कोरोना वायरस के प्रकोप में, हम औरतें कैसे, इस मुश्किल का सामना करते हुए भी, एक दूसरे का समर्थन कर सकती हैं?  जानने के लिए चेक करें हमारी स्पेशल फीड!

डॉ फाल्गुनी वसावड़ा की एक बात ज़रूर मानें कि आप जैसी भी हैं बहुत प्यारी हैं!

डॉ फाल्गुनी वसावड़ा कहती हैं कि हमारे पास सिर्फ एक ज़िंदगी है तो आखिर कब तक हम सोसाइटी के अनुसार खुद को बदलने में लगे रहेंगे?

डॉ फाल्गुनी वसावड़ा कहती हैं कि हमारे पास सिर्फ एक ज़िंदगी है तो आखिर कब तक हम सोसाइटी के अनुसार खुद को बदलने में लगे रहेंगे?

एक ही तो ज़िंदगी है कब तक खुद से नफरत करेंगे, सही कहा ना? आज ऐसी ही एक खूबसूरत महिला से हुई ख़ास बातचीत आपके लिए लाये हैं जिन्होंने सेल्फ लव को एक नयी परिभाषा दी है। डॉक्टर फाल्गुनी वसावड़ा – बोल्ड, चीयरफुल, हैप्पी, कॉन्फिडेंट, स्टाइलिस्ट। डॉक्टर फाल्गुनी एडवरटाइजिंग प्रोफेसर, TedX स्पीकर, बॉडी पॉजिटिव, डबल गोल्ड मेडलिस्ट, सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर और फैशन ब्लॉगर हैं।

अपने सोशल मीडिया प्लेटफार्म से ये बॉडी पॉजिटिविटी पर बात करती हैं और समाज और मीडिया के द्वारा दी गयी परफेक्ट ब्यूटी के कॉन्सेप्ट को चैलेंज करती हैं। अपनी इंस्टाग्राम रील्स में ये व्यंगात्मक तरीके से, युवा महिलाओं से लेकर होम मेकर्स तक, सबके मुद्दों पर बात करके हमारे चेहरे पर हसीं ले आती हैं। ये मार्केटिंग टिप्स भी देती हैं। और अगर आप साड़ी, ईयररिंग्स, नेकपीस और लिपस्टिक लवर भी हैं तो डॉक्टर फाल्गुनी का बोल्ड स्टाइल आपको ज़रूर पसंद आएगा।

डॉक्टर फाल्गुनी वसावड़ा से हुई इस वर्चुअल मुलाकात में इन्होंने अपनी जर्नी और सोशल मीडिया के बारे में चर्चा करी। इन्होंने बताया कि आखिर बॉडी पॉजिटिविटी है क्या और हम कैसे खुद से प्यार कर सकते हैं। और फाल्गुनी वसावड़ा ने होम मेकर्स के लिए भी चंद शब्दों में एक खूबसूरत सा मैसेज दिया है। 

डस्की स्किन कलर होने की वजह से मैंने भी बचपन से बहुत से लोगों से सो कॉल्ड ब्यूटी स्टैंडर्ड्स की डेफिनिशन सुनी है। इन सबका मुझे फर्क तो नहीं पड़ता लेकिन मैं बहुत सोचती हूँ कि आखिर ऐसे लोगों को क्या ज़वाब दूँ। डॉ फाल्गुनी वसावड़ा से हुए इस इंटरव्यू में मेरे इस प्रश्न का भी ज़वाब मिला। 

यक़ीनन आपके मन में भी ऐसे कई प्रश्न होंगे जिनके ज़वाब इस इंटरव्यू में मिलेंगे। तो अब आगे पढ़ते हैं हमारे प्रश्न और जानते हैं डॉ फाल्गुनी वसावड़ा का क्या कहना है। 

डॉ फाल्गुनी वसावड़ा के बॉडी पॉजिटिव होने का सफर 

मैं अर्ली ऐज में अपनी बॉडी को लेकर इनसिक्योर तो नहीं थी लेकिन कॉन्शियस थी। ये मेरे अर्ली 30s की बात है जब मैं बॉडी कॉंफिडेंट हुई। इसके पीछे अलग-अलग फैक्टर्स हैं। सबसे पहले मेरी शिक्षा का इसमें बहुत योगदान है। मैं अलग-अलग किताबें पढ़ी, नए-नए लोगों से मिली और पढाई पूरी होने के बाद मैं प्रोफेसर बन गयी। आर्थिक स्वतंत्रता से बहुत आत्म विश्वास आ गया।

इसके बाद मैं अपनी कॉन्फरेंसेस, रिसर्च वर्क के लिए दूसरे देशों में गई जहां मैंने एक अलग कल्चर देखा। वहां मैंने हर तरह के लोग देखे जो अपने आप में बहुत कॉंफिडेंट थे। साथ ही उन्हें कोई नहीं घूर रहा था, कोई जज नहीं कर रहा था। तो मेरे बॉडी पॉजिटिव होने के पीछे कई फैक्टर्स है जैसे एजुकेशन, फाइनेंशियल इंडिपेंडेंस, रीडिंग, ट्रैवेलिंग और कल्चरल एक्सपोज़र। 

Never miss real stories from India's women.

