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Kashish Bhardwaj

जिंदगी की राह का एक राही ... Social worker, Backpacker, Storyteller, Poet, Neophile, Ambivert, Spritual Seeker!!!

Voice of Kashish Bhardwaj

तुम्हारे कुर्ते का गला कितना गहरा था…

"नहीं सुनना मुझे कुछ... इतनी भीड़ में तुम पर ही क्यों नजर गई उनकी? कुछ तो किया होगा तुमने? यूं ही तो कोई परेशान नहीं किया करता..."

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मेरी प्रोफाइल पिक्चर पर इतने कम लाइक्स क्यों हैं…

अगर एक ने प्रोफाइल पिक्चर बदली और उस पर ज्यादा कमेंट और लाइक आ गए तो एक हफ्ते के अंदर-अंदर आपको भी अपनी प्रोफाइल पिक्चर बदलनी होगी... 

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फेमिनिज्म हाय-हाय! फेमिनिज्म हाय-हाय!

लखनऊ में अभी एक वृतांत हुआ जहां एक महिला ने एक गरीब कैब ड्राइवर को बिना उसकी गलती के उसके साथ हाथापाई की और...

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हमेशा पत्नी अपने पति के नाम से जानी जाती है लेकिन…

हम सब एक ढोंगी समाज का हिस्सा हैं। बगुलाभगत तो यहां इतने हैं गिनती कर कर के थक जाएंगे... लेकिन इनकी गिनती कम नहीं होगी...

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उफ्फ! ये लाल तो कमाल है…

मेरी लाल रंग की चुनर, लाल रंग में लहराती मेरी वो साड़ी, लाल रंग का सिंदूर, लाल रंग की मेरी बिंदिया, और वो लाल लहू का रंग...

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क्या सच में मेरे सारे ‘एडल्ट ग्रुप’ बंद हो जायेंगे?

कल रात जो सेक्सुअल मीम कॉपी/पेस्ट किए थे, वो अश्लील गाना जो डाउनलोड किया था, अपने एडल्ट ग्रुप में आप कैसे पहुंचा पाएंगे? कहाँ पोस्ट करेंगे?

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और मेरी माँ के कहे वो शब्द मेरी हिम्मत बन गए…

छोटी सी जान को उसकी मां की गोद में देते हुए डॉक्टर ने कहा, "घबराइए नहीं, बच्ची का रंग थोड़ा दबा हुआ है पर नैन नक्श बहुत अच्छे हैं।"

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आखिर कब तक तुम ऊँचे और नीची रहूंगी मैं?

इस दौर में कहते हैं सब, हम लिखेंगे नई कहानियां, जन्म लूं मैं किसी भी सदी में, क्यों लगता है बिकती हैं बस मेरी जवानियां?

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एक और इंसानियत को शर्मसार करता हुआ वृत्तांत…

किसी ने एक बार भी ये जानने की कोशिश भी नहीं करी कि क्या आरोपी पहले से शादीशुदा है? अगर वो शादीशुदा होता तो क्या होता?  

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चल! थक मत!

चलते रहना थकना मत, इस काली रात की सुबह भी बहुत शानदार होगी, जिंदगी किसने कहा कि आसान होगी।

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जिन्हें नाज़ है हिंद पर वो कहां हैं?

आत्मा का टूटना, बचपन का चले जाना, जिंदगी भर अपने आपको दोषी मानना, मानसिक आघात, शारीरिक टूटन, इसको आप किस एक्ट में लाना चाहेंगे?

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खरीदार मैं हूँ तुम्हारी, तुम नहीं…

जीवनसाथी तलाशते हो या बुढ़ापे में सेवा करने के लिए कोई आया, मुझे तो तुम्हारा यह समाज आज तक कुछ समझ में नहीं आया...

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उन आँखों ने इशारे से कहा, बेबस हो तुम…

घबराई सी पहुंची कहने जो अपनी बात, सभी के आंख के इशारे कहने लगे मानो चुप रह, सह, कह नहीं सकते हम ये किसी से...

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निर्भया हो, हैदराबाद, उन्नाव या हाथरस…क्या फर्क पड़ता है!

मजाक का विषय, शारीरिक अंगों का भंडार, यही है इस देश में हर औरत की पहचान। और ऐसी मर्दांगी की बातें करने वाले मर्द हमारे बीच ही पनपते हैं। 

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