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के.एम अभर्णा और सिदाम प्रमीला इस्तारी हैं जंगल की दो असली शेरनी

आइए मिलिए शेरनी फ़िल्म की प्रेरणा और असल में जंगल की ‘शेरनी’ जिनका नाम है के.एम अभर्णा और सिदाम प्रमीला इस्तारी

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आइए मिलिए शेरनी फ़िल्म की प्रेरणा और असल में जंगल की ‘शेरनी’ जिनका नाम है के.एम अभर्णा और सिदाम प्रमीला इस्तारी।

अभी हाल ही में रिलीज़ हुई फिल्म शेरनी में अपने दमदार और सहज अभिनय के कारण अभिनेत्री विद्या बालन खूब वाहवाही बटोर रही हैं।

फिल्म शेरनी एक ऐसी महिला आईएफएस अधिकारी की कहानी है जो एक बाघिन को जिंदा रखने के लिए अपनी टीम के साथ मुस्तैदी से काम करती है क्योंकि वह जानती हैं कि जंगल है तो बारिश है, बारिश है तो फसल है, फसल है तो वहां के लोगों का जीवन है।

शेरनी को ज़िंदा बचाने के इस टास्क के बीच महिला अधिकारी को कई व्यक्तिगत और प्रोफेश्नल बाधाओं का सामना करना पड़ता है।

लेकिन आज हम उनकी बात करेंगे जो असल में इस जंगल की ‘शेरनी’ हैं। इनका नाम है के.एम अभर्णा और सिदाम प्रमीला इस्तारी। हालाँकि ये फिल्म उनके निजी जीवन से प्रेरित है या नहीं, इसकी पुष्टि तो नहीं है लेकिन लोगों की माने तो ये कहानी कहीं ना कहीं के.एम अभर्णा और सिदाम प्रमीला इस्तारी के जीवन जैसी ही लगती है।

के.एम अभर्णा और सिदाम प्रमीला इस्तारी?

वर्ष 1980 से पहले तक भारतीय वन सेवा में कोई भी महिला अधिकारी नहीं थी। उसके बाद के एम अभर्णा समेत तीन महिलाओं ने IFS जोईन किया। आज भारतीय वन सेवा में 284 महिला कर्मी हैं।

2013 में अपनी ग्रेजुएशन करने के बाद अभर्णा ने विद्या बालन के किरदार की तरह जंगल में अवनी नाम की शेरनी के रेस्क्यू ऑपरेशन संभाला था। जिस बाघिन की साल 2018 में गोली मारकर हत्या कर दी गई थी, उस मामले की प्रभारी के.एम. अभर्णा ही थीं। उन्होंने पंढरकावड़ा संभाग के उप वन संरक्षक का उस वक़्त कार्यभार संभाला था।

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इस रेस्क्यू ऑपरेशन के दौरान अभर्णा ने वन रक्षकों की एक टीम बनाकर महाराष्ट्र के मारेगांव और पंढरकवाड़ा रेंज में बाघ-आबादी वाले क्षेत्रों में जागरूकता बढ़ाई और लोगों और जानवरों के बीच हो रहे संघर्ष को संभाला।

लोगों को शिक्षित करने के लिए वो लगातार गांव के लोगों से संपर्क में बनी रहीं और उन्होंने शेरनी अवनी को ढूंढने के लिए कैमरा लगाकर 24 घंटे निगरानी रखी।

के.एम अभर्णा की उपलब्धियाँ

अभर्णा का काम लोगों के बीच जागरूकता फैला रहा है। उन्होंने काज़ीरंगा नेशनल पार्क की इंचार्ज के रूप में पदभार संभाला। नेशनल पार्क में एक सींग वाले रायनओज़ की सबसे अधिक संख्या है। खबरों की मानें तो अभर्णा ने इस इलाके में गैंडों के अवैध शिकार को कम करने के लिए कई कोशिशें की।

उन्होंने 2016-17 प्लास्टिक बैन लागू किया था और अवैध रूप से मछली पकड़ने पर भी रोक लगाई। इसके बाद सहायक संरक्षक वन अधिकारी के रूप में काम किया।

सोशल मीडिया पर कई लोग के.एम अभर्णा की तारीफ़ कर रहे हैं।

2018 में अवनी शेरनी को तो कई कारणों से नहीं बच पाई लेकिन अभर्णा की कोशिशों के साथ-साथ एक और महिला वन मित्र ने मिलकर अवनी के दो बच्चों को ढूंढ निकाला और उनकी रक्षा की।

के.एम अभर्णा की कोशिश को आगे बढ़ाती सिदाम प्रमिला इस्तारी

28 वर्षीय की वन अधिकारी, सिदाम प्रमीला इस्तारी उन छह अधिकारियों में से एक हैं जिन्होंगे अवनी शेरनी के बच्चों को बचाया था। सिदाम इस्तरल ने लगातार 45 दिन तक यवतमाल के जंगलों में अवनी के बच्चों को ढूंढने के लिए दिन-रात एक कर दिया।

सिदाम बताती है कि शेरनी के बच्चों को ढूंढना बिलकुल आसान नहीं था। उन्हें अंधेरी रातों में जंगलों के बीच जाना पडता था। उन्हें बहुत चोटें आई लेकिन वो रूकी नहीं। वो अपने हाथ में लाठी पकड़ती थी और मांस लेकर जाती था ताकि शेरनी के बच्चे खाने को सूंघ कर उनके पास आ जाए।

बड़ी जद्दोजहद के बाद आख़िरकार सिदाम और उनकी टीम ने अवनी शेरनी के बच्चों को बचाने में कामयाबी मिली।

के.एम अभर्णा और सिदाम प्रमीला इस्तारी की तरह ही ऐसी कई औरतों की कहानियां है जो कहीं गुम हो जाती हैं लेकिन अगर उन्हें आवाज़ दी जाए तो हर कोई उन्हें सुनना पसंद करेगा।

मूल चित्र: Twitter/Asianetnews 

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