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चुनावों के अहम मुद्दों में महिलाओं की इस समस्या को भी शामिल किया जाना चाहिए…

Posted: सितम्बर 24, 2020
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चुनावों में कई मुद्दों पर वादे होते हैं, लेकिन पीरियड्स, जो सिर्फ महिलाओं की समस्या समझी जाती है, कभी भी किसी ने अहम मुद्दा नहीं समझी?

कुछ राज्यों में चुनाव हो चुके हैं और कुछ राज्यों को तारीखों का इंतज़ार है। हर पांच साल पर होने वाले चुनावों में अनेकों वादे किए जाते हैं, जिसमें सड़क, नालों, शिक्षा और रोज़गार पर वोटों का सौदा किया जाता है, मगर किसी भी चुनाव में महिलाओं के पीरियड्स को एक अहम मुद्दा नहीं बनाया जाता है। महिलाओं को केंद्र में रखकर कभी वादे नहीं किए जाते हैं, जिससे महिलाओं के स्वास्थ्य सम्बन्धी सुविधाएं, खासकर हर जगह साफ़ सार्वजनिक टॉयलेट्स पर सकारात्मक बातें हो सकें।

महिलाओं को मौलिक सहूलियत ज़रूरी है

हर एक लड़की निश्चित उम्र के बाद पीरियड के दौर से गुज़रती है, जिससे माहवारी अर्थात् पीरियड्स कहा जाता है। हर महीने आने वाले पीरियड्स के दौरान महिलाओं को दर्द के साथ-साथ शारिरीक परेशानियां भी महसूस होती हैं। कुछ महिलाएं पीरियड्स के दर्द के कारण इतनी परेशान हो जाती हैं कि उन्हें अस्पताल में भर्ती करने की नौबत आ जाती है, मगर सरकार के तरफ से महिलाओं को सुविधाएं नहीं मिल पाती हैं।

कई जगह महिलाओं को आज भी साफ़ सार्वजनिक टॉयलेट की सुविधा नहीं

पिछले साल ही मैं अपने दोस्तों के साथ नालंदा के ट्रिप पर गई थी। हम सबने नालंदा घूमा और खुब मज़े किए। उसी दिन हमारी नालंदा से वापसी की ट्रेन थी, जिसके लिए हम सभी दोस्त स्टेशन पर ट्रेन के आने का इंतज़ार कर रहे थे। उसी बीच मुझे टॉयलेट जाने की इच्छा हुई और मैंने आसपास देखा ताकि मुझे एक टॉयलेट मिल जाए, मगर अफसोस वहां टॉयलेट के होने के बावज़ूद मैं उसका इस्तेमाल नहीं कर सकी क्योंकि वह इस्तेमाल करने के लायक ही नहीं था। उसे इस्तेमाल करना मतलब बीमारियों को निमंत्रण देना। मैं परेशान हो गई और ट्रेन के आने में समय था। सच बताऊं बहुत मुश्किल से मैंने उस वक्त को गुजारा था। स्टेशन पर ढंग के टॉयलेट की व्यवस्था नहीं होने के कारण मेरी उस ट्रीप की यादें कड़वी हो गईं।

यह सिर्फ मेरी नहीं महिलाओं की समस्या है

यह परेशानी केवल मुझ तक सीमित नहीं रह सकती क्योंकि यह उन महिलाओं की समस्या है, जिन्हें यात्रा के दौरान टॉयलेट जाने की इच्छा होती है। यह हर उस लड़की की परेशानी है, जिसे पीरियड्स हो रहे होते हैं और वह यात्रा कर रही होती है मगर उसे स्टेशन पर ना ही साफ टॉयलेट मिलते हैं और ना ही पैड वेंडिग मशीन।

अगर उस स्टेशन पर किसी अन्य लड़की को पीरियड्स हो रहे होते और उसे पैड चेंज करने होते, ऐसे में उसके लिए परेशानियों का अंबार खड़ा हो जाता। उसे अपने कपड़ों में लगने वाले दाग के साथ-साथ अपने चेहरे को छुपाने के लिए भी जगह की तलाश करनी पड़ती। ये हादसा कइयों के लिए दर्दनाक हो सकता है। वहीं लंबे वक्त तक टॉयलेट को रोकने के कारण अनेकों बीमारियों का खतरा बन जाता है। साथ ही एक ही पैड घंटों तक लिए रहने के कारण इंफेक्शन का साया मंडराने लग जाता है।

