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कोरोना काल में सावधान रहें गर्भवती महिलाएं ताकि बच्चे को ना हो संक्रमण

Posted: मई 9, 2021

कोरोना माहमारी भयावह रुप ले चुकी है, इस काल में जरुरी है कि गर्भवती महिलाएं अपना ज़्यादा से ज़्यादा ध्यान रखें और पूरी सावधानी बरतें। 

कोरोना माहमारी भयावह रुप ले चुकी है, ऐसे में जरुरी है अपनी और अपनों की देखभाल। कोरोना वायरस के नये वैरियंट को डबल म्युटेंट कहा जा रहा है, जो 21-30 साल के लोगों को ज्यादा प्रभावित कर रहा है। आमतौर पर इस एज ग्रुप में ज्यादातर गर्भवती महिलाएं भी शामिल होती हैं। 

कोरोना के नए वैरिएंट के कुछ केस ऐसे भी केस सामने आएं हैं, जिसमें गर्भ में पल रहे बच्चे को भी कोरोना का ट्रांसमिशन हुआ है। हालांकि ऐसे मामले केवल 2-3 प्रतिशत केसों में ही पाए गए हैं। पहले बच्चों में कोरोना वायरस के ट्रांसमिट होने का खतरा नहीं के बराबर था, लेकिन इस बार की हालत पहले से भी ज्यादा खराब है। 

डब्लूएचओ द्वारा भी यह आशंका नहीं जताई गई थी कि मां से बच्चे में कोरोना संक्रमण देखा जा रहा है, इसलिए अभी आने वाली रिसर्चों के अनुसार भी पता लगाया जा सकेगा कि गर्भ में पल रहे बच्चों में संक्रमण का स्तर क्या होगा? 

गर्भवती महिला के शरीर के बदलाव

एक गर्भवती महिला की शरीर में कई तरह के बदलाव आते हैं, जिसे डॉक्टर की देख-रेख में लोग अपना ध्यान रखते हैं। ऐसे में अगर कोरोना वायरस का खतरा थोड़ा भी महसूस हो, तब गर्भवती महिला समेत परिवार के अन्य सदस्यों को भी जागरुक होने की जरुरत हो जाती है क्योंकि कोरोना संक्रमण के बाद बच्चे के आसपास बन रहे एमनियोटिक फ्लूड सुख जाता है, जिस कारण बच्चे की जान भी जाने का खतरा हो जाता है।

एमनियोटिक फ्लूड की मात्रा में बदलाव होने से बच्चे का विकास रुक जाता है, और संक्रमण होने की आशंका भी बढ़ जाती है। ऐसे में डॉक्टरों की यही सलाह होती है कि कोरोना के शुुरुआती टेस्ट्स जल्द करवा लिए जाएं और महिला को सेल्फ आइसोलेशन में रखा जाए। 

कोरोना में गर्भवती महिलाएं के लिए डॉक्टरों की जरुरी सलाह-

  • अपने-आप की जांच करते रहें, ताकि किसी प्रकार का बदलाव महसूस होने पर सावधान हो जाएं। 
  • अपने आप को साफ रखें और आसपास सकारात्मकता बनाएं रखें। 
  • नियमित तौर पर हाथों को सैनिटाइज करते रहें। 
  • 3-4 हफ्तों के पूरा होने के बाद अल्ट्रासाउंड करवाने जाएं, तब पूरी एहतियात के साथ ही बाहर निकलें। 
  • मांओं के लिए सबसे जरुरी है, पौष्टिक आहार लेना ताकि शरीर की रोग-प्रतिरोधक क्षमता को बल मिल सके और शिशु के गर्भस्थ विकास में बाधा उत्पन्न ना हो सके। 
  • सेल्फ आइसोलेशन
  • साथ ही स्वयं को निगेटिव बातों से दूर रखें और परिवार के लोगों के साथ समय बिताएं और बच्चे के लिए अच्छा सोचें।

माएं पिला सकतीं हैं दूध लेकिन….

साथ ही वैसी महिलाएं जिन्होंने अपने बच्चे को जन्म दे दिया है, मगर अब वह कोरोना पॉजिटिव आ गईं हैं, उनके लिए आइसीएमआर ने गाइडलाइन जारी करके कहा है कि कोरोना पॉजिटिव माएं बच्चों को दूध पिला सकती हैं, लेकिन बहुत ज्यादा सावधानी के साथ। मां का दूध पीते वक्त बच्चा मां के बहुत करीब होता है, ऐसे में सांस के जरिये संक्रमण फैलने का खतरा बढ़ जाता है। हालांकि बच्चों को तत्काल ब्रेस्ट मिल्क बैंक के जरिए भी दूध पिलाया जा सकता है, जिसे माएं ही चलाती हैं।  

हालांकि कोरोना से संक्रमित होने के बाद मां के स्वास्थ्य पर असर पड़ सकता है, लेकिन नवजात बच्चों पर अभी कोई ज्यादा असर नहीं दिख रहा है, जब तक बच्चों को पूरी केयर के साथ रखा गया हो। कई रिसर्च में पाया गया है कि COVID-19 पॉजिटिव मां से पैदा होने वाले नवजात शिशु में केवल संक्रमण होने का जोखिम है। कुछ केसों में संक्रमण पाए भी गए हैं, लेकिन क्लीनीकल सबूत अभी आने बाकी हैं। हालांकि अगर कोई महिला प्रेगनेंसी के लास्ट ट्राइमेस्टर में चल रही है और कोरोना पॉजिटिव हो जाती हैं, तब इस बात की संभावना बढ़ जाती है कि डिलीवरी जल्दी हो जाए और यह भी महिलाओं के लिए तनाव भी वजह बन रही है। 

वैक्सीन का अंश बच्चे में भी

कुछ रिसर्च में पाया गया है कि गर्भवती महिला ने अगर कोरोना का वैक्सीन लगवाया है, तब मां के गर्भ में पल रहे बच्चे की इम्यूनिटी भी मजबूत रहती है। खासतौर से जब तक बच्चा मां का दूध पीता है। वहीं डॉक्टरों का भी कहना है कि एंटीबॉडीज को प्लेसेंटा के माध्यम से या ब्रेस्ट मिल्क के माध्यम से ट्रांसफर किया जा सकता है। यही वजह है कि डॉक्टर्स गर्भवती महिलाओं को टीका लगवाने के लिए भी प्रोत्साहित कर रहे हैं। खासकर ऐसी महिलाओं, जो फ्रंट लाइन वर्कर हैं।

बच्चे की सुरक्षा मां से जुड़ी होती है इसलिए मांओं को अपने साथ बच्चों का भी ध्यान रखना है। परिवार वालों की भी जिम्मेदारी बनती है कि वह मांओं की देखभाल पूरी तनम्यता से करें ताकि स्वस्थ मां के साथ एक स्वस्थ शिशु भी घर पर पधारे।

मूल चित्र : Deyan Georgiev, Canva Pro

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