कोरोना वायरस के प्रकोप में, हम औरतें कैसे, इस मुश्किल का सामना करते हुए भी, एक दूसरे का समर्थन कर सकती हैं?  जानने के लिए चेक करें हमारी स्पेशल फीड!

Soma Sur

Voice of Soma Sur

तो क्या हुआ अगर घर की बहू सबके जागने के बाद जगी?

शादी के बाद ज्यादातर परिवारों में बहुओं को हमेशा छोटी-छोटी बातों में गिल्टी फील करवाया जाता है। क्या हुआ अगर घर की बहू सबके जागने के बाद जगी?

टिप्पणी देखें ( 0 )
क्या सुहागरात से जुड़े ऐसे रिवाजों का कोई अस्तित्व होना चाहिए?

सुहागरात  में रजनीगंधा और गुलाब से सजी सेज पर घुंघट निकाले मैं अपने पिया का इंतजार कर रही थी। मुझे ऐसा लगा कि कोई मुझे सुन रहा है।

टिप्पणी देखें ( 0 )
और जब मैंने अपनी ‘बस चुप रहो’ की चुप्पी तोड़ी तो…

बहुत बड़ी शरलाॅक होम्स बनी हो? किसी को बताने की जरूरत नहीं। घर के आदमी जाकर लड़ेंगे तो नाम तो तेरा ही आएगा और तेरी बदनामी होगी। बस चुपचाप रहो!

टिप्पणी देखें ( 0 )
लड़कियों के साथ होने वाले हर अपराध का कारण लड़कियों को ही क्यों माना जाता है?

जब भूमिका ने थप्पड़ मारा, निति ने रोते-रोते अपने गले में भूमिका का दुपट्टा लपेट लिया, विवेक ने समय रहते देख लिया इसलिए अनहोनी होने से बच गई।

टिप्पणी देखें ( 0 )
मां कामाख्या देवी – रजस्वला देवी को पूजते हो, फिर रजस्वला नारी से घृणा क्यों?

एक तरफ तो रजस्वला स्त्री को अपवित्र माना जाता है वहीं दूसरी ओर शक्ति की प्रतीक मां कामाख्या देवी को रजस्वला होने के दौरान पवित्र मानकर पूजा जाता है?

टिप्पणी देखें ( 0 )
और मैंने तय कर लिया कि क्या करना है….!

आज बहुत दिनों बाद अच्छी नींद आई क्यूंकि आज मैं सुबह का अलार्म बंद करके सोई थी और मैं अब वापस पीछे मुड़ने के मूड में बिल्कुल नहीं थी।

टिप्पणी देखें ( 0 )
कोविड-19 या कोरोना क्या है और इससे कैसे बचा जाए – एक सरल गाइड

कोविड-19 या कोरोना क्या है? हमें इससे डरना नहीं है, बल्कि कुछ नियमों का पालन करके ख़ुद को और अपने परिवार को इसके कहर से सुरक्षित रखना है।

टिप्पणी देखें ( 0 )
ओ री गौरेया… नन्हीं सी चिड़िया अंगना में फिर आ जा रे!

20 मार्च वर्ल्ड स्पैरो डे के रूप में मनाया जाता हैं। इन नन्हे पक्षियों का हमारे जीवन में बहुत बड़ा योगदान है।  यह एक लेख उनके नाम।  

टिप्पणी देखें ( 0 )
‘हर दिन बराबरी का’ क्या दे पाओगे तुम?

नहीं बनना देवी, ना तो दिन खास चाहिए, आधी दुनिया को जीने का अहसास चाहिए, 'दिन बराबरी वाला' नहीं चाहते हैं हम, 'हर दिन बराबरी का' क्या दे पाओगे तुम?