Register Now

कई बार खुद को भी अचानक महसूस होता है कि आप क्या जैसे दिखते हो उस तक सिमित रहना चाहते हो या उससे आगे भी बढ़ना चाहते हो। जब मुझे सेल्फ लव समझ आया तब मैं और बॉडी कॉंफिडेंट हो गयी। 

मैं नहीं चाहती कि भी कोई यंग लड़की अपने टीनएज इयर्स में इस कष्ट से गुज़रे…

फिर मैं अपने आप को मेरे काम, मेरे लिपस्टिक, मेरे कपड़े, मेरे हेयर स्टाइल आदि से एक्सप्रेस करने लगी। तब एक अंदर से कॉन्फिडेंस आता है कि आप कुछ भी कैरी कर सकते हैं। उसी दिन से मैं बॉडी पाजिटिविटी को लेकर बहुत वोकल रही हूँ। मैं नहीं चाहती कि कोई यंग लड़की अपने टीनएज इयर्स में इस कष्ट से गुज़रे। इसीलिए मैं अपना सोशल मीडिया प्लेटफार्म से ये मैसेज दूसरों को देना चाहती हूँ। 

शुरुवात में मुझे बहुत पॉजिटिव रिस्पांस मिला था क्योंकि मैं अपने पर्सनल एक्सपीरियंस पर बात कर रही थी। मैं जो कह रही थी वो सिर्फ कहने के लिए नहीं था बल्कि उसमे पूरा विश्वास करती थी। 

सोशल मीडिया पर हेट कमैंट्स को कैसे मैनेज करें

इसके लिए मैं मेरा 3C मॉडल इस्तेमाल करती हूँ – कम्युनिकेट, कनवर्स, कट द क्रैप। ये इस प्रकार है –

कम्युनिकेट – अगर कोई मेरे पॉइंट ऑफ़ व्यू से बिलकुल अपोजिट कमेंट करते हैं तो मैं उन्हें समझने की कोशिश करती हूँ क्योंकि खुद का पॉइंट रखना गलत नहीं है। 

कनवर्स – मैं उनसे बात करती हूँ। समझती हूँ कि वो क्या बोलना चाह रहे हैं। 

कट द क्रेेप – अगर कोई सिर्फ ट्रॉल्लिंग के लिए नेगेटिव कमैंट्स करते हैं तो मैं ब्लॉक कर देती हूँ। क्योंकि मैं कोई नेगेटिविटी नहीं चाहती। मेरे लिए मेन्टल पीस सबसे ऊपर है। 

डॉक्टर फाल्गुनी वसावड़ा के इस मॉडल को हम वर्चुअल दुनिया के साथ असल ज़िन्दगी में भी अपना सकते हैं और स्ट्रेस से बच सकते हैं।

बॉडी पॉजिटिविटी का मतलब क्या होना चाहिए?

बॉडी पॉजिटिविटी खुद को एक्सेप्ट करना है। समाज के द्वारा, मीडिया के द्वारा जो परिभाषा दी गयी है कि इस तरह के लोग ही सुन्दर हैं, ये सब गलत है। आप मोटे हो, आप डार्क स्किन है, पतले हो, लम्बे हो, छोटे हो, स्किन पर बहुत पिम्पल्स है, वाइट बाल है, और इन सबकी वजह से स्ट्रेस हैं तो इन सबसे ऊपर उठकर हर शेप साइज को अपनाना और खुद से प्यार करना ही बॉडी पाजिटिविटी है।

जो हम फिल्मों में, टेलीविज़न में देखते हैं वो सब आर्टिफीशियल है। बॉडी पॉजिटिविटी परफेक्ट ब्यूटी के कॉसेप्ट को चैलेंज करना है। ब्यूटीफुल कोई एक नहीं बल्कि कई टाइप के होते हैं।

