कोरोना वायरस के प्रकोप में, हम औरतें कैसे, इस मुश्किल का सामना करते हुए भी, एक दूसरे का समर्थन कर सकती हैं?  जानने के लिए चेक करें हमारी स्पेशल फीड!

माँ, मुझसे भी ज्यादा शायद ईश्वर को थी तेरी ज़रुरत…

Posted: मई 8, 2021

माँ, सबसे छोटा शब्द…माँ, सबसे छोटा शब्द लेकिन शब्दकोष में शायद शब्द ही कम पड़ जाएँ, पर माँ को बयाँ नहीं किया जा सकता।

“माँ “
सब रिश्तों में सबसे छोटा शब्द
पर भावनाएँ असीमित हैं।
एक अथाह सा सागर है
पर सम्भावनाएँ असीमित हैं।

अन्जान दुनिया में जन्म लेकर
बहुत डरी हुई थी मैं।
जब गोद में लिया तूने
महफूज़, सँभली हुई थी मैं।

याद है हर वो पल
जब तूने दिया सहारा
मुसीबतों के सागर में
तू बन कर आई किनारा।

फिर एक दिन चली गई
मुझसे करके किनारा।
ना रोक पाई तुझको
कितना तुझे पुकारा।

फिर समझाया खुद को मैंने,
यही है बस हकीकत।
मुझसे भी ज्यादा शायद तेरी
ईश्वर को थी ज़रुरत।

होता है गर्व खुद पर,
कि मैं हूँ तेरी बेटी।
इक जन्म मिले फिर से,
तो बन जाऊँ तेरी बेटी।

पास ही है, दूर नहीं तू,
कहकर समझा देते सब मुझको।
पर क्या अपनी थाली में से,
खिला सकती है “बुक्का” मुझको?

लेने होंगे जनम कई,
तेरे जैसा बन पाने को।
कुछ डाल सकूँ अपने बच्चों में,
तेरा कुछ ऋण चुकाने को।

लेने होंगे जनम कई,
तेरे जैसा बन पाने को।
कुछ डाल सकूँ अपने बच्चों में,
तेरा कुछ ऋण चुकाने को।

मूल चित्र : Still from Mom/Content Ka Keeda, YouTube

पसंद आया यह लेख?

पाइये विमेन्सवेब के सारे दिलचस्प हिंदी लेख अपने ईमेल इनबॉक्स मे!

विमेन्सवेब एक खुला मंच है, जो विविध विचारों को प्रकाशित करता है। इस लेख में प्रकट किये गए विचार लेखक के व्यक्तिगत विचार हैं जो ज़रुरी नहीं की इस मंच की सोच को प्रतिबिम्बित करते हो।यदि आपके संपूरक या भिन्न विचार हों  तो आप भी विमेन्स वेब के लिए लिख सकते हैं।

Samidha Naveen Varma Blogger | Writer | Translator | YouTuber • Postgraduate in English Literature. • Blogger at Women's

और जाने

घर के बाहर काम करने से क्या मैं बुरी माँ बन जाऊँगी?

टिप्पणी

Women In Corporate Allies 2020

अपना ईमेल पता दर्ज करें - हर हफ्ते हम आपको दिलचस्प लेख भेजेंगे!

Women In Corporate Allies 2020