टिप्पणी देखें ( 0 )
काश! हर एक इंसान को अपना suicide letter फाड़ने का मौका मिले

अपने प्रियजनों को भरोसा दिलाएं हम तुम्हारे साथ हैं, तुम्हारी सफलता असफलताओं से हमारे प्यार में कोई फ़र्क नहीं पड़ेगा, तुम्हारी जिंदगी हमारे लिए अनमोल है।

टिप्पणी देखें ( 0 )
ये रोटी बनाना नहीं आसां गालिब, बस यूं समझिए आग का दरिया है

पहले प्रयास के अगर मार्क्स मिलते तो मेरे नंबर नेगेटिव में आते। भगवान जी ने कोई ऐसी संरचना और इंसान ने कोई ऐसा नक्शा नहीं बनाया जैसा मेरी रोटी का आकार।

टिप्पणी देखें ( 0 )
15 अगस्त को सिर्फ छुट्टी न मनाएं

आज भी हमारी आज़ादी के लिए सीमा पर सैकड़ों फौजी शहीद हो रहे हैं और हमारे बच्चों को इस आज़ादी का मतलब और कीमत नहीं पता।

टिप्पणी देखें ( 0 )
ऐसे ऐतबार न करो, दुनिया बड़ी बेरहम है।

ये वो लोग हैं जो अपनी कायरता छुपाने के लिए, बच्चे तुम्हें ही गलत साबित करेंगे। किसी एक्सीडेंट को देखकर मोबाइल में विडियो बनाएंगे। फिर बातें बनाएंगे। 

टिप्पणी देखें ( 0 )
मेरे बेटे जब तूने मुझे दिया जन्म

जब भी मेरा दिल धड़का, जब भी मैं कमज़ोर पड़ी, तुमने अपने नन्हे-नन्हे हाथ-पाँव से मुझे एहसास दिलाया, 'माँ, मैं तुम्हारे पास आऊँगा। माँ मैं ठीक हूँ!'

टिप्पणी देखें ( 0 )
थोड़ा सा रूक जाओ ना माँ, मेरा बचपन लौटकर आएगा नहीं अतीत से

क्या होगा ऑल-राउंडर बनकर? कुछ मेडल्स और सर्टिफ़िकेट में इज़ाफ़ा और माँ-बाप की नाक थोड़ी सी ऊंची हो जाएगी? बस इतना ही!

टिप्पणी देखें ( 0 )
संस्कार-काश मुझे भी ना मिलते

काश! मुझे भी नहीं मिलती कोई विरासत। काश! मेरे शरीर से न लिपटी होती पिता, पति की इज़्ज़त।

टिप्पणी देखें ( 0 )
कृष्णकली तुम श्रेष्ठ हो, अपराजित हो

इतनी बार अस्विकृत होने के बाद यह तो समझ ही चुकी थी कि झूठ है कि संबंध ईश्वरीय वरदान से बनते हैं।

टिप्पणी देखें ( 0 )
मेरी सशक्तिकरण में सहायक पुरुष

एक पुरुष, स्त्री के बिना अधुरा है, और स्त्री को भी पुरुष की आवश्यकता है। सशक्तिकरण का मतलब, चाहे पुरुष हो या स्त्री, किसी भी सन्दर्भ में, अकेले चलना नहीं।

टिप्पणी देखें ( 0 )
कनकांजलि-“मैंने आपका ऋण उतार दिया।”

शास्त्रों में भी कहा गया है कि इंसान किसी भी ऋण को चुका सकता है पर मातृ-पितृ ऋण से उऋण नहीं हो सकता। फिर ऐसे रिवाज कैसे बने?

टिप्पणी देखें ( 0 )
मेहंदी के रंग से न मिटे स्याही के रंग-सुना है, आप कविताएं लिखती हैं!

दो बार पहले भी यही सवाल-जवाब हुए थे और दहेज पर सहमति ना बनने के बाद उसे काव्य-गोष्ठिओं में रात बिताने वाली 'चरित्रहीन' का तमगा दिया गया था।

टिप्पणी देखें ( 0 )

Women In Corporate Allies 2020

अपना ईमेल पता दर्ज करें - हर हफ्ते हम आपको दिलचस्प लेख भेजेंगे!

Women In Corporate Allies 2020