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Kashish Bhardwaj

जिंदगी की राह का एक राही ... Social worker, Backpacker, Storyteller, Poet Neophile Ambivert, Spritual Seeker!!!

Voice of Kashish Bhardwaj

और मेरी माँ के कहे वो शब्द मेरी हिम्मत बन गए…

छोटी सी जान को उसकी मां की गोद में देते हुए डॉक्टर ने कहा, "घबराइए नहीं, बच्ची का रंग थोड़ा दबा हुआ है पर नैन नक्श बहुत अच्छे हैं।"

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आखिर कब तक तुम ऊँचे और नीची रहूंगी मैं?

इस दौर में कहते हैं सब, हम लिखेंगे नई कहानियां, जन्म लूं मैं किसी भी सदी में, क्यों लगता है बिकती हैं बस मेरी जवानियां?

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एक और इंसानियत को शर्मसार करता हुआ वृत्तांत…

किसी ने एक बार भी ये जानने की कोशिश भी नहीं करी कि क्या आरोपी पहले से शादीशुदा है? अगर वो शादीशुदा होता तो क्या होता?  

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चल! थक मत!

चलते रहना थकना मत, इस काली रात की सुबह भी बहुत शानदार होगी, जिंदगी किसने कहा कि आसान होगी।

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जिन्हें नाज़ है हिंद पर वो कहां हैं?

आत्मा का टूटना, बचपन का चले जाना, जिंदगी भर अपने आपको दोषी मानना, मानसिक आघात, शारीरिक टूटन, इसको आप किस एक्ट में लाना चाहेंगे?

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खरीदार मैं हूँ तुम्हारी, तुम नहीं…

जीवनसाथी तलाशते हो या बुढ़ापे में सेवा करने के लिए कोई आया, मुझे तो तुम्हारा यह समाज आज तक कुछ समझ में नहीं आया...

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उन आँखों ने इशारे से कहा, बेबस हो तुम…

घबराई सी पहुंची कहने जो अपनी बात, सभी के आंख के इशारे कहने लगे मानो चुप रह, सह, कह नहीं सकते हम ये किसी से...

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निर्भया हो, हैदराबाद, उन्नाव या हाथरस…क्या फर्क पड़ता है!

मजाक का विषय, शारीरिक अंगों का भंडार, यही है इस देश में हर औरत की पहचान। और ऐसी मर्दांगी की बातें करने वाले मर्द हमारे बीच ही पनपते हैं। 

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