कोरोना वायरस के प्रकोप में, हम औरतें कैसे, इस मुश्किल का सामना करते हुए भी, एक दूसरे का समर्थन कर सकती हैं?  जानने के लिए चेक करें हमारी स्पेशल फीड!

तुम्हारे पापा की उम्र का हूँ तो क्या? अभी तो मैं जवान हूँ…

हमें शादी के लिए " कुंआरी" लड़की चाहिए, आज भी पुरुष शादी से पहले जितने चाहे रिश्ते बनाए वो उसकी मर्दानगी की पहचान है पर स्त्री के लिए वो एक कलंक...

हमें शादी के लिए ” कुंआरी” लड़की चाहिए, आज भी पुरुष शादी से पहले जितने चाहे रिश्ते बनाए वो उसकी मर्दानगी की पहचान है पर स्त्री के लिए वो एक कलंक…

लड़कियों की शादी की न्यूनतम उम्र 21 होगी। युवतियों की न्यूनतम उम्र में आखिरी बदलाव 1978 में किया गया था, और इसके लिए शारदा एक्ट 1929 में परिवर्तन कर उम्र 15 से 18 की गई थी।

UNICEF के अनुसार भारत में हर साल 15 लाख लड़कियों की शादी 18 साल से कम उम्र में हो होती है। जनगणना महापंजीयक के मुताबिक देश में 18 से 21 साल के बीच विवाह करने वाली युवतियों की संख्या करीब 16 करोड़ है…

अगर ये बिल पास हुआ तो ये कानून सभी धर्मों और वर्गों पर लागू होगा!

समझ नहीं आ रहा कि इस बार मैं इस लेख की कहां से शुरुआत करु? एक प्रसिद्ध बॉलीवुड हीरोइन की शादी से? पार्क में खेलती हुई उस छोटी बच्ची से? फिल्म का प्रीमियर अटेंड करती उस बॉलीवुड की हीरोइन से या अपनी कहानी से या आज की नई उभरती हुई बॉलीवुड अभिनेत्री से…

बहुत अजीब बात ये है सामाजिक, आर्थिक, धर्म, शिक्षा राजनीति, इन सभी कहानियों में कुछ भी एक जैसा नहीं है, सिवाय एक बात के कि हम सब लड़की/महिला हैं।

कुछ दिन पहले बॉलीवुड की बहुत ही चर्चित अभिनेत्री कैटरीना कैफ की शादी अभिनेता विकी कौशल से हुई, सभी लोग उनकी शादी की डिटेल्स जानना चाहते थे और वही सोशल मीडिया पर कैटरीना कैफ का मजाक बनाया जा रहा था, उनकी उम्र को लेकर, उनके पूर्व प्रेमी और उनके पूर्व प्रेम प्रसंग सलमान खान और रणधीर कपूर को लेकर। बेहद अश्लील ढंग से उनके स्त्री सम्मान को तार-तार किया जा रहा था कारण था सिर्फ उनका अपने पति से उम्र में कुछ साल बड़ा होना और उनके पुराने रिश्ते।

क्या यही सब हमको सलमान या रणबीर कपूर की शादी में देखने को मिलेगा? नहीं! क्यों? क्यूंकि आज भी हम शादी के लिए ” कुंआरी” लड़की की तलाश में हैं, आज भी एक पुरुष शादी से पहले जितने चाहे रिश्ते बनाए वो उसकी मर्दानगी की पहचान है पर स्त्री के लिए वो एक कलंक…

Never miss real stories from India's women.

Register Now

कैटरीना कैफ और उनके पूर्व प्रेमियों के बीच में जो भी निजी कारण रहे हों अलग होने के लेकिन मजाक और मीम का पात्र बनी केवल कैटरीना कैफ! और ये सारे मीम कोई पुरानी पीढ़ी के लोग नहीं बना रहे हैं, ये आप की आज की नई युवा पीढ़ी की विचारधारा है… मुबारक हो!

मैं पार्क में बैठी थी वहां छोटे-छोटे बच्चे खेल रहे थे तभी कुछ बच्चों में झगड़ा हुआ और एक छोटी सी बच्ची ने एक अपने हमउम्र लड़के को खेल-२ में जोरदार धक्का मार दिया जिससे वो गिर कर रोने लगा। दोनों के परिवार, उन दोनों की तरफ लपके।

लड़की की मां ने बच्ची को जोरदार डांट लगाई, “ऐसे मारते हैं किसी को?” जिससे वो मोटे-मोटे आसुओं से रोने लग गई। बड़ा मार्मिक दृश्य था। दोनों बच्चे रो रहे थे। तभी लड़के की मां ने बात को आगे ना बढ़ाते हुए दोनों की दोस्ती करानी चाही और लड़की की मां से पूछा, “क्या उम्र होगी बिटिया की?”

