कोरोना वायरस के प्रकोप में, हम औरतें कैसे, इस मुश्किल का सामना करते हुए भी, एक दूसरे का समर्थन कर सकती हैं?  जानने के लिए चेक करें हमारी स्पेशल फीड!

सूचियों के ढेर में दफन कविताएँ

न जाने कितनी ही कविताएँ गृहणियों की ऐसी ही सूचियों के ढेर में दफन मसालों और दालों के तोल बताती अपने अस्तित्व से अंजान बेमोल पड़ी सिसक रही हैं।

न जाने कितनी ही कविताएँ गृहणियों की ऐसी ही सूचियों के ढेर में दफन मसालों और दालों के तोल बताती, अपने अस्तित्व से अंजान बेमोल पड़ी सिसक रही हैं। 

एक किलो राजमा,
दो किलो मसूर,
चावल सेला पाँच किलो,
तीन किलो तूर।

साबुन टिक्की पाँच,
हल्दी की सौ ग्राम गाँठ,
गरम मसाला छोटा पैकेट,
नमक का एक बड़ा पैकेट।

बिट्टू के लिए बार्नवीटा,
छुटकी को बिस्कुट मीठा,
मेरे लिए हेयर डाई,
अम्मा को जलेबी मिठाई,
पिताजी को गज्जक पोली,
बड़े संदूक को नेपथिलीन की गोली।

एक झाड़ू और दो पोछे,
रसोई को सूती अँगोछे,
दो गुडनाईट रीफिल,
चार कोका कोला चिल्ल।

और ढेर सारी माफी उस कविता से,
जो यह गृहस्थी की जरूरत लिखते,
मेरे पास भागी आई थी,
मैंने उसकी ओर देखा तक नहीं,
और वो मर गई।

न जाने कितनी ही कविताएँ
गृहणियों की ऐसी ही सूचियों के ढेर में दफन,
मसालों और दालों के तोल बताती
अपने अस्तित्व से अंजान,
बेमोल पड़ी सिसक रही हैं।

मूल चित्र: Andrea Piacquadio via Pexels

Never miss real stories from India's women.

Register Now

पसंद आया यह लेख?

पाइये विमेन्सवेब के सारे दिलचस्प हिंदी लेख अपने ईमेल इनबॉक्स मे!

विमेन्सवेब एक खुला मंच है, जो विविध विचारों को प्रकाशित करता है। इस लेख में प्रकट किये गए विचार लेखक के व्यक्तिगत विचार हैं जो ज़रुरी नहीं की इस मंच की सोच को प्रतिबिम्बित करते हो।यदि आपके संपूरक या भिन्न विचार हों  तो आप भी विमेन्स वेब के लिए लिख सकते हैं।

टिप्पणी

About the Author

98 Posts | 276,350 Views
All Categories