कोरोना वायरस के प्रकोप में, हम औरतें कैसे, इस मुश्किल का सामना करते हुए भी, एक दूसरे का समर्थन कर सकती हैं?  जानने के लिए चेक करें हमारी स्पेशल फीड!

मेरी सशक्तिकरण में सहायक पुरुष

Posted: अप्रैल 17, 2019

एक पुरुष, स्त्री के बिना अधुरा है, और स्त्री को भी पुरुष की आवश्यकता है। सशक्तिकरण का मतलब, चाहे पुरुष हो या स्त्री, किसी भी सन्दर्भ में, अकेले चलना नहीं।

नारी सशक्तीकरण की बातें आप अक्सर सुनते हैं। यह बात शत-प्रतिशत सत्य है कि नारी सशक्तीकरण से समाज सशक्त होगा। आधी आबादी को भुलाकर कोई भी सभ्य समाज उन्नति नहीं कर सकता। किसी भी उन्नत समाज या देश के लिए आवश्यक है कि नारी को समाज में समान अवसर दिए जाएं।

हम अक्सर सुनते हैं कि औरतों को औरतों के सम्मान और अधिकारों के लिए आगे बढ़ना होगा। औरतों को औरतों की आवाज बननी होगी और मैं इससे सहमत भी हूँ। परंतु जीवन में अनुभव के आधार पर कहना चाहती हूँ कि महिलाओं के सशक्तिकरण में उनके जीवन में आए पुरुषों का भी बहुत बड़ा हाथ होता है।

मेरे जन्म के उपरांत मेरी दादी ज़्यादा खुश नहीं हुई थी क्योंकि उनकी इच्छा थी कि उनके बेटे का पहला बच्चा बेटा ही हो। उनकी इस इच्छा में भी एक कारण छुपा था। बेटी होने का अर्थ था दहेज की चिंता। मेरे पिता ने दादी माँ से कहा, “मैं अपनी बेटी की परवरिश सिर्फ शादी करवाने के लिए नहीं करूंगा। वह काबिल बनेगी।” और मेरे पिता ने यह वादा निभाया। मुझे और मेरे छोटे भाई हर एक सुख-सुविधा दी। हमें पढ़ने और बढ़ने के समान अवसर मिले।

मेरे जीवन में आए दूसरे पुरुष, मेरे पति ने मेरी कमजोरियों को दूर करने में सहायता की। पिता ने जहां किताबों से ज्ञान लेने की बात कही। पति ने व्यवहारिक ज्ञान दिलवाया। बैंक के काम हो या मार्केट का। बिल भरने हो या कार चलाना। उन्होंने मुझे विश्वास दिलाया कि ‘हां तुम कर सकती हो।’ शादी के बाद पढ़ाई हो या जॉब उनके सहारे के बिना असंभव था।

मेरा भाई और अब मेरे सत्रह वर्ष के बेटे ने नई टेक्नोलॉजी से मेरा साक्षात्कार करवाया। जब कहीं मैं अटकी इन्होंने तुरंत उस बाधा से पार करवाया। पर हां वो मेरी सहायता इस शर्त पर करते हैं कि वो सिर्फ मुझे निर्देश देंगे, बाकि करना मुझे ही पड़ेगा।

समाज हो या घर, स्त्री-पुरुष की परस्पर साझेदारी से सुचारू रूप से चल सकता है। एक पुरुष स्त्री के बिना अधुरा है, वैसे ही स्त्री को भी पुरुष की आवश्यकता है। सशक्तिकरण का मतलब अकेले चलना नहीं, चाहे वो पुरुष के लिए हो या स्त्री के संदर्भ में।

आप सब के जीवन में भी ऐसे पुरुष होंगे जिन्होंने आपकी सहायता की, आपको सशक्त और पूर्ण बनाने में। तो चलिए, हम अपने जीवन को सुंदर बनाने वाले स्त्री हो या पुरुष दोनों को धन्यवाद दें। चाहे वो पिता हो, भाई हो, पति हो, पुत्र हो या दोस्त हो।

घर के बाहर काम करने से क्या मैं बुरी माँ बन जाऊँगी?

टिप्पणी

Women In Corporate Allies 2020

अपना ईमेल पता दर्ज करें - हर हफ्ते हम आपको दिलचस्प लेख भेजेंगे!

Women In Corporate Allies 2020