शुरू कर दिया। तलाक हो भी गया और बिंदु फिर से मायके आ गई।

बिंदु कुछ असामान्य थी लेकिन ससुराल और पति को भूल नहीं पा रही थी। अब वह पहले के मुकाबले और ज्यादा बड़बडाने लगी और कभी कभी चीख भी पडती थी। उसकी माँ ने लगातार उसे कमरे में बंद रखना शुरू कर दिया।

ताई लोग कहती थीं, “सबके सामने  बिठाओ सब से बात करें जिससे उसका मन भी बहले।” लेकिन उनको यह मंजूर नहीं था क्योंकि उन्होंने कभी किसी बात में नीचा नहीं देखा था। उनकी बेटी असामान्य है यह बात वह बर्दाश्त नहीं कर पा रही थी जबकि सही समय पर इलाज कराने से बिंदु ठीक हो सकती थी। उनकी मूर्खतापूर्ण विचारधारा ने उसे लगभग पागल कर दिया।

बिंदु के बाकी भाई बहन सामान्य थे लेकिन किसी को उससे सहानुभूति नहीं थी। सब उस से बचते थे। अभी मंझले मामा के सबसे छोटे बेटे की शादी थी। इसके बाद छोटे मामा के बेटे की शादी होनी थी।

अनु को उसकी मम्मी ने बताया की छोटी मामी बिंदु को मानसिक चिकित्सालय में भर्ती करने ले गई हैं। उनकी आंखें बार-बार भर आ रही थीं। वैसे तो वह कभी बच्चों के सामने किसी की बुराई नहीं करती थी पर दुख भरी लंबी सांस लेकर कहने लगी, “बिंदु को तो उसके माता-पिता ने ही विक्षिप्त कर दिया। काश छोटी मामी सबकी बात मान लेती और बचपन में ही बिना किसी झिझक के बिंदु का इलाज करवा देतीं तो आज यह दशा नहीं होती। काश वह समझ लेतीं कि बिंदु की क्या आवश्यकता है।”

अनु रोती हुई मम्मी से लिपट गई और अपना सिर उनकी गोदी में रख दिया। बिंदु मौसी का दु:ख देखकर उसके आंसू भी बह रहे थे।

मूल चित्र: Still from Rang/Indian Short Films, YouTube

पसंद आया यह लेख?

पाइये विमेन्सवेब के सारे दिलचस्प हिंदी लेख अपने ईमेल इनबॉक्स मे!

विमेन्सवेब एक खुला मंच है, जो विविध विचारों को प्रकाशित करता है। इस लेख में प्रकट किये गए विचार लेखक के व्यक्तिगत विचार हैं जो ज़रुरी नहीं की इस मंच की सोच को प्रतिबिम्बित करते हो।यदि आपके संपूरक या भिन्न विचार हों  तो आप भी विमेन्स वेब के लिए लिख सकते हैं।

टिप्पणी

About the Author

16 Posts | 439,188 Views
All Categories