महिलाओं की सिर्फ बाहरी सुरक्षा काफी नहीं

पीरियड्स एक बॉयोलोजिकल प्रोसेस है, जिससे हर एक इंसान वाकिफ होता है मगर लोग उस पर बात नहीं करना चाहते। खासकर चुनाव के समय जहां महिलाओं की सुरक्षा के वादे किए जाते हैं, उन वादों में महिलाओं के स्वास्थ्य और पीरियड्स को नज़र अंदाज़ कर दिया जाता है। सामाजिक माहौल का सांचा ऐसा बनाया गया है कि पीरियड्स पर किसी भी चुनाव में यह वादे नहीं किए जाते कि महिलाओं को परेशानियों से बचाने के लिए पैड वेंडिग मशीन लगाई जाएगी, टॉयलेट्स को दुरुस्त किया जाएगा और महिलाओें के लिए एक स्वच्छ वातावरण का निर्माण किया जाएगा जिसमें महिलाएं स्वयं को सुरक्षित महसूस कर सकें।

महिलाओं की मौलिक आवश्यकताओं को लेकर बातचीत का स्वस्थ माहौल बनाया जाए

अगर पीरियड्स को लेकर बातचीत का स्वस्थ्य माहौल विकसित किया जाएगा तभी लड़कियां अपने-अपने घरों से बाहर निकल सकेंगी क्योंकि आज भी पीरियड़्स की डेट आते ही लड़कियों को घर से निकलने नहीं दिया जाता है।

भले ही टेक्नोलॉजी के दौर में पीरियड्स के डेट को याद रखने के लिए एप्प विकसित किए गए हैं, मगर आज भी हमारे समाज में एक तबका ऐसा भी रहता है, जिसके लिए पीरियड्स एक नया शब्द होता है। जर्नी के दौरान पीरियड्स के डर से भी लोग अपनी बच्चियों और लड़कियों को अकेले यात्रा करने की अनुमति नहीं देते हैं। इसके साथ ही पैड अगर साथ में हो तब भी परेशानियां होती हैं क्योंकि पैड के इस्तेमाल करने के लिए भी एक साफ जगह की ज़रुरत होती है। मगर अफसोस इस बात का है कि लड़कियों को साफ टॉयलेट भी नहीं मिल पाता। तो ये है ना महिलाओं की समस्या?

महिलाओं की ये समस्या हर चुनाव में नज़रअंदाज़ की जाती है

चुनावी वादों में सुरक्षा का मुद्दा जितना बड़ा है, उतना ही ज़रुरी मुद्दा महिलाओं का स्वास्थ्य भी है जिसे हर चुनाव में नज़र अंदाज़ कर दिया जाता है। लड़कियां बेफिक्री से अपनी यात्रा कर सकें इसके लिए हर स्टेशन पर साफ टॉयलेट के साथ-साथ पैड वेंडिग मशीन की व्यवस्था भी होनी चाहिए। इसके साथ ही सड़कों के चौक चौराहों पर भी साफ टॉयलेट के साथ-साथ पैड की सुविधा होनी चाहिए। इसके साथ ही वहां महिलाओं की सुरक्षा का पुख्ता इंतज़ाम हो इसका ध्यान भी रखा जाना चाहिए।

चुनाव केवल सड़कों और रोज़गार पर फोकस होने से पहले महिलाओं के स्वास्थ्य पर भी फोक्सड होना चाहिए। विकसित देश के लिए जितनी ज़रुरत दुरुस्त सड़कों की है, उतना ही ज़रुरी महिलाओं के स्वास्थ्य का मुद्दा भी है। पीरियड्स पर चुनावी वादें हो और ज़मीनी स्तर पर काम भी हो तभी महिलाएं यात्रा के दौरान बेफिक्र रह सकेंगी और एक बेहतर समाज का निर्माण हो सकेगा।

मूल चित्र : salimoctober from Getty Images via Canva Pro 

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