जो महिलाएँ अपनी बॉडी को लेकर असुरक्षित महसुस करती हैं…

हमारे पास सिर्फ एक ज़िंदगी है वो भी कितनी बड़ी है कितनी छोटी है हमे नहीं पता। तो आखिर कब तक हमे खुद को हेट करने में, सोसाइटी के अकॉर्डिंग चेंज करने में लगे रहेंगे। हमें अपनी एनर्जी सही जगह इन्वेस्ट करनी चाहिए – एजुकेशन लेने में और फिनेंशली इंडिपेंडेंट बनने में जो की आज के समय की ज़रूरत है। खुद को सक्षम बनाइये।

अगर आप खुद ही खुद से प्यार नहीं करेंगी तो दूसरे क्यों करेंगे। जब आप खुद को अपनाओगे तो अपने आप दूसरे इज़्ज़त करेंगे। अपनी इन सिक्योरिटीज को पीछे छोड़िये और खुद को स्ट्रांग बनाइये।  

क्या पूरी लाइफ लोगों को जवाब देने में ही निकालनी है…

मेरा डस्की स्किन कलर है। इसलिए लोगों से कई तरह की बातें सुननी पड़ती है। तो ऐसे लोगो को कैसे कॉल आउट करें?

ऐसे लोगों को कॉल आउट मत करो। खुद को ज़्यादा स्ट्रांग करों। हमें अपनी एनर्जी खुद में डालनी चाहिए नाकि ऐसे लोगों में। आज आप दो लोगों को जवाब दोगे कल चार और आएंगे तो क्या पूरी लाइफ लोगों को जवाब देने में निकालना है? इन सबसे ऊपर उठकर खुद के लिए काम करो। 

अगर आपको लोगो को समझाना है तो उन्हें बताओ कि आप अपनी स्किन से कई ज्यादा ऊपर उठकर हैं। जैसे कोई शादी करते हैं तो दो लोग एक दूसरे से शादी करते हैं – एक दूसरे के स्किन कलर से तो नहीं करते न। सामने वालो को कहो कि एक इंसान इन टिपिकल ब्यूटी स्टैंडर्ड्स से ऊपर उठकर कई चीज़ों के लिए बना है। 

डियर होम मेकर्स, घर सब का है, सिर्फ आपका नहीं…

सबसे पहले होम मेकर्स खुद को रेस्पेक्ट करना सीखना होगा। फैमिली में खुद के कंट्रीब्यूशन का आपको पता होना चाहिए। आप कमा नहीं रहे इसका मतलब ये नहीं है कि कुछ कर नहीं रहे। याद रखें, आपकी वजह से ही तो लोग बाहर कमाने जा पा रहे हैं। लोगों को पता होना चाहिए कि आप कितना हार्ड वर्क कर रहे हैं। 

होममेकर्स होने के नाते आपको फैमिली की फाइनेंशियल इन्वेस्टमेंट का पता होना चाहिए। करंट न्यूज़, करंट अफेयर्स के बारे में पता होना चाहिए। खुद को अपडेट रखें। परिवार के लोगों को समझाएं कि घर सब का है, सिर्फ आपका नहीं है। इसीलिए खुद की ज़िम्मेदारी खुद उठानी है और सबको कंट्रीब्यूट करना है। साथ ही खुद की हॉबीज़ के लिए टाइम निकालें। खुद से प्यार करें। 

डॉक्टर फाल्गुनी वसावड़ा से इस मुलाकात के बाद मुझे मेरे कई सवालों के ज़वाब तो मिले ही साथ ही सेल्फ लव को एक अलग नज़रिये से देखने का एंगल मिला। आप फाल्गुनी वसावड़ा को इंस्टाग्राम पर यहां फॉलो करें। इनके कंटेंट से आपको कॉन्फिडेंस और पॉजिटिविटी मिलेगी।

मूल चित्र : Doctor Falguni Vasavada, Instagram

पसंद आया यह लेख?

पाइये विमेन्सवेब के सारे दिलचस्प हिंदी लेख अपने ईमेल इनबॉक्स मे!

विमेन्सवेब एक खुला मंच है, जो विविध विचारों को प्रकाशित करता है। इस लेख में प्रकट किये गए विचार लेखक के व्यक्तिगत विचार हैं जो ज़रुरी नहीं की इस मंच की सोच को प्रतिबिम्बित करते हो।यदि आपके संपूरक या भिन्न विचार हों  तो आप भी विमेन्स वेब के लिए लिख सकते हैं।

टिप्पणी

About the Author

Shagun Mangal

A strong feminist who believes in the art of weaving words. When she finds the time, she argues with patriarchal people. Her day completes with her me-time journaling and is incomplete without writing 1000 read more...

136 Posts | 543,630 Views
All Categories