लड़की की मां ने कहा, “6 साल!”

तपाक से उन्होंने जवाब दिया, “ये तो मेरे बेटे एक साल से बड़ी है।” और बेटे की तरफ देख कर बोली, “चलो बेटा दीदी से हैंड शेक करो, चलो-चलो जल्दी दोनों हाथ मिलाओ, दोस्ती करो। अब चुप हो जाओ, कुछ नहीं हुआ! अरे! लड़के ऐसे नहीं रोते…चलो!”

इस वृतांत को देखकर मैं सोच में पड़ गई…

बचपन से ही हम अनजाने में कितने सामाजिक कंडीशनिंग के बीज बच्चों के कोमल मन/ मस्तिष्क में बो देते हैं। लड़की में शक्ति है, वो धक्का मार सकती है( कुछ गलत होने पर), पर बचपन से ही उसे रोक दिया गया, लड़का चोट लगने पर रो सकता है, उस पर भी रोक लगा दी (पुरूष नहीं रोते) दोनों बच्चों के मन में लड़का-लड़की के अंतर के साथ साथ, उम्र मे लड़की अगर एक साल भी बड़ी हो तो वो “दीदी”हो जाती है। ये सामाजिक कंडीशनिंग भी कर डाली…वाह:!

आप हिंदुस्तान से लेकर हॉलीवुड की किसी भी फिल्म के चर्चित मेल स्टार को अगर देखेंगे तो आप हैरान रह जाएंगे कि उनके लिए उम्र का कोई पैमाना नहीं होता। हिंदुस्तान के बॉलीवुड से लेकर अलग-अलग राज्यों की फिल्म के मेगास्टार की उम्र 71 से भी ज्यादा हैं जो हीरो के तौर पर फिल्मों में आते हैं। साउथ इंडिया की फिल्म इंडस्ट्री में कई मेगास्टार और उनके पुत्र दोनों, अलग-अलग फिल्म्स में हीरो का रोल निभाते हुए आपको दिखाई देंगे और उनकी हीरोइन की उम्र होती है, उनकी बेटी और पोती की उम्र की।

इसी का ज्वलंत उदाहरण है बोलीवुड फिल्म इंडस्ट्री के हीरो सैफ अली खान की बेटी सारा अली खान (26 साल) जिनकी आने वाली मूवी में वो अक्षय कुमार की हीरोइन के तौर पर दिखाई देंगी जो उनके पिता सैफ अली खान से भी 4 साल उम्र में बड़े है(54 साल) लेकिन जब सारा अली खान से पूछा गया कि क्या उन्हें अजीब नहीं लगता, पिता से उम्र बड़े हीरो के साथ रोमांटिक सीन करते वक्त, तो उनका जवाब था, “नहीं!”

कैसे एक बॉलीवुड की नई उभरती हुई अभिनेत्री बड़े बैनर, बड़े बजट, बड़े उम्र के चर्चित हीरो की फिल्म को “ना” बोलेगी क्योंकि हमारे यहां हीरोइनों का कैरियर हीरो के करियर के मुकाबले कुछ सालों का होता है और हर दूसरी फिल्म में ऐसी बेमेल जोड़ियां दिखना आम बात है।

पहले एक हीरोइन की उम्र और शादी के बाद उसका कैरियर स्थाई तौर पर खत्म होना लाज़मी होता था। हां कुछ सालों में कुछ अपवाद रहे हैं जैसे कैटरीना कैफ, मलाइका अरोड़ा, करीना कपूर खान ,माधुरी दीक्षित, अनुष्का शेट्टी, ज्योतिका, काजल अग्रवाल, श्रीया सरन, श्रुति हसन, स्नेहा प्रसाना, प्रिया आनंद, तृषा कृष्णन, समांथा रूथ… जो आज अपने अभिनय से इस ग्लैमर की दुनिया में अपने पैर जमाए हुए हैं पर उनको भी उनके उम्र के ताने कई बार दिए जाते हैं।

रजनीकांत, मामूटी, मोहनलाल, शाहरुख खान, अमीर खान, चिरंजीवी, अजीत, विजय, सूर्या, विक्रम, सुरेश गोपी… क्या आपने कभी किसी हीरो का इंट्रोडक्शन/ न्यूज हेडलाइंस/ वीडियो मे उनकी उम्र का जिक्र सुना है? या कोई चर्चित चेहरा पुरुष, जब अपने से कम उम्र लड़की से शादी करता है तो क्या आपने उस पुरुष की उम्र का जिक्र सुना है? कहीं किसी न्यूज़ पेपर या वीडियो में ऐसी हैडलाइन सुनाई दी कभी, “34 वर्षीय शाहिद कपूर ने की 20 वर्षीय मीरा राजपूत से की शादी,जो उनके छोटे भाई की उम्र की है, और दोनों में उम्र का अंतर 14 साल का है!”

