Soma Sur

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15 अगस्त को सिर्फ छुट्टी न मनाएं

आज भी हमारी आज़ादी के लिए सीमा पर सैकड़ों फौजी शहीद हो रहे हैं और हमारे बच्चों को इस आज़ादी का मतलब और कीमत नहीं पता।

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ऐसे ऐतबार न करो, दुनिया बड़ी बेरहम है।

ये वो लोग हैं जो अपनी कायरता छुपाने के लिए, बच्चे तुम्हें ही गलत साबित करेंगे। किसी एक्सीडेंट को देखकर मोबाइल में विडियो बनाएंगे। फिर बातें बनाएंगे। 

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मेरे बेटे जब तूने मुझे दिया जन्म

जब भी मेरा दिल धड़का, जब भी मैं कमज़ोर पड़ी, तुमने अपने नन्हे-नन्हे हाथ-पाँव से मुझे एहसास दिलाया, 'माँ, मैं तुम्हारे पास आऊँगा। माँ मैं ठीक हूँ!'

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थोड़ा सा रूक जाओ ना माँ, मेरा बचपन लौटकर आएगा नहीं अतीत से

क्या होगा ऑल-राउंडर बनकर? कुछ मेडल्स और सर्टिफ़िकेट में इज़ाफ़ा और माँ-बाप की नाक थोड़ी सी ऊंची हो जाएगी? बस इतना ही!

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संस्कार-काश मुझे भी ना मिलते

काश! मुझे भी नहीं मिलती कोई विरासत। काश! मेरे शरीर से न लिपटी होती पिता, पति की इज़्ज़त।

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कृष्णकली तुम श्रेष्ठ हो, अपराजित हो

इतनी बार अस्विकृत होने के बाद यह तो समझ ही चुकी थी कि झूठ है कि संबंध ईश्वरीय वरदान से बनते हैं।

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मेरी सशक्तिकरण में सहायक पुरुष

एक पुरुष, स्त्री के बिना अधुरा है, और स्त्री को भी पुरुष की आवश्यकता है। सशक्तिकरण का मतलब, चाहे पुरुष हो या स्त्री, किसी भी सन्दर्भ में, अकेले चलना नहीं।

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कनकांजलि-“मैंने आपका ऋण उतार दिया।”

शास्त्रों में भी कहा गया है कि इंसान किसी भी ऋण को चुका सकता है पर मातृ-पितृ ऋण से उऋण नहीं हो सकता। फिर ऐसे रिवाज कैसे बने?

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मेहंदी के रंग से न मिटे स्याही के रंग-सुना है, आप कविताएं लिखती हैं!

दो बार पहले भी यही सवाल-जवाब हुए थे और दहेज पर सहमति ना बनने के बाद उसे काव्य-गोष्ठिओं में रात बिताने वाली 'चरित्रहीन' का तमगा दिया गया था।

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