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विद्या बालन सुना रही हैं साईनी राज की कविता Dear Daughters of India

Posted: जुलाई 30, 2020

फिल्म शकुंतला देवी के रिलीज़ से पहले एक बहुत ही सुंदर कविता रिलीज़ की गई है, साईनी राज की Dear Daughters of India, जिसे विद्या बालन सुना रही हैं। 

विश्व भर में ह्यूमन कंप्यूटर के नाम के विख्यात भारत की महान गणितज्ञ शुंकतला देवी पर बनी बॉयोपिक 31 जुलाई 2020 को अमेज़ॉन प्राइम पर रिलीज़ हो रही है। इस फिल्म में विद्या बालन ने शकुंतला देवी का रोल अदा किया है। ये तो पूरी दुनिया जानती है कि शकुंतला देवी मैथ्स की मास्टर थीं। लेकिन इस फिल्म ना सिर्फ उनके प्रोफेशनल ही नहीं बल्कि पर्सनल ज़िंदगी को भी दिखाया गया है।

गणित को लेकर शकुंतला देवी का पैशन इस कदर था कि उनका अपनी बेटी से रिश्ता भी प्रभावित हुआ था। इस फिल्म में मां-बेटी के बनते-बिगड़ते रिश्ते को बुना गया है। शकुंतला देवी की कहानी मां-बेटी की कहानी भी है। विद्या बालन और सनाया मल्होत्रा मां-बेटी के किरदार में परफेक्ट लग रही हैं।

फिल्म के रिलीज़ से पहले एक बहुत ही सुंदर कविता रिलीज़ की गई है जिसे विद्या बालन सुना रही हैं। ये कविता हर माता-पिता को सुननी चाहिए। साईनी राज की लिखी इस कविता में मां का अपनी बेटी के लिए अटूट प्यार और फिक्र दिखती है।

आइए एक बार ये कविता डिअर डॉटर्स ऑफ़ इंडिया ( Dear Daughters of India ) पढ़ लेते हैं…

डिअर बेटी,

गुस्से से जब गाल फुलाकर
दरवाज़ा बंद कर देती हो
किसको जाकर कंप्लेन करूं मैं
आख़िर तुम मेरी ही बेटी हो!

मैं भी इसी तरह अपने मन की करती थी
मजाल है जो कोई टोक दे
किसी से ना मैं डरती थी !

मुझसे अक्सर कहा जाता था
कि तुम लड़की हो
ऐसे नहीं उठो-बैठो!
हाथ जोड़ो, सिर झुकाओ
शर्मा जी की बेटी को देखो !

पर मैं तुमसे ये नहीं कहूंगी क्यूंकि तुम
शर्मा की जी नहीं, मेरी बेटी हो !

मैं तुमसे कहूंगी कि चाहे जो हो जाए
वैसी ही रहना जैसी हो!

अपने सपने, अपनी आंखों से देखना
कोई और उन्हें नामुमकिन कहे, तो कहने दो !

सबको ख़ुश करना, तुम्हारा काम नहीं है
बस ख़ुद को ख़ुश रहने दो !

रोटी गोल नहीं बनती, तो ना बने
तुम अपने हिसाब की रोटी बनाओ

उड़ कर छू लो आसमान
तारों को गले लगाओ

था एक ज़माना जब धरती के गोल होने पर भी सवाल था
पर देखो, कैसे काया पलटी
ये किसी के विश्वास का कमाल था !

तुम भी ऐसे ही विश्वास बनाए रखना !
ऐसे ही नहीं मैं कहती हूं
किसी से कम नहीं हो तुम
क्योंकि तुम, मेरी बेटी हो !

डिअर डॉटर्स ऑफ़ इंडिया  की लेखिका साईनी राज कौन हैं?

साईनी राज कवियित्री भी हैं और अभिनेत्री भी। वो महाराष्ट्र में पैदा हुई और उन्होंने R.D नेशनल कॉलेज और W.A साइंस कॉलेज से मास मीडिया में ग्रेजुएशन किया है। अपने एक्टिंग करियर में उन्होंने शाका लाका बूम-बूम (2000), डरना ज़रूरी है फिल्म में काम किया है।

अपने बारे में वो लिखती हैं I act, write and cry । इनकी इंस्टाग्राम प्रोफाइल पर आपको कई और शानदार कविताएं पढ़ने को मिलेंगी।

साईनी राज आज की पढ़ी-लिखी महिला हैं जो औरतों या फिर समाज से जुड़े मुद्दों पर समय-समय पर अपनी बात रखती हैं। अपनी एक वीडियो में वो कहती हैं ‘Achieving self love is painful and an excruciatingly slow process, but it’s also the truest form of love’. ये शब्द उनके ख़ुद के लिखे हैं जो ये साफ़ बयां करते हैं करते साईनी राज खुल के जीने और दुनिया की परवाह किए बिना अपने सपनों को जीने में विश्वास रखती हैं।

इस कविता के अनुसार मां-बेटी एक दूसरे की ताकत हैं

मां और बेटी का रिश्ता बहुत ख़ास होता है। वो एक-दूसरे से जितना लड़ती हैं उससे कहीं ज्यादा एक-दूसरे से प्यार करती हैं। हमारे समाज में आए दिन लड़कियों को लेकर तरह-तरह की बंदिशें और पाबंदियां लगाई जाती है जो सदियों से चली आ रही हैं।

मां भी उसी ढर्रे पर चलकर अक्सर अपनी बेटियों को वही सिखाती आई हैं कि ऐसे मत बैठो, ज्यादा हंसो मत, खाना बनाना सीख लो। कभी-कभी मां चाहकर भी अपनी बेटी के मन की बात समझ नहीं पाती। हालांकि शिक्षा से बड़े स्तर पर महिलाओं की ज़िंदगी में बदलाव आया है।

आज की मां अपनी बेटी को उड़ना सिखा रही है। मां अपनी बेटी को जो ताक़त दे सकती है वो कोई और नहीं दे सकता क्योंकि एक औरत होने के नाते वो ये बात समझती है कि आने वाले वक्त में उसे किन-किन परिस्थितियों का सामना करना पड़ सकता है।

बेटी को हर कठिन परिस्थिति के लिए तैयार करना मां से बेहतर कोई और नहीं कर सकता। अपनी बेटी की तुलना कभी किसी से मत करिएगा क्योंकि वो आपका ही प्रतिरूप है। मां-बेटी जब एक साथ हैं तो उनकी ताक़त सबसे ज्यादा है।

मूल चित्र : YouTube 

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