नहीं ना?

पर इलेक्ट्रॉनिक माध्यम से लेकर बड़े-बड़े न्यूज़पेपर की हेडलाइन में आपको कहीं ना कहीं यह पढ़ने को मिल जाता है, “जानिए इन हीरोइनों ने की अपने से कम उम्र के लड़के से शादी!”

पर हाल-फिलहाल जब संगीता बिजलानी एक फिल्म के प्रीमियर में पहुंची तो न्यूज हेड लाइन थी, “सलमान खान की पूर्व प्रेमिका, 61 साल की संगीता बिजलानी इस ट्रेंडी स्कर्ट को पहनकर मूवी के प्रीमियर में शरीक हुईं!”

क्या बात!

क्या कोई इलेक्ट्रॉनिक मीडिया या न्यूज़पेपर ये हेड लाइन लिख पाएगा, “56 साल की उम्र में भी शाहरुख खान कर रहे है अपने से 30 साल छोटी हीरोइन के साथ रोमांटिक सीन…”

कहाँ से लाते हैं, इतना दोगलापन?

और फिर एक वृतांत मेरे साथ हुआ जहां मुझे एहसास हुआ कि जाने-अनजाने हम कैसे सामाजिक कंडीशनिंग का हिस्सा बन जाते हैं। कुछ दिन पहले एक साहित्य कार्यक्रम में जाने का मौका मिला, वहां के आयोजक सभी की देखभाल कर रहा थे। उनमें से एक आयोजक ने मुझ पर कुछ खास ध्यान देना जब चालू किया, तो मुझे अंदर ही अंदर घबराहट होने लगी क्योंकि वो लड़का, मुझसे उम्र में छोटा था। उस ने मुझसे कोई भी गलत व्यवहार नहीं किया या ना कोई भी सीमा लांघी बस एक स्त्री-पुरुष का जो आकर्षण होता है वो था। मैं उस बात को पचा नहीं पा रही थी और बातों-बातों में उसे कम से कम चार-पांच बार ये समझा दिया कि मैं उससे उम्र में बड़ी हूं और वो मुझे अपने से बड़ा मान कर केवल आदर दे, आकर्षण या प्रेम की निगाह से ना देखे।

बिलकुल इसके विपरीत, बहुत से पुरुष अपनी उम्र देखे बिना भी आकर्षित होते आये हैं या शादी का प्रस्ताव रखते हैं। कोई मुझसे उम्र में 15 साल बड़ा है, कोई युवा बेटी का पिता है, किसी के दो बच्चे हैं। इनकी उम्र 45 साल से लेकर 55 साल तक है। मुझे तब भी बहुत अजीब लगता था। पर कोई छोटी उम्र का लड़का मेरे प्रति आकर्षित हुआ तो मैं बहुत बेचैन हो जाऊंगी ऐसा मैंने सोचा नहीं था।

“सोशल कंडीशनिंग” आह! क्योंकि हमेशा अपने आसपास यही माहौल देखा है कि जीवनसाथी उम्र में बड़ा होगा तो ही परिपक्व होगा- आर्थिक, मानसिक, भावुक तौर पर सबल होगा और तभी जीवन या शादी का निर्वाह कर पाएगा।

उम्र और परिपक्वता का कोई लेना देना नहीं होता। कोई इंसान जीवन के उतार-चढ़ाव से सीख ले तो एक 28 साल का लड़का भी 40 साल के पुरुष से ज्यादा परिपक्व हो सकता है। क्या ये बात सोची जा सकती है?

ऐसा बिल्कुल मत सोचिएगा की उम्र के पैमाने केवल औरतों को डराते हैं। ना! अंतर सिर्फ इतना है कि निंदा औरतों या महिलाओं की उम्र की चारों तरफ देखने को मिल जाती है, चाहे वो कोई बॉलीवुड सेलिब्रिटी हो, राजनीतिज्ञ, समाज सेवक, लेखक, शिक्षक या कोई एक ग्रहणी।

मैंने अपने जीवन में अनुभव किया कि मेरे पिता से 7-8 साल उम्र में छोटे पुरूष (55-56 उम्र) चाहते हैं कि मैं उन्हें भाई साहब बोलूँ, जो मेरे चाचा की उम्र के हैं। अगर आप ध्यान से देखेंगे तो हर एक पुरुष चाहे वो 40 से लेकर 75 साल का हो एक दूसरे को “भाई साहब” कह कर संबोधित करते हैं। अधिकांश पुरुष अपने आपको चाचा, ताऊ, भाई, पिता का संबोधन किसी महिला से सुनना नहीं चाहता (इसमें कुछ अपवाद है) शायद उम्र का डर साफ़ देखने को मिलता है।

अंतर सिर्फ इतना है, पुरूष एक दूसरे का उपहास या निंदा नहीं करते। ना निजी जीवन में ना रुपहले पर्दे पर। बड़ी उम्र के हीरो को देखकर सीटियां बजाते हैं, उन्हें “भाई”, “भाईजान”, “थलाइवा”, “मेगा स्टार”, “सुपर स्टार”, जैसे अलंकारों से सुसज्जित करते हैं। वहीं 30 साल की हिरोइन या महिला बुढ़िया के वर्ग में आ जाती है!

तब एक 70 साल के बूढ़े हीरो को 22-23 साल की हीरोइन के साथ देख कर, किसी को कोई फर्क नहीं पड़ता लेकिन अगर एक हीरोइन अपने से उम्र में 1 साल बड़े व्यक्ति से शादी कर ले या प्रेम प्रसंग हो जाए तो न्यूज़ हैडलाइन से लेकर मीम बनाने में आज की न्यूज चैनल, पत्रकार, युवा पीढ़ी भी देर नहीं लगाती।

लड़की की शादी की उम्र 21 साल हो या 18 जब तक हम महिला को सिर्फ शारीरिक भोग की तरह देखेंगे, परिवार लड़की को सिर्फ एक जिम्मेदारी मानेगा, कम उम्र बहू या बीवी की तलाश शारीरिक और मानसिक जरूरत के लिये रहेगी तब तक कम उम्र की लड़कियों की शादी और मातृत्व का बोझ उनके कोमल शरीर, अबोध मानसिकता को उठाना पड़ेगा।

आपको जानकर हैरानी होगी राजस्थान के एक पिछड़े इलाके में इस बिल की ख़बर आते ही, कुछ लोगों ने जल्दबाजी में अपनी स्कूल और कॉलेज में पढ़ती हुई बच्चियों की शादी आनन-फानन में तय कर दी क्योंकि जिस लड़के से वो अपनी बेटी के स्कूल या कॉलेज खत्म होने के बाद शादी करने की इच्छा रखते थे, वो 3 साल तक नहीं रुकेगा और उनके हाथ से अच्छा रिश्ता चला जाएगा।

कानून अभी बना भी नहीं लेकिन कानून को तोड़ने वाले उससे पहले आ गए…!

तालियां!

क्या जीवन भर हम लड़कियों को केवल एक बोझ मानते रहेंगे? क्या उम्र के पैमाने से ही हम जीवन साथी की तलाश करते रहेंगे? क्या सड़ी गली मानसिकता के लिए भी कोई कानून बनेगा?

नया साल फिर हमारे जीवन में दस्तक देने के लिए खड़ा है। कैलेंडर में सिर्फ दिन और तारीख बदल रही हैं? क्या समाज और उसकी वही घिसी-पिटी सामाजिक सोच भी बदलने के लिए, कुछ नए के लिए कुछ अच्छे के लिए तैयार हैं?

और उम्र का क्या है जनाब ये एक ऐसी शह कि आप चाह कर भी रोक नहीं पाएंगे। जीवन साथी ढूंढने के पैमाने बदलने का समय दस्तक देने लगा!

और स्त्री और पुरुष दोनों को उम्र के किसी भी पड़ाव को समान रूप से, खूबसूरत तरीके से देखने व अनुभव करने का समय भी शायद दस्तक देने लगा है!

इमेज सोर्स: Still from trailer of Atrangi Re, YouTube.

पसंद आया यह लेख?

पाइये विमेन्सवेब के सारे दिलचस्प हिंदी लेख अपने ईमेल इनबॉक्स मे!

विमेन्सवेब एक खुला मंच है, जो विविध विचारों को प्रकाशित करता है। इस लेख में प्रकट किये गए विचार लेखक के व्यक्तिगत विचार हैं जो ज़रुरी नहीं की इस मंच की सोच को प्रतिबिम्बित करते हो।यदि आपके संपूरक या भिन्न विचार हों  तो आप भी विमेन्स वेब के लिए लिख सकते हैं।

टिप्पणी

About the Author

17 Posts | 34,940 Views
All Categories